Shootout at Sushant Lok : सिर्फ 2 मिनट में 60 राउंड फायर, 4 शूटर ढेर, Deepak Nandal Gang की धज्जियाँ उड़ गयीं

Shootout at Sushant Lok Gurugram
प्रतिरूप फोटो
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घटना रात करीब नौ बजकर पचास मिनट की है। काली स्कॉर्पियो में सवार पांच हमलावर सुशांत लोक स्थित एक प्रमुख कारोबारी के घर पहुंचे। गाड़ी की नंबर प्लेट पर काली पट्टी लगाकर उसे कैमरों की नजर से बचाने की कोशिश की गई थी।

हरियाणा के गुरुग्राम की सबसे सुरक्षित और पॉश मानी जाने वाली सुशांत लोक कॉलोनी गुरुवार रात अचानक गोलियों की तड़तड़ाहट से दहल उठी। महज दो मिनट तक चली जबरदस्त मुठभेड़ में साठ से अधिक गोलियां चलीं और पूरा इलाका रणभूमि में बदल गया। ब्रिटेन में बैठे कुख्यात गैंगस्टर दीपक नांदल के इशारे पर कथित रूप से दस करोड़ रुपये की रंगदारी वसूलने और कारोबारी की हत्या करने पहुंचे पांच शूटरों को क्राइम ब्रांच ने चारों ओर से घेर लिया। मुठभेड़ में चार शूटर मारे गए, एक गंभीर रूप से घायल हो गया, जबकि तीन पुलिसकर्मी भी गोली लगने से घायल हुए। हरियाणा के इतिहास में इस स्तर की मुठभेड़ बेहद दुर्लभ मानी जा रही है और इसने यह भी संकेत दे दिया है कि दिल्ली एनसीआर में संगठित अपराध और रंगदारी का जाल अब पहले से कहीं अधिक खतरनाक हो चुका है।

घटना रात करीब नौ बजकर पचास मिनट की है। काली स्कॉर्पियो में सवार पांच हमलावर सुशांत लोक स्थित एक प्रमुख कारोबारी के घर पहुंचे। गाड़ी की नंबर प्लेट पर काली पट्टी लगाकर उसे कैमरों की नजर से बचाने की कोशिश की गई थी। तीन बदमाश गाड़ी से उतरे और घर के बाहर खड़ी गाड़ियों, पहली मंजिल की बालकनी और खिड़कियों पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। उस समय कारोबारी घर पर नहीं थे और अपने मित्रों के साथ एक पब में गये हुए थे। घर के भीतर उनकी पत्नी, भाई, बहनोई और घरेलू कर्मचारी मौजूद थे। कई गोलियां घर की दीवारों तक पहुंचीं, लेकिन संयोग से कोई भी घायल नहीं हुआ।

पुलिस के मुताबिक क्राइम ब्रांच को पहले ही खुफिया सूचना मिल चुकी थी कि प्रमुख कारोबारियों पर हमला हो सकता है। इसी कारण संभावित स्थलों के आसपास कई दिनों से सादे कपड़ों में टीमें तैनात थीं। सूचना यह भी थी कि हथियारबंद बदमाश काली स्कॉर्पियो में घूम रहे हैं। जैसे ही हमलावरों ने गोलीबारी शुरू की, क्राइम ब्रांच की पहली टीम ने उन्हें आत्मसमर्पण के लिए कहा। जवाब में बदमाशों ने पुलिस पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं। इसी बीच दो अन्य टीमों ने गली के बाकी दोनों रास्ते भी बंद कर दिए। टी-आकार वाली गली में घिर चुके बदमाशों के पास बच निकलने का कोई रास्ता नहीं बचा था।

बताया जा रहा है कि करीब तीस पुलिसकर्मियों ने इस अभियान में हिस्सा लिया। पुलिस का कहना है कि शूटर स्वचालित पिस्तौलों से लगातार फायरिंग कर रहे थे और उन्होंने करीब चालीस गोलियां चलाईं। जवाबी कार्रवाई में क्राइम ब्रांच ने भी मोर्चा संभाला। घनी आबादी वाले इलाके में आम लोगों की सुरक्षा को देखते हुए पुलिस ने बेहद सतर्कता बरती, लेकिन जब बदमाश नहीं रुके तो उन्हें मुंहतोड़ जवाब दिया गया। दो मिनट तक चली इस मुठभेड़ के दौरान आसपास के लोग अपनी जान बचाने के लिए गाड़ियों और पेड़ों की आड़ में छिप गए। कई लोगों ने अपने मोबाइल फोन से घटना के वीडियो भी बनाए, जिनमें लगातार गूंजती गोलियों की आवाज और हथियारबंद पुलिसकर्मी दिखाई दे रहे हैं।

मुठभेड़ में दीपा उर्फ संदीप, नितिन, अंकित और आर्यन की मौत हो गई, जबकि शिवम गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे तत्काल मेदांता अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसका उपचार चल रहा है। क्राइम ब्रांच के पुलिस उपायुक्त हितेश यादव ने कहा कि घायल आरोपी को हर हाल में जीवित रखना जरूरी है ताकि पूरे गिरोह और साजिश का पर्दाफाश किया जा सके। उन्होंने कहा कि पुलिस को पहले से भरोसेमंद सूचना थी कि दीपक नांदल किसी भी समय हमला करा सकता है। जैसे ही गोलीबारी शुरू हुई, पुलिस ने बदमाशों को भागने का कोई मौका नहीं दिया। उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई का मकसद यह स्पष्ट संदेश देना है कि गुरुग्राम और हरियाणा अपराधियों के लिए सुरक्षित ठिकाना नहीं बन सकते।

पुलिस के अनुसार दीपक नांदल लंबे समय से कारोबारी से दस करोड़ रुपये की रंगदारी मांग रहा था। रकम नहीं मिलने पर उसने कई बार धमकी भरे संदेश भेजे और अंततः हत्या की नीयत से शूटरों को भेजा। मुठभेड़ के बाद फोरेंसिक और बैलिस्टिक विशेषज्ञों ने घटनास्थल से पांच पिस्तौल, पचास से अधिक खाली कारतूस, जिंदा कारतूस और गोलियों से छलनी स्कॉर्पियो बरामद की। जांच में यह भी सामने आया कि स्कॉर्पियो कई हाथों से गुजरने के बाद किराये पर ली गई थी। मामले में हत्या के प्रयास, संगठित अपराध और शस्त्र अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

हालांकि इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक नया विवाद भी खड़ा हो गया है। मुठभेड़ में मारे गए तीन युवकों- आर्यन, अंकित और नितिन के परिवारों ने पुलिस के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है कि उनके बेटे दीपक नांदल गिरोह से जुड़े हुए थे। रोहतक जिले के बालोठ गांव के रहने वाले इन युवकों के परिजनों का कहना है कि उन्हें अपने बेटों की मौत की जानकारी शुक्रवार सुबह गांव के चौकीदार के जरिए मिली और इससे पहले उन्हें किसी भी तरह की आपराधिक गतिविधि की कोई जानकारी नहीं थी।

परिजनों के अनुसार आर्यन बारहवीं कक्षा का छात्र था और पिछले दो वर्षों से भाला फेंक की तैयारी कर रहा था। उसके पिता प्रदीप का कहना है कि आर्यन के पास मोबाइल फोन तक नहीं था और वह नितिन के साथ गया था। उन्होंने कहा कि बच्चों को बहकाना आसान होता है, इसलिए उन्हें एक मौका मिलना चाहिए था। उन्होंने कहा कि कार्रवाई गैंगस्टरों पर होनी चाहिए थी, मासूम बच्चों पर नहीं। वहीं अंकित के पिता अनिल कुमार ने बताया कि उनका बेटा पांच भाई बहनों में इकलौता पुत्र था और दो दिन पहले यह कहकर घर से निकला था कि वह हरिद्वार कांवड़ लेने जा रहा है। उनका दावा है कि अंकित का कभी कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं रहा। नितिन के पिता संजय कुमार ने स्वीकार किया कि उनके बेटे का नाम पहले एक आपराधिक मामले में आया था, लेकिन उन्होंने दीपक नांदल गिरोह से किसी भी संबंध से इंकार किया। 

दूसरी ओर पुलिस अपने दावे पर कायम है। अपराध शाखा के सहायक पुलिस आयुक्त नवीन शर्मा के अनुसार दीपा उर्फ संदीप के खिलाफ पहले से चौदह आपराधिक मामले दर्ज थे, जिनमें शस्त्र अधिनियम और मादक पदार्थ से जुड़े मामले भी शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि अन्य आरोपियों की आपराधिक पृष्ठभूमि की भी जांच की जा रही है। ऐसे में यह मुठभेड़ अब केवल अपराधियों और पुलिस के बीच हुई गोलीबारी भर नहीं रह गई है, बल्कि यह जांच का भी विषय बन गई है कि आखिर इन युवकों की भूमिका क्या थी और वे किस परिस्थिति में इस गिरोह के साथ पहुंचे। फिलहाल इतना तय है कि गुरुग्राम की इस मुठभेड़ ने संगठित अपराध, रंगदारी और युवाओं के अपराध की ओर खिंचने जैसे कई गंभीर सवाल एक साथ खड़े कर दिए हैं।

-नीरज कुमार दुबे

(इस लेख में लेखक के अपने विचार हैं।)
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