Tata Sons के IPO की उठी मांग, करोड़ों Investors के हितों और बेहतर Governance का दिया गया हवाला

Tata Sons
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Ankit Jaiswal । May 25 2026 10:20PM

टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने की वकालत करते हुए कहा गया है कि 25 लाख करोड़ रुपये के समूह मूल्यांकन के साथ, अब अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता है। आरबीआई द्वारा एक महत्वपूर्ण वित्तीय संस्था मानी जाने वाली टाटा संस की सूचीबद्धता से अल्पसंख्यक शेयरधारकों को भी उचित मूल्य निर्धारण और बेहतर जानकारी मिल सकेगी।

टाटा समूह की सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार मूल्य 25 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है। इसके बाद टाटा संस की पारदर्शिता और प्रशासन को लेकर बहस बढ़ गई है। इनगवर्न रिसर्च सर्विसेज ने कहा है कि टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध किया जाना चाहिए ताकि निवेशकों को ज्यादा जानकारी और बेहतर निगरानी मिल सके।

देश के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में शामिल टाटा समूह एक बार फिर चर्चा में है। इस बार वजह समूह की कंपनियों का बढ़ता बाजार मूल्य और टाटा संस की पारदर्शिता को लेकर उठ रहे सवाल हैं। टाटा समूह की सूचीबद्ध कंपनियों का संयुक्त बाजार मूल्य अब पच्चीस लाख करोड़ रुपये से ज्यादा पहुंच चुका है। ऐसे में टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने की मांग तेज होती दिख रही है।

मौजूद जानकारी के अनुसार प्रॉक्सी सलाहकार संस्था ‘इनगवर्न रिसर्च सर्विसेज’ ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि टाटा संस की वर्तमान संरचना और नियंत्रण व्यवस्था को देखते हुए अब इसे निजी कंपनी बनाए रखने का तर्क कमजोर पड़ता जा रहा है। संस्था के संस्थापक श्रीराम सुब्रमण्यम ने कहा कि जब किसी कंपनी का प्रभाव इतने बड़े स्तर पर लाखों निवेशकों और कई प्रमुख कंपनियों पर पड़ता हो, तब केवल निजी सहमति के आधार पर संचालन पर्याप्त नहीं माना जा सकता है।

बता दें कि टाटा संस, टाटा समूह की प्रमुख होल्डिंग कंपनी है और इसका नियंत्रण समूह की कई बड़ी सूचीबद्ध कंपनियों पर है। इनमें टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, टाटा स्टील, टाइटन कंपनी, टाटा मोटर्स, टाटा पावर और इंडियन होटल्स कंपनी जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल है। रिपोर्ट के मुताबिक केवल टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज का बाजार मूल्य करीब आठ लाख चालीस हजार करोड़ रुपये के आसपास है, जबकि टाइटन कंपनी और टाटा मोटर्स समूह का मूल्यांकन भी लाखों करोड़ रुपये में पहुंच चुका है।

गौरतलब है कि इन कंपनियों में देशभर के एक करोड़ बीस लाख से ज्यादा छोटे निवेशकों के साथ म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियों और पेंशन फंड जैसे बड़े संस्थागत निवेशकों की भी हिस्सेदारी है। ऐसे में टाटा संस के फैसलों का असर सीधे तौर पर बड़ी संख्या में निवेशकों पर पड़ता है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारतीय रिजर्व बैंक ने टाटा संस को अभी भी एक महत्वपूर्ण गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्था की श्रेणी में रखा हुआ है। हालांकि कंपनी ने इस दर्जे से बाहर निकलने के लिए आवेदन किया हुआ है, लेकिन उसका मामला अभी लंबित बताया जा रहा है। इनगवर्न का कहना है कि यही स्थिति इस बात का संकेत देती है कि टाटा संस आर्थिक व्यवस्था में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

संस्था ने यह भी तर्क दिया कि सूचीबद्ध होने से कंपनी के मूल्यांकन में छूट यानी होल्डिंग कंपनी डिस्काउंट जरूर बना रह सकता है, लेकिन ऐसा अक्सर पारदर्शिता की कमी और जटिल प्रशासनिक ढांचे के कारण होता है। रिपोर्ट में बजाज होल्डिंग्स एंड इन्वेस्टमेंट, आईटीसी और आदित्य बिड़ला कैपिटल जैसी सूचीबद्ध कंपनियों का उदाहरण देते हुए कहा गया कि शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने के बावजूद लंबी अवधि की कारोबारी रणनीतियां सफलतापूर्वक जारी रखी जा सकती है।

बता दें कि टाटा समूह लंबे समय से अपने परोपकारी ट्रस्ट ढांचे के लिए जाना जाता है। टाटा ट्रस्ट्स के जरिए समूह ने वर्षों तक सामाजिक और दीर्घकालिक निवेश मॉडल को बढ़ावा दिया है। हालांकि इनगवर्न का कहना है कि मौजूदा समय में समूह का आकार और आर्थिक प्रभाव इतना बड़ा हो चुका है कि अब अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी हो गई है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सूचीबद्ध होने से टाटा संस के अल्पसंख्यक शेयरधारकों को बेहतर जानकारी और उचित मूल्य निर्धारण का फायदा मिल सकता है। इसमें एसपी समूह और टाटा समूह की सात सूचीबद्ध कंपनियों का भी जिक्र किया गया है, जिनकी टाटा संस में हिस्सेदारी लंबे समय से बनी हुई है।

हालांकि विशेषज्ञों ने यह भी साफ किया है कि केवल सूचीबद्ध हो जाने से कंपनी के मूल्य में तुरंत बड़ा फायदा होना तय नहीं माना जा सकता है। लेकिन उनका कहना है कि इतने बड़े और प्रभावशाली कारोबारी ढांचे को ज्यादा पारदर्शी और जवाबदेह बनाना समय की जरूरत बन चुकी है।

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