Tata Group पर राजनीति करते ही फँस गये Rahul Gandhi, Aircel Founder के पुराने बयान ने खोली Congress के जमाने की पोल

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर आरोप लगाया कि टाटा को आपराधिक तरीके से बर्बाद किया जा रहा है और देश के बड़े कारोबारी नेता इस मुद्दे पर बोलने से डर रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को निशाने पर लेते हुए सवाल किया कि कारोबारी कब तक चुप रहेंगे।
टाटा समूह के नेतृत्व से जुड़े विवाद पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के आरोपों और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के जवाब के बीच अब एयरसेल के संस्थापक सी. शिवशंकरन का बयान भी चर्चा में है। हम आपको याद दिला दें कि शिवशंकरन ने पूर्ववर्ती यूपीए शासनकाल के दौरान कारोबारियों पर कथित राजनीतिक दबाव का अपना अनुभव साझा किया था। उन्होंने कहा था कि उस समय कारोबार बढ़ने पर उद्यमियों को अपनी कंपनी किसी खास व्यक्ति को बेचने के लिए दबाव का सामना करना पड़ता था, जबकि आज कारोबारी माहौल पहले से अलग है। उनके बयान ने कांग्रेस शासनकाल में उद्योग जगत और राजनीतिक सत्ता के संबंधों पर बहस को एक नया संदर्भ दिया है।
राहुल गांधी का आरोप, टाटा विवाद पर सरकार को घेरा
हम आपको बता दें कि राहुल गांधी ने 28 अक्टूबर को सोशल मीडिया मंच एक्स पर आरोप लगाया कि टाटा को आपराधिक तरीके से बर्बाद किया जा रहा है और देश के बड़े कारोबारी नेता इस मुद्दे पर बोलने से डर रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को निशाने पर लेते हुए सवाल किया कि कारोबारी कब तक चुप रहेंगे और क्या भारतीय कारोबार सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों की जागीर है। दरअसल, यह विवाद टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति के प्रस्ताव को लेकर टाटा ट्रस्ट्स की ओर से उठाई गई आपत्तियों के बीच सामने आया था। राहुल गांधी ने इस आंतरिक कॉरपोरेट विवाद को सरकार और कारोबारी जगत के संबंधों से जोड़ते हुए राजनीतिक मुद्दा बनाया।
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निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस के लाइसेंस-कोटा राज का उठाया मुद्दा
राहुल गांधी के आरोपों पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पलटवार करते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष को हर मुद्दे का राजनीतिकरण करने से बचना चाहिए। उन्होंने व्यावसायिक और कानूनी मामलों को बिना ठोस आधार के आपराधिक करार देने पर भी आपत्ति जताई। सीतारमण ने कांग्रेस के शासनकाल के लाइसेंस-कोटा राज का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि उस व्यवस्था ने भारतीय उद्यमियों की कारोबारी क्षमता और उद्यमशीलता को बाधित किया। इसके विपरीत उन्होंने केंद्र की मौजूदा सरकार की नीतियों को उद्योग, निवेश और रोजगार सृजन को प्रोत्साहित करने वाला बताया।
इसके बाद, राहुल गांधी ने जवाब में सवाल किया कि टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के प्रतिनिधियों को अमित शाह के आवास पर किस कारोबारी या कानूनी मामले के सिलसिले में बुलाया गया था। इस तरह दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तेज हो गए।
एयरसेल संस्थापक का बयान: कारोबार बढ़ने पर कंपनी बेचने का दबाव
दूसरी ओर, आपको याद दिला दें कि एयरसेल के संस्थापक सी. शिवशंकरन ने मई 2024 में उद्यमी और पॉडकास्ट होस्ट राज शमानी के कार्यक्रम में अपने कारोबारी अनुभव साझा किए थे। शिवशंकरन ने कहा था कि पहले भारत में कारोबार बढ़ने पर उद्यमियों को कंपनी किसी खास व्यक्ति को बेचने के लिए दबाव का सामना करना पड़ता था। एयरसेल में अपनी 74 प्रतिशत हिस्सेदारी की 2006 में मैक्सिस को हुई बिक्री का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा था कि उन्हें इस सौदे से लगभग 3,400 करोड़ रुपये मिले, जबकि उनके मुताबिक एटीएंडटी को बेचने पर उन्हें आठ अरब डॉलर तक मिल सकते थे। उन्होंने कहा कि उस समय उन्हें सबसे ऊंची पेशकश स्वीकार करने का अवसर नहीं मिला।
शिवशंकरन ने तत्कालीन कारोबारी माहौल और मौजूदा स्थिति की तुलना करते हुए कहा था, “Today no one can pressurize you”, साथ ही उन्होंने भारत को अब उदारीकृत अर्थव्यवस्था बताया था। उन्होंने अपने अनुभव के आधार पर कहा था कि पहले कारोबारियों को किसी खास खरीदार को कंपनी बेचने के लिए दबाव झेलना पड़ता था, जबकि अब उद्यमी अपना कारोबार बनाने और आगे बढ़ाने के लिए अधिक स्वतंत्र महसूस कर सकते हैं।
हम आपको बता दें कि एयरसेल की बिक्री को लेकर शिवशंकरन ने पहले भी आरोप लगाए थे कि उन पर कंपनी को बाजार मूल्य से कम कीमत पर बेचने का दबाव बनाया गया। तत्कालीन दूरसंचार मंत्री दयानिधि मारन और उनके भाई कलानिधि मारन से जुड़े आरोपों की जांच हुई थी। हालांकि, 2017 में विशेष सीबीआई अदालत ने मारन बंधुओं को मामले में आरोपमुक्त कर दिया था।
उद्योग जगत पर दबाव या कारोबार की आजादी?
बहरहाल, राहुल गांधी का आरोप है कि कारोबारी नेता मौजूदा सरकार के दबाव में खुलकर बोलने से बच रहे हैं। इसके जवाब में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस के शासनकाल की लाइसेंस-कोटा व्यवस्था पर सवाल उठाए। वहीं, एयरसेल के संस्थापक सी. शिवशंकरन का बयान इस बहस को एक अलग संदर्भ देता है। उन्होंने अपने कारोबारी अनुभव साझा करते हुए बताया था कि पहले उद्यमियों पर अपनी कंपनी किसी खास खरीदार को बेचने का दबाव बनाया जाता था। उन्होंने मौजूदा कारोबारी माहौल को पहले से अलग बताया। खैर...अब सारा प्रकरण जनता के सामने है और चुनावों के दौरान जनता की अदालत में ही फैसला होगा कि कौन सही है और कौन गलत।
-नीरज कुमार दुबे
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