World Bank Group ने भारत में चार साल में जुटाई 36 अरब डॉलर की निजी पूंजी

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अंतरराष्ट्रीय वित्त निगम के अनुसार विश्व बैंक समूह ने भारत में विकास और रोजगार बढ़ाने के लिए पिछले चार वर्षों में 36 अरब डॉलर का निजी निवेश जुटाया है। इसमें से 9.6 अरब डॉलर विशेष रूप से एमएसएमई क्षेत्र के लिए हासिल किए गए। समूह के जोखिम आकलन और गारंटी के चलते संस्थागत निवेशकों का भरोसा लगातार मजबूत हुआ है।

विश्व बैंक समूह ने भारत में विकास कार्यों, निवेश बढ़ाने और रोजगार सृजन के प्रयासों में मदद के लिए पिछले चार वर्षों में कुल 36 अरब डॉलर की निजी पूंजी जुटाने में मदद की है। इसमें से 9.6 अरब डॉलर सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के लिए जुटाए गए। विश्व बैंक समूह की संस्था अंतरराष्ट्रीय वित्त निगम (आईएफसी) के दक्षिण एशिया निदेशक मैनुअल रेयस-रेताना ने पीटीआई-भाषा से कहा कि समूह के जरिये जुटाई गई निजी पूंजी राशि वित्त वर्ष 2021-22 के करीब तीन अरब डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 14.5 अरब डॉलर हो गई।

उन्होंने कहा, ‘‘निजी क्षेत्र के निवेशकों की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है और इस दिशा में गतिविधियां बढ़ रही हैं। भारत समेत दुनियाभर के निवेशक अपने निवेश के साधनों और परिसंपत्तियों में विविधता लाने के विकल्प तलाश रहे हैं।’’ रेयस-रेताना ने कहा कि आईएफसी और बहुपक्षीय निवेश गारंटी एजेंसी (एमआईजीए) की ओर से दी जाने वाली गारंटी को निवेशकों से अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। संस्थागत निवेशक इन गारंटी को महत्व देते हैं क्योंकि वे विश्व बैंक समूह के जोखिम आकलन मानकों और संचालन प्रक्रियाओं से परिचित हैं।

उन्होंने कहा कि विश्व बैंक समूह सरकारों की विकास प्राथमिकताओं और निजी निवेश के बीच सेतु का काम करता है। इसके लिए वह बाजारों को मजबूत करने, व्यवहार्य परियोजनाएं तैयार करने और वित्तपोषण, गारंटी तथा साझेदारी के जरिये जोखिम कम करने में मदद करता है। विश्व बैंक ने 43.6 करोड़ डॉलर के ‘एमएसएमई प्रदर्शन में सुधार और तेजी लाने’ (रैम्प) कार्यक्रम के तहत व्यापार प्राप्य छूट प्रणाली (ट्रेड्स) से जुड़े सुधारों में मदद की।

ट्रेड्स एक डिजिटल मंच है, जहां कंपनियां अपने बकाया बिलों के बदले जल्द धन प्राप्त कर सकती हैं। इस पहल से 2.5 लाख से अधिक एमएसएमई को पूंजी तक तेजी से पहुंच मिली है। इस मंच से 30 गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) भी जुड़ी हैं, जिससे ऋण उपलब्ध कराने वाले संस्थानों का दायरा बढ़ा है।

विश्व बैंक समूह के मुताबिक, महिला-स्वामित्व वाले कारोबारों के लिए ऋण गारंटी का हिस्सा पिछले दो वर्षों में 14 प्रतिशत से बढ़कर 18 प्रतिशत हो गया है। इससे एक अरब डॉलर से अधिक की पूंजी जुटाने में मदद मिली है। भारत के पहले हरित एमएसएमई गारंटी कोष से भी 4,000 से अधिक उद्यमों को लाभ मिला है।

इसके जरिये हरित और चक्रीय अर्थव्यवस्था से जुड़ी गतिविधियों में चार करोड़ डॉलर का निवेश हुआ है। ये निवेश भारत के साथ विश्व बैंक समूह की साझेदारी का हिस्सा हैं। इसका उद्देश्य अगले दशक में भारत को उच्च-मध्यम आय वाली अर्थव्यवस्था बनाने और 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने में मदद करना है।

विश्व बैंक समूह वित्त वर्ष 2025-26 से 2030-31 के लिए अपनी देश साझेदारी रूपरेखा के तहत रोजगार सृजन करने वाली, निजी क्षेत्र के नेतृत्व वाली वृद्धि को बढ़ावा दे रहा है। इसमें समावेशन और टिकाऊ वृद्धि पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

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