सेबी का Options Trading पर बड़ा दांव, Live Market में जुड़ेंगे नए Strike Price

Sebi
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Ankit Jaiswal । May 25 2026 10:44PM

सेबी ने विकल्प कारोबार में एक बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया है, जिसके तहत अब कारोबारी घंटों के दौरान ही नए स्ट्राइक प्राइस जोड़े जा सकेंगे। इस कदम का मुख्य उद्देश्य बाजार में तेज उतार-चढ़ाव के समय निवेशकों को बेहतर हेजिंग के अवसर प्रदान करना और कारोबार को सुचारु बनाए रखना है।

शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और बढ़ती भागीदारी के बीच अब सेबी ने डेरिवेटिव कारोबार को लेकर बड़ा प्रस्ताव रखा है। सेबी ने विकल्प कारोबार में स्ट्राइक प्राइस को लेकर एक नया और लचीला ढांचा लागू करने का सुझाव दिया है, जिससे तेज उतार-चढ़ाव वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों और कारोबारियों को राहत मिल सके।

मौजूद जानकारी के अनुसार सेबी ने सोमवार को जारी एक परामर्श पत्र में कहा कि एक्सचेंजों को कारोबार के दौरान ही नए स्ट्राइक प्राइस जोड़ने की अनुमति दी जानी चाहिए। इसका मकसद खासतौर पर तेजी से बढ़ रहे सूचकांक विकल्प कारोबार में हेजिंग को आसान बनाना और बाजार में रुकावट कम करना है।

बता दें कि स्ट्राइक प्राइस वह तय स्तर होता है जिस पर कोई कारोबारी विकल्प अनुबंध के तहत किसी शेयर या सूचकांक को खरीद या बेच सकता है। बाजार में सही और पर्याप्त स्ट्राइक प्राइस उपलब्ध होना विकल्प कारोबार के लिए बेहद जरूरी माना जाता है।

सेबी के प्रस्ताव के मुताबिक सभी एक्सचेंजों को विकल्प अनुबंधों के निर्माण और प्रबंधन के लिए स्पष्ट नियम बनाने होंगे। इसके तहत बाजार भाव के आसपास पर्याप्त इन-द-मनी और आउट-ऑफ-द-मनी स्ट्राइक प्राइस बनाए रखना जरूरी होगा। साथ ही रोजाना समीक्षा कर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि बाजार से बहुत दूर के और कम उपयोग वाले अनुबंधों को हटाया जा सके।

गौरतलब है कि कई बार बाजार में अचानक बड़ी तेजी या गिरावट आने पर उपलब्ध स्ट्राइक प्राइस कम पड़ जाते हैं। ऐसे में कारोबारियों को नई स्थिति के हिसाब से सौदे करने में दिक्कत होती है। सेबी का मानना है कि अगर कारोबारी घंटों के दौरान ही नए स्ट्राइक प्राइस जोड़े जाएं, तो बाजार में सुचारु कारोबार जारी रह सके।

सेबी ने यह भी साफ किया है कि इस व्यवस्था के लागू होने पर दलाल कंपनियों और निवेशकों को अपने सिस्टम में लाइव कारोबार के दौरान किसी तरह का बदलाव नहीं करना पड़ेगा। इससे कारोबार की निरंतरता बनी रहेगी और तकनीकी बाधाएं कम होंगी।

विशेषज्ञों के मुताबिक भारत में डेरिवेटिव कारोबार खासकर सूचकांक विकल्प खंड में पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में बाजार की जरूरतों के मुताबिक लचीले नियम लाना जरूरी हो गया था। माना जा रहा है कि इस कदम से छोटे और बड़े दोनों तरह के निवेशकों को बेहतर कारोबार का माहौल मिल सके है।

सेबी ने इस प्रस्ताव पर आम लोगों और बाजार से जुड़े पक्षों से सुझाव भी मांगे हैं। आने वाले समय में सुझावों की समीक्षा के बाद अंतिम नियम लागू किए जा सकते है।

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