Chai Par Sameeksha: बिहार की गद्दी छोड़ कर Rajya Sabha की सीट पर क्यों जा रहे हैं Nitish Kumar?

नीरज कुमार दुबे ने इस बात को भी स्वीकार किया कि नीतीश कुमार को बिहार में सभी लोग पसंद करते हैं। उन्होंने बिहार को बदलने का काम किया हैं। नीतीश कुमार की बदौलत एनडीए बिहार में जीत हासिल करता रहा है। नीतीश कुमार की आज भी बिहार में स्वीकारता है। वह बिहार के सर्वमान्य नेता है।
प्रभासाक्षी न्यूज़ नेटवर्क के खास साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह बिहार की राजनीति से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गयी। इस दौरान प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे ने तमाम सवालों का जवाब दिया। नीरज कुमार दुबे ने साफ तौर पर कहा कि नीतीश कुमार पहले भी यह बात कह चुके हैं कि उन्हें राज्यसभा जाने की इच्छा है। अब वह समय आ गया है। नीतीश कुमार अपनी इच्छा से राज्यसभा जा रहे हैं जैसा कि उन्होंने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा है। उन्होंने कहा कि 2020 में जब चुनाव हुए थे तब नीतीश कुमार तीसरे नंबर की पार्टी बन गए थे। बावजूद इसके भाजपा ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाया। इस बार भाजपा बड़ी पार्टी है। नीतीश कुमार की जदयू ने भी अच्छी खासी सीटे हासिल की है। लेकिन जिस तरीके से नीतीश कुमार के स्वास्थ्य का हाल है, उसको लेकर कई सवाल बने हुए हैं और शायद यही कारण है कि नीतीश कुमार अब दिल्ली जाने का फैसला कर रहे हैं।
नीरज कुमार दुबे ने इस बात को भी स्वीकार किया कि नीतीश कुमार को बिहार में सभी लोग पसंद करते हैं। उन्होंने बिहार को बदलने का काम किया हैं। नीतीश कुमार की बदौलत एनडीए बिहार में जीत हासिल करता रहा है। नीतीश कुमार की आज भी बिहार में स्वीकारता है। वह बिहार के सर्वमान्य नेता है। ऐसे में नीतीश कुमार की बिहार में लोकप्रियता का अंदाजा लगाया जा सकता है। उनके मुख्यमंत्री पद छोड़ने पर वहां प्रदर्शन हो रहे हैं। इससे साफ तौर पर हम कह सकते हैं कि नीतीश अभी भी बिहार में बहुत ही लोकप्रिय नेता हैं।
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नीरज दुबे ने यह भी कहा कि बिहार को जंगल राज की छवि से नीतीश कुमार ने बाहर निकाला है। नीतीश कुमार ने कई बड़े काम किए हैं। नीतीश कुमार ने महिलाओं के लिए बड़े काम किए हैं। नीतीश कुमार से भले ही मुख्यमंत्री पद की कुर्सी ले जा सकती है लेकिन उन्होंने बिहार के लिए जो काम किया है उसको हमेशा याद किया जाएगा। इतना ही नहीं, नीरज कुमार दुबे ने यह भी कहा कि अगर नीतीश कुमार भविष्य में कभी वापस मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आना चाहे तो मतदाताओं का साथ उन्हें मिल सकता है। मतदाता लगातार नीतीश कुमार के साथ बने रह सकते हैं। यही नीतीश कुमार की मजबूती है और इस बात को उनके सहयोगी दल भी अच्छे से समझते हैं।
उन्होंने दावा किया कि भाजपा की सलाह पर यह निर्णय लिया गया लगता है, क्योंकि 2025 विधानसभा चुनाव में एनडीए की जीत के बाद बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी (89 सीटें) बन गई है। इससे बिहार में भाजपा का मुख्यमंत्री बनना आसान हो सकता है, जबकि नीतीश के बेटे निशांत को डिप्टी सीएम बनाए जाने की चर्चा है। हालांकि, जदयू में उनके इस फैसले पर असंतोष है, लेकिन इसे उनका व्यक्तिगत निर्णय बताया जा रहा है। वहीं विपक्ष इसे बीजेपी का "मास्क" हटाने का प्रयास मान रहा है। इससे राजद को पुनः सियासी ऑक्सीजन मिल सकता है। यूँ तो नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद बिहार के नए मुख्यमंत्री की घोषणा अभी स्पष्ट रूप से नहीं हुई है, क्योंकि यह प्रक्रिया राज्यसभा चुनाव के परिणाम (16 मार्च 2026) के बाद शुरू होगी। एनडीए में बीजेपी का सबसे बड़ा दावा माना जा रहा है, क्योंकि उनके पास 89 विधायक हैं।
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