Middle East में US-Iran तनाव से Crude Oil में उबाल, कीमतों में 4% का बड़ा उछाल

Strait of Hormuz
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Ankit Jaiswal । Jul 13 2026 5:33PM

मध्य पूर्व में अमेरिका-ईरान के बीच नए सैन्य हमलों के बाद वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें 4% तक बढ़ गईं और शेयर बाजारों में गिरावट आई। होरमुज जलडमरूमध्य को लेकर विरोधाभासी दावों के बीच ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने की आशंका ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।

मध्य पूर्व में एक बार फिर बढ़ते सैन्य तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर दिखाई देने लगा है। सोमवार को एशियाई कारोबार की शुरुआत के साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में करीब 4 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। मौजूद जानकारी के अनुसार, अमेरिका की ओर से ईरान पर किए गए नए सैन्य हमलों और उसके जवाब में ईरान द्वारा कई देशों की ओर मिसाइलें दागे जाने के बाद निवेशकों की चिंता बढ़ गई हैं।


बता दें कि ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 4 प्रतिशत की बढ़त के साथ 79 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई, जो पिछले तीन सप्ताह का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है। वहीं अमेरिकी मानक कच्चा तेल भी करीब 4.13 प्रतिशत बढ़कर 74.36 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है।


गौरतलब है कि सप्ताहांत में अमेरिका ने ईरान के खिलाफ नए सैन्य हमले किए थे। इसके जवाब में ईरान ने बहरीन, कुवैत, कतर, जॉर्डन और ओमान की दिशा में मिसाइल हमले किए। इन घटनाओं के बाद पूरे मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ गया है, जिसका सीधा असर ऊर्जा बाजारों पर देखने को मिल रहा है।


इस बीच सबसे बड़ी चिंता होरमुज जलडमरूमध्य को लेकर बनी हुई है। ईरान ने दावा किया है कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को फिर से जहाजों की आवाजाही के लिए बंद कर दिया गया है। दूसरी ओर अमेरिका लगातार कह रहा है कि यह समुद्री मार्ग अभी भी खुला है और सामान्य रूप से संचालित हो रहा है। बता दें कि दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की बाधा का असर पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है।


बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह तनाव और बढ़ता है तथा आसपास के देशों के ऊर्जा प्रतिष्ठान भी इसकी चपेट में आते हैं, तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर बड़ा दबाव बन सकता है। इसके चलते आने वाले महीनों में कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है। फिलहाल इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की संख्या भी काफी कम हो गई है, जिससे आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।


मौजूद जानकारी के अनुसार, तेल की कीमतों में तेजी के साथ-साथ एशिया और यूरोप के शेयर बाजारों में भी गिरावट दर्ज की गई। वहीं बॉन्ड बाजार पर भी दबाव देखा गया। निवेशकों को आशंका है कि यदि मध्य पूर्व में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो इसका असर वैश्विक व्यापार, महंगाई और आर्थिक वृद्धि पर भी पड़ सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के बीच आगे की स्थिति पर बनी हुई हैं।

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