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जेवर हवाईअड्डा: कुछ किसान क्यों भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रहें

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Publish Date: Aug 27 2018 12:11PM

जेवर हवाईअड्डा: कुछ किसान क्यों भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रहें
Image Source: Google

नोएडा। उत्तर प्रदेश में गौतम बुद्ध नगर जिला के जेवर में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा के लिए राज्य सरकार की भूमि अधिग्रहण की कोशिश का कुछ किसान विरोध कर रहे हैं। दरअसल, इसकी मुख्य वजह किसानों से किया गया वादा पूरा नहीं किया जाना, अपर्याप्त मुआवजा और अपनी पहचान खोने का डर है।

किसान अपने क्षेत्र को शहरी क्षेत्र की श्रेणी में डाले जाने से भी नाराज हैं। यह वर्गीकरण उन्हें ‘‘सर्किल रेट’’ का दोगुना मुआवजा पाने के योग्य बनाता है, जबकि भूमि अधिग्रहण पुनर्वास एवं पुनर्स्थपान अधिनियम, 2013 के तहत कृषि भूमि के लिए चार गुना मुआवजे का प्रावधान है।

रोही, परोही, दयानाथपुर, किशोरपुर और रणहेरा -- इन पांच गांवों के कई किसान प्रशासन द्वारा की गई 2,300 रूपया से 2,500 रूपया प्रति वर्ग मीटर की पेशकश के लिए तैयार हैं, जबकि कुछ अन्य सर्किल रेट का चार गुना (3,600 रूपया प्रति वर्ग मीटर) मांग रहे हैं। 

 गौरतलब है कि जेवर में एक अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा प्रस्तावित है, जिसके लिए करीब 5,000 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की गई है। हवाईअड्डा पर 15,000 रूपये से 20,000 करोड़ रूपय की लागत आने की उम्मीद है। वहां 2022 - 23 से उड़ानों का परिचालन शुरू होने का कार्यक्रम है। सरकार अपने प्रथम चरण में पांच गांवों से 1,300 हेक्टेयर से अधिक भूमि अधिग्रहित करना चाहती है, जिससे 2,250 परिवार प्रभावित होंगे। रणहेरा गांव के 69 वर्षीय मुरलीधर शर्मा ने दावा किया कि उन्हें अब तक भूखंड नहीं मिला है जिसका प्रशासन ने वादा किया था।
 
यमुना एक्सप्रेसवे के लिए अधिग्रहित की गई उनकी भूमि के एवज में मौद्रिक मुआवजा के साथ भूखंड देने का भरोसा दिलाया गया था। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने सभी सरकारें देख ली। अब मैं क्या कहूं... अब यमुना एक्प्रेसवे कहे जाने वाले स्थान पर कभी मेरी जमीन हुआ करती थी। मुझे मेरी अधिग्रहित भूमि का सात फीसदी आकार का भूखंड देने का वादा किया गया था---जो मुझे अब तक नहीं मिला।’’
 
उन्होंने दावा किया कि उनके जैसे ऐसे कई लोग हैं जो मुआवजे के रूप में भूखंड का इंतजार कर रहे हैं। रवि शर्मा (61) ने दावा किया कि सरकार ने एक्सप्रेसवे के दोनों ओर सर्विस लेन बनाने का वादा किया था लेकिन ऐसा नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि कोई किसान विकास या हवाईअड्डा का विरोधी नहीं है लेकिन वे भूमि के लिए मुआवजे की दर में विसंगति को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि तीन साल पहले पेरीफेरल हाईवे के निर्माण के लिए सरकार ने 3600 रूपया प्रति वर्ग मीटर का मुआवजा दिया था।
 
इसलिए, जिले में मुआवजे की दर एक समान होनी चाहिए। हवाईअड्डा परियोजना के प्रथम चरण के मुताबिक सभी पांच जिलों से कृषि भूमि अधिग्रहित की जाएगी, लेकिन समूचे रोही गांव के लोग और आंशिक रूप से दयानाथपुर के बाशिंदों को दूसरी जगह बसाया जाना है। रोही गांव के बाशिंदों ने कहा कि भूमि अधिग्रहण के बाद जो गांव यहां बचे रहेंगे, उन्हीं के लिए यह विकास होगा। 
 
पूरन प्रसाद शर्मा (48) ने कहा कि कुछ गांव विस्थापित हो जाएंगे, उन्हें इससे क्या फायदा मिलेगा। सिर्फ बेहतर मुआवाज ही उनके लिए सर्वश्रेष्ठ चीज हो सकती है। उन्होंने कहा, ‘‘हम किसी चीज की भीख नहीं मांग रहे हैं, हम तो बस अपना अधिकार मांग रहे हैं...। ’’ एक एकड़ भूमि के मालिक शर्मा ने कहा कि इस बारे में कोई सूचना नहीं है कि हमें कहां बसाया जाएगा।
 
भूमि अधिग्रहण से पहले सरकार को यह बताना चाहिए कि वह इस गांव को और यहां के लोगों को कहां बसाएगी। महेंद्र सिंह (69) ने कहा, ‘‘जब हम अपनी जमीन से विस्थापित हो जाएंगे, तब हम अपनी पहचान, अपनी संस्कृति और अपनी परंपरा खो देंगे। हमारी धार्मिक मान्यताएं भी प्रभावित होंगी।’
 
सिंह ने कहा, ‘‘एक स्थानीय मंदिर है। गांव में आने वाली किसी नव विवाहिता दुल्हन को घर में प्रवेश करने से पहले उस मंदिर में कुल देवता की पूजा करने के लिए जाना होता है। यह सब खत्म हो जाएगा।’’ स्थानीय लोगों ने कहा कि उनके इलाके को को ग्रामीण क्षेत्र से हटा कर शहरी क्षेत्र की श्रेणी में बिना उनकी जानकारी के डाल दिया गया।
 
एक सरकारी स्कूल में शिक्षक नरेश कौशिक (42) ने कहा कि इस इलाके को रातों रात ग्रामीण से शहरी क्षेत्र की श्रेणी में डाल दिया गया, जबकि यहां माचिस की एक तीली तक नहीं बनती है। जिलाधीश ब्रजेश नारायण सिंह ने कहा कि वह एक सकारात्मक नतीजे की उम्मीद कर रहे हैं। ‘‘हम अपनी ओर से सर्वश्रेष्ठ कोशिश कर रहे हैं...।’’
 

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