Gold Price Hike: घरेलू बाजार में सोना हुआ महंगा, MCX Futures में एक प्रतिशत की जोरदार रिकवरी

Gold Price
प्रतिरूप फोटो
Canava
Ankit Jaiswal । Jul 21 2026 8:48PM

अमेरिका और ईरान के बीच बदलते घटनाक्रमों के बीच सोने की कीमतों ने अपने महत्वपूर्ण समर्थन स्तरों को पार करते हुए वैश्विक बाजार में मजबूती दर्ज की है। बाजार विश्लेषकों के अनुसार चीन में भौतिक मांग और निवेश कोषों की सीमित हिस्सेदारी के कारण बड़ी गिरावट की संभावना कम है जो इसे लंबी अवधि के लिए एक स्थिर विकल्प बनाती है। निवेशकों को यूरोपीय केंद्रीय बैंक के फैसलों और डॉलर की मजबूती पर बारीकी से नजर रखने की सलाह दी जाती है ताकि प्रभावी जोखिम प्रबंधन किया जा सके।

अगर आप सोने में निवेश करने की योजना बना रहे हैं या आभूषण खरीदने का विचार कर रहे हैं, तो आपके लिए यह अहम खबर है। मंगलवार को घरेलू और वैश्विक दोनों बाजारों में सोने की कीमतों में मजबूत तेजी दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, निवेशकों की सतर्कता और मजबूत मांग के कारण सोने को लगातार समर्थन मिल रहा है।

बता दें कि बहु वस्तु विनिमय पर अगस्त महीने की आपूर्ति वाले सोने के वायदा अनुबंध में 988 रुपये यानी करीब एक प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। कारोबार के दौरान सोना 1,42,376 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर तक पहुंच गया। इस दौरान कुल 551 अनुबंधों का कारोबार हुआ, जिससे बाजार में अच्छी सक्रियता देखने को मिली।

वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की कीमतों में तेजी बनी रही। अमेरिका के कोमेक्स बाजार में अगस्त आपूर्ति वाले सोने का वायदा भाव 66.30 अमेरिकी डॉलर यानी करीब दो प्रतिशत बढ़कर 4,082.20 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। वैश्विक बाजार में यह बढ़त निवेशकों के बढ़ते भरोसे का संकेत मानी जा रही है।

लेमन मार्केट्स डेस्क के शोध विश्लेषक गौरव गर्ग के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच तनाव में कुछ नरमी आने से ऊर्जा कीमतों को लेकर चिंता कम हुई है। इसका असर घरेलू बाजार में भी देखने को मिला और सोने की कीमतों में तेजी दर्ज की गई। हालांकि निवेशकों की सतर्कता अभी भी बनी हुई है।

गौरतलब है कि हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता पैदा कर दी थी। अब ऐसी खबरें सामने आई हैं कि मध्यस्थ देशों की ओर से ईरान को 10 दिन के युद्धविराम का प्रस्ताव दिया गया है। ऑगमोंट की शोध प्रमुख रेनिशा चैनानी का कहना है कि इसी कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना अपने महत्वपूर्ण समर्थन स्तर से ऊपर लौटने में सफल रहा है।

मौजूद जानकारी के अनुसार अमेरिका का केंद्रीय बैंक भविष्य में ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपना सकता है। इसके साथ ही मजबूत अमेरिकी मुद्रा भी सोने की कीमतों पर दबाव बना सकती है। हालांकि लंबे समय से निवेश कोषों से निकासी के कारण सोने में निवेशकों की हिस्सेदारी पहले ही काफी कम हो चुकी है। ऐसे में कीमतों में बड़ी गिरावट की संभावना फिलहाल सीमित मानी जा रही है।

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि चीन में भौतिक सोने की मजबूत मांग और दुनिया के कई केंद्रीय बैंकों द्वारा लगातार सोने की खरीदारी की जा रही है। यही वजह है कि वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतों को मजबूत आधार मिल रहा है और बाजार में गिरावट आने पर भी खरीदारी बढ़ जाती है।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के जिंस विश्लेषक मानव मोदी के अनुसार आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव की दिशा, प्रमुख मुद्राओं की चाल और यूरोपीय केंद्रीय बैंक के नीतिगत फैसलों पर रहेगी। इन सभी कारकों का सीधा असर सोने की कीमतों पर पड़ सकता है। ऐसे में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है, लेकिन सुरक्षित निवेश के विकल्प के रूप में सोने की मांग फिलहाल मजबूत बनी हुई हैं।

All the updates here:

अन्य न्यूज़