डब्ल्यूजीसी रिपोर्ट: अप्रैल-जून तिमाही में भारत में सोने की मांग 6 प्रतिशत घटकर 131.4 टन रही

डब्ल्यूजीसी रिपोर्ट: अप्रैल-जून तिमाही में भारत में सोने की मांग 6 प्रतिशत घटकर 131.4 टन रही
प्रतिरूप फोटो

विश्व स्वर्ण परिषद की रिपोर्ट के अनुसार, मौसमी सुस्ती, सीमा शुल्क वृद्धि और पीएम मोदी की अपील के कारण अप्रैल-जून तिमाही में सोने की मांग घटी है। हालांकि, ऊंची कीमतों की वजह से मूल्य के लिहाज से सोने की खपत 50 प्रतिशत बढ़कर 1,98,100 करोड़ रुपये पर पहुंच गई। वहीं, सोने के बिस्कुट और सिक्कों में निवेश की मांग नौ प्रतिशत बढ़ी है।

मुंबई, 30 जुलाई मौसमी सुस्ती, सीमा शुल्क में बढ़ोतरी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सोने की खरीद कम करने की अपील के कारण भारत में अप्रैल-जून तिमाही के दौरान सोने की मांग सालाना आधार पर छह प्रतिशत घटकर 131.4 टन रह गई। विश्व स्वर्ण परिषद (डब्ल्यूजीसी) की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। डब्ल्यूजीसी की वर्ष की दूसरी तिमाही पर आधारित ‘क्यू2 2026 गोल्ड डिमांड ट्रेंड्स’ रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वर्ष की समान अवधि में कुल मांग 139.7 टन थी।

डब्ल्यूजीसी के भारत क्षेत्र के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) सचिन जैन ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘ हालांकि, मूल्य के लिहाज से मांग रिकॉर्ड स्तर पर रही।सोने की खपत का मूल्य 1,98,100 करोड़ रुपये रहा, जबकि 2025 की समान अवधि में यह 1,32,500 करोड़ रुपये था। यह 2025 की दूसरी तिमाही की तुलना में 50 प्रतिशत अधिक है जो दर्शाता है कि ऊंची कीमतों के बावजूद उपभोक्ता सोने को प्राथमिकता दे रहे हैं।’’ आगामी स्थिति पर जैन ने कहा कि डब्ल्यूजीसी का अनुमान है कि समूचे वर्ष के दौरान सोने की मांग 650 से 750 टन के बीच रहेगी। उन्होंने कहा, ‘‘ हमें अब भी इस वर्ष मांग 650 से 750 टन के दायरे में रहने की उम्मीद है।

हालांकि, मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों, ब्याज दरों और मुद्रास्फीति को देखते हुए हमारा मानना है कि मांग इस दायरे के मध्य के आसपास रहेगी। यदि सोने की कीमतों में और गिरावट आती है तथा सीमा शुल्क कम किया जाता है, तो मांग इस दायरे के ऊपरी स्तर तक पहुंच सकती है।’’ समीक्षाधीन तिमाही में भारत में आभूषणों की कुल मांग 15 प्रतिशत घटकर 75.1 टन रह गई जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह 88.8 टन थी। जैन ने कहा, ‘‘ मौसमी सुस्ती, प्रधानमंत्री की सोने की खरीद कम करने की अपील और सीमा शुल्क में वृद्धि सहित अन्य कारणों का मांग पर असर पड़ा।’’ प्रधानमंत्री मोदी ने इस वर्ष मई में लोगों से अस्थिर कच्चे तेल की कीमतों के कारण बढ़ती आयात लागत के बीच विदेशी मुद्रा बचाने के लिए गैर-जरूरी सोना खरीद कम करने और बचत के अन्य विकल्प अपनाने का आग्रह किया था।

जैन ने सीमा शुल्क बढ़ने के बाद ‘ग्रे मार्केट’ में बढ़ोतरी पर चिंता जताते हुए कहा कि अवैध रूप से आयात किया गया सोना इन बाजारों में पहुंचने की खबरें मिल रही हैं। उन्होंने कहा, ‘‘ हमारा मानना है कि तस्करी और अवैध सोने का बाजार में पहुंचना इस उद्योग के लिए सबसे बड़ा जोखिम है और हमें इसके संकेत मिलने लगे हैं। आने वाली तिमाहियों में हम इस पर नजर रखेंगे।’’ इस बीच, निवेश मांग उत्साहजनक रही।

सोने के बिस्कुट और सिक्कों की मांग सालाना आधार पर नौ प्रतिशत बढ़कर 50.3 टन हो गई जबकि वैश्विक स्तर पर निकासी के बावजूद भारत के गोल्ड ईटीएफ में 4.2 टन का शुद्ध निवेश आया। इस बीच, डब्ल्यूजीसी के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल-जून तिमाही में भारत में पुराना सोना देकर सोने का नया सामान लेने की मात्रा 17 प्रतिशत घटकर 19.2 टन रह गई, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह 23.1 टन थी। वर्ष 2026 की दूसरी (अप्रैल-जून) तिमाही में भारत का कुल सोना आयात 98.1 टन रहा जो 2025 की समान अवधि के 127.4 टन की तुलना में 23 प्रतिशत कम है।

दूसरी तिमाही में सोने की औसत कीमत 4,506.3 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस रही जबकि 2025 की समान अवधि में यह 3,280.4 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस थी। भारत में अप्रैल-जून तिमाही के दौरान सोने की औसत कीमत (आयात शुल्क तथा माल एवं सेवा कर को छोड़कर) 1,50,744.8 रुपये रही, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह 94,875.9 रुपये थी।

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