Japan के Overnight Crying Cafe बना पेरेंट्स का नया सपोर्ट सिस्टम, सोशल मीडिया पर खूब हो रही चर्चा

Japan Overnight Crying Cafe
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एकता । May 26 2026 12:21PM

एक जापानी कॉमिक्स से प्रेरित होकर शुरू हुए 'ओवरनाइट क्राइंग कैफे' का कॉन्सेप्ट काफी पसंद किया जा रहा है, जहां माता-पिता अपने रोते हुए बच्चों को देर रात तक ला सकते हैं। ये कैफे जरूरी सुविधाओं के साथ एक ऐसा सुरक्षित माहौल प्रदान करते हैं, जहां पेरेंट्स को किसी भी तरह की झिझक महसूस नहीं होती।

जापान का 'ओवरनाइट क्राइंग कैफे' इन दिनों सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में है। यह देर रात तक खुलने वाली एक सुरक्षित जगह है, जहां माता-पिता अपने उन बच्चों को ला सकते हैं जो रात में सो नहीं पाते या ज्यादा रोते हैं। इस कैफे को इस तरह बनाया गया है ताकि माता-पिता को पूरी सहूलियत मिल सके। सबसे अच्छी बात यह है कि यहां बच्चे के रोने पर माता-पिता को किसी तरह की झिझक या शर्मिंदगी महसूस नहीं करनी पड़ती।

कैफे में मिलने वाली खास सुविधाएं

इस कैफे में माता-पिता की मदद के लिए कई तरह के इंतजाम किए गए हैं, बच्चों को दूध पिलाने के लिए अलग कमरा (नर्सिंग बूथ), डायपर बदलने की जगह, बच्चों के सुरक्षित खेलने के लिए सॉफ्ट एरिया, छोटे बच्चों के सोने के लिए खास कोना और बच्चों की देखभाल करने वाले अनुभवी स्टाफ और मददगार लोग (वॉलंटियर्स)।

कहां से आया यह अनोखा विचार?

इस बेहतरीन कैफे की सोच 'योनाकिगोया' (Yonakigoya) नाम की एक जापानी कॉमिक्स से मिली है। साल 2023 में एक महिला कार्टूनिस्ट ने इसे इंटरनेट पर डाला था, जो खुद भी एक मां हैं। इस कॉमिक्स में, एक ऐसे 'नाइट-टाइम क्राइंग हाउस' की कल्पना की गई थी, जहां परेशान मांएं रात के समय अपने बच्चों के साथ आ सकें और बिना किसी डर के अपना तनाव कम कर सकें।

असल जिंदगी में कैसे काम कर रहे हैं ये कैफे?

जापान के होक्काइडो में 'ओयाको नो कोया' नाम का कैफे चलाने वाली मादोका नोजावा ने खुद इस परेशानी को झेला है। जब उनकी बेटी छोटी थी, तो वह रात भर रोती थी और उनके पति को सुबह जल्दी काम पर जाना होता था। मादोका ने बताया कि वह एक ऐसी जगह बनाना चाहती थीं जहां किसी भी माता-पिता को इस सफर में अकेलापन न लगे।

मादोका का यह कैफे पिछले साल अक्टूबर से चल रहा है। दिन में यहां स्वादिष्ट 'फ्रेंच टोस्ट' मिलता है, लेकिन रात 9 बजते ही यह 'क्राइंग कैफे' बन जाता है। जापान में अब ऐसे कई कैफे खुल चुके हैं। आइची शहर में तो एक किताबों की दुकान हर महीने रात को 'बेबीज नाइट' रखती है, जिसे पूर्व नर्सरी टीचर और दाई मिलकर संभालती हैं।

मांओं के लिए क्यों वरदान हैं ये कैफे?

शुरुआती दिनों में छोटे बच्चों को संभालना बहुत थका देने वाला होता है और इससे इंसान अकेला पड़ जाता है। एक मां ने अपना दर्द बताते हुए कहा कि बच्चों को सुलाते-सुलाते वह इतनी थक जाती थीं कि उनमें हिलने की भी हिम्मत नहीं होती थी। उन्होंने कहा, "मेरे पास बातचीत करने के लिए लोग बहुत कम हैं, इसलिए यह कैफे मेरे लिए एक बहुत बड़े सहारे जैसा है।"

यही मानसिक और भावनात्मक सहारा इन कैफे की सबसे बड़ी ताकत है। ये जगहें मांओं को अकेलेपन से बाहर निकालकर राहत देती हैं, इसीलिए जापानी माताएं इसे इतना पसंद कर रही हैं।

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