UP में धर्मांतरण के बड़े खिलाड़ियों के खेल का खुलासा, क्या अब सेकुलर लोग कुछ बोलेंगे ?

UP में धर्मांतरण के बड़े खिलाड़ियों के खेल का खुलासा, क्या अब सेकुलर लोग कुछ बोलेंगे ?

इस हैरान कर देने वाली घटना के खिलाफ किसी की चेतना नहीं जाग्रत हुई। कहीं कोई बवाल नहीं कटा, न दलितों पर अत्याचार के नाम पर हो-हल्ला मचाने वालों का दिल पसीजा और न ही किसी महिला आयोग, सामाजिक संगठन ने इसका संज्ञान लेना उचित समझा।

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की सख्ती के बाद भी लव-जेहाद और धर्मांतरण की घटनाएं कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। कहीं बरगला कर तो कहीं लालच ओर धोखा देकर लोगों का धर्म परिर्वतन कराया जा रहा है। इसी तरह से करीब एक हजार लोगों का धर्मांतरण कराए जाने की एक घटना का पुलिस ने खुलासा करते हुए एक धार्मिक मुहिम चलाने वाले संगठन के दो लोगों को गिरफ्तार किया है, इन लोगों ने करीब एक हजार लोगों का धर्म परिर्वतन कराए जाने की बात कबूली है।

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पहले बाद लव-जेहाद की जो सामाजिक रूप से काफी घिनौना कृत्य है। लव-जेहाद की शिकार लड़कियों और महिलाओं को तो पता ही नहीं चलता है कि वह किस तरह से एक सम्प्रदाय विशेष की साजिश का शिकार हो जाती हैं, जिसे वह प्यार समझती हैं, वह लव-जेहाद होता है। इस हकीकत का पता जब लव-जेहाद की शिकार लड़कियों को चलता है तब तक काफी देर हो चुकी होती है। इसको ऐसे समझा जा सकता है। उत्तर प्रदेश के जिला बरेली के इज्जनगर थाना क्षेत्र की अनुसूचित जाति की एक लड़की के साथ दूसरे सम्प्रदाय के एक युवक ने दुष्कर्म किया और दुष्कर्म का वीडियो वायरल करने की धमकी देकर पहले तो उसका धर्म परिवर्तन कराया और बाद में जबर्दस्ती उससे निकाह कर लिया। बात यहीं तक नहीं रूकी, निकाह के बाद लड़का अपनी पत्नी पर दबाव बनाने लगा कि वह मायके से दहेज के रूप में सात लाख रुपए लेकर आए। लड़की रुपए की व्यवस्था नहीं कर पाई तो उसे घर से निकाल दिया गया।

इस हैरान कर देने वाली घटना के खिलाफ किसी की चेतना नहीं जाग्रत हुई। कहीं कोई बवाल नहीं कटा, न दलितों पर अत्याचार के नाम पर हो-हल्ला मचाने वालों का दिल पसीजा और न ही किसी महिला आयोग, सामाजिक संगठन ने इसका संज्ञान लेना उचित समझा। जो नेता कथित रूप से आपसी विवाद में एक शख्स की दाढ़ी काटने की झूठी घटना को साम्प्रदायिक रंग देकर योगी सरकार को घेरने में लग जाते हैं, यदि वह उक्त मामले में भी ऐसा ही रवैया अपनाते तो उनका वोट बैंक और तुष्टिकरण की सियासत पर ‘ग्रहण’ लग सकता था, इसीलिए सब मौन साधे रहे। किसी ने योगी सरकार से सवाल नहीं किया। यह पहली बार नहीं हुआ है, बार-बार इस तरह की घटनाएं सामने आती रहती हैं, लेकिन तुष्टिकरण की सियासत करने वाले दल और नेता हमेशा ही मौके की नजाकत को भांप कर मुंह बंद रखते हैं।

बात धर्मांतरण की कि जाए तो उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण का बड़ा मामला सामने आया है, जिसके द्वारा करीब एक हजार से अधिक लोगों को मुस्लिम बनाने की जानकारी पुलिस के हत्थे लगी है। उत्तर प्रदेश एटीएस ने इस खेल में लिप्त दो लोगों को गिरफ्तार करने के बाद उनके खिलाफ केस दर्ज किया है। अपर पुलिस महानिदेशक एटीएस तथा कानून-व्यवस्था प्रशांत कुमार ने इस बात का खुलासा करते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण का बड़ा खेल लम्बे समय से चल रहा है। पुलिस को गैर मुस्लिमों को मुस्लिम बनाने के कारनामे की जानकारी मिली तो हमने एटीएस को सक्रिय किया और बड़ी कामयाबी हाथ लगी। प्रदेश में सोची समझी साजिश के तहत इस प्रकार का धर्मांतरण किया जा रहा है। धर्मांतरण के मामले में बड़ी तफ्तीश जारी है। धर्मांतरण के मामले में पकड़े गए आरोपितों ने एक हजार लोगों का धर्म बदलवा कर उन्हें मुस्लिम बनाने की बात स्वीकार की। इन लोगों का पूरा एक संगठन था जिसे आईएसआई से फंडिंग होती थी। इस्लामिक दवा सेंटर के जरिये बड़ा खेल हो रहा था।

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प्रशांत कुमार ने बताया कि फिलहाल तो एटीएस ने इस मामले में गिरफ्तार दिल्ली के जामियानगर के उमर और जहांगीर पर गंभीर धारा में केस दर्ज किया गया है। अब इनसे पूछताछ में और भी लोगों के नाम सामने आएंगे। गैर मुस्लिमों का मुस्लिम में धर्मांतरण करने के मामले में बेहद सक्रिय उमर और जहांगीर को लखनऊ से पकड़ा गया है। गाजियाबाद में दर्ज केस के बाद यह मामला सामने आया है। माना जा रहा है कि इन दोनों और इनके साथियों ने उत्तर प्रदेश में हजार से ज्यादा लोगों का धर्मांतरण कराया है।

    

यह सब तब हो रहा है जबकि उत्तर प्रदेश में लव-जिहाद और धर्म धर्मांतरण की घटनाओं पर लगाम कसने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा सख्त कानून बनाया है। इस कानून के तहत किसी के भी छल-कपट व जबरन धर्मांतरण के मामलों में लिप्त पाए जाने पर एक से दस वर्ष तक की सजा का प्रावधान किया गया है। खासकर किसी नाबालिग लड़की या अनुसूचित जाति-जनजाति की महिला का छल से या जबरन धर्मांतरण कराने के मामले में दोषी को तीन से दस वर्ष तक की सजा की व्यवस्था है। इसके अलावा सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में भी तीन से 10 वर्ष तक की सजा रखी गई। जबरन या कोई प्रलोभन देकर किसी का धर्म परिवर्तन कराया जाना संज्ञेय अपराध माना गया है।

-स्वदेश कुमार

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं तथा उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त रह चुके हैं।)