अवैध तरीके से पैसा निकालने के मामलों में इजाफा: सरकार

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Publish Date: Feb 12 2019 5:58PM
अवैध तरीके से पैसा निकालने के मामलों में इजाफा: सरकार
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उन्होंने बताया कि 2016-17 में यह मात्रा 42.29 करोड़ रुपये थी।हालांकि डिजिटल लेनदेन की तुलना में धोखाधड़ी से किये गये लेन देन की हिस्सेदारी 2015-16 में 0.0000337 प्रतिशत था जो 2017-18 में कम होकर 0.0000281 प्रतिशत हो गयी।

नयी दिल्ली।सरकार ने स्वीकार किया है कि डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड और इंटरनेट बैंकिंग के माध्यम से साइबर धोखाधड़ी के द्वारा बैंक खातों से पैसे निकालने के मामलों में पिछले तीन साल में ढाई गुना तक वृद्धि हुयी है।वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों के हवाले से बताया कि साइबर धोखाधड़ी के माध्यम से 2015-16 में बैंक खातों से एक लाख रुपये से अधिक की निकाली गयी राशि की मात्रा 40.20 करोड़ रुपये से बढ़कर 2017-18 में 109.56 करोड़ रुपये हो गयी है।उन्होंने बताया कि 2016-17 में यह मात्रा 42.29 करोड़ रुपये थी।हालांकि डिजिटल लेनदेन की तुलना में धोखाधड़ी से किये गये लेन देन की हिस्सेदारी 2015-16 में 0.0000337 प्रतिशत था जो 2017-18 में कम होकर 0.0000281 प्रतिशत हो गयी।

बैंकों में धोखाधड़ी अवैध तरीके से खातों से निकाली गयी राशि का वहन खाताधारक को ही करने के सवाल पर गोयल ने स्पष्ट किया कि आरबीआई के छह जुलाई 2017 के परिपत्र के मुताबिक अप्राधिकृत ई बैंकिंग लेनदेन में खाताधारक की जिम्मेदारी को निर्धारित किया गया है।उन्होंने बताया कि इसके तहत बैंक की लापरवाही से हुयी धोखाधड़ी होने के तीन दिन के भीतर इसकी सूचना बैंक को देने पर खाताधारक की जिम्मेदारी शून्य होगी। इसके अलावा बैंक को चार से सात दिनों के भीतर धोखाधड़ी की सूचना देने और खाताधारक की संलिप्तता स्पष्ट रूप से प्रमाणित नहीं होने पर ग्राहक की देयता पांच से 25 हजार रुपये तक सीमित होगी। 

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ग्राहक द्वारा सात कार्यदिवस के बाद बैंक को धोखाधड़ी की जानकारी देने के बाद ग्राहक की देयता बैंक के बोर्ड द्वारा अनुमोदित नीति के तहत निर्धारित की जायेगी।धोखाधड़ी में ग्राहक की संलिप्तता प्रमाणित होने पर ग्राहक स्वयं उत्तरदायी होंगे।बैंक की लापरवाही के कारण बैंकिंग लेनदेन में साइबर सुरक्षा में चूक के मामलों की संख्या के सवाल पर गोयल ने बताया कि आरअीआई द्वारा ऐसी सूचना केन्द्रीय स्तर पर नहीं रखी जाती है।

 


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