आयुष्मान भारत योजना के लिए कैसे कराएं रजिस्ट्रेशन ? कितना मिलेगा पैसा ?

By कमलेश पांडे | Publish Date: Jul 8 2019 4:47PM
आयुष्मान भारत योजना के लिए कैसे कराएं रजिस्ट्रेशन ? कितना मिलेगा पैसा ?
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सच कहा जाए तो ''आयुष्मान भारत'' योजना निजी अस्पतालों और बीमा कंपनियों के लिए संजीवनी बन चुकी है। प्रख्यात अमेरिकी उद्योगपति बिल गेट्‍स ने भी आयुष्मान भारत योजना की तारीफ की है।

आयुष्मान भारत योजना या प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, भारत सरकार की एक स्वास्थ्य योजना है, जिसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर लोगों खासकर बीपीएल धारक को स्वास्थ्य बीमा मुहैया कराना है। 
 
इस योजना के अन्तर्गत आने वाले प्रत्येक परिवार को 5 लाख रुपये तक का कैशरहित स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध कराया जा रहा है। 
 


एक आंकड़े के मुताबिक, 10 करोड़ बीपीएल धारक परिवार समेत लगभग 50 करोड़ लोग इस योजना का प्रत्यक्ष लाभ उठाने की दिशा की ओर अग्रसर हैं। इसके अलावा बाकी बची आबादी को भी इस योजना के अन्तर्गत लाने की योजना है।
 
आयुष्मान भारत योजना को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 14 अप्रैल 2018 को बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर की जयन्ती के दिन छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले से आरम्भ किया था। जबकि अंत्योदय के स्वप्नद्रष्टा पंडित दीन दयाल उपाध्याय की जन्मतिथि 25 सितंबर 2018 से प्रधानमंत्री मोदी द्वारा ही इस योजना को पूरे देश में लागू कर दिया गया है।
 
इस योजना में दो प्रमुख तत्व शामिल हैं:- एक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना, जो अब आयुष्मान भारत योजना में तब्दील हो चुकी है, के तहत सरकार 10 करोड़ गरीब और कमजोर परिवारों के लगभग 50 करोड़ लाभार्थियों को कवर कर रही है। यह हर परिवार के लिये, प्रति वर्ष 5 लाख रुपये के मुल्य के लिए माध्यमिक और तृतीयक स्तर पर अस्पताल में देखभाल के लिये कवरेज प्रदान करती है। 


इस योजना के लाभ पूरे देश में कहीं भी पैनल में शामिल निजी या सरकारी अस्पतालों में लिए जा सकते हैं। इस योजना के अंतर्गत आने वाले लाभार्थी को देश भर के किसी भी सार्वजनिक या निजी अस्पताल से कैशलेस लाभ लेने की अनुमति है।


 
एस.ई.सी.सी डेटाबेस में दिए गए मानदंड के आधार पर यह तय किया गया है कि किसे इस योजना का लाभ उठाने का हक है। यह योजना लगभग 10.74 करोड़ गरीब, वंचित ग्रामीण परिवारों और विस्तृत शहरी कर्मचारियों के परिवारों को लक्षित कर रहा है। यह परिवार एस.ई.सी.सी. डेटाबेस, जिसमें गांवों और शहरों दोनों के डेटा शामिल हैं, के मुताबिक तय होंगे। यह लगभग सभी माध्यमिक और कई तृतीयक अस्पतालों को कवर करता है, एक नकारात्मक सूची को छोड़कर।
 
दूसरा, कल्याण केंद्र, इस योजना के तहत स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र में प्रदान की जाने वाली निम्न सेवाओं को भी शामिल किया गया है: जैसे, गर्भावस्था देखभाल और मातृ स्वास्थ्य सेवाएं, नवजात और शिशु स्वास्थ्य सेवाएं, बाल स्वास्थ्य, जीर्ण संक्रामक रोग, गैर संक्रामक रोग, मानसिक बीमारी का प्रबंधन, दांतों की देखभाल, बुजुर्ग के लिए आपातकालीन चिकित्सा, आदि।
 
एक प्रारंभिक आंकड़े के मुताबिक, आयुष्मान भारत योजना के तहत स्वास्थ्य बीमा का लाभ लेने वालों की संख्या 20 लाख के पार निकल गई है। कुल मिलाकर अब तक 3.07 करोड़ लाभार्थियों को योजना के तहत ई-कार्ड जारी किए गए हैं। इस योजना की देखरेख करने वाली एजेंसी राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) के मुताबिक, इस योजना के लागू होने के पहले 200 दिनों में पीएम-जेएवाई के तहत 20.8 लाख से अधिक गरीब लोग लाभान्वित हुए। 
 
इसके तहत चिकित्सा बीमा की इस योजना के तहत इन लोगों को 5,000 करोड़ रुपए के इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई गई। हालांकि, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के प्रयासों से यह खर्च 2,760 करोड़ रुपए रहा। 
 
इस योजना के तहत अब तक 3.07 करोड़ लाभार्थियों को पीएम-जेएवाई का ई-कार्ड जारी किया गया है। इसी योजना के तहत 15,400 अस्पताल को भी जोड़ा गया है, जिनमें से 50 प्रतिशत निजी अस्पताल हैं। सच कहा जाए तो 'आयुष्मान भारत' योजना निजी अस्पतालों और बीमा कंपनियों के लिए संजीवनी बन चुकी है। प्रख्यात अमेरिकी उद्योगपति बिल गेट्‍स ने भी आयुष्मान भारत योजना की तारीफ की है।
 
सरकार इस योजना के माध्यम से गरीब, उपेक्षित परिवार और शहरी गरीब लोगों के परिवारों को स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध कराना चाहती है। क्योंकि सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना 2011 के हिसाब से ग्रामीण इलाके के 8.03 करोड़ परिवार और शहरी इलाके के 2.33 करोड़ परिवार आयुष्मान भारत योजना के दायरे में आ रहे हैं। जबकि इस योजना के दायरे में लगभग 50 करोड़ लोग आएंगे।
आयुष्मान भारत योजना में हर परिवार को सालाना पांच लाख रुपये का मेडिकल इंश्योरेंस मिल रहा है। साल 2008 में यूपीए सरकार द्वारा लांच राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना को भी आयुष्मान भारत योजना में मिला दिया गया है। मोदी सरकार ने महिला, बच्चे और सीनियर सिटीजन को इस योजना में खास तौर पर तरजीह दी है।
 
खास बात यह कि आयुष्मान भारत योजना में शामिल होने के लिए परिवार के आकार और उम्र का कोई बंधन नहीं है। सरकारी अस्पताल और पैनल में शामिल अस्पताल में आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थियों का कैशलेस और पेपरलेस इलाज हो सकेगा।
 
एसईसीसी के आंकड़ों के हिसाब से आयुष्मान भारत योजना में लोगों को मेडिकल इंश्योरेंस मिल रहा है। एसईसीसी के आंकड़ों के हिसाब से ग्रामीण इलाके की आबादी में डी-1, डी-2, डी-3, डी-4, डी-5 और डी-7 कैटेगरी के लोग आयुष्मान भारत योजना में शामिल किये गए हैं। वहीं, शहरी इलाके में 11 पूर्व निर्धारित पेशे व कामकाज के हिसाब से लोग आयुष्मान भारत योजना में शामिल हो सकते हैं। राज्यों में राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना में पहले से शामिल लोग खुद ही आयुष्मान भारत योजना में शामिल हो गए हैं।
 
आयुष्मान भारत योजना में शामिल होने के लिए मोटे तौर पर ग्रामीण इलाके में कच्चा मकान होना चाहिए, परिवार में किसी व्यस्क (16-59 साल) का नहीं होना, परिवार की मुखिया महिला हो, परिवार में कोई दिव्यांग हो, अनुसूचित जाति और जनजाति से हों और भूमिहीन व्यक्ति व दिहाड़ी मजदूर हों। इसके अलावा, ग्रामीण इलाके के बेघर व्यक्ति, निराश्रित, दान या भीख मांगने वाले, आदिवासी और क़ानूनी रूप से मुक्त बंधुआ आदि खुद आयुष्मान भारत योजना में शामिल हो जायेंगे।
 
जबकि, शहरी इलाकों में भिखारी, कूड़ा बीनने वाले, घरेलू कामकाज करने वाले, रेहड़ी-पटरी दुकानदार, मोची, फेरी वाले, सड़क पर कामकाज करने वाले अन्य व्यक्ति, कंस्ट्रक्शन साईट पर काम करने वाले मजदूर, प्लंबर, राजमिस्त्री, मजदूर, पेंटर, वेल्डर, सिक्योरिटी गार्ड, कुली और भार ढोने वाले अन्य कामकाजी व्यक्ति स्वीपर, सफाई कर्मी, घरेलू काम करने वाले, हेंडीक्राफ्ट का काम करने वाले लोग, टेलर, ड्राईवर, रिक्शा चालक, दुकान पर काम करने वाले लोग आदि आयुष्मान भारत योजना में शामिल किये जा रहे हैं। 
आयुष्मान भारत योजना का लाभार्थी अस्पताल में एडमिट होने के लिए कोई चार्ज नहीं चुकाएगा। अस्पताल में दाखिल होने से लेकर इलाज तक का सारा खर्च इस योजना में कवर किया जायेगा। आयुष्मान भारत योजना के लाभ में अस्पताल में दाखिल होने से पहले और बाद के खर्च भी कवर किये जायेंगे।
 
पैनल में शामिल हर अस्पताल में एक आयुष्मान मित्र होगा। वह मरीज की मदद करेगा और उसे अस्पताल की सुविधाएं दिलाने में मदद करेगा। अस्पताल में एक हेल्प डेस्क भी होगा जो दस्तावेज चेक करने, स्कीम में नामांकन के लिए वेरिफिकेशन में मदद करेगा। आयुष्मान भारत योजना में शामिल व्यक्ति देश के किसी भी सरकारी या पैनल में शामिल निजी अस्पताल में इलाज करा सकेगा।
 
आयुष्मान भारत योजना में तकरीबन हर बीमारी के लिए चिकित्सा और अस्पताल में दाखिल होने का खर्च कवर है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने आयुष्मान भारत योजना में 1354 पैकेज शामिल किये हैं। इसमें कोरोनरी बायपास, घुटना बदलना और स्टंट डालने जैसे इलाज शामिल हैं। आयुष्मान भारत योजना में इलाज का खर्च केंद्र सरकार की स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) से 15-20 फीसदी कम है।
 
आयुष्मान भारत योजना का लाभ लेने के लिए कोई औपचारिक प्रक्रिया नहीं है। बस एक बार इसके योग्य होने पर आप सीधे इलाज करा सकते हैं। सरकार द्वारा चिन्हित परिवारों के लोग इस योजना में शामिल हो सकते हैं। केंद्र सरकार, सभी राज्य सरकार और इलाके की अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ आयुष्मान भारत योजना के लिहाज से योग्य परिवार की जानकारी साझा करेगी। उसके बाद इन परिवारों को एक फैमिली आइडेंटिफिकेशन नंबर मिलेगा। लिस्ट में शामिल लोग ही आयुष्मान भारत योजना का लाभ उठा सकते हैं। जिन लोगों के पास 28 फरवरी 2018 तक राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना का कार्ड होगा, वे भी आयुष्मान भारत योजना का लाभ उठा सकते हैं।
 
सभी सरकारी अस्पताल में आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थी इलाज करा सकते हैं। इसके साथ ही सरकार के पैनल में शमिल निजी अस्पताल में भी इस योजना के लाभार्थी इलाज करा सकते हैं। हां, पैनल में शामिल होने के लिए निजी अस्पताल में कम से कम 10 बेड और इसे बढ़ाने की क्षमता होनी चाहिए। 
 
बता दें कि लाभार्थियों के हित में सरकार द्वारा आयुष्मान भारत योजना के लिए एक हेल्पलाइन नंबर 14555 जारी किया गया है, जिस पर आप कभी भी कॉल कर सकते हैं। इस पर आपको समस्त जानकारियां मुहैय्या करवाई जाएंगी।
 
-कमलेश पांडे
(वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार)
 

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