Income Tax Relief: छात्रों और NRI के लिए अघोषित विदेशी संपत्ति बताने का मौका, 31 दिसंबर 2026 है Deadline

Income Tax Relief
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आयकर विभाग की नई स्वैच्छिक घोषणा योजना छोटे करदाताओं को अघोषित विदेशी संपत्ति पर कानूनी जटिलताओं से बचने का एक सुधारात्मक अवसर प्रदान करती है। इस योजना के अंतर्गत 31 दिसंबर 2026 तक एक करोड़ रुपये तक की अघोषित आय और पांच करोड़ रुपये तक की पूर्व घोषित संपत्तियों का विवरण देकर अनुपालन सुनिश्चित किया जा सकता है। यह विश्लेषणात्मक कदम वित्तीय तंत्र में पारदर्शिता लाने और कर आधार को व्यापक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। कीवर्ड: आयकर विभाग, विदेशी संपत्ति

 आयकर विभाग ने शनिवार को कहा कि छोटे करदाताओं के लिए विदेशी संपत्ति की स्वैच्छिक घोषणा योजना के तहत घोषणाएं 31 दिसंबर, 2026 तक दाखिल की जा सकती हैं। इस योजना के तहत करदाताओं को 30 प्रतिशत कर के साथ उतनी ही राशि का अतिरिक्त शुल्क देना होगा। छोटे करदाताओं, जैसे छात्रों, युवा पेशेवरों, प्रौद्योगिकी क्षेत्र के कर्मचारियों और विदेश में स्थानांतरित हुए प्रवासी भारतीयों के लिए विदेशी संपत्ति की स्वैच्छिक घोषणा की यह योजना 2026-27 के बजट में घोषित की गई थी।

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने शनिवार को योजना के नियम अधिसूचित करते हुए कहा कि इसके तहत पात्र करदाता ऐसी अघोषित विदेशी संपत्तियों, अघोषित विदेशी आय या ऐसी विदेशी संपत्तियों की घोषणा कर सकते हैं, जिन्हें संबंधित विवरण में घोषित नहीं किया गया है। इसके लिए निर्धारित कर या शुल्क का भुगतान करना होगा।

यह योजना 16 अगस्त से प्रभावी होगी और इसके तहत ऑनलाइन घोषणाएं 31 दिसंबर, 2026 तक दाखिल की जा सकेंगी। घोषित की जाने वाली संपत्तियों का उचित बाजार मूल्य 31 मार्च, 2026 की स्थिति के अनुसार निर्धारित किया जाएगा। योजना के तहत घोषणा दाखिल करने के लिए दो व्यापक श्रेणियां तय की गई हैं।

पहली श्रेणी में भारत के बाहर स्थित ऐसी अघोषित संपत्ति या ऐसी अघोषित विदेशी आय शामिल है, जिस पर कर नहीं चुकाया गया है। इस मामले में अघोषित संपत्ति का कुल मूल्य एक करोड़ रुपये से अधिक नहीं होना चाहिए।

दूसरी श्रेणी में भारत के बाहर स्थित ऐसी संपत्ति शामिल हैं, जिस पर पहले ही कर दिया जा चुका है या जिसे करदाता के प्रवासी (एनआरआई) रहने के दौरान हासिल किया गया था, लेकिन आयकर रिटर्न के संबंधित कॉलम में घोषित नहीं किया गया था। ऐसी घोषणाओं के लिए पांच करोड़ रुपये की मौद्रिक सीमा तय की गई है और इस पर एक लाख रुपये का शुल्क लगेगा।

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