Dalal Street पर IT Stocks की भारी बिकवाली, Infosys-TCS ने निवेशकों को दिया बड़ा झटका

Dalal Street
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Ankit Jaiswal । Apr 27 2026 9:20PM

प्रमुख आईटी कंपनियों के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद निवेशकों की नजर इस बात पर है कि भारतीय कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में खुद को कैसे ढालती हैं। हालांकि शेयरों का मूल्यांकन आकर्षक हुआ है, लेकिन ठोस प्रदर्शन की कमी के कारण निवेशक बाजार में पूरी तरह सकारात्मक रुख अपनाने से बच रहे हैं।

देश के सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र को लेकर बाजार में चिंता बढ़ती नजर आ रही है, जहां हालिया नतीजों ने निवेशकों के भरोसे को कुछ हद तक कमजोर किया है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, देश की प्रमुख सॉफ्टवेयर सेवा कंपनी इन्फोसिस लिमिटेड ने आने वाले वित्त वर्ष के लिए आय वृद्धि का अनुमान बाजार की उम्मीद से कम रखा है। इसके ठीक पहले एचसीएल टेक्नोलॉजीज लिमिटेड के नतीजे भी उम्मीद से कमजोर रहे थे, जिसके बाद दोनों कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखने को मिली है।

गौरतलब है कि इन घटनाओं के बाद पूरे क्षेत्र पर असर पड़ा है और सूचना प्रौद्योगिकी सूचकांक में तेज गिरावट दर्ज की गई है, जो पिछले कई महीनों के निचले स्तर पर पहुंच गया है हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि इस क्षेत्र में दबाव अभी और बने रहने की आशंका जताई जा रही है।

बता दें कि भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग, जिसकी कुल क्षमता सैकड़ों अरब डॉलर की मानी जाती है, इस समय दोहरी चुनौती का सामना कर रहा है। एक ओर वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव के कारण कंपनियां तकनीकी खर्च में कटौती कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर कृत्रिम बुद्धिमत्ता का तेजी से बढ़ता प्रभाव पारंपरिक कारोबार मॉडल के लिए चुनौती बनता जा रहा है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, इस गिरावट की शुरुआत तब और तेज हुई जब टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज ने अपने नतीजों का ऐलान किया था। तब से अब तक इस क्षेत्र की कंपनियों के बाजार मूल्य में बड़ी कमी दर्ज की जा चुकी है, जिसका असर व्यापक शेयर बाजार पर भी पड़ा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय निवेशकों की नजर इस बात पर टिकी है कि भारतीय आईटी कंपनियां कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में खुद को कितनी तेजी से ढाल पाती हैं। इन्फोसिस जैसी कंपनियां अपने उत्पादों और सेवाओं में नई तकनीक को शामिल कर लागत कम करने और ग्राहकों को आकर्षित करने की कोशिश कर रही हैं, जबकि टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज ने भी नई साझेदारियों के जरिए इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।

गौरतलब है कि भारतीय आईटी कंपनियों ने पहले भी कई वैश्विक संकटों और तकनीकी बदलावों का सामना किया है, लेकिन इस बार चुनौती का स्वरूप अलग माना जा रहा है, क्योंकि इसमें तकनीक खुद ही मौजूदा कामकाज को बदलने की क्षमता रखती है।

हालांकि कुछ बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार गिरावट के बाद अब इस क्षेत्र के शेयरों का मूल्यांकन आकर्षक स्तर पर पहुंच गया है, लेकिन निवेशक तब तक पूरी तरह सकारात्मक रुख अपनाने से बच रहे हैं जब तक कंपनियां ठोस प्रदर्शन नहीं दिखाती हैं।

कुल मिलाकर देखा जाए तो भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र फिलहाल अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है, जहां वैश्विक परिस्थितियों और नई तकनीकों के बीच संतुलन बनाना कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है हैं

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