Economic Situation of Jammu and Kashmir | GSDP वृद्धि दर में गिरावट, बढ़ता कर्ज और विकास की चुनौतियां

जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था को लेकर भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक (CAG) की नवीनतम रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण खुलासे हुए हैं।
जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था को लेकर भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक (CAG) की नवीनतम रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण खुलासे हुए हैं। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा विधानसभा में पेश की गई इस रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रशासित प्रदेश की आर्थिक विकास दर में पिछले वर्ष की तुलना में गिरावट दर्ज की गई है।
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भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बृहस्पतिवार को विधानसभा में कैग की यह रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट के अनुसार, देश के कुल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में जम्मू-कश्मीर की हिस्सेदारी मामूली रूप से बढ़कर 0.79 प्रतिशत हो गई है।
रिपोर्ट कहती है कि वित्त वर्ष 2020-21 से लेकर 2024-25 के दौरान जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था का आकार 1.67 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2.62 लाख करोड़ रुपये हो गया। केंद्रशासित प्रदेश में प्रति व्यक्ति सालाना आय वर्ष 2020-21 के 1,01,645 रुपये से बढ़कर 2024-25 में 1,54,826 रुपये हो गई है। हालांकि यह अब भी राष्ट्रीय औसत से कम है।
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कैग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जम्मू-कश्मीर में कुल खर्च का एक बड़ा हिस्सा पहले से तय आर्थिक देनदारियों और सब्सिडी को चुकाने में चला जाता है। इसके कारण बुनियादी ढांचे और विकास कार्यों पर निवेश के लिए बहुत कम पैसा बचता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, बढ़ता हुआ कर्ज का बोझ और कम पूंजीगत निवेश जम्मू-कश्मीर की वित्तीय स्थिति के लिए चिंता का विषय है। कैग ने जम्मू कश्मीर की सरकार को अपनी कमाई बढ़ाने और खर्चों पर बेहतर नियंत्रण रखने का सुझाव दिया है।
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