SBI चालू वित्त वर्ष में 12,000 नई भर्तियां करेगा, 250 शाखाएं भी खुलेंगी

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भारतीय स्टेट बैंक चालू वित्त वर्ष के दौरान लिपिक और अधिकारी स्तर पर करीब 11,000 से 12,000 कर्मचारियों की भर्ती करने जा रहा है। बैंक के चेयरमैन सी. एस. शेट्टी ने बताया कि नेटवर्क विस्तार के तहत देश भर में 200 से 250 नई शाखाएं भी खोली जाएंगी। इसके साथ ही एसबीआई और उसकी अनुषंगी कंपनी नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में अपनी करीब एक प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की योजना बना रही है।

(कुमार दीपांकर) नयी दिल्ली, छह सितंबर (भाषा)सार्वजनिक क्षेत्र का भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) चालू वित्त वर्ष में करीब 11,000 से 12,000 कर्मचारियों की भर्ती करने और अपने शाखा नेटवर्क के विस्तार की योजना बना रहा है। बैंक के चेयरमैन सी. एस. शेट्टी ने यह जानकारी दी। शेट्टी ने पीटीआई-के साथ बातचीत में कहा कि बैंक चालू वित्त वर्ष में लिपिक और अधिकारी स्तर पर करीब 11,000 से 12,000 नियुक्तियां करेगा।

इसके अलावा बैंक की 200 से 250 नई शाखाएं खोलने की भी योजना है। उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्तियों और उभरती जरूरतों के आधार पर यह संख्या कुछ कम या ज्यादा हो सकती है, लेकिन उम्मीद है कि वित्त वर्ष के अंत तक करीब 12,000 लोगों की भर्ती हो जाएगी। उन्होंने कहा कि पिछले साल बैंक ने बड़े पैमाने पर नियुक्तियां की थीं, जिसमें 1,500 विशेषज्ञ सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिकारी भी शामिल हैं।

इस साल आईटी क्षेत्र में इतनी बड़ी संख्या में भर्तियों की जरूरत नहीं है। मार्च, 2026 तक एसबीआई के कर्मचारियों की संख्या 2.45 लाख से अधिक थी। बैंक की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में एसबीआई ने कुल 25,633 कर्मचारियों की नियुक्ति की थी।

शेट्टी ने कहा कि बड़ा शाखा नेटवर्क होने के बावजूद देश के कई हिस्सों में अब भी बैंक के लिए विस्तार की गुंजाइश है। नई कॉलोनियों के विकसित होने के साथ-साथ व्यावसायिक रूप से सक्रिय जिलों में भी बैंक अपनी मौजूदगी बढ़ाना चाहता है। उन्होंने कहा कि बैंक कुछ शाखाओं का युक्तिकरण भी कर रहा है और इसके बावजूद शाखाओं की संख्या में हर साल करीब 200 से 250 की शुद्ध वृद्धि होने की उम्मीद है।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) में हिस्सेदारी के प्रस्तावित विनिवेश के बारे में शेट्टी ने कहा कि एसबीआई और उसकी अनुषंगी एसबीआई कैपिटल मार्केट्स मिलकर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में अपनी करीब एक प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की योजना बना रहे हैं। इसमें एसबीआई 0.65 प्रतिशत और एसबीआई कैपिटल मार्केट्स 0.35 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच सकती है। हालांकि, अन्य शेयरधारकों के भी हिस्सेदारी बेचने की स्थिति में एसबीआई समूह का विनिवेश एक प्रतिशत से कम रह सकता है।

वर्तमान में एसबीआई के पास एनएसई में 3.23 प्रतिशत और एसबीआई कैपिटल मार्केट्स के पास 4.33 प्रतिशत हिस्सेदारी है। एनएसई को पिछले सप्ताह 30,000 करोड़ रुपये के प्रस्तावित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के लिए नियामकीय मंजूरी मिल गई। यह आईपीओ देश का अबतक का सबसे बड़ा आईपीओ बन सकता है।

इससे पहले 2024 में हुंदै मोटर इंडिया का 27,858.75 करोड़ रुपये का आईपीओ सबसे बड़ा था। इसके अलावा भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) ने 2022 में 20,557.23 करोड़ रुपये, पेटीएम ने 2021 में 18,300 करोड़ रुपये, टाटा कैपिटल ने 2025 में 15,511.87 करोड़ रुपये और कोल इंडिया ने 2010 में 15,200 करोड़ रुपये का आईपीओ पेश किया था। शेट्टी ने स्पष्ट किया कि निकट भविष्य में बैंक की अन्य अनुषंगी कंपनियों में हिस्सेदारी के मौद्रीकरण की कोई योजना नहीं है।

इससे पहले जुलाई में एसबीआई और उसके विदेशी साझेदार अमुंडी ने एसबीआई म्यूचुअल फंड में करीब 10 प्रतिशत हिस्सेदारी का विनिवेश किया था। करीब 11,675 करोड़ रुपये के इस निर्गम को 41.66 गुना अभिदान मिला था। सूचीबद्ध होने के बाद एसबीआई म्यूचुअल फंड में एसबीआई की हिस्सेदारी 61.86 प्रतिशत से घटकर 55.56 प्रतिशत रह गई है।

वहीं अमुंडी की हिस्सेदारी 3.7 प्रतिशत घटकर 32.63 प्रतिशत पर आ गई है।

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