दिवाली पर माँ लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए इस विधि से करें पूजा, जानें पूजन का शुभ मुहूर्त

diwali shubh muhurat and poojan vidhi
प्रिया मिश्रा । Nov 02, 2021 12:46PM
माँ लक्ष्मी को धन और वैभव की देवी माना जाता है इसलिए सभी भक्त दिवाली के दिन माँ लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करते हैं और धन-समृद्धि का आशीर्वाद मांगते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दिवाली के दिन माता लक्ष्मी और भगवान श्रीगणेश की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।

दिवाली हिंदू धर्म का मुख्य पर्व है। हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास की अमावस्या तिथि दिवाली का पर्व मनाया जाता है। इस साल 4 नवंबर 2021 (गुरुवार) को दिवाली मनाई जाएगी। दिवाली को दीपों और रोशनी का त्योहार माना जाता है। यह पर्व अंधकार पर प्रकाश की विजय को दर्शाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, दिवाली के दिन ही श्रीराम अयोध्या लौटे थे और इस खुशी में अयोध्या वासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था। दिवाली के दिन शाम के समय माँ लक्ष्मी की पूजन का विशेष महत्व है। माँ लक्ष्मी को धन और वैभव की देवी माना जाता है इसलिए सभी भक्त दिवाली के दिन माँ लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करते हैं और धन-समृद्धि का आशीर्वाद मांगते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दिवाली के दिन माता लक्ष्मी और भगवान श्रीगणेश की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। इस दिन घरों, दुकानों और दफ्तरों को दीयों और फूलों से सजाया जाता है। आज के इस लेख में हम आपको दिवाली का शुभ मुहूर्त और लक्ष्मी पूजन विधि की जानकारी देंगे। इसके साथ ही आज हम आपको बताएंगे कि दिवाली के दिन माँ लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए- 

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दिवाली 2021 शुभ मुहूर्त

अमावस्या तिथि का प्रारंभ - 04 नवंबर 2021 (गुरुवार) को सुबह 06 बजकर 03 मिनट से

अमावस्या तिथि समाप्त - 05 नवंबर 2021 (शुक्रवार) को प्रातः 02 बजकर 44 मिनट तक 

दिवाली पर लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त - 04 नवंबर शाम 06 बजकर 09 मिनट से रात 08 बजकर 20 मिनट तक

प्रदोष काल मुहूर्त- शाम 5 बजकर 34 मिनट से रात 8 बजकर 10 मिनट तक

वृषभ काल मुहूर्त- शाम 6 बजकर 10 मिनट से रात 8 बजकर 06 मिनट तक

लक्ष्मी पूजन की विधि 

लक्ष्‍मी पूजन के लिए मंदिर या पूजन स्थल को गंगाजल से साफ करें।  इसके बाद एक लकड़ी की चौकी पर पीला या लाल कपड़ा बिछाएं और इस पर चावल के आटे से रंगोली बनाएं।  अब इस पर माता लक्ष्मी और भगवान श्रीगणेश की मूर्तियां इस प्रकार रखें कि लक्ष्मी की दाईं दिशा में श्रीगणेश रहें और उनका मुख पूर्व दिशा की ओर रहे।  इसके दाईं या बाईं ओर एक मुट्ठी अनाज रखें।

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इसके बाद एक कलश लें और उसे पानी, एक सुपारी, गेंदे का एक फूल, सिक्के और चावल से भरें। अब इस कलश पर एक नारियल लाल कपड़े में लपेट कर इस प्रकार रखें कि उसका केवल अग्रभाग ही दिखाई दे। नारियल के चारों ओर आम के 5 पत्‍ते लगाएं।  

अब दो बड़े दीपक लेकर एक में घी और दूसरे में तेल भरकर रखें। एक को मूर्तियों के चरणों में और दूसरे को चौकी की दाईं तरफ रखें।  एक दीपक भगवान गणेश के चरणों में रखें।  

अब माँ लक्ष्मी और गणेश जी के माथे पर हल्दी-कुमकुम का तिलक लगाएं और अक्षत चढ़ाएं।  फिर शुभ मुहूर्त के समय जल, मौली, अबीर, चंदन, गुलाल, चावल, धूप, बत्ती, गुड़, फूल, धानी, नैवेद्य आदि लेकर सबसे पहले पवित्रीकरण करें। अब तेल से भरे न्यूनतम  26 दीपक जलाएं।    

इसके बाद अपने व्‍यापार या पेशे से जुड़े बही-खातों और कलम आदि की पूजा कर नए लिखने की शुरुआत करें।  

अब माँ लक्ष्मी का आह्वान करें और उन्‍हें फूल और चावल अर्पित करें।  देवी को फल और मिठाई का भोग लगाएं और उनके सामने नारियल, पान के पत्‍ते पर सुपारी रखें।  इसके बाद गणेशजी, लक्ष्मीजी व अन्य देवी-देवताओं का विधिवत षोडशोपचार पूजन, श्री सूक्त, लक्ष्मी सूक्त व पुरुष सूक्त का पाठ करें और आरती उतारें।

पूजा के बाद दीपक घर के कमरों में, तिजौरी के पास, आंगन और घर के सभी कोनों पर जलाकर रखें।

- प्रिया मिश्रा

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