क्या ADAS हर सड़क पर करता है काम? भारतीय रोड्स की सच्चाई जानकर रह जाएंगे हैरान

car
Image Source: pexels

भारत की कई सड़कों पर लेन मार्किंग या तो मिट चुकी होती है या फिर साफ दिखाई नहीं देती। ऐसे में लेन कीप असिस्ट और लेन डिपार्चर वार्निंग जैसे फीचर सही तरीके से काम नहीं कर पाते। यदि सिस्टम लेन को पहचानने में असफल हो जाए, तो वह अचानक निष्क्रिय हो सकता है।

आज के समय में कार खरीदते वक्त लोग केवल इंजन, माइलेज या डिजाइन ही नहीं देखते, बल्कि आधुनिक सेफ्टी फीचर्स पर भी खास ध्यान देते हैं। इन्हीं में सबसे चर्चित तकनीक ADAS (Advanced Driver Assistance System) है। यह सिस्टम ड्राइविंग को सुरक्षित और आरामदायक बनाने के लिए विकसित किया गया है। हालांकि, जितनी तेजी से यह तकनीक लोकप्रिय हो रही है, उतना ही जरूरी है कि इसके काम करने के तरीके और सीमाओं को भी समझा जाए। खासतौर पर भारतीय सड़कों और ट्रैफिक की वास्तविक परिस्थितियों में ADAS हर समय समान प्रदर्शन नहीं कर पाता।

ADAS कैसे करता है काम?

ADAS कई आधुनिक तकनीकों का संयोजन है। इसमें कैमरे, रडार, अल्ट्रासोनिक सेंसर और कुछ मॉडलों में LiDAR जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाता है। ये सिस्टम सड़क की लेन, आगे चल रहे वाहनों, पैदल यात्रियों और अन्य संभावित बाधाओं की लगातार निगरानी करते हैं। किसी खतरे की स्थिति बनने पर यह ड्राइवर को चेतावनी देता है और जरूरत पड़ने पर ब्रेकिंग या स्टीयरिंग में भी सहायता करता है।

इसे भी पढ़ें: Best Electric Bike India: लंबी रेंज, दमदार स्पीड और कम खर्च वाली 4 शानदार इलेक्ट्रिक बाइक्स

धुंधली लेन मार्किंग बन सकती है चुनौती

भारत की कई सड़कों पर लेन मार्किंग या तो मिट चुकी होती है या फिर साफ दिखाई नहीं देती। ऐसे में लेन कीप असिस्ट और लेन डिपार्चर वार्निंग जैसे फीचर सही तरीके से काम नहीं कर पाते। यदि सिस्टम लेन को पहचानने में असफल हो जाए, तो वह अचानक निष्क्रिय हो सकता है। ऐसी स्थिति में वाहन का पूरा नियंत्रण तुरंत ड्राइवर को संभालना पड़ता है।

अनियमित ट्रैफिक पैटर्न से बढ़ती है मुश्किल

भारतीय ट्रैफिक दुनिया के सबसे जटिल ट्रैफिक सिस्टम में से एक माना जाता है। सड़क पर अचानक बाइक, ऑटो, साइकिल, पैदल यात्री या जानवर आ जाना आम बात है। कई बार ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग (AEB) ऐसे हालात में जरूरत से पहले ब्रेक लगा देता है, जबकि कुछ स्थितियों में बाधा को सही समय पर पहचानने में भी दिक्कत हो सकती है। इससे दुर्घटना का जोखिम बढ़ सकता है।

खराब मौसम में घट सकती है सिस्टम की क्षमता

तेज बारिश, घना कोहरा, धूल या कीचड़ कैमरा और रडार की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकते हैं। यदि सेंसर सही तरीके से आसपास का वातावरण नहीं देख पाएंगे, तो ADAS फीचर्स अस्थायी रूप से बंद हो सकते हैं या उनकी सटीकता कम हो सकती है। इसलिए खराब मौसम में केवल इस तकनीक पर निर्भर रहना सुरक्षित नहीं माना जाता।

सेंसर की सफाई और रखरखाव भी है जरूरी

कई लोग यह भूल जाते हैं कि ADAS का प्रदर्शन सेंसर और कैमरों की साफ-सफाई पर भी निर्भर करता है। यदि इन पर धूल, कीचड़ या पानी की परत जम जाए तो सिस्टम गलत अलर्ट दे सकता है या काम करना बंद कर सकता है। नियमित सर्विसिंग और सेंसर की जांच इस तकनीक की विश्वसनीयता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

ADAS का सही इस्तेमाल कैसे करें?

ADAS को कभी भी ऑटो-पायलट या पूरी तरह स्वचालित ड्राइविंग सिस्टम न समझें। यह केवल ड्राइवर की सहायता करने वाली तकनीक है। ड्राइविंग के दौरान हमेशा दोनों हाथ स्टीयरिंग पर रखें, सड़क पर पूरा ध्यान दें और वाहन की गति परिस्थितियों के अनुसार नियंत्रित रखें। खराब मौसम, भीड़भाड़ वाले इलाके और ग्रामीण सड़कों पर अतिरिक्त सतर्कता बरतना सबसे बेहतर विकल्प है।

ADAS आधुनिक कारों की सुरक्षा को नई ऊंचाई देता है और दुर्घटनाओं की संभावना कम करने में मददगार साबित हो सकता है। लेकिन भारतीय सड़कों की वास्तविक परिस्थितियों में इसकी कुछ व्यावहारिक सीमाएं भी हैं। इसलिए इस तकनीक को ड्राइवर का विकल्प नहीं, बल्कि एक स्मार्ट सहायक के रूप में इस्तेमाल करना ही समझदारी है। सुरक्षित ड्राइविंग का सबसे बड़ा आधार आज भी सतर्क और जिम्मेदार चालक ही है।

- डॉ. अनिमेष शर्मा

All the updates here:

अन्य न्यूज़