Bengaluru की Startup Pronto पर बड़ा आरोप, AI Training के लिए घरों में हो रही Video Recording?

Pronto
प्रतिरूप फोटो
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Ankit Jaiswal । May 24 2026 11:42PM

सोशल मीडिया पर लगे आरोपों के बाद बेंगलुरु की स्टार्टअप प्रोंटो एआई ट्रेनिंग के लिए वीडियो रिकॉर्डिंग करने पर विवादों में है, जिससे डेटा सुरक्षा पर बहस छिड़ गई है। प्रोंटो ने स्पष्ट किया है कि यह कार्यक्रम केवल 0.1% ग्राहकों के लिए वैकल्पिक है और हर बार रिकॉर्डिंग से पहले स्पष्ट अनुमति ली जाती है, जो पूरी तरह कानूनी है।

आजकल एआई और डेटा सुरक्षा को लेकर बहस लगातार तेज होती जा रही है। इसी बीच बेंगलुरु की घरेलू सेवाएं देने वाली स्टार्टअप “प्रोंटो” अब निजता से जुड़े विवादों में घिर गई हैं।

मौजूद जानकारी के अनुसार सोशल मीडिया मंच एक्स पर पत्रकार हर्ष उपाध्याय ने दावा किया कि प्रोंटो के कुछ कर्मचारी ग्राहकों के घरों में छोटे कैमरों के जरिए वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहे हैं। उनका कहना था कि यह रिकॉर्डिंग कंपनी के निवेशकों की “फिजिकल एआई” परियोजना के प्रशिक्षण के लिए इस्तेमाल की जा रही हैं।

हर्ष उपाध्याय की पोस्ट तेजी से वायरल हो गई और उसे दो लाख से ज्यादा बार देखा गया। इसके बाद सामाजिक माध्यमों पर लोगों ने निजता, डेटा सुरक्षा और एआई के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर चिंता जतानी शुरू कर दी है।

पोस्ट में कहा गया कि प्रोंटो के कर्मचारी कुछ चुनिंदा कामों के दौरान बाहर की ओर लगे छोटे कैमरे का इस्तेमाल करते हैं और बाद में ग्राहकों को उसकी रिकॉर्डिंग भेजी जाती हैं।

विवाद बढ़ने के बाद प्रोंटो ने अपनी सफाई जारी की हैं। कंपनी का कहना है कि किसी भी ग्राहक की स्पष्ट अनुमति के बिना कोई रिकॉर्डिंग नहीं की जाती हैं।

गौरतलब है कि प्रोंटो एक 10 मिनट घरेलू सेवा देने वाली स्टार्टअप है, जिसकी स्थापना 23 वर्षीय अंजलि सरदाना ने की हैं। कंपनी का दावा है कि एआई प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरी तरह वैकल्पिक है और इसमें बहुत कम ग्राहक शामिल होते हैं।

कंपनी ने कहा कि अगर कोई ग्राहक इस कार्यक्रम का हिस्सा नहीं बनना चाहता तो कर्मचारी कैमरा लेकर उसके घर नहीं जाता हैं। प्रोंटो के मुताबिक यह अनुमति हर बुकिंग से पहले अलग से ली जाती है और यह कोई स्थायी सहमति नहीं होती हैं।

प्रोंटो ने यह भी कहा कि जिन मामलों में कैमरे का इस्तेमाल होता है, वहां उसे आसानी से देखा जा सकता है और ग्राहकों को इसकी पूरी जानकारी दी जाती हैं।

बता दें कि कंपनी के अनुसार यह कार्यक्रम केवल 0.1 प्रतिशत ग्राहकों तक सीमित है और इसे लागू करने से पहले कई महीनों तक डेटा सुरक्षा नियमों की जांच की गई थीं।

कंपनी ने दावा किया कि उसकी प्रक्रिया भारत के डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण कानून यानी डीपीडीपी अधिनियम के पूरी तरह अनुरूप हैं। साथ ही कंपनी ने यह भी कहा कि इस तरह की तकनीक का इस्तेमाल केवल वही नहीं बल्कि अन्य कंपनियां भी कर रही हैं।

हालांकि इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि एआई तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बीच लोगों की निजी जिंदगी और डेटा की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए।

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