पेट्रोल पंप नीति: कंपनियों को लगाने होंगे कम से कम 100 पेट्रोल पंप

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  नवंबर 26, 2019   17:13
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पेट्रोल पंप नीति: कंपनियों को लगाने होंगे कम से कम 100 पेट्रोल पंप

एक राजपत्र अधिसूचना में पेट्रोल पंप लगाने के संशोधित प्रावधानों की जानकारी दी गयी है। इसके तहत लाइसेंस पाने वाली कंपनी को पेट्रोल पंप का परिचालन शुरू होने के तीन साल के भीतर सीएनजी, बायो ईंधन, एलएनजी, इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन आदि जैसे वैकल्पिक माध्यमों में से किसी एक के विपणन की सुविधा भी लगानी होगी।

नयी दिल्ली। सरकार ने ईंधन क्षेत्र में नई उदारीकृत खुदरा नीति जारी की है।इसके तहत ईंधन की खुदरा बिक्री के क्षेत्र में उतरने वाली कंपनियों को देशभर में कम से कम 100 पेट्रोल पंप लगाने होंगे और उनमें से पांच प्रतिशत पेट्रोल पंप दूरदराज इलाकों में होने चाहिये। सरकार ने पिछले महीने ही कंपनियों के लिये पेट्रोल पंप खोलने के नियमों में ढील दी थी।सरकार ने गैर- पेट्रोलियम कंपनियों को इस क्षेत्र में उतरने की अनुमति दी है। नई नीति के मुताबिक देश में पेट्रोल पंप का लाइसेंस पाने के संशोधित प्रावधानों के तहत संबंधित कंपनी को न्यूनतम 100 पेट्रोल पंप लगाने होंगे, जिनमें कम से कम पांच प्रतिशत दूरस्थ इलाके में होने चाहिये।

एक राजपत्र अधिसूचना में पेट्रोल पंप लगाने के संशोधित प्रावधानों की जानकारी दी गयी है। इसके तहत लाइसेंस पाने वाली कंपनी को पेट्रोल पंप का परिचालन शुरू होने के तीन साल के भीतर सीएनजी, बायो ईंधन, एलएनजी, इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन आदि जैसे वैकल्पिक माध्यमों में से किसी एक के विपणन की सुविधा भी लगानी होगी।

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इससे पहले पेट्रोल पंप के लिये लाइसेंस पाने के लिये एक कंपनी को पेट्रोलियम क्षेत्र में दो हजार करोड़ रुपये निवेश करने की जरूरत होती थी। अधिसूचना के अनुसार, ‘‘पेट्रोलियम उत्पादों के खुदरा विपणन का लाइसेंस पाने के लिये आवेदन करते समय कंपनी का न्यूनतम नेट वर्थ 250 करोड़ रुपये होना चाहिये।’’

सरकार ने पेट्रोल पंप पाने का आवेदन शुल्क 25 लाख रुपये तय किया है। अधिसूचना के अनुसार, लाइसेंस मिलने के पांच साल के भीतर कंपनी को देश भर में कम से कम 100 पेट्रोल पंप खोलने होंगे जिनमें कम से कम पांच प्रतिशत पेट्रोल पंप दूरस्थ इलाकों में अवस्थित होने चाहिये। सरकार ने इससे पहले 2002 मे पेट्रोल पंप लाइसेंस आवंटन के प्रावधानों को संशोधित किया था।इस नीति की समीक्षा उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति की सिफारिश के बाद की गई है। 

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सरकार के पेट्रोलियम विपणन क्षेत्र में गैर- पेट्रोलियम कंपनियों को प्रवेश देने की नीति से वैश्विक स्तर की कंपनियों जैसे की फ्रांस की टोटल एसए, सउदी अरब की आरामको, ब्रिटेन की बीपी पीएलसी और ट्राफिगुरा कीविपणन कंपनी पमा एनर्जी को भारतीय बाजार में आने का रास्ता मिलेगा। 

इससे पहले फ्रांस की टोटल कंपनी अदाणी समूह के साथ मिलकर नवंबर 2018 में देश में 1,500 खुदरा पेट्रोल और डीजल पंप के लिये लाइसेंस का आवेदन कर चुकी है। बीपी ने भी रिलायंस इंडस्ट्रीज के साथ मिलकर पेट्रोल पंप खोलने के वास्ते भागीदारी की है। हालांकि कंपनी ने अभी तक औपचारिक तौर पर आवेदन नहीं किया है। पुमा एनर्जी ने खुदरा लाइसेंस के लिये आवेदन किया है जबकि अरामको क्षेत्र में उतरने के लिये बातचीत कर रही है। 

फिलहाल देश में वर्तमान में चल रहे 66,408 पेट्रोल पंपों में से ज्यादातर पंप सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों इंडियन आयल कारपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल), भारत पेट्रोलियम कारपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल), हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कारपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) के ही हैं।इनके अलावा रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड, न्यारा एनर्जी (पूर्व में एस्सार आयल) और रायल डच शेल निजी क्षेत्र की कुछ कंपनियां भी पेट्रोल पंप चला रही हैं लेकिन उनकी मौजूदगी बहुत कम हे।रिलायंस के 1,400 पेट्रोल पंप हैं जबकि उसकी सहयोगी बीपी ने भी 3,500 पेट्रोल पंप के लिये आवेदन किया है लेकिन अभी शुरू नहीं किये हैं।शेल के 167 पेट्रोल पंप ही हैं। 





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मुथूट फाइनेंस के चेयरमैन एमजी जॉर्ज का 71 वर्ष की उम्र में निधन

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  मार्च 7, 2021   11:32
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मुथूट फाइनेंस के चेयरमैन एमजी जॉर्ज का 71 वर्ष की उम्र में निधन

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि शुक्रवार को 9.21 बजे पुलिस को घर की चौथी मंजिल से गिरने के बाद एक अस्पताल में एम जी जॉर्ज मुथूट को भर्ती कराये जाने के बारे में सूचना मिली, जहां बाद में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। पुलिस उपायुक्त (दक्षिण पूर्वी दिल्ली) आरपी मीणा ने कहा, ‘‘मामले की जांच की गयी और बयान दर्ज किये गये।

नयी दिल्ली। मुथूट फाइनेंस का कारोबार देश भर में फैलाने तथा सबसे बड़ी स्वर्ण ऋण प्रदाता गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) बनाने का श्रेय रखने वाले एमजी जॉर्ज मुथूट की शुक्रवार की शाम घर की चौथी मंजिल से गिरकर मौत हो गयी। उन्होंने कंपनी के चेयरमैन के रूप में मुथूट फाइनेंस को नयी ऊंचाइयों पर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। उन्होंने कंपनी के कारोबार का देश भर में और यहां तक ​​कि विशेष रूप से मध्य पूर्व तक विस्तार किया। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि शुक्रवार को 9.21 बजे पुलिस को घर की चौथी मंजिल से गिरने के बाद एक अस्पताल में एम जी जॉर्ज मुथूट को भर्ती कराये जाने के बारे में सूचना मिली, जहां बाद में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। पुलिस उपायुक्त (दक्षिण पूर्वी दिल्ली) आरपी मीणा ने कहा, ‘‘मामले की जांच की गयी और बयान दर्ज किये गये। सीसीटीवी कैमरे भी चेक किये गये। उन्हें फोर्टिस एस्कॉर्ट अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गयी।

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शनिवार को एम्स में उनका पोस्टमार्टम किया गया। किसी भी तरह की साजिश का संदेह नहीं है। पूछताछ की जा रही है।’’ मुथूट (71) की कंपनी का मुख्यालय भले ही कोच्चि में है, लेकिन वह लंबे समय से राष्ट्रीय राजधानी में ही रह रहे थे। कंपनी ने मौत के कारण का जिक्र किये बिना शनिवार को शेयर बाजारों को बताया, ‘‘एम जी जॉर्ज मुथूट का अचानक व अप्रत्याशित निधन कंपनी, कर्मचारियों, सभी हितधारकों, परिवार और दोस्तों के लिए एक अपूरणीय क्षति है। कंपनी के सभी निदेशकों और कर्मचारियों ने उनके परिवार के प्रति गहरी सहानुभूति, दुःख और संवेदना व्यक्त की है।





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PM मोदी ने 7,500 जन औषधि केंद्र राष्ट्र को समर्पित किए

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  मार्च 7, 2021   11:24
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PM मोदी ने 7,500 जन औषधि केंद्र राष्ट्र को समर्पित किए

पीएम मोदी ने ,500 जन औषधि केंद्र राष्ट्र को समर्पित किए। इस केंद्र पर गुणवत्ता वाली दवाइयां उचित मूल्य पर उपलब्ध होती हैं। इसके अलावा प्रधानमंत्री ने इस दौरान देश के विभिन्न हिस्सों के लोगों के साथ बातचीत भी की।

नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को शिलॉन्ग के पूर्वोत्तर इंदिरा गांधी क्षेत्रीय स्वास्थ्य एवं चिकित्सा संस्थान (एनईआईजीआरआईएचएमएस) में 7,500 जन औषधि केंद्र राष्ट्र को समर्पित किए। मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये यह नया केंद्र राष्ट्र को समर्पित किया। इस केंद्र पर गुणवत्ता वाली दवाइयां उचित मूल्य पर उपलब्ध होती हैं। इसके अलावा प्रधानमंत्री ने इस दौरान देश के विभिन्न हिस्सों के लोगों के साथ बातचीत भी की। प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना का उद्देश्य सस्ते दाम पर अच्छी दवाइयां उपलब्ध कराना है। वर्ष 2014 में इन केंद्रों की संख्या 86 थी। इस योजना के तहत आज इन स्टोर की संख्या 7,500 पर पहुंच गई है।

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देश के सभी जिलों में इस तरह के स्टोर हैं। वित्त वर्ष 2020-21 में चार मार्च तक इन केंद्रों द्वारा दवाओं की बिक्री से नागरिकों को करीब 3,600 करोड़ रुपये की बचत हुई है। इन केंद्रों पर दवाएं बाजार मूल्य से 50 से 90 प्रतिशत सस्ती मिलती हैं। ‘जन औषधि’ के बारे में जागरूकता के प्रसार के लिए एक से सात मार्च तक देशभर में ‘जन औषधि’ सप्ताह मनाया जा रहा है। इसका विषय ‘जन औषधि-सेवाभी, रोजगार भी’ रखा गया है।





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women's day special: घर में बिस्किट बनाने से लेकर IPO तक का रजनी बेक्टर्स का सफर!

  •  निधि अविनाश
  •  मार्च 6, 2021   17:52
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women's day special: घर में बिस्किट बनाने से लेकर IPO तक का रजनी बेक्टर्स का सफर!

कराची में पैदा हुईं रजनी बेक्टर बटवारे के बाद जब भारत लौटीं तब उन्हें शायद ही पता होगा कि उनकी जिंदगी कितनी बदलने वाली है। बता दें कि अपनी कड़ी मेहनत के बदौलत रजनी बेक्टर इस दौरान बेक्टर्स फूड स्पेशियलिटीज की मालिक हैं।रजनी बेक्टर की कंपनी क्रीमिका ब्रांड से बिस्किट,ब्रेड और आइसक्रीम दुनिया के 60 देशों में निर्यात होती है।

साल 1970 के दशक में अपने घर से बिस्कुट पकाने से लेकर आइसक्रीम बेचने तक का सफर रजनी बेक्टर्स के लिए आसान नहीं था लेकिन आज वह बेक्टर्स फूड स्पेशियलिटीज की मालिक हैं। रजनी की कहानी वास्तव में एक प्रेरणादायक है। महिला दिवस के विशेष अवसर पर आज हम आपको बताएंगे एक ऐसी शख्स की जिसने अपनी मेहनत की बदौलत से भारत में बड़ा नाम कमाया है। 

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सफर था कठिन, लेकिन मंजिल मिली जरूर

कराची में पैदा हुईं रजनी बेक्टर बटवारे के बाद जब भारत लौटीं तब उन्हें शायद ही पता होगा कि उनकी जिंदगी कितनी बदलने वाली है। बता दें कि अपनी कड़ी मेहनत के बदौलत रजनी बेक्टर इस दौरान बेक्टर्स फूड स्पेशियलिटीज की मालिक हैं। रजनी बेक्टर की कंपनी क्रीमिका ब्रांड से बिस्किट, ब्रेड और आइसक्रीम दुनिया के 60 देशों में निर्यात होती है। आपको जानकार हैरानी होगी कि रजनी की कंपनी का सलाना टर्नओवर 1000 करोड़ रुपये है। बेक्टर की कंपनी न केवल बिस्किट और आइसक्रीम अलग-अलग देशों में निर्यात करती है बल्कि फास्ट फूड चेन मेक्डोनाल्ड्स और बर्गर किंग को भी अपनी ब्रेड सप्लाई करती है। 

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कौन है रजनी बेक्टर?

रजनी बेक्टर पाकिस्तान के कराची शहर में पैदा हुई। भारत-पाकिस्तान के बटवारे बाद रजनी भारत लौटीं और अपनी परिवार के साथ दिल्ली में ही बस गई। दिल्ली से रजनी ने अपनी ग्रेजुएशन पूरी की। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद उनकी शादी पंजाब के शहर लुधियाना में हो गई। शादी के बाद रजनी ने बिस्किट बनाने के शौक को पेशे में बदला और साल 1978 में घर से ही बिस्किट बनाने शुरू कर दिए। एक छोटे से घर से अपने बिस्किट बनाने के शौक को उन्होंने आज बहुत बड़े बिजनेस में तब्दील कर दिया है। आद रजनी बेक्टर की कंपनी मिसेज बेक्टर्स फूड स्पेशियलिटीज की न सिर्फ पंजाब में बल्कि हिमाचल, यूपी, महाराष्ट्र और कर्नाटक के बेंगलुरु में भी ब्रांच है।  

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 IPO में रजनी बेक्टर की कंपनी!

अपनी काबिलियत से  यहां तक पहुंचने वाली रजनी की कंपनी ने अपनी लगन और मेहनत के दम पर 300 रुपए लगाकर अपनी एक कंपनी खड़ी की, जिसका सलाना टर्नओवर 1000 करोड़ रुपए हो गया है। रजनी की कंपनी IPO में भी शामिल हो गई है। बता दें कि मिसेज बेक्टर्स फूड स्पेशिएल्टीज मिसेज बेक्टर का आईपीओ साल 2020 का 15वां आईपीओ रहा। मिसेज बेक्टर्स को 198 गुणा सब्सक्राइब किया गया।मिसेज बेक्टर्स फूड स्पेशलिटीज ने आईपीओ के जरिए अपने कारोबार को बढ़ाने का फैसला किया है और इसके लिए कंपनी आईपीओ लेकर आई है। कंपनी का ब्रांड क्रेमिका प्रीमियम बिस्कुट की केटेगरी में उत्तर भारत के राज्यों में लोकप्रिय है। इसके अलावा कंपनी का दूसरा ब्रांड इंग्लिश ओवन मेट्रो सिटीज में दिखाई देता है। बता दें कि कंपनी बर्गर किंग, मैकडॉनल्ड्स, केएफसी और पिज्जा हट जैसी बड़ी फूड कंपनियों को बन सप्लाई करती हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 4 दशक की मेहनत के बाद उनका नाम काफी लोकप्रिय हो गया और वह ब्रेड और बिस्कुट के लिए जाना जाने लगा। जिसकी बदौलत घरेलू बाजार में रजनी बेक्टर के शेयर 4.5 फीसदी और निर्यात के लिए 12 फीसदी हो गए। इसके अतिरिक्त वर्तमान में कंपनी के पास 6 मैन्युफ्रैक्चरिंग यूनिट हैं जो मांग की पूर्ति करने में जुटी रहती हैं।







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