सूर्यग्रहण पर इस बार क्या बन रहा है संयोग? क्या बरतें सावधानी?

By संजय तिवारी | Publish Date: Aug 11 2018 12:33PM
सूर्यग्रहण पर इस बार क्या बन रहा है संयोग? क्या बरतें सावधानी?
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इस साल का यह अद्भुत संयोग है। एक ही पक्ष में दोनों ग्रहण। गुरुपूर्णिमा को चंद्रग्रहण हम देख चुके। अब शनि अमावस्या को आज सूर्यग्रहण की बारी है। संयोग इसलिए और भी अद्भुत है क्योंकि शनि देव स्वयं भगवान सूर्य के पुत्र हैं।

इस साल का यह अद्भुत संयोग है। एक ही पक्ष में दोनों ग्रहण। गुरुपूर्णिमा को चंद्रग्रहण हम देख चुके। अब शनि अमावस्या को आज सूर्यग्रहण की बारी है। संयोग इसलिए और भी अद्भुत है क्योंकि शनि देव स्वयं भगवान सूर्य के पुत्र हैं। शनि की अमावस्या के दिन सूर्य पर ग्रहण को पितृ ग्रहण भी माना गया है। यह पितरों के लिए बहुत ही विशिष्ट होता है। खगोलीय जानकारी बताती है कि दो ग्रहण जैसी घटनाएं यदि इतने कम समयानराल पर हो रही हैं तो यह दर्शाता है की अंतरिक्ष में भी उथल पुथल है। हालांकि इस उथल पुथल का पृथ्वी या इसके किसी सौरमंडल से कोई सम्बन्ध नहीं हैं लेकिन अंतरिक्ष की प्रत्येक घटना पृथ्वी को अवश्य प्रभावित करती है।

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2018 का यह आखिरी सूर्यग्रहण
 
अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार वर्ष 2018 का यह आखिरी सूर्यग्रहण है। इससे पहले 13 जुलाई को भी सूर्यग्रहण लगा था लेकिन वह केवल ऑस्ट्रेलिया और नूजीलैंड में दिखा था। हर पन्द्रहवें दिन यानि लगातार तीन पक्षों में ग्रहण का होना किसी भी तरह सामान्य घटना तो नहीं है। हालांकि अभी वैज्ञानिक इस घटना को बहुत ठीक से रेखांकित नहीं कर पा रहे हैं। यद्यपि भारतीय ज्योतिर्विज्ञान में ग्रहण को लेकर काफी कुछ लिखा गया है। भारतीय ज्योतिर्विज्ञान ग्रहण को अंतरिक्ष के उद्वेलन के रूप में देखता है। इसीलिए प्रत्येक ग्रहण के समय प्रत्येक प्राणी और वास्तु के लिए भी शांत अवस्था का विधान किया गया है। यह विधान सीधे जीवन संस्कृति से जोड़ दिया गया ताकि धर्म समझ कर लोग इन नियमो का पालन अवश्य करें।


 
व्यक्ति और उसके आसपास की प्रत्येक वस्तु को शांत भाव में रखने का विधान
 
स्पष्ट है कि सामान्य व्यक्ति को ज्योतिर्विज्ञान की व्याख्या नहीं बतायी जा सकती थी इसलिए व्यक्ति और उसके आसपास की प्रत्येक वस्तु को शांत भाव में रखने का विधान कर दिया गया। प्रकृति और पदार्थ जो जिस भाव में हैं, उन्हें उसी भाव में ग्रहण काल में छोड़ देने का विधान है। ग्रहण काल से पूर्व का भोजन ग्रहण काल के बाद कदापि नहीं करना चाहिए। गर्भवती स्त्री को ग्रहण काल में अपने कक्ष में ही रहना चाहिए। मंदिर या किसी भी पूजास्थल में इस काल में शांति रहने देनी चाहिए और ग्रहण काल के बाद ही पूजा करनी चाहिए। ये सारे नियम मनुष्य प्राणियों और वनस्पतियों के स्वास्थ्य के लिए बनाये गए। इनका आधार विशुद्ध विज्ञान है। हमारी पृथ्वी और हमारा सौर मंडल अपनी गति से ही हमारे लिए जीवन के संसाधन देते हैं। यदि सौर मंडल में कोई घटना हो रही है और उथल पुथल है तो उसका असर पृथ्वी के प्रत्येक प्राणी और वनस्पति पर होना ही है।
 


उत्तरी गोलार्ध में सुबह के शुरुआती समय में दिखाई देगा ग्रहण
 
यह 11 अगस्त को उत्तरी गोलार्ध में सुबह के शुरुआती समय में दिखाई देगा। इस बार सूर्य ग्रहण का समय कुल 3 घंटे 30 मिनट तक होगा। नासा के जारी किए एक जिफ के मुताबिक यह आंशिक सूर्य ग्रहण चीन को कुछ भागों में भी दिखाई देगा। इस बार आंशिक सूर्य ग्रहण होगा, जो कि पृथ्‍वी के उत्तरी गोलार्द्ध यानी कि उत्तरी यूरोप से लेकर पूर्वी एशिया और रूस में दिखाई देगा। भारत में साल के इस अंतिम सूर्य ग्रहण के दीदार नहीं होंगे। इसके अलावा नोर्थ कनाडा, नोर्थ ईस्टर्न यूएस, ग्रीनलैंड, साइबेरिया और सेंट्रल एशिया के कुछ भागों में भी ये दिखाई देगा। ग्रीन विच मीन टाइम के अनुसार यह सुबह 9 बजे शुरू होगा और नॉर्थ अमेरिका और ग्रीनलैंड में होता हुआ 12.32 पीएम जीएमटी (5.02 pm IST) पर समाप्त होगा। इस बार यानी 11 अगस्त का सूर्य ग्रहण का भारत में दिखाई नहीं देगा। नासा के अनुसार अगले साल 2019 में भी तीन सूर्य ग्रहण देखने को मिलेंगे। 2019 में पहला सूर्य ग्रहण 6 जनवरी को, दूसरा 2 जुलाई को और तीसरा 26 अगस्त को पड़ेगा। 
 


क्‍या होता है आंशिक सूर्य ग्रहण
 
पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमने के साथ-साथ अपने सौरमंडल के सूर्य के चारों ओर भी चक्कर लगाती है। दूसरी ओर, चंद्रमा दरअसल पृथ्वी का उपग्रह है और उसके चक्कर लगता है, इसलिए, जब भी चंद्रमा चक्कर काटते-काटते सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है, तब पृथ्वी पर सूर्य आंशिक या पूर्ण रूप से दिखना बंद हो जाता है। इसी घटना को सूर्य ग्रहण कहा जाता है। सूर्य ग्रहण आंशिक और पूर्ण दोनों तरह का हो सकता है। आंशिक सूर्य ग्रहण में चंद्रमा सूर्य के कुछ ही हिस्‍से को ढकता है और जब इस नजारे को पृथ्‍वी से देखा जाए तो सूर्य एक डिस्‍क की तरह दिखाई देता है।
 
सूर्य ग्रहण का समय
 
इस बार का सूर्य ग्रहण भारतीय समयानुसार दोपहर 1 बजकर 32 मिनट से शुरू होकर शाम 5 बजे खत्‍म होगा। ग्रहणकाल का सूतक लगभग 12 घंटे पहले लगेगा। हालांकि अंतरराष्‍ट्रीय समय के अनुसार आंश‍िक सूर्य ग्रहण 8 बजकर 2 मिनट से शुरू होकर सुबह 11 बजकर 30 मिनट पर खत्‍म होगा। 
 
सूर्य ग्रहण को देखना कितना सुरक्षित
 
सूर्य ग्रहण चाहे कैसा भी हो आंशिक या पूर्ण उसे खुली या नंगी आंखों से नहीं देखना चाहिए। हालांकि सूर्य ग्रहण को देखने के लिए बाजार में कई तरह के चश्‍मे उपलब्‍ध हैं। इन चश्‍मों का इस्‍तेमाल कर आप अपनी आंखों को नुकसान पहुंचाए बिना इस खगोलीय घटना के साक्षी बन सकते हैं। सूर्य ग्रहण दूरबीन या पिनहोल कैमरे की मदद से भी देखा जा सकता है। 
 
मान्‍यताएं
1. सूर्य ग्रहण के दौरान पूजा-पाठ और मूर्ति पूजा नहीं करनी चाहिए।
2. मान्‍यता है कि सूर्य ग्रहण के दौरान तुलसी और शामी के पौधे को नहीं छूना चाहिए।
3. ग्रहण काल के दौरान खाना खाने और पकाने की मनाही होती है।
4. मान्‍यता है कि ग्रहण के दौरान सोना नहीं चाहिए।
5. ग्रहण के वक्‍त मंत्रों का उच्‍चारण करने का चलन है।
6. हिन्‍दू मान्‍यताओं के अनुसार ग्रहण काल खत्‍म होने के बाद पवित्र नदियों में स्‍नान करना चाहिए।
7. अगर घर पर ही हैं तो नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्‍नान करना चाहिए।
8. ग्रहण काल के बाद गरीबों और ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा देने का विधान है।
 
-संजय तिवारी

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