खेल के आयोजन में जरूरी बायो-बबल, खिलाड़ियों के लिए कितना फायदेमंद और नुकसानदेह ?

खेल के आयोजन में जरूरी बायो-बबल, खिलाड़ियों के लिए कितना फायदेमंद और नुकसानदेह ?

मौजूदा दौर में बायो-बबल का काफी ज्यादा महत्तव है। इसकी वजह से खिलाड़ियों के बीच एक सुरक्षा का विश्वास रहता है कि वो सुरक्षित है। इसके साथ ही बायो बबल को उस तरीके से बनाया जाता है कि इसके अंदर एक एक चीज पर लगाम लगाई जा सकें जो संक्रमण लाने का खतरा अंदर आती है।

कोरोना के प्रकोप के कारण सभी तरह की चीजें बंद है। एक तरफ जहां कई खेलों की गतिविधियां रूक गई है वहीं कई खेल बड़ी मुश्किल से हो पा रहे है। ऐसे में इन दिनों भारतीय क्रिकेट में अगर किसी भी टूर्नामेंट या सीरीज को पूरा कराया जा रहा है तो उसमें बायो बबल का बड़ा महत्व है। क्योंकि ये बायो बबल सुरक्षा का ऐसा घेरा है जिसके वजह से ही खेलों का आयोजन सही से हो रहा है। सभी खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिए इस बायो बबल को बनाया जाता है जहां कोरोना से बचाव के लिए हर तरह के उपाय किए जाते है जो खिलाड़ियों तक कोरोना पहुंचने में रोक लगाता है। ऐसे में भारतीय क्रिकेट टीम भी पिछले 9 महीने से बायो बबल में कई बार रूकी है। भारतीय खिलाड़ियों को पहली बार बायो बबल में यूएई में हुए आईपीएल में जाना पड़ा। जहां कोरोना काल के बाद सभी खिलाड़ियों को बायो बबल का महत्व पता चला। इसके बाद से कई सीरीज फिर भारत में हुआ आईपीएल जहां भारतीय खिलाड़ियों का बायो बबल में जाना पड़ा। अब भारतीय टीम इंग्लैंड जाने के लिए तैयार है। जहां टीम इंडिया को वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल और इंग्लैंड के खिलाफ पांच मैचों की टेस्ट सीरीज खेलनी है। ऐसे में मुंबई में सभी भारतीय खिलाड़ी टीम इंडिया के बनाए गए बायो बबल में क्वारंटीन है। टीम इंडिया के कई खिलाड़ी 19 मई को ही इस बायो बबल का हिस्सा बन गए वहीं मुंबई और इसके आसपास रहने वाले खिलाड़ियों ने 24 मई को इस बायो बबल को ज्वाइन किया। इस बायो बबल में कई नियम है जैसे टीम इंडिया के वो खिलाड़ी जो 19 मई को टीम से जुड़ गए थे उनके लिए नियम थोड़े से अलग है वहीं 24 मई को जुड़ने वाले खिलाड़ियों को ट्रेनिंग भी अपने रूम के अंदर ही करनी पड़ेगी। 19 मई से जुड़ने वाले खिलाड़ियों के एक दिन छोड़कर कोरोना टेस्ट होंगे वहीं 24 मई से जुड़ने वाले खिलाड़ियों के हर रोज कोरोना के टेस्ट होने है। ऐसे में कोरोना के इस दौर में क्या बायो बबल का खिलाड़ियों के लिए कितना महत्व है। इस बायो बबल से खिलाड़ियों को फायदे तो है लेकिन इसके नुकसान क्या है।

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बायो-बबल से खिलाड़ियों को कितना फायदा ?

मौजूदा दौर में बायो-बबल का काफी ज्यादा महत्तव है। इसकी वजह से खिलाड़ियों के बीच एक सुरक्षा का विश्वास रहता है कि वो सुरक्षित है। इसके साथ ही बायो बबल को उस तरीके से बनाया जाता है कि इसके अंदर एक एक चीज पर लगाम लगाई जा सकें जो संक्रमण लाने का खतरा अंदर आती है। वर्ल्ड क्रिकेट में इंग्लैंड ने सबसे पहले बायो बबल बनाकर दुनिया को दिखाया कि इस तरह भी क्रिकेट खेला जा सकता है। उसके बाद हर टीम ने बायो बबल बनाकर मैच खेलें। ऐसे में इस बायो बबल को बनाने की वजह से क्रिकेट का खेल रूका नहीं और लगातार चलता रहा। भारत ने पिछले साल यूएई में मजबूत बायो बबल के कारण आईपीएल जैसे टूर्नामेंट का बेहद ही सफलता से आयोजन कराया।

जाहिर है बायो बबल एक तरह का इको बबल होता है जो एक सुरक्षित वातावरण बनाता है। मैच से जुड़े सभी खिलाड़ी और सपोर्ट स्टाफ इस सुरक्षित वातावरण में रहते हैं। ये एक ऐसा वातावरण हो जाता है जहां आप बाहरी दुनिया से कट जाते हैं। यह एक तरह का सुरक्षित वातावरण ही होता है जिसमें सख्ती कुछ ज्यादा होती है लेकिन यह खिलाड़ियों को कोरोना के संक्रमण से बचाए रखने में फायदेमंद होती है। 

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बायो-बबल से खिलाड़ियों को किस तरह के नुकसान ?

हाल ही में आईपीएल 14 के दौरान हमने देखा कि बायो बबल में भी किस तरह से कोरोना ने एंट्री मारी। उसके बाद से कई खिलाड़ियों लगातार पॉजिटिव आने लगे और फिर आईपीएल के इस सीजन को स्थगित कर दिया गया। ऐसे में यह तो जाहिर है कि बायो बबल भले ही एक सुरक्षित वातावरण हो लेकिन यहां भी कुछ परेशानी हुई तो कोरोना आ सकता है। इसके साथ ही अगर बायो बबल को लेकर किसी दूसरे परेशानी पर नजर डाली जाएं तो अभी कुछ समय पहले भारतीय कप्तान विराट कोहली ने एक बयान देते हुए कहा थि कि “बायो बबल में रह रहे सभी लोग शानदार है, माहौल अच्छा है। यही वजह है कि हम साथ खेलने का और बायो बबल में साथ रहने का मजा ले रहे हैं। लेकिन लगातार ऐसा होने से यह कठिन हो जाता है मानसिक थकान पर भी ध्यान देना होगा। टूर्नामेंट या दौरा कितना लंबा है और खिलाड़ियों पर मानसिक रूप से इसका क्या असर पड़ेगा वगैरह। एक जैसे माहौल में 80 दिन तक रहना और दूसरा कुछ नहीं करना या बीच में परिवार से मिलने की अनुमति होना। इन चीजों पर गंभीरता से विचार करना होगा। आखिर में तो आप चाहते हैं कि खिलाड़ी मानसिक रूप से पूरी तरह फिट रहें तो इस बात की बातचीत नियमित तौर पर होनी चाहिए।”

जाहिर है बायो बबल में मानसिक रूप से फिट होने को लेकर कई खिलाड़ी भी बयान दे चुके है। ऐसे में अब ये देखना दिलचस्प होगा कि भविष्य में अगर बायो बबल का दौर ज्यादा चलता है तो इसको और ज्यादा बेहतर बनाने के किस तरह के फैसले लिए जाएंगे। क्योंकि आईपीएल के दौरान खबरें आई थी कि कई टीमों ने मेंटल कोच को टीम के खिलाड़ियों के लिए सकारात्मकता बनाए रखने के लिए नियुक्त किया है। इसलिए अब देखना होगा कि किस तरह से इस बॉयो बबल में खिलाड़ी लगातार क्रिकेट खेलकर प्रदर्शन करते हैं और इसको किस तरह से ज्यादा बेहतर बनाया जा सकता है।

- आयशा आलम