CBI ने Future Retail के खिलाफ 904 करोड़ रुपये की बैंक धोखाधड़ी का केस दर्ज किया

केंद्रीय जांच ब्यूरो ने फ्यूचर रिटेल लिमिटेड और उसके प्रवर्तक किशोर बियानी तथा राकेश बियानी के खिलाफ 904 करोड़ रुपये की बैंक धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। आरोप है कि बैंक से मिले कर्ज का इस्तेमाल तय कारोबारी उद्देश्यों के बजाय दूसरी कंपनियों में किया गया। इस मामले में मुंबई में कई ठिकानों पर छापेमारी की गई है।
देश के बड़े खुदरा कारोबार से जुड़ी कंपनी फ्यूचर रिटेल लिमिटेड एक बार फिर विवादों में आ गई है। सीबीआई ने कंपनी और उसके प्रमुख अधिकारियों के खिलाफ 904 करोड़ रुपये के कथित बैंक धोखाधड़ी मामले में मुकदमा दर्ज किया है। इस मामले में कंपनी के प्रमुख प्रवर्तक किशोर बियानी और राकेश बियानी के नाम भी शामिल हैं। आरोप है कि बैंक से कारोबार के लिए लिया गया कर्ज तय कामों में लगाने के बजाय दूसरी कंपनियों के जरिए इधर-उधर किया गया।
सीबीआई ने 4 नवंबर को यह मामला दर्ज किया है। इसके बाद जांच एजेंसी ने मुंबई में कंपनी के प्रवर्तकों और निदेशकों से जुड़े कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इस कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने वित्तीय लेनदेन से जुड़े कई अहम दस्तावेज बरामद किए हैं। जांच एजेंसी ने इन दस्तावेजों को अपने कब्जे में लेकर उनकी जांच शुरू कर दी है।
इस मामले में किशोर बियानी और राकेश बियानी के अलावा कुछ अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। इनके खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार रोकथाम कानून के तहत मामला दर्ज किया गया है। हालांकि, जांच अभी शुरुआती दौर में है और आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
मौजूद जानकारी के अनुसार, सीबीआई ने यह कार्रवाई भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की मुंबई स्थित तनावग्रस्त संपत्ति प्रबंधन शाखा-3 की शिकायत पर शुरू की है। बैंक ने आरोप लगाया था कि फ्यूचर रिटेल लिमिटेड और उसके अधिकारियों ने मिलकर कर्ज लेने के लिए साजिश रची। कंपनी ने एसबीआई की फोर्ट स्थित वाणिज्यिक शाखा और 9 अन्य बैंकों के समूह से अलग-अलग तरह की वित्तीय सुविधाएं हासिल की थीं। इनमें कारोबार चलाने के लिए कार्यशील पूंजी कर्ज, लंबी अवधि के ऋण और साख पत्र जैसी सुविधाएं शामिल थीं।
सीबीआई की शुरुआती जांच में सामने आया है कि कंपनी ने बैंक से मिली रकम का इस्तेमाल उन कामों के लिए नहीं किया, जिनके लिए कर्ज मंजूर कराया गया था। आरोप है कि इस पैसे को दूसरी जगहों पर भेज दिया गया। जांच एजेंसी का दावा है कि सहयोगी कंपनियों और उनसे जुड़ी अन्य संस्थाओं के जरिए कर्ज की रकम को इधर-उधर किया गया। इससे एसबीआई और कर्ज देने वाले दूसरे बैंकों को कुल 904.3 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
बता दें कि फ्यूचर रिटेल लिमिटेड कभी देश के बड़े खुदरा कारोबारियों में शामिल रही है। कंपनी बिग बाजार, फैशन एट बिग बाजार और फूडहॉल जैसे चर्चित खुदरा ब्रांड चलाती थी। इसके अलावा कंपनी रोजमर्रा के इस्तेमाल की चीजों, खाने-पीने के सामान और कपड़ों के कारोबार में भी सक्रिय थी। बिग बाजार कभी देश के बड़े शहरों से लेकर छोटे शहरों तक आम ग्राहकों के बीच काफी लोकप्रिय रहा था।
हालांकि, कंपनी को पिछले कुछ वर्षों में गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा। कारोबार पर बढ़ते कर्ज और वित्तीय दबाव के कारण उसकी स्थिति लगातार कमजोर होती गई। कंपनी के कारोबार और संपत्तियों को लेकर भी विवाद सामने आए थे। ऐसे में अब 904 करोड़ रुपये के कथित बैंक धोखाधड़ी मामले ने कंपनी के पुराने वित्तीय लेनदेन को फिर जांच के दायरे में ला दिया है।
गौरतलब है कि सीबीआई अब इस पूरे मामले में कथित साजिश से जुड़े सभी लोगों की भूमिका का पता लगाने में जुटी है। जांच एजेंसी यह भी पता करेगी कि बैंक से मिली रकम किन-किन कंपनियों के खातों में भेजी गई और आखिरकार उसका इस्तेमाल कहां हुआ। इसके साथ ही यह जांच भी की जाएगी कि इस पूरे मामले में किसी सरकारी कर्मचारी ने आरोपियों की मदद तो नहीं की है। जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि इस कथित धोखाधड़ी में किसकी कितनी भूमिका रही है।
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