Infosys-TCS में 6% तक की बड़ी गिरावट, AI की टेंशन ने डुबोया IT Sector, Sensex भी क्रैश।

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Ankit Jaiswal । Feb 24 2026 11:05PM

आईटी शेयरों में चौतरफा बिकवाली के कारण मंगलवार को सेंसेक्स 1,068 अंक लुढ़क गया और निफ्टी में भी भारी गिरावट आई। इस तेज गिरावट की मुख्य वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर बढ़ती निवेशक चिंता रही, क्योंकि उन्नत AI टूल्स भारतीय आईटी कंपनियों के बिजनेस मॉडल के लिए एक बड़े खतरे के रूप में देखे जा रहे हैं।

मंगलवार सुबह दलाल स्ट्रीट पर माहौल कुछ ठीक नहीं दिखा और कारोबार के साथ ही प्रमुख सूचकांकों पर दबाव बढ़ने लगा। दिन के अंत तक बिकवाली और तेज हो गई। बीएसई सेंसेक्स 1,068.74 अंक गिरकर 82,225.92 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी50 288.35 अंक टूटकर 25,424.65 पर आ गया।

बता दें कि गिरावट की सबसे बड़ी वजह आईटी शेयरों में तेज बिकवाली रही। निफ्टी आईटी इंडेक्स शुरुआती कारोबार में ही करीब 5 प्रतिशत फिसल गया। इसका सीधा मतलब यह है कि अधिकांश बड़ी आईटी कंपनियों के शेयर एक साथ टूटे और उन्होंने पूरे बाजार को नीचे खींच लिया।

मौजूद जानकारी के अनुसार इंफोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, एचसीएलटेक, टेक महिंद्रा और विप्रो समेत कई दिग्गज शेयर गहरे लाल निशान में बंद हुए। एलटीआईमाइंडट्री में 6 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, जबकि टेक महिंद्रा और एचसीएलटेक भी 5 से 6 प्रतिशत तक टूटे। इंफोसिस और टीसीएस जैसे बड़े शेयरों में भी लगभग 3 से 4 प्रतिशत की कमजोरी देखी गई।

गौरतलब है कि निवेशकों की चिंता का मुख्य कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर बढ़ती अनिश्चितता है। हाल ही में अमेरिका की एआई कंपनी एंथ्रॉपिक ने ऐसे उन्नत टूल पेश किए हैं जो कोडिंग, डॉक्यूमेंटेशन और डेटा प्रोसेसिंग जैसे काम स्वतः कर सकते हैं। ये वही सेवाएं हैं जिनसे भारतीय आईटी कंपनियां वैश्विक बाजार में बड़ा कारोबार करती हैं। ऐसे में आशंका है कि भविष्य में मांग की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।

जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार के मुताबिक टेक शेयरों में कमजोरी व्यापक ट्रेंड का हिस्सा है और अमेरिकी बाजार में सूचीबद्ध भारतीय आईटी कंपनियों के एडीआर में भी दबाव दिख रहा है।

वैश्विक संकेतों ने भी बाजार की चिंता बढ़ाई। अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा नए टैरिफ संकेत दिए जाने के बाद वहां के बाजारों में गिरावट आई। बता दें कि टैरिफ यानी आयात शुल्क में बदलाव से अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर असर पड़ता है और कंपनियां निवेश फैसलों को टाल सकती हैं। यूरोपीय संघ द्वारा अमेरिका के साथ एक प्रमुख व्यापार समझौते को रोकने की खबर ने भी अनिश्चितता बढ़ाई।

हालांकि टाटा स्टील, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, एशियन पेंट्स और एक्सिस बैंक जैसे कुछ गैर-आईटी शेयरों में हल्की मजबूती दिखी, लेकिन वे आईटी सेक्टर की बड़ी गिरावट की भरपाई नहीं कर सके।

विश्लेषकों का कहना है कि विदेशी संस्थागत निवेशक हाल के हफ्तों में भारतीय बाजार में खरीदार जरूर रहे हैं, लेकिन उनका फोकस पूंजीगत सामान और वित्तीय शेयरों पर अधिक है। आईटी सेक्टर में वे अब भी सतर्क रुख अपना रहे हैं।

तकनीकी स्तर पर विशेषज्ञों के अनुसार निफ्टी के लिए 25,500–25,450 का दायरा अहम सपोर्ट है। इसके नीचे फिसलने पर 25,300 तक गिरावट संभव है, जबकि ऊपर की ओर 25,650–25,750 पर रुकावट देखने को मिल सकती है। बैंक निफ्टी अपेक्षाकृत स्थिर दिखा और 60,900 के ऊपर बने रहने पर व्यापक रुझान सकारात्मक माना जा सकता है।

कुल मिलाकर आईटी सेक्टर में तेज बिकवाली, एआई को लेकर बढ़ती आशंका और वैश्विक व्यापार तनाव ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया है और निकट अवधि में उतार-चढ़ाव बने रहने के संकेत मिल रहे हैं।

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