आसान और लाभकारी बिजनेस है मत्स्य पालन, कॅरियर के हैं भरपूर अवसर

आसान और लाभकारी बिजनेस है मत्स्य पालन, कॅरियर के हैं भरपूर अवसर

2 से 3 मिनट के बाद मछली के बच्चों को तालाब में डाल देना चाहिए। ध्यान रखने वाली बात यह है कि मछलियों की मात्रा तालाब में ना तो बहुत ज्यादा होना चाहिए और बहुत कम भी नहीं होनी चाहिए। आप तालाब में सही अनुपात में मछलियों का बीज डालें।

भारत भर में मत्स्य पालन एक जाना पहचाना व्यवसाय रहा है। कृषि से इसको जोड़कर ज़रूर देखा जाता रहा है, किंतु हकीकत में यह काफी उन्नत और लाभकारी व्यवसाय है।

वर्तमान में कोरोनावायरस के कारण बड़ी संख्या में गांवों की ओर लोगों का पलायन हुआ है। कई लोगों को रोजगार की समस्या भी उत्पन्न हुई है, क्योंकि जमे जमाए व्यवसाय या फिर शहर में करने वाली नौकरी छूटने के बाद लोग गांव की ओर लौटे हैं। गांव में चूँकि अधिकतर लोगों के पास कम-अधिक जमीन होती ही है और ऐसी स्थिति में मत्स्य पालन उन सबके लिए एक लाभकारी व्यवसाय हो सकता है।

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आइए जानते हैं इसकी बेसिक बातें...

तालाब को ठीक से करें तैयार 

अक्सर लोग किसी तालाब की खुदाई के बाद तुरंत ही मछली के बीज डाल देते हैं, लेकिन यह ठीक मेथड नहीं है। सबसे पहले तालाब की सफाई करने के बाद उसमें 200 किलो प्रति हेक्टेयर के हिसाब से चूने का छिड़काव जरूरी है। इसके अलावा महुए की खली और ब्लीचिंग पाउडर डालने से भी मछली पालन के लिए तालाब बेहतर कंडीशन में तैयार हो जाता है। यह सारा कार्य आप ठंड के मौसम में ही कर लें, ताकि ठंड का मौसम बीतते-बीतते मछली का बच्चा डालने योग्य आप का तालाब तैयार हो जाए। 

साथ ही तालाब में ढैंचा नामक घास भी बोया जाता है, ताकि बाद में वह खाद बन जाए और मछली पालन के लिए उपयुक्त रहे। यह तकरीबन 40 किलो प्रति हेक्टेयर के हिसाब से तालाब में बोया जाता है। साथ ही गोबर की खाद डालने से भी वनस्पति जल्दी उग जाती है। अगर समय पर तालाब में अच्छी घास नहीं होती है तो गोबर के साथ सुपर फास्फेट और यूरिया का घोल तालाब में डालना लाभकारी हो सकता है।

हालांकि मछली का बीज डालने से काफी पहले ही यह कार्य करना चाहिए। मछली का बीज डालने के बाद खाद डालना खतरनाक हो सकता है।

उपरोक्त कार्य करने के कम से कम 1 महीने बाद ही तालाब में पानी भरकर, ठंड का मौसम बीतने के बाद मछली का बीज डालें। साथ ही तालाब के पानी की गुणवत्ता और उस में ऑक्सीजन की ठीक मात्रा हो, इसके प्रति अतिरिक्त सजगता आवश्यक है।

मछलियों की ब्रीड पर खास ध्यान दें

अगर आपका तालाब ठीक ढंग से तैयार हो गया है, किंतु मछलियों के बीज आप सही ढंग से नहीं डालते हैं, तो आपके लिए यह लाभकारी नहीं रहेगा।

मुख्य रूप से देशी और विदेशी ब्रीड की मछलियां लोग डालते हैं। इसमें देसी में रोहू, कतला, मृगल इत्यादि प्रचलित प्रजातियां हैं, तो विदेशियों में सिल्वर कॉर्प, ग्रास कार्प इत्यादि प्रमुख हैं। कई लोग जब बाहर से मछली लेकर आते हैं तो उसे एक दो परसेंट नमक के घोल में कुछ देरी के लिए रखते हैं, ताकि अगर मछली के बीज में कोई बीमारी है तो उसका असर कम हो जाए।

हालांकि यह बहुत देर तक नहीं होना चाहिए और 2 से 3 मिनट के बाद मछली के बच्चों को तालाब में डाल देना चाहिए। ध्यान रखने वाली बात यह है कि मछलियों की मात्रा तालाब में ना तो बहुत ज्यादा होना चाहिए और बहुत कम भी नहीं होनी चाहिए। आप तालाब में सही अनुपात में मछलियों का बीज डालें।

अगर एक या दो मछली आपके तालाब में मर जाती हैं, तो उसे तत्काल निकाल कर बाहर करें समय-समय पर बीज की वृद्धि और उसकी जांच करना आपको नुकसान से बचा सकता है।

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मछलियों के लिए यूं तो किसी विशिष्ट चारे की जरूरत नहीं होती है, खासकर तब जब आप का तालाब पुराना हो गया हो, किंतु चावल का आटा और मूंगफली की खली इत्यादि मछलियों को तेजी से बढ़ाती हैं। इसके अलावा प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और वसा युक्त चारे की मात्रा मछलियों के लिए पर्याप्त रूप से उपलब्ध हो, इसके प्रति भी सजग रहें। ध्यान दें मछली का बीज सही क्वालिटी का हो, तो सही मात्रा में भी अवश्य हो, अन्यथा बाद में मछलियां ठीक ढंग से बढ़ेंगी नहीं।

मार्केट को समझना जरूरी है 

अब जब आपके पास मछली के बीज तैयार हो जाते हैं तो आसपास की मार्केट का एक अध्ययन जरूर करें और देखें कि आपके आसपास किस तरह की मछलियों की खपत ज्यादा होती है। लोग आखिर क्या खरीदते हैं?

ऐसे में जब आप मछली मार्केट जाएंगे, तो एक ग्राहक बनकर मछलियों की ब्रीड से लेकर उसकी कीमत तक का पता कर सकते हैं। उसी अनुरूप आप अपनी बिजनेस स्ट्रेटेजी बनाएं। अगर बड़ी मछलियों की खपत अधिक है, तब आपके तलाब में कम मछलियों का बीज रहना चाहिए, जबकि अगर छोटी मछलियों की खपत है तो तालाब में बीज अगर अधिक भी डालेंगे तो आपको फायदा ही होगा।

कुल मिलाकर सही टाइम पर मछलियों को बेचना और सही व्यापारियों से संपर्क में रहना आपको लाभ दिला सकता है। कई बार मछली के व्यापारी आपके तालाब पर आकर खुद ही सारी मछलियां ले जाते हैं।

हालांकि रेट में अगर ज्यादा डिफरेंस है तो आप मछलियों को खुद भी मार्केट तक पहुंचा सकते हैं।

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इसके अलावा कुछ और बातों का ध्यान रखना जरूरी है। जैसे मछलियों की ग्रेडिंग करना आवश्यक है। मतलब अगर आपके तालाब में कुछ मछलियां बड़ी हो गई हैं और कुछ मछलियां छोटी हैं, तो बड़ी मछलियों को या तो निकाल कर दूसरे तालाब में डालें या उन्हें मार्केट में भेज दें, क्योंकि बड़ी मछलियों का आहार अधिक होगा और वह छोटी मछलियों का चारा भी खा जाएंगी। इसलिए मछलियों की ग्रेडिंग करना आवश्यक है ताकि मछलियों की ग्रोथ में एक निरंतरता रहे। साथ ही मछलियों में इंटरनल और एक्सटर्नल बीमारी के प्रति सजग रहें, अन्यथा आपको पता भी नहीं चलेगा कि कब आपकी पूँजी भारी नुक्सान में बदल गयी।

इसके अलावा नई नई जानकारियां आप भिन्न माध्यमों से लेते रहें और अलग-अलग मछली पालकों के संपर्क में रहें। ऐसे में नई चीजें आपको पता चलेंगी।

- मिथिलेश कुमार सिंह