Silver Price में भारी गिरावट से निवेशक बेचैन, MCX पर अब खरीदें, बेचें या करें इंतजार?

चांदी में हालिया गिरावट एक अल्पकालिक करेक्शन है, क्योंकि अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और तकनीकी बिकवाली ने कीमतों पर दबाव डाला है। हालांकि, औद्योगिक मांग मजबूत रहने से विशेषज्ञ चांदी के दीर्घकालिक रुझान को सकारात्मक मान रहे हैं और मौजूदा गिरावट को एक अवसर के रूप में देख रहे हैं।
हाल के दिनों में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद चांदी की कीमतों में तेज गिरावट ने निवेशकों और कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी का भाव 2.5 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर से नीचे फिसल गया, जिससे बाजार में यह सवाल उठने लगा है कि क्या गिरावट का सिलसिला अभी और जारी रह सकता है।
गौरतलब है कि इससे पहले एमसीएक्स सिल्वर फ्यूचर्स लगभग 4,20,000 रुपये प्रति किलोग्राम के शिखर तक पहुंच गए थे। इतनी तेज रैली के बाद अब कीमतें 2,30,000 से 2,70,000 रुपये के दायरे में कारोबार कर रही हैं, जो घरेलू और वैश्विक बाजारों में बढ़ी अस्थिरता को दर्शाता है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, इस गिरावट की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय संकेत रहे हैं। अमेरिका से उम्मीद से बेहतर आर्थिक आंकड़े आने के बाद ब्याज दरों में जल्द कटौती की उम्मीदें कमजोर पड़ी हैं। जब दरों में कटौती की संभावना घटती है तो डॉलर मजबूत होता है। मजबूत डॉलर के कारण चांदी जैसी कमोडिटी विदेशी खरीदारों के लिए महंगी हो जाती है, जिससे मांग पर दबाव पड़ता है।
इसके अलावा भारी मुनाफावसूली भी गिरावट का बड़ा कारण बनी है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब किसी धातु में तेज उछाल आता है तो मामूली कमजोरी के संकेत पर ट्रेडर अपने मुनाफे को सुरक्षित करने लगते हैं। अहम तकनीकी स्तर टूटने के बाद स्टॉप-लॉस और एल्गोरिदमिक बिकवाली से गिरावट और तेज हो जाती है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कॉमेक्स पर चांदी 121 डॉलर प्रति औंस से ऊपर के उच्च स्तर से फिसलकर अब काफी नीचे आ गई है, जिससे घरेलू बाजार में भी नकारात्मक धारणा बनी है।
एनरिच मनी के सीईओ पोन्मुडी आर के मुताबिक, दीर्घकालिक नजरिए से चांदी का रुझान अभी भी सकारात्मक है, लेकिन हालिया गिरावट ने कीमतों को प्रमुख मूविंग एवरेज से नीचे धकेल दिया है। इससे अल्पकालिक दबाव और करेक्शन का संकेत मिलता है।
एमसीएक्स पर 2,25,000 से 2,60,000 रुपये का दायरा मजबूत सपोर्ट जोन माना जा रहा है। बता दें कि यह स्तर पिछले स्विंग लो और दीर्घकालिक संरचनात्मक समर्थन से मेल खाता है। यदि कीमतें इस दायरे के ऊपर टिककर मजबूती दिखाती हैं तो 3,00,000 से 3,25,000 रुपये तक की वापसी संभव मानी जा रही है। हालांकि यदि यह सपोर्ट decisively टूटता है तो गिरावट और गहरा सकती है।
वैश्विक स्तर पर 65 से 70 डॉलर का दायरा अहम सपोर्ट माना जा रहा है। यदि वहां स्थिरता बनती है और कीमतें 85 से 92 डॉलर के ऊपर लौटती हैं तो 95 से 105 डॉलर तक की नई तेजी देखी जा सकती है।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि मध्यम और लंबी अवधि में चांदी की बुनियादी स्थिति मजबूत बनी हुई है। सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक वाहनों जैसे क्षेत्रों से औद्योगिक मांग लगातार बढ़ रही है, जबकि आपूर्ति संबंधी चुनौतियां भी बनी हुई हैं। ऐसे में मौजूदा गिरावट को व्यापक तेजी के चक्र के भीतर एक करेक्शन के रूप में देखा जा रहा है।
फिलहाल बाजार में उतार-चढ़ाव ऊंचे स्तर पर बना हुआ है और अमेरिकी ब्याज दरों की दिशा, डॉलर इंडेक्स तथा तकनीकी स्तर ही आगे की चाल तय करेंगे।
अन्य न्यूज़














