Flexi-Fuel गाड़ियों से Ethanol सम्मिश्रण E-20 से आगे ले जाएगी सरकार, Tarun Kapoor ने दी जानकारी

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प्रधानमंत्री के सलाहकार तरुण कपूर ने नई दिल्ली में आयोजित बायो-एनर्जी सम्मेलन में बताया कि सरकार पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण को मौजूदा 20 प्रतिशत से आगे बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है। पश्चिम एशिया संकट और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच जैव-ईंधन को बढ़ावा देना देश के लिए बेहद जरूरी हो गया है। इसके साथ ही पेट्रोल पंपों पर शुद्ध एथनॉल की उपलब्धता सुनिश्चित करने की तैयारी भी की जा रही है।

नयी दिल्ली, नौ सितंबर प्रधानमंत्री के सलाहकार तरुण कपूर ने बुधवार को कहा कि सरकार फ्लेक्सी-फ्यूल गाड़ियों के जरिये मौजूदा ई-20 स्तर से ज्यादा पेट्रोल में एथनॉल मिलाने की अनुमति देने पर काम कर रही है। द इंडिया शुगर एंड बायो-एनर्जी कॉन्फ्रेंस 2026 के चौथे संस्करण को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए कपूर ने कहा कि ई-20 कार्यक्रम अबतक ‘बहुत सफल’ रहा है और कई वाहन कंपनियों ने जल्द ही फ्लेक्सी-फ्यूल गाड़ियां पेश करने की योजना की घोषणा की है। उन्होंने कहा, ‘‘अब हमारा ध्यान फ्लेक्सी-फ्यूल गाड़ियों पर है और ऐसी सम्मिश्रण की मंजूरी देना है जो ई-20 से ज्यादा हो।’’ उन्होंने कहा कि ऐसी गाड़ियों की पेशकश के साथ-साथ ईंधन बिक्री केंद्रों पर शुद्ध एथनॉल की उपलब्धता भी बढ़ानी होगी।

कपूर ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के बीच जैव-ईंधन पर जोर देना और भी जरूरी हो गया है। इस संकट ने आपूर्ति में रुकावट डाली है और कच्चे तेल की कीमतों को लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा दिया है, साथ ही और बढ़ोतरी की आशंका भी बनी हुई है। उन्होंने कहा, ‘‘यह जरूरी है कि हम देश में जो कुछ भी उपलब्ध है, उसका इस्तेमाल करने की कोशिश करें।’’ उन्होंने कहा कि देश में एथनॉल उत्पादन की क्षमता पेट्रोल में इसे मिलाने की जरूरतों से ज्यादा हो गई है, और इस अतिरिक्त क्षमता का पूरा इस्तेमाल करने के लिए उद्योग को एथनॉल के अन्य इस्तेमाल के तरीकों पर भी विचार करना होगा।

ई-20 को लेकर हालिया आलोचना का जवाब देते हुए कपूर ने कहा कि इसमें से ज्यादातर गलत जानकारी या ‘खास मकसद से की गई आलोचना’ के कारण थी। उन्होंने कहा कि अध्ययनों से पता चला है कि ई-20 अच्छा काम करता है और ईंधन क्षमता में थोड़ी-बहुत कमी की भरपाई ज्यादा ‘ऑक्टेन’ सामग्री से हो जाती है। डीजल खंड के बारे में कपूर ने कहा कि सरकार जैव-ईंधन एडिटिव्स पर विचार कर रही है।

उन्होंने कहा कि अगर आइसोब्यूटेनॉल के साथ किए जा रहे प्रयोग सफल होते हैं, तो यह जैव-ईंधन के लिए एक ‘बड़ा’ नया रास्ता खोल सकते हैं, क्योंकि रिफाइनरी उत्पादन में डीजल का बड़ा हिस्सा होता है। उन्होंने सरकार की नई गोवर्धन योजना का भी जिक्र किया, जो संपींडित बायोगैस (सीबीजी) को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग मंत्रालयों से मिलने वाले मदद को एक साथ लाती है। इस क्षेत्र में अब तक सीमित प्रगति हुई है।

कपूर ने एथनॉल बनाने वाली कंपनियों से सीबीजी उत्पादन और पोटाश जैसे दूसरे मूल्यवर्धित उप-उत्पादों के क्षेत्र में भी काम करने का आग्रह किया। कपूर ने कहा कि सरकार जैव-ईंधन क्षेत्र के लिए ‘पूरी तरह से प्रतिबद्ध’ है और यह सुनिश्चित करने के लिए काम करेगी कि जैसे-जैसे बाजार का विस्तार हो, मौजूदा निवेश में कोई अनिश्चितता न आए।

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