भारत में न्यूजीलैंड की ऐतिहासिक वनडे सीरीज जीत, रवींद्र जडेजा के भविष्य पर गहराते सवाल

Ravindra Jadeja
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Ankit Jaiswal । 19-01-2026

2026 में न्यूजीलैंड के हाथों वनडे सीरीज में मिली ऐतिहासिक हार ने रवींद्र जडेजा के करियर पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है, ठीक वैसे ही जैसे 2024 की टेस्ट हार ने कोहली-रोहित के लिए किया था। बल्ले और गेंद से लगातार खराब प्रदर्शन के कारण, चयनकर्ताओं के लिए 2027 विश्व कप की योजनाओं में जडेजा को बनाए रखना मुश्किल हो गया है।

बीते 14 महीनों में न्यूजीलैंड ने भारतीय सरजमीं पर दो ऐसे कारनामे किए हैं, जिन्होंने टीम इंडिया के सीनियर खिलाड़ियों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। साल 2024 में टेस्ट क्रिकेट में 3-0 की ऐतिहासिक हार ने विराट कोहली और रोहित शर्मा के भविष्य पर बहस को फिर से हवा दी थी और सात महीने बाद दोनों ने टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कह दिया था, यह सब मौजूद जानकारी के अनुसार हुआ है।

अब साल 2026 में न्यूजीलैंड ने भारत में पहली बार वनडे सीरीज जीतकर एक बार फिर भारतीय क्रिकेट को आईना दिखाया। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार चर्चा के केंद्र में विराट या रोहित नहीं, बल्कि रवींद्र जडेजा हैं। गौरतलब है कि जडेजा का सफेद गेंद क्रिकेट में भविष्य लंबे समय से संक्रमण के दौर की चर्चाओं में दबा हुआ था, लेकिन अब वह सवाल सामने आकर खड़ा हो गया है।

दरअसल, इस पूरी बहस की औपचारिक शुरुआत पिछले साल अक्टूबर में हुई थी, जब ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए घोषित वनडे टीम में जडेजा का नाम नहीं था। उस समय यह सवाल उठा कि क्या चयनकर्ता जडेजा से आगे बढ़ चुके हैं और क्या 2027 विश्व कप की योजना में उनकी जगह अब नहीं रही है। हालांकि, भारत के मुख्य चयनकर्ता अजित अगरकर ने उस समय इन अटकलों को खारिज करते हुए साफ कहा था कि जडेजा अभी भी टीम की योजनाओं का हिस्सा हैं।

इसके कुछ ही दिनों बाद जडेजा ने भी अपने इरादे स्पष्ट किए थे। उन्होंने कहा था कि उन्हें जब भी मौका मिलेगा, वह हमेशा की तरह अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करेंगे और अगर विश्व कप तक उन्हें अवसर मिलते हैं और प्रदर्शन अच्छा रहता है, तो यह भारतीय क्रिकेट के लिए बेहतर होगा, ऐसा उनका मानना है।

नवंबर में जडेजा की वनडे टीम में वापसी हुई, जब दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ घरेलू सीरीज में अक्षर पटेल को आराम दिया गया था। उस समय जडेजा भारत के पास उपलब्ध एकमात्र अनुभवी बाएं हाथ के स्पिन ऑलराउंडर थे। चैंपियंस ट्रॉफी में उनका पिछला प्रदर्शन भी ठीक-ठाक रहा था, जहां उन्होंने किफायती गेंदबाजी की थी।

लेकिन इसके बाद के आंकड़े जडेजा के पक्ष में नहीं गए हैं। भारत की वनडे टीम में जडेजा की भूमिका अक्सर निचले क्रम में तेजी से रन बनाने और पारी को फिनिश करने की रही है, लेकिन हाल के मुकाबलों में वह डेथ ओवरों में लय हासिल करने में नाकाम दिखे। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ रायपुर में खेला गया मैच हो या न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरा वनडे, जडेजा की धीमी पारियों ने दूसरे बल्लेबाजों पर अतिरिक्त दबाव डाला।

गेंदबाजी के मोर्चे पर भी स्थिति उत्साहजनक नहीं रही है। 2023 विश्व कप के बाद से उनके विकेट लेने की रफ्तार थमी हुई है और हालिया वापसी के बाद तो लंबे स्पेल डालने के बावजूद सफलता नहीं मिली है। यह पहलू टीम प्रबंधन के लिए ज्यादा चिंता का विषय बनता जा रहा है।

अब आगे की तस्वीर पर नजर डालें तो भारत को जुलाई में इंग्लैंड दौरे से पहले कोई वनडे नहीं खेलना है। माना जा रहा है कि तब तक टीम प्रबंधन टी20 विश्व कप से ध्यान हटाकर 50 ओवरों की तैयारी पर फोकस करेगा। ऐसे में यह तय है कि चयनकर्ता सीमित विकल्पों में से ही बाएं हाथ के स्पिन ऑलराउंडर को चुनना चाहेंगे।

अक्षर पटेल और वॉशिंगटन सुंदर जैसे खिलाड़ी इस दौड़ में जडेजा को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। अक्षर का बल्ले से स्ट्राइक रेट भले औसत हो, लेकिन गेंद से उनका योगदान ज्यादा असरदार रहा है। वहीं वॉशिंगटन सुंदर भी लगातार मौके मिलने पर खुद को उपयोगी साबित कर रहे हैं।

इन सबके बीच हार्दिक पांड्या की वापसी, केएल राहुल की निरंतरता और हर्षित राणा जैसे खिलाड़ियों का निचले क्रम में उभरना जडेजा के लिए मुश्किलें बड़ा रहा है। ऐसे हालात में यह संभावना अब अनदेखी नहीं की जा सकती कि शायद जडेजा ने अपना आखिरी वनडे मैच खेल लिया हो, यह चर्चा अब क्रिकेट गलियारों में तेज होती जा रही हैं।

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