International Labor Day 2026: '8-घंटे काम' के नारे से कैसे शुरू हुआ था ये आंदोलन? जानिए पूरी कहानी

International Labor Day 2026
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आज यानी की 01 मई को दुनिया भर में लेबर डे मनाया जा रहा है। यह दिन दुनिया भर में मजदूरों के सम्मान का दिन है। यह दिन अपने आप में एक संघर्ष की कहानी है। यह दिन याद दिलाता है कि जिन लोगों ने अपने अधिकारों की आवाज उठाई थी।

आज यानी की 01 मई को दुनिया भर में लेबर डे मनाया जा रहा है। यह दिन दुनिया भर में मजदूरों के सम्मान का दिन है। यह दिन अपने आप में एक संघर्ष की कहानी है। यह दिन याद दिलाता है कि जिन लोगों ने अपने अधिकारों की आवाज उठाई थी। बता दें कि 19वीं सदी में औद्योगिक क्रांति तेजी से बढ़ रही थी। नई-नई फैक्ट्रियां खुल रही थीं, मशीनों का इस्तेमाल बढ़ रहा था। लेकिन इस दौरान मजदूरों की हालत खराब होती जा रही थी। उनको लंबे समय तक काम करना पड़ता था। 

मजदूरों का आंदोलन

उस दौर में मजदूरों का 14 से 16 घंटे काम करना आम बात थी। कई बार बच्चों से भी काम कराया जाता था। वहीं महिलाओं को मजदूरी कम दी जाती थी। वहीं काम के दौरान कोई सुरक्षा नहीं होती थी। जिससे मजदूरों की सेहत पर बुरा असर पड़ता था। धीरे-धीरे मजदूरों को अपने अधिकारों का एहसास होने लगा। मजदूरों ने छोटे-छोटे समूह बनाने शुरूकर दिए। इनको यूनियन कहा गया। यूनियन का काम मजदूरों की आवाज को बुलंद करना था। मजदूरों को यह समझ आने लगा था कि अकेले लड़ना मुश्किल है। लेकिन वह मिलकर अपने लिए आवाज उठा सकते हैं औऱ बदलाव ला सकते हैं। यही सोच आगे जाकर ब़ड़े आंदोलन में बदल गई।

आठ घंटे काम की मांग

मजदूरों की सबसे बड़ी मांग काम के घंटे कम करना था। मजदूर चाहते थे कि काम का समय तय हो। उनका नारा था, 'आठ घंटे काम, आठ घंटे आराम और आठ घंटे अपने लिए।' फिर आया वह दिन जब 01 मई 1886 को अमेरिका के लाखों मजदूरों ने हड़ताल की थी। यह एक बड़ा आंदोलन था और शिकागो शहर इसका मुख्य केंद्र था। करीब 3 लाख मजदूर इस आंदोलन में शामिल हुए और मजदूर सड़कों पर उतरे थे। उन्होंने रैलियां निकाली और वह अपनी मांग शांतिपूर्ण तरीके से रख रहे थे।

03 मई 1886 तक आंदोलन तीखा हो गया और एक फैक्ट्री के बाहर प्रदर्शन हुआ। पुलिस ने मजदूरों पर गोली चला दी और कई मजदूर मारे गए। इस दौरान गुस्सा बढ़ गया और 04 मई को हेमार्केट स्क्वायर में सभा हुई। यहां पर लोग अपने अधिकारों की बात कर रहे थे, तभी अचानक एक बम फेंका गया और इसके बाद पुलिस ने भीड़ पर गोली चला दी। इस दौरान कई मजदूर और पुलिसकर्मी मारे गए। यह घटना हेमार्केट अफेयर कही जाती है।

हेमार्केट का असर

इसके बाद कई मजदूर नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। उनके खिलाफ ठोस सबूत नहीं थे और इसके बाद भी उनको दोषी ठहराया गया। 8 नेताओं पर मुकदमा चला और 4 को फांसी दी गई थी। एक ने जेल में आत्महत्या कर ली थी। इस घटना ने पूरी दुनिया को झझकोर दिया था। लोगों ने मजदूरों के संघर्ष को समझा और साल 1889 में पेरिस में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में 01 मई को मजदूर दिवस मनाए जाने का फैसला लिय़ा गया।

भारत में मजदूर दिवस

भारत में भी धीरे-धीरे मजदूर आंदोलन बढ़ा। वहीं 01 मई 1923 को पहली बार चेन्नई में मजदूर दिवस मनाया गया। लेबर किसान पार्टी ऑफ हिंदुस्तान ने यह आयोजन किया था। यह भारत में मजदूर एकता का प्रतीक बना था।

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