Energy Market Update | $114 के पार पहुंचा कच्चा तेल, ईरान युद्ध के दूसरे हफ्ते में दुनिया भर में मची अफरा-तफरी

Crude oil
ANI
रेनू तिवारी । Mar 9 2026 10:17AM

ईरान युद्ध तेज होने के बीच तेल के दाम 2022 के बाद से पहली बार 114 डॉलर प्रति बैरल हो गए। अंतरराष्ट्रीय मानक वाले ब्रेंट कच्चे तेल का दाम 114 डॉलर प्रति बैरल हो गया है जो शुक्रवार की तुलना में 23 प्रतिशत अधिक है।

ईरान युद्ध तेज होने के बीच तेल के दाम 2022 के बाद से पहली बार 114 डॉलर प्रति बैरल हो गए। अंतरराष्ट्रीय मानक वाले ब्रेंट कच्चे तेल का दाम 114 डॉलर प्रति बैरल हो गया है जो शुक्रवार की तुलना में 23 प्रतिशत अधिक है। शुक्रवार को तेल का दाम 92.69 डॉलर प्रति बैरल था। ईरान युद्ध के दूसरे हफ्ते भी जारी रहने से कई देश और स्थान उसकी अपनी चपेट में आ गये हैं, जिसके कारण तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। फारस की खाड़ी में ये वे देश एवं स्थान हैं जो तेल व गैस के उत्पादन तथा परिवहन के लिए महत्वपूर्ण हैं।

23% की एकमुश्त छलांग: आंकड़ों का विश्लेषण

शुक्रवार को बाजार बंद होने के समय तेल की कीमत $92.69 प्रति बैरल थी। सोमवार सुबह बाजार खुलते ही इसमें 23% की जबरदस्त बढ़ोतरी देखी गई। युद्ध के दूसरे हफ्ते में प्रवेश करते ही कीमतों में आई यह उछाल सीधे तौर पर आपूर्ति (Supply) बाधित होने के डर को दर्शाती है।

शुक्रवार की कीमत: $92.69 प्रति बैरल

सोमवार की कीमत: $114.00+ प्रति बैरल

वृद्धि: लगभग $21 प्रति बैरल (एक ही सत्र में)

फारस की खाड़ी: युद्ध की चपेट में 'ऑयल हब'

तेल की कीमतों में इस 'आग' की सबसे बड़ी वजह फारस की खाड़ी (Persian Gulf) में जारी हिंसा है। यह क्षेत्र वैश्विक तेल और गैस उत्पादन के साथ-साथ उनके परिवहन के लिए रीढ़ की हड्डी माना जाता है।

होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz): दुनिया का लगभग 20% तेल इसी संकरे समुद्री रास्ते से गुजरता है। युद्ध के कारण यहाँ जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है। ईरान के भीतर तेल डिपो और रिफाइनरियों पर हुए हमलों ने उत्पादन क्षमता को भारी नुकसान पहुँचाया है। कतर, बहरीन और यूएई जैसे देशों के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर मंडराते खतरों ने निवेशकों के बीच घबराहट पैदा कर दी है।

इसे भी पढ़ें: Saudi Arabia Missile Attack | भारतीय दूतावास ने की पुष्टि- 'किसी भी भारतीय नागरिक की मौत नहीं हुई'

अर्थव्यवस्था पर प्रभाव: महंगाई का नया दौर

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कीमतें इसी स्तर पर बनी रहीं, तो दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ेंगे, जिससे माल ढुलाई महंगी होगी और अंततः महंगाई (Inflation) बेकाबू हो जाएगी। मार्केट एनालिस्ट का कहना है "यह अब केवल एक क्षेत्रीय युद्ध नहीं रह गया है; यह एक 'फिजिकल सप्लाई शॉक' है। $114 का स्तर वैश्विक इकॉनमी के लिए एक टैक्स की तरह काम करेगा, जिससे रिकवरी की गति धीमी हो जाएगी।" 

इसे भी पढ़ें: वेस्ट एशिया संकट! संसद में आज हुंकार भरेंगे एस जयशंकर, मिडिल ईस्ट की जंग पर देश को देंगे जानकारी

ईरान युद्ध के चलते तेल की कीमतों में आया यह उछाल भविष्य के लिए बड़े संकट का संकेत है। जब तक फारस की खाड़ी में स्थिरता नहीं आती, ऊर्जा बाजार में यह अस्थिरता बनी रहने की संभावना है। 

All the updates here:

अन्य न्यूज़