SEBI Order के खिलाफ SAT पहुंचे Zee Entertainment और Punit Goenka, बुधवार को होगी अहम सुनवाई

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Ankit Jaiswal । Aug 10 2026 10:53PM

जेड एंटरटेनमेंट और पुनीत गोयनका ने सेबी के प्रतिबंधात्मक आदेश के खिलाफ प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण का रुख कर अंतरिम राहत की मांग की है। यह कानूनी चुनौती कंपनी के भविष्य और बाजार साख के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि नियामक ने कॉर्पोरेट गवर्नेंस और प्रकटीकरण मानदंडों के उल्लंघन का हवाला दिया है। जेड एंटरटेनमेंट सेबी आदेश प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण पुनीत गोयनका कॉर्पोरेट गवर्नेंस विनियामक अनुपालन।

जेड एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड और कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पुनीत गोयनका ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड के आदेश के खिलाफ प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण का रुख किया है। दोनों ने बाजार में प्रवेश पर लगाई गई रोक को चुनौती दी है। मामले में कंपनी की ओर से तत्काल सुनवाई और अंतरिम राहत की मांग की गई, जिसके बाद न्यायाधिकरण ने बुधवार को सुनवाई तय की है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण में सोमवार को मामले की सुनवाई हुई। जेड एंटरटेनमेंट की ओर से पेश वकील ने तत्काल सुनवाई का अनुरोध करते हुए कहा कि कंपनी को दो महीने के लिए प्रतिभूति बाजार से बाहर कर दिया गया है। इसके बाद न्यायाधिकरण ने मामले को बुधवार के लिए सूचीबद्ध कर दिया है।

गौरतलब है कि भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने 31 जुलाई को जारी अपने आदेश में जेड एंटरटेनमेंट को दो महीने तक प्रतिभूति बाजार में कारोबार करने से रोक दिया था। वहीं कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पुनीत गोयनका और प्रवर्तक सुभाष चंद्रा पर 12-12 महीने की रोक लगाई गई है। नियामक ने कंपनी पर 30 लाख रुपये, पुनीत गोयनका पर 58 लाख रुपये और सुभाष चंद्रा पर 60 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। कुल 1.48 करोड़ रुपये की यह रकम 45 दिनों के भीतर जमा करने का निर्देश दिया गया है।

यह मामला हैदराबाद के जुबली हिल्स इलाके में स्थित जेड एंटरटेनमेंट की एक संपत्ति से जुड़ा है। नियामक के अनुसार, इस संपत्ति का इस्तेमाल एस्सेल समूह की चार कंपनियों द्वारा लिए गए कर्ज के लिए सुरक्षा के तौर पर किया गया था। इन कंपनियों ने इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड से करीब 726 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था।

सेबी के निष्कर्षों के मुताबिक, संपत्ति के मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेज 27 दिसंबर 2018 को जमा किए गए थे। बाद में करीब 225 करोड़ रुपये के कर्ज भुगतान के बाद एक जून 2020 को इन दस्तावेजों को वापस किया गया था। नियामक ने इस पूरे लेनदेन को लेकर कंपनी की आवश्यक मंजूरियों और जानकारी सार्वजनिक करने के तरीके पर सवाल उठाए हैं।

सेबी ने कहा कि इस मामले में कंपनी की लेखा समिति, निदेशक मंडल और शेयरधारकों से जरूरी मंजूरी नहीं ली गई थी। इसके अलावा संपत्ति के इस्तेमाल, संबंधित पक्ष से जुड़े लेनदेन और संभावित देनदारी से जुड़ी पर्याप्त जानकारी सार्वजनिक नहीं किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।

मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय में चल रहे मुकदमे, संपत्ति को बेचने या हस्तांतरित नहीं करने से जुड़े वचन और बाद में संपत्ति के दस्तावेज जारी किए जाने से संबंधित जानकारी भी जांच का हिस्सा रही है।

बता दें कि प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण में दायर अपील से जेड एंटरटेनमेंट और उसके प्रवर्तकों को सेबी के आदेश के खिलाफ कानूनी राहत लेने का रास्ता मिला है। बुधवार की सुनवाई में कंपनी बाजार में कारोबार पर लगी रोक को अंतरिम तौर पर हटाने या राहत देने की मांग कर सकती है।

इस पूरे मामले का समय भी खास माना जा रहा है। सेबी का आदेश उसी दिन आया था, जिस दिन जेड एंटरटेनमेंट के शेयरधारकों ने असाधारण आम बैठक में कंपनी की प्रस्तावित योजना को मंजूरी दी थी। शेयरधारकों की मंजूरी से कंपनी की आगे की रणनीति को लेकर सकारात्मक उम्मीद बनी थी, लेकिन उसी दिन नियामकीय कार्रवाई सामने आने से कंपनी के लिए नई चुनौती खड़ी हो गई है। अब सबकी नजर बुधवार को होने वाली सुनवाई पर है।

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