पद्मश्री ठुकराने वाली महान गायिका संध्या मुखर्जी का निधन, 90 साल की उम्र में ली आखिरी सांस

अस्पताल के एक वरिष्ठ अधिकारी नेबताया कि शाम करीब साढ़े सात बजे दिल का दौरा पड़ने से मुखर्जी का निधन हो गया। मुखर्जी कोरोना वायरस से संक्रमित पाई गई थीं और वह हृदय संबंधी बीमारियों से भी ग्रस्त थीं।
सुप्रसिद्ध बंगाली गायिका संध्या मुखर्जी का निधन हो गया है। वह 90 साल की थीं। जानकारी के मुताबिक खराब स्वास्थ्य की वजह से वह कई दिनों से अस्पताल में भर्ती थीं। उन्हें 27 जनवरी को सांस फूलने की समस्या आई थी जिसके बाद उन्हें दक्षिण कोलकाता स्थित आवास से एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल के एक वरिष्ठ अधिकारी नेबताया कि शाम करीब साढ़े सात बजे दिल का दौरा पड़ने से मुखर्जी का निधन हो गया। मुखर्जी कोरोना वायरस से संक्रमित पाई गई थीं और वह हृदय संबंधी बीमारियों से भी ग्रस्त थीं। उनके कई अंगों ने काम करना बंद दिया था। 73 वें गणतंत्र दिवस के मौके पर भारत सरकार की ओर से पद्म पुरस्कारों की घोषणा की गई थी जिसमें संध्या मुखर्जी का भी नाम था। संध्या मुखर्जी ने पद्मश्री पुरस्कार ठुकरा दिया था।
केंद्र सरकार के अधिकारियों ने सम्मान के लिए उनकी सहमति की खातिर उनसे टेलीफोन पर संपर्क किया था। गायिका की बेटी सौमी सेनगुप्ता ने कहा कि मुखर्जी ने दिल्ली से फोन करने वाले वरिष्ठ अधिकारी से कहा था कि वह गणतंत्र दिवस सम्मान सूची में पद्म श्री के लिए नामित होने को तैयार नहीं हैं। उनकी सहमति के लिए उनसे संपर्क किया गया था। सेनगुप्ता ने कहा, 90 साल की उम्र में, लगभग आठ दशकों से अधिक के गायन करियर के साथ, पद्म श्री के लिए चुना जाना उनके लिए अपमानजनक है। गायिका की बेटी ने कहा, पद्म श्री किसी जूनियर कलाकार के लिए अधिक योग्य है, न कि गीताश्री संध्या मुखोपाध्याय के लिए।Iconic Bengali singer Sandhya Mukherjee passes away at a private hospital in Kolkata, West Bengal. She was admitted here with critical health issues. pic.twitter.com/CKluEmhbPO
— ANI (@ANI) February 15, 2022
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लता मंगेशकर के बाद संध्या मुखर्जी का जाना संगीत प्रेमियों के लिए एक बड़ा झटका है। संध्या मुखर्जी ने एसडी बर्मन, अनिल विश्वास, मदन मोहन, रोशन और सलिल चौधरी जैसे कई संगीत निर्देशकों के साथ काम किया है। संध्या मुखर्जी ने 60 और 70 के दशक में हजारों गाना गाए हैं। उन्हें पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से 2001 में बंगा विभूषण से सम्मानित किया गया था। बंगा विभूषण पश्चिम बंगाल सरकार का सबसे बड़ा नागरिक पुरस्कार है।
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