Global Cues ने बिगाड़ा खेल, Sensex में 1000 अंकों की भारी गिरावट, IT-Metal Stocks धड़ाम

कमजोर वैश्विक संकेतों और आईटी-मेटल शेयरों में भारी बिकवाली के दबाव में भारतीय शेयर बाजार बुरी तरह लुढ़क गया। सेंसेक्स 1,048 अंक टूटकर 82,626 पर, जबकि निफ्टी 336 अंक गिरकर 25,471 पर बंद हुआ, जिसमें अमेरिकी महंगाई आंकड़ों की चिंता ने भी अहम भूमिका निभाई।
शुक्रवार को शेयर बाजार में कारोबार की शुरुआत तो सामान्य रही, लेकिन जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा बिकवाली का दबाव तेज होता गया। वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों और धातु, आईटी व कमोडिटी शेयरों में व्यापक गिरावट के चलते घरेलू सूचकांकों ने एक प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट के साथ सत्र समाप्त किया।
30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 1,048.16 अंक यानी 1.25 प्रतिशत लुढ़ककर 82,626.76 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह 1,140.37 अंक टूटकर 82,534.55 के निचले स्तर तक पहुंच गया था। इसी तरह 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 336.10 अंक यानी 1.30 प्रतिशत गिरकर 25,471.10 पर आ गया। इंट्राडे में यह 25,444.30 तक फिसला।
गौरतलब है कि हाल के दिनों में वैश्विक अनिश्चितताओं, अमेरिकी महंगाई आंकड़ों से पहले सतर्कता और तकनीकी शेयरों पर दबाव के कारण निवेशकों का रुख कमजोर बना हुआ है। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका-भारत व्यापार समझौते को लेकर शुरुआती उत्साह अब कम होता दिख रहा है।
सेंसेक्स में हिंदुस्तान यूनिलीवर, टाइटन, टाटा स्टील, अदाणी पोर्ट्स, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, रिलायंस इंडस्ट्रीज, एशियन पेंट्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा, एचडीएफसी बैंक और एचसीएल टेक्नोलॉजीज जैसे शेयरों में प्रमुख गिरावट दर्ज की गई। वहीं बजाज फाइनेंस और भारतीय स्टेट बैंक बढ़त दर्ज करने वाले चुनिंदा शेयरों में शामिल रहे।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा कि अमेरिकी मुद्रास्फीति आंकड़ों से पहले वैश्विक स्तर पर सतर्कता का माहौल है। उनका यह भी कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित बदलावों को लेकर बढ़ती आशंकाओं ने आईटी कंपनियों पर दबाव बनाया है, खासकर उन कंपनियों पर जो श्रम-आधारित मॉडल पर अधिक निर्भर हैं।
मौजूद जानकारी के अनुसार, मजबूत डॉलर इंडेक्स और रूस के डॉलर निपटान प्रणाली में संभावित वापसी से जुड़ी खबरों ने मेटल शेयरों में मुनाफावसूली को बढ़ावा दिया। इससे धातु कंपनियों की आय पर असर की आशंका जताई जा रही है।
एशियाई बाजारों में भी कमजोरी का रुख रहा। हांगकांग, शंघाई, टोक्यो और सियोल के प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। यूरोपीय बाजारों में मिला-जुला रुख देखने को मिला, जबकि अमेरिकी बाजार गुरुवार को दो प्रतिशत तक फिसल गए थे।
बता दें कि गुरुवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 108.42 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे थे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशक भी 276.85 करोड़ रुपये के शुद्ध खरीदार रहे। इसके बावजूद बाजार पर दबाव बना रहा। वैश्विक कच्चे तेल का मानक ब्रेंट क्रूड 0.32 प्रतिशत बढ़कर 67.81 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक संकेत स्पष्ट नहीं होते और अमेरिकी आर्थिक आंकड़े सामने नहीं आते, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव का सिलसिला जारी रह सकता है।
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