Airlines के दबाव में सरकार का U-Turn, Flight में 60% Free Seat का नियम फिलहाल स्थगित

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Ankit Jaiswal । Apr 3 2026 9:13PM

सरकार और एयरलाइंस के बीच राजस्व मॉडल पर मतभेद के चलते मुफ्त सीट चयन का बड़ा नियम टल गया है, जिसके तहत 60% सीटों पर अतिरिक्त शुल्क खत्म होना था। अब मंत्रालय इस नीति की व्यापक समीक्षा करेगा ताकि यात्रियों की सुविधा और एयरलाइनों के व्यावसायिक हितों के बीच संतुलन बनाया जा सके।

हवाई यात्रियों के लिए राहत और असमंजस दोनों तरह की स्थिति बन गई है, क्योंकि सरकार ने सीट चयन से जुड़े अपने एक बड़े फैसले को फिलहाल रोक दिया है। बता दें कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एयरलाइनों को निर्देश दिया था कि 20 अप्रैल से हर उड़ान में कम से कम 60 प्रतिशत सीटें बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के चुनने की सुविधा दी जाए, लेकिन अब इस आदेश को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया गया है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, यह फैसला एयरलाइनों की आपत्तियों के बाद लिया गया है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस और अकासा एयर ने सरकार को बताया कि इस नियम से संचालन और व्यावसायिक ढांचे पर असर पड़ सकता है। गौरतलब है कि एयरलाइनों का कहना था कि यह व्यवस्था मौजूदा किराया प्रणाली के साथ मेल नहीं खाती और इससे टिकट कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।

बता दें कि पहले जारी निर्देश के तहत डीजीसीए को कहा गया था कि वह एयरलाइनों को इस नियम का पालन सुनिश्चित कराए, ताकि यात्रियों को सीट चयन में अधिक पारदर्शिता और सुविधा मिल सके। हालांकि अब मंत्रालय ने साफ किया है कि इस पूरे मामले की व्यापक समीक्षा की जाएगी और तब तक यह प्रावधान लागू नहीं होगा।

मौजूद जानकारी के अनुसार, अभी तक केवल लगभग 20 प्रतिशत सीटें ही बिना अतिरिक्त शुल्क के उपलब्ध होती हैं, जबकि बाकी सीटों के लिए यात्रियों को अलग से भुगतान करना पड़ता है। बता दें कि सीट चयन के लिए आमतौर पर 200 रुपये से लेकर 2100 रुपये तक का शुल्क लिया जाता है, जो सीट की स्थिति और अतिरिक्त सुविधाओं पर निर्भर करता है।

गौरतलब है कि सरकार का यह कदम यात्रियों की बढ़ती शिकायतों के बाद आया था, जिसमें कहा जा रहा था कि एयरलाइंस विभिन्न सेवाओं के नाम पर ज्यादा शुल्क वसूल रही हैं। ऐसे में सरकार यात्रियों को राहत देने के उद्देश्य से यह नया नियम लागू करना चाहती थी।

हालांकि, अब इस फैसले को टाल दिए जाने से फिलहाल यात्रियों को पहले जैसी व्यवस्था में ही यात्रा करनी होगी। माना जा रहा है कि सरकार जल्द ही सभी पक्षों से चर्चा के बाद इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय ले सकती है, जिससे यात्रियों और एयरलाइनों दोनों के हितों के बीच संतुलन बनाया जा सके।

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