सेमीकंडक्टर संयंत्र गुजरात में लगाने का फैसला पेशेवर आधार पर लिया गयाः वेदांता प्रमुख

anil agarwal
प्रतिरूप फोटो
वेदांता समूह के प्रमुख अनिल अग्रवाल ने सेमीकंडक्टर चिप विनिर्माण के प्रस्तावित संयंत्र को महाराष्ट्र से गुजरात ले जाने पर पैदा हुए विवाद के बीच बृहस्पतिवार को कहा कि इस संयंत्र की जगह का फैसला पूरी तरह पेशेवर और स्वतंत्र परामर्श के आधार पर किया गया है। अग्रवाल ने अपने कई ट्वीट में इस संयंत्र को स्थानांतरित करने से जुड़े विवाद पर स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की।

वेदांता समूह के प्रमुख अनिल अग्रवाल ने सेमीकंडक्टर चिप विनिर्माण के प्रस्तावित संयंत्र को महाराष्ट्र से गुजरात ले जाने पर पैदा हुए विवाद के बीच बृहस्पतिवार को कहा कि इस संयंत्र की जगह का फैसला पूरी तरह पेशेवर और स्वतंत्र परामर्श के आधार पर किया गया है। अग्रवाल ने अपने कई ट्वीट में इस संयंत्र को स्थानांतरित करने से जुड़े विवाद पर स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि भले ही चिप विनिर्माण संयंत्र को गुजरात ले जाने का फैसला किया गया है लेकिन उनका समूह महाराष्ट्र में भी निवेश के लिए प्रतिबद्ध है।

वेदांता और उसकी साझेदार फॉक्सकॉन के सेमीकंडक्टर चिप संयंत्र पहले महाराष्ट्र में लगाने की चर्चा थी। लेकिन दो दिन पहले वेदांता ने अचानक गुजरात सरकार के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर कर इस संयंत्र को गुजरात में स्थापित करने की घोषणा कर दी। इस संयंत्र पर करीब 1.52 लाख करोड़ रुपये का निवेश होने की संभावना है। हालांकि, इस घोषणा के फौरन बाद महाराष्ट्र और गुजरात के राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया। कई दलों ने इसे महाराष्ट्र सरकार की नाकामी के तौर पर भी पेश किया।

अग्रवाल ने इस संदर्भ में अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा, ‘‘वेदांता-फॉक्सकॉन गठजोड़ करोड़ों डॉलर वाले इस निवेश के लिए माकूल जगह का आकलन पेशेवर ढंग से करता रहा है। यह एक वैज्ञानिक एवं वित्तीय प्रक्रिया है जिसमें कई साल भी लग जाते हैं। हमने यह प्रक्रिया दो साल पहले शुरू की थी।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इसमें एक बाहरी पेशेवर एजेंसी की सेवाएं भी ली गईं।हमने गुजरात, कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे कुछ राज्यों का चयन किया और पिछले दो साल से हम इनमें से हरेक राज्य की सरकार के साथ बात करते रहे हैं।’’

वेदांता समूह के प्रमुख ने कहा कि गुजरात का अंतिम रूप से चयन कंपनी की उम्मीदों पर खरा उतरने की वजह से किया गया। हालांकि, उन्होंने उन अपेक्षाओें का ब्योरा नहीं दिया लेकिन यह जरूर कहा कि समूह 1,000 एकड़ जमीन मुफ्त में चाहता था जबकि पानी एवं बिजली को भी रियायती दरों पर मुहैया कराने की मांग रखी गई थी। उन्होंने कहा, ‘‘हमने अपनी अपेक्षाएं पूरी होने पर कुछ महीने पहले ही गुजरात को इस संयंत्र के लिए चुन लिया था। लेकिन जुलाई में महाराष्ट्र सरकार ने प्रतिस्पर्द्धी पेशकश कर अन्य राज्यों को पीछे छोड़ने की कोशिश की।

लेकिन हमें यह संयंत्र एक ही जगह लगाना है लिहाजा पेशेवर एवं स्वतंत्र परामर्श के आधार पर हमने गुजरात को ही अंतिम तौर पर चुना।’’ उन्होंने कहा कि इस दीर्घकालिक निवेश से भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र का स्वरूप ही बदल जाएगा। उन्होंने कहा, ‘‘हम अखिल भारतीय पारिस्थितिकी तैयार करेंगे और महाराष्ट्र में भी निवेश के लिए हम प्रतिबद्ध हैं। हमारे गुजरात संयंत्र में एकीकरण को आगे बढ़ाने के लिए महाराष्ट्र की भूमिका अहम होगी।

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