FICCI का नेशनल टूरिज्म इंवेटर्स मीट: 2029 तक भारत को ग्लोबल टूरिज्म का केंद्र बनाने का आह्वान

FICCI का नेशनल टूरिज्म इंवेटर्स मीट: 2029 तक भारत को ग्लोबल टूरिज्म का केंद्र बनाने का आह्वान

लुंबिनी में गौतम बुद्ध के जन्मस्थान की तुलना में बिहार की भूमि का मूल्य अधिक है। बोधगया का अधिक महत्व है इसलिए निवेश के साथ आगे बढ़ाने की जरूरत है। नालंदा विश्वविद्यालय ज्ञान का भंडार हुआ करता था। यह एक वास्तुशिल्प चमत्कार भी था।

भारत की टूरिज्म इंडस्ट्री में फिर से नई जान फूंकने की कोशिश में फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) छठा नेशनल टूरिज्म इनवेस्टर्स मीट (एनटीआईएम) 23 और 24 सितंबर को आयोजित किया गया। यह इवेंट नई दिल्ली में तानसेन मार्ग पर स्थित 1, फिक्की फेडरेशन हाउस में आयोजित किया गया। कार्यक्रम के आयोजन में सभी सेफ्टी प्रोटोकॉल का पालन किया गया। इस मीट में बिहार को 'थीम राज्य' के तौर पर चयनित किया गया था। इस आयोजन के माध्यम से फिक्की का उद्देश्य कोविड के बाद के युग में देश के पर्यटन उद्योग को फिर से लॉन्च करने के लिए टूरिज्म के आधारभूत ढांचे में निवेश को प्रोत्साहित करना है। यह इस समय की सबसे बड़ी जरूरत है। 

इसे भी पढ़ें: झारखंड की यह अनोखी पहाड़ी बताती है कि महिला के गर्भ में लड़का है या लड़की

एनटीआईएम का सबसे बड़ा संस्करण माने जाने वाले इस आयोजन से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के आकर्षित होने की उम्मीद है। इस दो दिवसीय इवेंट के उद्घाटन समारोह में बिहार सरकार के माननीय पर्यटन मंत्री नारायण प्रसाद, भारत सरकार में पर्यटन विभाग के महानिदेशक जी. कमलावर्धन राव और संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन, तकनीकी सहयोग और सिल्क रोड डिवेलपमेंट (यूएनटीडब्ल्यूओ) सुमन बिल्ला मौजूद थे। नेशनल टूरिज्म इनेस्टर्स मीट के छठे संस्करण में पर्यटन मंत्रालय, राज्य सरकार और वित्तीय संस्थानों  के प्रतिनिधियों समेत निवेश और कारोबारी समुदाय से जुड़े विभिन्न हितधारक एक ही प्लेटफॉर्म पर एकत्रित हुए। इवेंट के दौरान विशेषज्ञों ने देश में पर्यटन के उद्योग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने व इनमें निवेश की संभावना को तलाशने पर ज़ोर दिया। 

इसे भी पढ़ें: भगवान श्रीकृष्ण से गहरा नाता रखने वाले द्वारका शहर में घूमने के लिए है बहुत कुछ

बिहार के माननीय पर्यटन मंत्री नारायण प्रसाद ने अपने संबोधन में कहा, "बिहार में यात्रा और पर्यटन में अपार अवसर हैं। हमने बिहार में रामायण सर्किट, बुद्ध सर्किट, गांधी सर्किट, सूफी सर्किट और कई और सर्किट बनाए हैं। हाल ही में माननीय 'बिहार के मुख्यमंत्री ने बांका में मंदार हिल्स में रोपवे का उद्घाटन किया। पहले इसे 1 घंटे में कवर किया गया था जो अब 3 मिनट में कवर किया जा सकेगा। ये क्रांतिकारी बदलाव है। बिहार में फ़्रेश वाटर की कई झीलें हैं जिन्हें रामसर कन्वेंशन के तहत दर्जा मिला है। राजगीर में एक नया रोपवे भी बनाया गया है। राजगीर में चिड़ियाघर सफारी, नेचर सफारी भी है , और एक सुंदर कांच का पुल (ग्लास ब्रिज) बनाया गया है जो लोगों को आकर्षित करता है। बुद्ध की भूमि बोधगया हम सभी के लिए एक पवित्र स्थान है। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व बिहार का एक दर्शनीय स्थल है। पर्यटन के अलावा आज बिहार 'हर थाली में बिहारी व्यंजन' अभियान के तहत भारत की सभी प्लेटों में राजकीय व्यंजनों को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहा है। मैं निवेशकों से अनुरोध करता हूं कि बिहार में आकर निवेश करें। महावीर, सीता और बुद्ध की भूमि आप सभी का स्वागत करती है।"

इसे भी पढ़ें: मध्य प्रदेश की बेहद खूबसूरत जगह है भेड़ाघाट, जानिए इसके बारे में

उषा पाधेय, संयुक्त सचिव, नागरिक उड्डयन मंत्रालय, भारत सरकार ने कहा, " विश्व पर्यटन संगठन के अनुसार 2025 तक 15.3 मिलियन। यात्रा और पर्यटन वर्तमान में भारत के सकल घरेलू उत्पाद का 9.6% (जिसमें से 88% घरेलू यात्रा से आता है) और देश की कुल नौकरियों (या 40.3 मिलियन नौकरियों) के 9.3% का समर्थन करता है। हमें हवाई यात्रा संचालन को फिर से शुरू हुए लगभग एक साल हो गया है, लेकिन हवाई यात्रा को यात्रा के एक सुरक्षित और कुशल साधन के रूप में स्थापित किया गया है। आने वाले समय में टीकाकरण की तेजी को देखते हुए पर्यटन के असीमित विकास की उम्मीद है।"

इसे भी पढ़ें: महाराष्ट्र के लवासा घूमने के बाद पूरा हो जाएगा आपका इटली घूमने का सपना

फिक्की की ट्रैवल, टूरिज्म और हॉस्पटिलिटी कमिटी के अध्यक्ष और ललित सूरी हॉस्पटिलिटी ग्रुप की सीएमडी डॉ. ज्योत्सना सूरी ने कहा, “भारतीय पर्यटन उद्योग में विकास की असीमित संभावनाएं हैं। भारत और अन्य देशों में कोरोना की महामारी अब कम हो गई है, जो एक सकारात्मक संकेत है, जिससे यह सेक्टर फिर से उभर सकता है। बिहार में ट्रेवल और टूरिस्म को लेकर कई सम्भावना हैं। गौतम बुद्ध की धरती बोध गया का दुनिया भर में नाम है जिसे और सुदृढ़ तरीक़े से उभरने की ज़रूरत है। राजगीर, नालंदा व गया में चेन ऑफ होटल्स की आवश्यकता है। भारत को पसंदीदा गंतव्य बनाने और राज्य को एक उभरता हुआ राज्य बनाने के प्रयास में बिहार की भागीदारी सराहनीय है। लुंबिनी में गौतम बुद्ध के जन्मस्थान की तुलना में बिहार की भूमि का मूल्य अधिक है। बोधगया का अधिक महत्व है इसलिए निवेश के साथ आगे बढ़ाने की जरूरत है। नालंदा विश्वविद्यालय ज्ञान का भंडार हुआ करता था। यह एक वास्तुशिल्प चमत्कार भी था। आने वाले समय में आगे की पीढ़ियों को इससे रूबरू कराने को आवश्यकता है। एनटीआईएम की कई राज्य सरकारों के साथ भागीदारी है। आज इस कार्यक्रम में विभिन्न राज्य सरकारों के प्रतिनिधि अपने राज्य के पर्यटन सेक्टर में निवेश की संभावनाओं को निवेशकों के सामने पेश कर उन्हें प्रोत्साहित करेंगे। मुझे यह विश्वास है कि एनटीआईएम का यह सेशन घरेलू अंतरराष्ट्रीय निवेशकों  को आकर्षित करेगा और इससे निश्चित रूप से पर्यटन के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव आएंगे।“

इसे भी पढ़ें: चित्तौड़गढ़ की धरती पर गूंजती हैं राजपूत परम्परा की वीरता भरी गाथाएं

संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन (यूएनटीडब्ल्यूओ) के निदेशक, सुमन बिल्ला, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिनेवा से बैठक में शामिल हुए, ने कहा, "यूएन महामारी के प्रकोप के कारण हुए नुकसान को देखते हुए देशों में यात्रा और पर्यटन में निवेश के विचार का प्रचार कर रहा है। अब वहाँ एक सकारात्मक प्रवृत्ति है जिसे हम देख रहे हैं। निवेश वापस आ रहा है और यह एक बहुत ही सकारात्मक संकेत है। रिपोर्ट में भविष्यवाणी की गई है कि 2029 तक भारत का पर्यटन क्षेत्र 6.7 प्रतिशत बढ़कर 35 ट्रिलियन (यूएस $ 488 बिलियन) तक पहुंचने की उम्मीद है, जिसका हिसाब है कुल अर्थव्यवस्था का 9.2 प्रतिशत, 30.5 मिलियन से अधिक विदेशी आगंतुकों के आगमन के साथ। यह भारत को तेज गति से बढ़ने में मदद करेगा क्योंकि वीसी इसे पसंदीदा स्थान के रूप में ढूंढते हैं। चैनल बनाने का समय जहां खरीदार विक्रेताओं से मिलते हैं, और एक पारिस्थितिकी तंत्र/मंच हो सकता है निवेश को बनाए रखने के लिए बनाया गया है। कोविद की संख्या में गिरावट के साथ यात्रा सामान्य हो रही है। लोग अब यात्रा करने के लिए तैयार हैं। हमें सुरक्षा और स्वच्छता मानकों को सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।"

इसे भी पढ़ें: शिव की भूमि के नाम से जाना जाता है झारखंड का देवघर, 12 ज्योतिर्लिंग मंदिरों में शामिल

फिक्की का लक्ष्य है कि भारतीय पर्यटन उद्योग में निवेश की संभावनाओं की पूरी तरह खोज करेंगे। रणनीतिक योजना से निवेश के लिहाज से इंटरनेशनल टूरिज्म मैप पर भारत पर्यटन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण डेस्टिनेशन बनकर उभरेगा। नागिया एंडरसन, एलएलपी, की “टूरिज्म इनवेस्टमेंट पोटेंशियल इन इंडिया” नॉलेज रिपोर्ट के अनुसार  भारत की जीडीपी में पर्यटन उद्योग का योगदान 6.9 फीसदी और देश के कुल लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने मैं 8 फीसदी का योगदान है। नॉलेज रिपोर्ट के अनुसार भारत की पर्यटन इंडस्ट्री की 3.5 फीसदी की वार्षिक दर के साथ विकास की उम्मीद है। रिपोर्ट में यह भविष्यवाणी की गई है कि 2029 तक भारतीय टूरिज्म सेक्टर का विकास 35 ट्रिलियन रुपयों (488 बिलियन डॉलर) तक पहुंचने और 6.7 फीसदी की दर से होने की उम्मीद है। पर्यटन उद्योग पूरी अर्थव्यवस्था में 9.2 फीसदी का योगदान दती है। भात में इस अवधि में 30.5 मिलियन से ज्यादा विदेशी मेहमानों के भारत में आगमन की उम्मीद है। नवीन कुंडू, सह अध्यक्ष, फिक्की घरेलू पर्यटन समिति और प्रबंध निदेशक, EBIXCash Travel & Holidays, द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तावित किया गया था।