भारत में बड़े विकास के लिए एमएसएमई को डिजिटल कर्ज देने की तैयारी

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Publish Date: Nov 21 2018 3:28PM
भारत में बड़े विकास के लिए एमएसएमई को डिजिटल कर्ज देने की तैयारी
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ओमिड्यार नेटवर्क और बीसीजी की रिपोर्ट बताती है कि बाजार ‘‘वाटरशेड मोमेंट’’ में है। ईबे के संस्थापक पियरे ओमिड्यार द्वारा स्थापित इम्पैक्ट निवेश कंपनी ओमिड्यार नेटवर्क

ओमिड्यार नेटवर्क और बीसीजी की रिपोर्ट बताती है कि बाजार ‘‘वाटरशेड मोमेंट’’ में है। ईबे के संस्थापक पियरे ओमिड्यार द्वारा स्थापित इम्पैक्ट निवेश कंपनी ओमिड्यार नेटवर्क ( http://www.omidyar.com/ ) और बीसीजी (https://www.bcg.com/) ने आज एक शोध जारी किया जिसमें बताया गया कि भारत में सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्योगों (एमएसएमई) को डिजिटल कर्ज वित्तीय सेवाओं में यथास्थिति को बदलने की क्षमता रखता है, यह नवोन्मेषक स्टार्टअप तथा परंपरागत कर्जदाताओं दोनों के लिए एक सार्थक बाजार अवसर की पेशकश करता है। 
 
‘‘क्रेडिट डिस्रप्टेडः डिजिटल एमएसएमई लेंडिंग इन इंडिया’’ ( https://www.omidyar.com/insights/credit-disrupted ) बताता है कि एमएसएमई को डिजिटल कर्ज 2023 तक 10 से 15 गुना बढ़ने का अनुमान लगाया गया है, जो सालाना वितरण के तौर पर 6 से 7 लाख करोड़ (80-100 अरब डॉलर) के बीच हो सकता है। भारत में प्रभावशाली पदाधिकारियों के बगैर बड़े स्तर पर इस क्षेत्रा को मिलाते हुए प्रविष्टियों और बिजनेस मॉडल की एक बड़ी रेंज इस बाजार में सफलतापूवर्क हासिल की जा सकती है। 
 
ओमिड्यार नेटवर्क में भारत की पार्टनर और प्रबंध निदेशक रूपा कुदवा ने कहा, “डिजिटल लेंडिंग में भारत के एमएसएमई की उत्पादकता को वैश्विक नेतृत्व तक पहुंचाने की क्षमता है। वर्ष 2018 तक 600 अरब में से ज्यादातर कर्ज की मांग अनौपचारिक स्रोतों से पूरी की गई है। और इस प्रकार यह रिपोर्ट दर्शाती है कि भारत इस महत्वपूर्ण घड़ी के शीर्ष पर है और अर्थव्यवस्था में एमएसएमई की भूमिका को आगे बढ़ाने के मामले में दूसरे देशों के लिए मिसाल बन सकता है।” 


 
भारत के 60 मिलियन एमएसएमई-बड़े पैमाने पर 250 करोड़ रुपये के सालाना राजस्व के साथ कारोबार के तौर पर परिभाषित- भारत में रोजगार तथा इसके सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) दोनों में व्यापक योगदान करते हैं। अभी तक ये अन्य बड़े देशों के मुकाबले बहुत कम स्तर का प्रदर्शन करते रहे हैं, जिनमें यह जीडीपी योगदान में अमेरिका से 10 फीसदी अंक और चीन से 23 अंक पीछे है। इस अंतर की मुख्य वजह यह है कि ये कारोबारी औपचारिक कर्ज स्रोतों तक अक्सर पहुंच नहीं बना पाते हैं, तकरीबन 40 फीसदी भारतीय एमएसएमई अनौपचारिक स्रोतों से ही कर्ज लेते हैं और औपचारिक सेक्टर के ब्याज की तुलना में औसतन 2.5 गुना ज्यादा ब्याज चुकाते हैं। ।
 
 
‘‘क्रेडिट डिस्रप्टेड’’ (https://www.omidyar.com/insights/credit-disrupted) का आकलन है कि यह परिदृश्य जल्द ही बदलने वाला है। सभी प्रकार के एमएसएमई में जहां डिजिटल कर्जदाता ग्राहकों की क्षमता नहीं है, वहीं उनमें से 40 फीसदी एमएसएमई डिजिटल कर्ज लेने में तत्पर रहे हैं, इसका श्रेय देश में तीन बड़े बदलावों को जाता है। 


 
पहला, वर्ष 2016 से एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) लांच और 2017 में लागू वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) समेत सरकारी नीतियों ने बड़ी संख्या में एमएसएमई को औपचारिक बनाने और उनके कारोबार को डिजिटाइज करने में मदद की है। दूसरा, वर्ष 2015 से बाजार की बढ़ती स्पर्धा ने मोबाइल डाटा खर्च में आश्चर्यजनक कमी की है, जिससे एमएसएमई कनेक्टिविटी तेजी से बढ़ाने में मदद मिली है। अंत में, एपीआई आधारित डाटा उपलब्धता के अलावा भारत का मुद्रा भंडार परिपक्व होने से अब महज एक दिन में ही डिजिटल एमएसएमई कर्ज के लिए अंतिम मंजूरी मिल जाती है।
 
बीसीजी में फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस प्रैक्टिस के सीनियर पार्टनर और निदेशक और एशिया-पैसिफिक प्रमुख सौरभ त्रिपाठी ने कहा, “आज लगभग 60 फीसदी एमएसएमई अनौपचारिक कर्ज लेते हैं, इसे देखते हुए एमएसएमई कर्ज औपचारिकरण और डिजिटाइजेशन में व्यापक वृद्धि के साथ आगे बढ़ने की तैयारी में है। डिजिटल लेंडिंग के जरिये अपेक्षाकृत आसान और सस्ता कर्ज में औपचारिकरा के लिए नेक चक्र की क्षमता हैः वर्ष 2023 तक 85 फीसदी तक एमएसएमई औपचारिक किए जा सकते हैं।” 
 


एमएसएमई जैसे-जैसे डिजिटल डाटा से जुड़ते हैं और इन्हें जनरेट करते हैं, एक बड़ी संख्या संकेत देती है कि वे डिजिटल तरीके से डाटा साझा करने में सहज हैंः 60 फीसदी से अधिक अगले तीन वर्षों में अहम डिजिटल भुगतान प्रक्रिया से जुड़ने की उम्मीद रखते हैं। डिजिटल डाटा प्रक्रिया कर्जदाताओं को महत्वपूर्ण जानकारी देती है जिससे वे उपयुक्त अंडरराइटिंग फैसले लेने में इसका इस्तेमाल कर सकें। ओमिड्यार नेटवर्क में निवेश निदेशक अनुराधा रामचंद्रन ने कहा, “यह रिपोर्ट दर्शाती है कि लाखों भारतीय एमएसएमई के पसंदीदा वित्तीय साधन के तौर पर डिजिटल लेंडिंग को अनुकूल बनाने वाले कई कारक हैं। बाजार की जरूरतें पूरी करने के लिए उचित बिजनेस मॉडल तलाशने के लिए यह सभी कर्जदाता के लिए होंगे, चाहे वे फिनटेक उद्यमी हों या स्थापित कंपनी।”
 
इस रिपोर्ट में ऐसे ही कई बिजनेस मॉडलों की पहचान की गई है। डिजिटल कर्जदाताओं और ई-कॉमर्स उद्योगों, ऑनलाइन समूहोंऔर भुगतान प्रदाताओं जैसे प्लेटफॉर्म आधारित कारोबारियों के बीच प्लेटफॉर्म भागीदारी डिजिटल कर्जदाताओं को इस प्लेटफॉर्म पर एमएसएमई लेनदेन का कारोबार करने में मदद कर सकती है और साथ ही उसी समय पुनर्भुगतान की सुविधा देते हुए बेहतर अंडरराइटिंग दे सकती है। 
 
दूसरा विकल्प डिजिटल कर्जदाताओं और ऑटो पार्ट्स विनिर्माताओं जैसे सप्लाई चेन समूहों के बीच सप्लाई-चेन भागीदारी है, जो ग्राहकों के अधिग्रहण में भी मदद कर सकती है, अंडरराइटिंग के लिए नकद प्रवाह डाटा प्रदान कर सकती है और कर्ज के पुनर्भुगतान की सुविधा दे सकती है। ग्राहकों से जुड़ने के लिए कर्जदाता की डिजिटल संपदाओं का इस्तेमाल करते हुए डायरेक्ट डिजिटल मॉडल तीसरा विकल्प है जो अंडरराइटिंग के लिए ग्राहकों के डाटा तक पहुंच के लिए भारत की सहमति आधारित सार्वजनिक डिजिटल अधोसंरचना का लाभ उठाता है। 
 
एमएसएमई की जरूरतों को पूरा करने के लिए कर्जदाताओं के कार्यों के अलावा सरकार एक निर्बाध कर डाटा-सहमति प्रक्रिया की ओर बढ़ते हुए इस हस्तांतरण को सहयोग जारी रख सकती है, आनुषांगिक रिकार्ड तक ऑनलाइन पहुंच की सुविधा देती है और सरकारी कर्ज वित्तपोषण कार्यक्रमों को पुनर्जीवित करती है। अधिक जानकारी इस रिपोर्ट में यहां प्राप्त की जा सकती है।
 
http://www.omidyar.com/insights/credit-disrupted. ओमिड्यार नेटवर्क के बारे में 
 
ओमिड्यार नेटवर्क एक परोपकारी निवेश कंपनी है जो आर्थिक और सामाजिक बदलाव को गति देने के लिए उच्च स्तरीय अभिनव संस्थाओं में निवेश और सहयोग करती है। ईबे के संस्थापक पियरे ओमिड्यार और उनकी पत्नी पैम द्वारा वर्ष 2004 में स्थापित इस संस्था ने डिजिटल आइडेंटिटी, हिशक्षा, उभरती टेक्नोलॉजी, वित्तीय समावेशन, शासन एवं नागरिक संलग्नता और संपदा अधिकार समेत कई तरह की मुहिमों में 1.3 अरब डॉलर से अधिक की लाभदायी कंपनियों और गैरलाभकारी संगठनों के लिए प्रतिबद्धता दिखाई है। अधिक जानकारी के लिए देखें http://www.omidyar.com और ट्विटर पर फॉलो करें @omidyarnetwork #PositiveReturns
 
बीसीजी के बारे में 
बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (बीसीजी) एक वैश्विक प्रबंधन कंसल्टिंग कंपनी और विश्व में व्यापारिक रणनीति पर सलाह देने वाली अग्रणी कंपनी है। हम संस्थाओं के उच्च मूल्य अवसरों की पहचान करने, उनकी सबसे अहम चुनौतियों से निपटने और उनके उद्योगों में बदलाव लाने के लिए निजी, सरकारी और गैर-लाभकारी सेक्टरों के ग्राहकों के साथ सभी क्षेत्रों में भागीदारी करते हैं। हमारी कस्टमाइज्ड पहल सभी स्तर के ग्राहक संगठन के साथ घनिष्ठ सहयोग बनाते हुए कंपनियों एवं बाजारों की गतिशीलता से जुड़ी गहरी जानकारी का साझा करती है। इससे सुनिश्चित होता है कि हमारे ग्राहकों ने स्थायी प्रतिस्पर्धी लाभ प्राप्त किया है और अंतिम परिणाम सुनिश्चित किया है। वर्ष 1963 में निजी कंपनी के तौर पर स्थापित बीसीजी के 50 देशों के 90 से अधिक शहरों में कई कार्यालय हैं। अधिक जानकारी के लिए कृपया देखें bcg.com
 
 
 

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