शून्य से शिखर तक पहुंचा ‘योग’

By अभिनय आकाश | Publish Date: Jun 21 2019 12:46PM
शून्य से शिखर तक पहुंचा ‘योग’
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पिछले कुछ सालों में योग पूरी दुनिया में तेज़ी से लोकप्रिय हुआ है, लेकिन आधिकारिक तौर पर पूरी दुनिया में इसे मान्यता दिलाने की गंभीर और निर्णायक पहल पिछले साल 27 सितम्बर 2014 को हुई। उस दिन संयुक्त राष्ट्र में दिए अपने पहले भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक प्रस्ताव पेश किया जिसके तहत 21 जून को इंटरनेशनल योग दिवस मानाने की बात कही गई।

कुछ सालों बाद अगर ये सवाल पूछा जाएगा कि दुनिया को भारत की सबसे बड़ी देन क्या है तो बेहिचक जवाब होगा ‘योग’। विकास की अंधी दौड़ में जिंदगी को उतनी ही तेज़ रफ़्तार में दौड़ाते विश्व को समझ आने लगा है कि जीवन की सार्थकता और ताज़गी के लिए योग का सहारा लेना ही होगा। पूरी दुनिया में अब योग का डंका बजने लगा है। देश की पांच हज़ार साल पुरानी विद्या अब दुनिया को नई दिशा दे रही है। 21 जून के दिन पूरी दुनिया ने पांचवें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया। योग एक तरह से उस जीवन शैली से मोहभंग की शुरुआत भी है जो पिछले कुछ दशको से हमारे जीवन को मशीनी मकड़जाल में घेरती जा रही थी। 


प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पांचवें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मुख्य कार्यक्रम में झारखंड की राजधानी रांची में शामिल हुए। योग दिवस के मुख्य कार्यक्रम के लिए रांची का चुनाव करने के पीछे पीएम ने तीन कारण भी गिनाए।
 
- पीएम ने कहा कि पहला कारण यह कि झारखंड प्रकृति के बेहद करीब है। यहां की रमणीयता मन-मस्तिष्‍क पर अमिट छाप छोड़ती है। इस लिहाज से रांची में प्रकृति के साथ मिलकर योग करने से इसके बेहद सकारात्‍मक परिणाम मिलेंगे। 
 
- प्रधानमंत्री ने दूसरा कारण गिनाते हुए कहा कि रांची और स्वास्थ्य का रिश्ता इतिहास में दर्ज है। बीते साल सितंबर में हमारी सरकार ने यहीं से विश्‍व की सबसे मुफीद हेल्‍थकेयर आयुष्मान योजना की शुरुआत रांची से ही की थी, ऐसे में रांची में योग दिवस मनाना भी लाजमी था।


 
- तीसरा कारण गिनाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चार 'प' का संदेश देते हुए कहा कि उत्तम स्वास्थ्य के लिए पानी, पोषण, पर्यावरण और परिश्रम करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि योग हमारी संस्कृति का हिस्सा रहा है, ऐसे में झारखंड के छऊ नृत्य की मुद्राओं ने उन्‍हें आदिवासी समाज के बीच जाकर योग करने की वजह दी। 
गौरतलब है कि पीएम मोदी झारखंड और अमित शाह ने हरियाणा में योग किया। दोनों ही जगहों पर इस साल के आखिर में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने इसी वजह से इन दोनों जगहों को चुना। बता दें कि इससे पहले जब उत्तर प्रदेश में चुनाव था उससे पहले पीएम ने लखनऊ में योग दिवस मनाया था। बहरहाल, वर्तमान दौर में देश और दुनिया के लिए योग ही एक ऐसा दर्शन है, जिससे मानव अपनी सारी समस्याओं का निदान कर सकता है। हालांकि देश में समय-समय पर योग को लेकर कुछ विरोध भी होते रहे हैं। कुछ पक्ष योग दिवस और सूर्य नमस्कार का विरोध भी करते दिखते हैं। उनका कहना है कि ये योग मुद्रा धार्मिक तौर पर उन्हें स्वीकार नही है। योग एक आदर्श जीवन शैली है, जो मानवीय उत्थान की ओर ले जाती है। 
 
योग डे बनने का सफ़र
पिछले कुछ सालों में योग पूरी दुनिया में तेज़ी से लोकप्रिय हुआ है, लेकिन आधिकारिक तौर पर पूरी दुनिया में इसे मान्यता दिलाने की गंभीर और निर्णायक पहल पिछले साल 27 सितम्बर 2014 को हुई। उस दिन संयुक्त राष्ट्र में दिए अपने पहले भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक प्रस्ताव पेश किया जिसके तहत 21 जून को इंटरनेशनल योग दिवस मानाने की बात कही गई। उन्होंने शरीर और दिमाग पर पड़ने वाले योग के सकारात्मक प्रभाव की चर्चा की। इसके बाद 11 दिसंबर 2014 को यूएन ने घोषणा कि की हर साल 21 जून को आधिकारिक तौर पर इंटरनेशनल योग डे मनाया जाएगा।
गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र की ओर से किसी भी ऐसे दिवस की घोषणा करने से पहले इसमें शामिल देशों से राय ली जाती है और बहुमत के आधार पर ही इसकी औपचारिक घोषणा की जाती है। जब 21 जून को इंटरनेशनल योग डे मनाने के लिए यूएन ने भारत के प्रस्ताव को पेश किया तो इसे 177 देशों का समर्थन मिला। किसी प्रस्ताव पर इतने देशों का एक साथ समर्थन मिलना एक बड़ी बात थी और यह विश्व रिकॉर्ड बन गया। यही नही,प्रस्ताव पेश होने के 90 दिनों के अन्दर ही उसे पास करवाने का भी एक रिकॉर्ड बन गया। भारत को संयुक्त राष्ट्र में शामिल 193 देशों में से 177 देशों का समर्थन प्राप्त हुआ।
 
21 जून ही क्यों
21 जून को ही योग दिवस मानाने की बात क्यों की गई इसके पीछे तर्क है कि 21 जून को सबसे लंबा दिन होता है। ज्यादातर देशों में इस दिन सुबह जल्दी होती है और सूरज की किरणे सबसे अधिक देर तक धरती पर आती है। इसी वैज्ञानिक तर्क के आधार पीएम मोदी ने 21 जून को योग डे के रूप में मानाने का सुझाव दिया था। विश्व में योग को मान्यता दिलाने के लिए पिछले कई सालों से कोशिश की जा रही थी। वैसे इस मामले में आर्ट ऑफ़ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर ने 2011 में संयुक्त राषट्र में एक प्रस्ताव पेश किया था। जिसमें 21 जून को इंटरनेशनल योग डे मनाने की बात कही गई थी लेकिन यह प्रस्ताव आगे नही बढ़ सका था।
 
योग को पहचान दिलवाने वालों पर एक नज़र
 
पतंजलि- योगसूत्र के रचनाकार पतंजलि काशी में ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी में चर्चा में थे। भारतीय दर्शन साहित्य में पतंजलि के लिखे हुए 3 प्रमुख ग्रन्थ मिलते है- योगसूत्र, अष्टाध्यायी पर भाष्य और आयुर्वेद पर ग्रन्थ। पतंजलि के योग का महत्व इसलिए अधिक है, क्योंकि सर्वप्रथम उन्होंने ही योग विद्या को सुव्यवस्थित रूप दिया। 

टी कृष्णमाचार्य– आधुनिक युग के पितामह मने जाने वाले टी कृष्णमाचार्य का जन्म मैसूर में हुआ थाl वे योग शिक्षक के साथ साथ उपचारक भी थेl  1933 में उन्होंने भारत के पहले योग स्कूल के नींव रखीl 
 
परमहंस योगानंद- परमहंस योगानंद भारतीय योग गुरुओं में उच्च स्थान रखते हैं। परमहंस योगानंद ने ‘ऑटोग्राफी ऑफ ए योगी’ पुस्तक के माध्यम से मेडिटेशन और क्रिया योग से पश्चिमी दुनिया को अवगत कराया। 
 
- अभिनय आकाश
 

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