अटल पेंशन योजना के फायदे क्या हैं ? इससे किस उम्र में और कैसे जुड़ा जा सकता है ?

  •  कमलेश पांडे
  •  जून 26, 2019   17:07
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अटल पेंशन योजना के फायदे क्या हैं ? इससे किस उम्र में और कैसे जुड़ा जा सकता है ?

अटल पेंशन योजना हेतु निवेश के इच्छुक लोगों को छह भागों में बांटा गया है, जिसे दिए हुए चार्ट (1) के माध्यम से समझा जा सकता है। इस योजना का फायदा उठाने के लिए आपकी उम्र 18 से 40 साल के बीच होनी चाहिए।

आमतौर पर अटल पेंशन योजना में कोई भी भारतीय अपना निवेश शुरू कर सकता है। बस, इस योजना में भाग लेने के लिए आपका बैंक खाता होना जरूरी है। साथ ही, इस योजना के वास्ते खाता खोलने के लिए इसका आधार कार्ड से जुड़ा होना भी अनिवार्य है। शर्त सिर्फ इतनी कि अटल पेंशन योजना का लाभ उन्हीं लोगों को मिल सकता है जो इनकम टैक्स स्लैब से बाहर हैं। साथ ही, ईपीएफ और ईपीएस योजना का लाभ पहले से नहीं ले रहे हैं।

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# अटल पेंशन योजना में शामिल होने के लिए आयु सीमा क्या है और कम से कम कितने साल निवेश करना होगा?

अटल पेंशन योजना हेतु निवेश के इच्छुक लोगों को छह भागों में बांटा गया है, जिसे दिए हुए चार्ट (1) के माध्यम से समझा जा सकता है। इस योजना का फायदा उठाने के लिए आपकी उम्र 18 से 40 साल के बीच होनी चाहिए। इसके अलावा, इस योजना के तहत पेंशन पाने के लिए आपको कम से कम 20 साल तक निवेश करना होगा। हां, यदि उससे पहले पति की मृत्यु हो जाती है तो पत्नी या उसके बच्चे एकमुश्त राशि या फिर अंशदान जमा करते रहने पर आजीवन पेंशन के हकदार होंगे। पति की मृत्यु पर पत्नी और पत्नी की मृत्यु पर नॉमिनी एक मुश्त दावा धनराशि या फिर आजीवन पेंशन के हकदार होंगे।

# अटल पेंशन योजना के तहत किसी भी निवेशक को कितना पेंशन मिलेगा? क्या है उसका स्लैब?

अटल पेंशन योजना में पेंशन की रकम आपके द्वारा किए गए निवेश और आपकी तत्कालीन उम्र पर निर्भर करती है। हालांकि इस योजना के तहत किसी भी व्यक्ति को कम से कम 1,000 रुपये और अधिकतम 5,000 रुपये मासिक पेंशन मिल सकती है। पेंशन शुरू होने की उम्र सीमा 60 साल है। इस उम्र से आपको पेंशन मिलनी शुरू हो जाएगी। हां, इतना अवश्य है कि आप जितनी जल्दी इस पेंशन योजना से जुड़ेंगे, उतना अधिक फायदा आपको मिलेगा। उदाहरणतः, अगर कोई व्यक्ति 18 साल की उम्र में इस पेंशन योजना से जुड़ता है तो उसे हर महीने 210 रुपये का निवेश करना होगा। तब जाकर रिटायर होने के बाद अर्थात् 60 साल की उम्र से आपको हर महीने 5000 रुपये मासिक पेंशन मिलेगी। यहां यह स्पष्ट कर दें कि ऐसे लोग जो आयकर के दायरे में आते हैं, या सरकारी इम्प्लाई हैं या फिर पहले से ही ईपीएफ और ईपीएस जैसी योजना का लाभ ले रहे हैं, वे किसी भी कीमत पर अटल पेंशन योजना का हिस्सा नहीं बन सकते।

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# कम निवेश में अपना और अपने आश्रितों का भविष्य कीजिए सुरक्षित

खास बात यह कि अटल पेंशन योजना से आप जितनी जल्‍दी जुड़ेंगे, आपको उतने ही कम पैसे जमा करने होंगे। अगर आप 60 साल की उम्र के बाद प्रति माह 5,000 रुपए प्राप्‍त करना चाहते हैं तो अटल पेंशन योजना से बेहतर विकल्‍प कदापि नहीं मिलेगा। क्योंकि इस योजना से अगर आप 18 साल की उम्र में जुड़ते हैं और प्रतिदिन 7 रुपये बचाकर हर महीने मात्र 210 रुपए जमा करते हैं तो 60 साल की उम्र के बाद आपको हर महीने 5,000 रुपए मिलेंगे।

# अटल पेंशन योजना के तहत कितनी मिलती है पेंशन? और कितने-कितने रुपये का है स्लैब?

अटल पेंशन योजना के तहत पात्र व्‍यक्ति को 1,000 रुपए से 5,000 रुपए तक की पेंशन प्रति माह मिल सकती है। हां, आप जितनी कम उम्र में इस योजना में निवेश की शुरुआत करेंगे, आपको प्रति माह उतनी ही कम रकम देनी होगी। उदाहरणतः प्रति माह 1,000 रुपए की पेंशन प्राप्‍त करने के लिए निवेशक को उसकी उम्र के हिसाब से 42 रुपए से लेकर 291 रुपए प्रति माह जमा करवाना पड़ सकता है। लेकिन, किस्‍त देने वाले व्‍यक्ति की यदि किसी कारणवश मृत्‍यु हो जाती है तो उसके नॉमिनी को एकमुश्‍त 1,70,000 रुपए मिलेंगे। उसी प्रकार, यदि आप प्रति माह 2,000 रुपए की पेंशन पाना चाहते हैं तो आपको प्रत्येक माह 84 रुपए से लेकर 582 रुपए तक की किस्‍त देनी होगी, जो आपकी उम्र पर निर्भर करती है। यदि इस दौरान व्‍यक्ति और उसकी पत्‍नी की मृत्‍यु किसी कारणवश हो जाती है तो उनके नामित संतान को 3,40,000 रुपए एकमुश्त मिल जाएंगे। इसी तरह, प्रति माह 5000 रुपए की पेंशन के लिए आपको प्रत्येक महीने 210 रुपए से लेकर 1,454 रुपए जमा करने पड़ सकते हैं। यदि इस दौरान व्‍यक्ति और उसकी पत्नी की मौत हो जाती है तो उनके द्वारा नामित किये गए संतान को 8,50,000 रुपए की एकमुश्त धनराशि मिलेगी।

# आखिर कौन-कौन उठा सकता है अटल पेंशन योजना का बेमिसाल फायदा

बता दें कि मोदी सरकार द्वारा शुरू की गई अटल पेंशन योजना समाज के कमजोर वर्ग के लिए है ताकि 60 साल के बाद उन्‍हें आर्थिक परेशानियों का सामना नहीं करना पड़े। यही वजह है कि इस योजना से 18 से 40 साल तक की उम्र के वैसे सभी लोग जुड़ सकते हैं, जो इसके वास्तविक पात्र हैं। क्योंकि इस योजना में कम से कम 20 साल का निवेश करना नितांत जरूरी है, मृत्यु गत परिस्थितियों के अलावे। खास बात यह कि अटल पेंशन योजना से जुड़ने के लिए किसी भी बैंक में आपका एक बचत खाता और आधार कार्ड होना अनिवार्य है।

अटल पेंशन योजना के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए आप दी हुई वेबसाइट के लिंक पर जाकर अद्यतन जानकारी हासिल कर सकते हैं: https://npscra.nsdl.co.in/nsdl/scheme-details/APY_Scheme_Details.pdf

-कमलेश पांडे

(वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार)







कोरोना महामारी से जूझती जनता के लिए आरबीआई ने कीं यह पहलें

  •  जे. पी. शुक्ला
  •  जनवरी 16, 2021   15:57
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कोरोना महामारी से जूझती जनता के लिए आरबीआई ने कीं यह पहलें

लगातार अधिक तरलता को देखते हुए मौजूदा नीति दर गलियारे को 50 बीपीएस से बढ़ाकर 65 बीपीएस करने का निर्णय लिया गया है। नए कॉरिडोर के तहत, तरलता समायोजन सुविधा (एलएएफ) के तहत रिवर्स रेपो दर पॉलिसी रेपो दर से 40 बीपीएस कम होगी।

मौजूदा कोविड-19  महामारी के मद्देनजर भारतीय बाजार में खुदरा और साथ ही संस्थागत प्लेयर्स पर बोझ को कम करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा हाल ही में कई उपाय किए गए हैं। RBI ने हाल ही में 27 मार्च, 2020 को एक कोविद-19 नियामक पैकेज की घोषणा की थी, जिसमें भारत भर के उधारदाताओं को सभी किश्तों के भुगतान पर तीन महीने- 1 मार्च, 2020 और 31 मई, 2020 (मोरेटोरियम पीरियड) के बीच की मोहलत देने की अनुमति थी। 

यह स्टेटमेंट विभिन्न विकासात्मक और विनियामक नीतियों को निर्धारित करता है, जो COVID-19 की वजह से वित्तीय स्थितियों की मुश्किलों को सीधे संबोधित करता है। इसमें शामिल हैं: (i) सिस्टम में तरलता का विस्तार से यह सुनिश्चित करना कि वित्तीय बाजार और संस्थान COVID से संबंधित अव्यवस्थाओं के सामने सामान्य रूप से कार्य करने में सक्षम हैं; (ii) मौद्रिक संचरण को सुदृढ़ करना ताकि आसान शर्तों पर बैंक ऋण प्रवाह उन लोगों के लिए बने रहे जो महामारी से प्रभावित रहे हैं; (iii) COVID-19 व्यवधानों के कारण पुनर्भुगतान के दबावों को कम करने और कार्यशील पूंजी तक पहुंच में वित्तीय तनाव कम करना और (iv) महामारी की शुरुआत और इसके प्रसार के साथ उच्च अस्थिरता को देखते हुए बाजारों के कामकाज में सुधार।

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नियामक पैकेज के तहत कुछ उपाय:

1. लक्षित दीर्घकालिक परिचालन संचालन (Targeted Long Term Repos Operations (TLTROs)

भारत में COVID-19 की शुरुआत और तेजी से प्रसार ने घरेलू इक्विटी, बॉन्ड और विदेशी मुद्रा बाजारों में बड़े बिकवाली को उत्साहित किया है। रिडेम्पशन प्रेशर के तेज होने से कॉरपोरेट बॉन्ड, कमर्शियल पेपर और डिबेंचर जैसे इंस्ट्रूमेंट्स पर लिक्विडिटी प्रीमियर बढ़ गए हैं। COVID-19 प्रकोप के साथ व्यापारिक गतिविधि के कमज़ोर होने के साथ, इन उपकरणों के लिए वित्तीय स्थितियां, जो उपयोग की जाती हैं, बैंक क्रेडिट में मंदी की स्थिति में कार्यशील पूंजी तक पहुंचने के लिए इसे सख्त कर दिया गया है।

बैंकों को प्राथमिक बाज़ार निर्गमों से अपने सक्षम उपकरणों के वृद्धिशील होल्डिंग्स के पचास प्रतिशत और द्वितीयक बाजार से शेष पचास प्रतिशत का अधिग्रहण करना होगा, जिसमें म्यूचुअल फंड और गैर-बैंकिंग वित्त कंपनियां शामिल हैं। इस सुविधा के तहत बैंकों द्वारा किए गए निवेश को परिपक्वता (HTM) के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा, यहां तक कि कुल निवेश का 25 प्रतिशत से अधिक HTM पोर्टफोलियो में शामिल करने की अनुमति होगी। 

2. नकद आरक्षित अनुपात (Cash Reserve Ratio)

बैंकिंग प्रणाली में तरलता पर्याप्त बनी हुई है, जैसा कि 1-25 मार्च, 2020 के दौरान दैनिक औसत आधार पर 2.86 लाख करोड़ के ऑर्डर के एलएएफ के रिवर्स रेपो परिचालन के तहत बैंकिंग प्रणाली से अधिशेष के अवशोषण में परिलक्षित होता है। हालाँकि, इस तरलता का वितरण वित्तीय प्रणाली में अत्यधिक विषम है और बैंकिंग प्रणाली के भीतर भी ऐसा ही है।

COVID-19 के कारण होने वाले व्यवधान पर बैंकों की मदद करने के लिए एकमुश्त उपाय के रूप में, सभी बैंकों के नकदी आरक्षित अनुपात (CRR) को 100 आधार अंकों की घटाकर शुद्ध मांग और समय देनदारियों (एनडीटीएल) के 3.0 प्रतिशत करने का निर्णय 28 मार्च, 2020 के रिपोर्टिंग पखवाड़े से लिया गया है। सीआरआर में यह कमी सम्पूर्ण बैंकिंग प्रणाली में लगभग 1,37,000 करोड़ की प्राथमिक तरलता को अतिरिक्त एसएलआर की होल्डिंग्स के संबंध में घटकों की देयताओं के अनुपात में जारी करेगी। यह वितरण 26 मार्च, 2021 को समाप्त होने वाली एक वर्ष की अवधि के लिए उपलब्ध होगा।

इसके अलावा, कर्मचारियों की सामाजिक दूरी और परिणामस्वरूप बैंकों द्वारा सामना की जाने वाली कठिनाइयों का संज्ञान लेते हुए, पहले दिन से प्रभावी दैनिक सीआरआर बैलेंस रखरखाव की आवश्यकता को 90 प्रतिशत से घटाकर 80 प्रतिशत करने का निर्णय 28 मार्च, 2020 से लिया गया है। 

3. सीमांत स्थायी सुविधा (Marginal Standing Facility)

सीमांत स्थायी सुविधा (MSF) के तहत, बैंक वैधानिक तरलता अनुपात (SLR) में 2 प्रतिशत तक की कटौती करके अपने विवेक पर रातोंरात उधार ले सकते हैं।

TLTRO, CRR और MSF से संबंधित ये तीन उपाय सिस्टम में कुल 3.74 लाख करोड़ की तरलता को इंजेक्ट करेंगे।

4. मौद्रिक नीति दर गलियारे का चौड़ीकरण (Widening of the Monetary Policy Rate Corridor)

लगातार अधिक तरलता को देखते हुए मौजूदा नीति दर गलियारे को 50 बीपीएस से बढ़ाकर 65 बीपीएस करने का निर्णय लिया गया है। नए कॉरिडोर के तहत, तरलता समायोजन सुविधा (एलएएफ) के तहत रिवर्स रेपो दर पॉलिसी रेपो दर से 40 बीपीएस कम होगी। सीमांत स्थायी सुविधा (MSF) की दर पॉलिसी रेपो दर से 25 बीपीएस ऊपर रहेगी।

इस तरह के प्रयास वास्तविक अर्थव्यवस्था के वित्तीय तनाव के संचरण को रोकेंगे और व्यवहार्य व्यवसायों की निरंतरता सुनिश्चित करेंगे और इन असाधारण रूप से परेशान समय में उधारकर्ताओं को राहत प्रदान करेंगे।

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5. सावधि ऋण पर अधिस्थगन (Moratorium on Term Loans)

सभी वाणिज्यिक बैंकों (क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, छोटे वित्त बैंकों और स्थानीय क्षेत्र के बैंकों सहित), सहकारी बैंक, अखिल भारतीय वित्तीय संस्थान और NBFC (आवास वित्त कंपनियों और सूक्ष्म-वित्त संस्थानों सहित) ("ऋण देने वाली संस्थाएं)" को 1 मार्च, 2020 तक बकाया सभी सावधि ऋणों के संबंध में किश्तों के भुगतान पर तीन महीने की मोहलत देने की अनुमति दी गई। 

6. कार्यशील पूंजी सुविधाओं पर ब्याज का स्थगितकरण (Deferment of Interest on Working Capital Facilities)

नकद ऋण / ओवरड्राफ्ट के रूप में स्वीकृत कार्यशील पूंजीगत सुविधाओं के संबंध में, उधार देने वाली संस्थाओं को 1 मार्च, 2020 तक बकाया ऐसी सभी सुविधाओं के संबंध में ब्याज के भुगतान पर तीन महीने की छूट देने की अनुमति दी जा रही है। ब्याज का भुगतान आस्थगित अवधि की समाप्ति के बाद किया जाएगा।

उधारकर्ताओं को COVID-19 की वजह से उत्पन्न आर्थिक गिरावट से सक्षम बनाने के लिए विशेष रूप से अधिस्थगन / स्थगन प्रदान किया जा रहा है।

7. वर्किंग कैपिटल फाइनेंसिंग में आसानी (Easing of Working Capital Financing)

नकद ऋण / ओवरड्राफ्ट के रूप में स्वीकृत कार्यशील पूंजी सुविधाओं के संबंध में, उधार देने वाली संस्थाएं मार्जिन को कम करके और / या उधारकर्ताओं के लिए कार्यशील पूंजी चक्र को आश्वस्त करके ड्राइंग पावर को रिकलकुलेट कर सकती हैं। उधारकर्ताओं के लिए विशेष रूप से COVID-19 से आर्थिक गिरावट की वजह से दी गई क्रेडिट शर्तों में इस तरह के बदलाव को उधारकर्ता की वित्तीय कठिनाइयों के कारण दी गई रियायतों के रूप में नहीं माना जाएगा।

8. नेट स्टेबल फंडिंग रेशियो (NSFR) के कार्यान्वयन को स्थगित करना (Deferment of Implementation of Net Stable Funding Ratio (NSFR)

वैश्विक वित्तीय संकट के बाद के वर्षों में किए गए सुधारों के हिस्से के रूप में, बेसल कमेटी ऑन बैंकिंग सुपरविजन (BCBS) ने नेट स्टेबल फंडिंग रेशियो (NSFR) की शुरुआत की थी, जो बैंकों को फंडिंग के पर्याप्त स्थिर स्रोतों के लिए अपनी गतिविधियों की फंडिंग को भविष्य के वित्त पोषण के तनाव के जोखिम को कम करने के लिए बैंकों की आवश्यकता के हिसाब से जोखिम को कम करता है।  

- जे. पी. शुक्ला







रेकरिंग डिपॉजिट से तैयार कीजिए एकमुश्त धनराशि, खाता संचालन प्रक्रिया हुई बेहद आसान

  •  कमलेश पांडेय
  •  जनवरी 14, 2021   13:34
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रेकरिंग डिपॉजिट से तैयार कीजिए एकमुश्त धनराशि, खाता संचालन प्रक्रिया हुई बेहद आसान

बता दें कि पोस्ट ऑफिस आरडी पर 5.8 प्रतिशत ब्याज दे रहा है। आप आरडी स्कीम में न्यूनतम 100 रुपए हर महीने निवेश कर सकते हैं। यदि अधिक करने की इच्छा है तो 10 रुपये के गुणक में ही करें। अधिकतम राशि की कोई सीमा नहीं है वैध तरीके से।

किसी भी व्यक्ति को 5-10 साल के अंतराल पर एकमुश्त धनराशि की जरूरत पड़ती है। कभी कभी प्रत्येक 10-20 वर्ष में बड़ी पूंजी की जरूरत महसूस होती है। लेकिन यह बात उनको काफी खलती है जिन्हें कोई सम्पत्ति या बड़ी पूंजी नहीं होती है। ऐसे में हम आपको यह बताना चाहते हैं कि अपनी नियमित या मासिक आय में से ही कुछ राशि बचाएं और उसे पोस्ट ऑफिस के आरडी खाते में जमा करें, ताकि आपकी भविष्य की योजनाएं निर्बाध रूप से साकार हो सकें।

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अब आपको यह पता होना चाहिए कि ऑनलाइन बैंकिंग के जरिए पोस्ट ऑफिस के आर डी (रेकरिंग डिपाजिट) अकाउंट में आप घर बैठे ही पैसा जमा कर सकते हैं और आईपीपीबी ऐप के जरिए आपका यह काम होगा। इस प्रकार अब प्रति माह पैसा जमा करने के लिए पोस्ट ऑफिस जाने का चक्कर नहीं होगा और आसानीपूर्वक आपका पैसा आपके आर डी एकाउंट में जमा होता जाएगा। 

बता दें कि पोस्ट ऑफिस आरडी पर 5.8 प्रतिशत ब्याज दे रहा है। आप आरडी स्कीम में न्यूनतम 100 रुपए हर महीने निवेश कर सकते हैं। यदि अधिक करने की इच्छा है तो 10  रुपये के गुणक में ही करें। अधिकतम राशि की कोई सीमा नहीं है वैध तरीके से। ऐसे में यदि आपका रेकरिंग डिपॉजिट अकाउंट पोस्ट ऑफिस में है तो आपको इसमें पैसा जमा करने के लिए पोस्ट ऑफिस जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, बल्कि आप  इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (आईपीपीबी) ऐप के माध्यम से पोस्ट ऑफिस आरडी में ऑनलाइन पैसा जमा कर सकते हैं। कहने का तातपर्य यह कि आप अपनी मासिक किस्त को इस ऐप के माध्यम से ऑनलाइन अपने आरडी खाते में ट्रांसफर कर सकते हैं।

बताते चलें कि आप ऐसे ऐप से अपनी नियत राशि डिपाजिट कर सकते हैं। सबसे पहले अपने बैंक खाते से आईपीपीबी अकाउंट में पैसे ट्रांसफर करें। फिर डीओपी प्रॉडक्ट्स पर जाएं और यहां पर रेकरिंग डिपॉजिट चुनें।

आर डी अकाउंट नंबर और फिर डीओपी कस्टमर आईडी लिखें। उसके बाद इंस्टालमेंट पीरियड और अमाउंट दर्ज करें। इतना करने पर इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक आपको आईपीपीबी ऐप के जरिए किए गए पेमेंट ट्रांसफर के लिए सूचित करेगा। इस तरह से आप इंडिया पोस्ट द्वारा ऑफर की जाने वाली अन्य स्कीम्स में भी आईपीपीबी बचत खाते के माध्यम से नियमित भुगतान कर सकते हैं।

आपको मालूम होना चाहिए कि आरडी यानी आवर्ती जमा (रेकरिंग डिपॉजिट) किसी भी बड़ी बचत में आपकी मदद कर सकती है। एक तरह से आप इसका इस्‍तेमाल गुल्लक की तरह कर सकते हैं। आशय यह कि आप इसमें हर महीने सैलरी आने पर एक निश्चित रकम डालते रहें और इसके मेच्योर होने पर आपके हाथ में एक बड़ी रकम होगी। फिलवक्त इंडिया पोस्ट की आरडी में 5.8 फीसदी ब्याज मिल रहा है। इस आरडी स्कीम में आप मिनिमम 100 रुपए हर महीने निवेश कर सकते हैं। इससे ज्यादा 10 के मल्टीपल में आप कोई भी रकम जमा करा सकते हैं। मैक्सिमम जमा राशि की कोई लिमिट नहीं है।

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उल्लेखनीय है कि इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक की शुरुआत 1 सितंबर 2018 को हुई थी। आईपीपीबी देशभर में फैले 1.55 लाख पोस्ट ऑफिस और 3 लाख पोस्टल एम्पलॉयीज के जरिए अपनी बेहतर सेवाएं दे रहा है। इसमें 1.35 लाख पोस्ट ऑफिस ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित हैं। आईपीपीबी मौजूदा समय में 13 भाषाओं में अपनी सेवाएं उपलब्ध करा रहा है। आप अपनी भावी बड़ी जरूरतों यथा- बच्चों की शिक्षा, उनके लिए बड़ी पूंजी की व्यवस्था, खुद के लिए अप्रत्याशित बड़े आकस्मिक व्यय के वास्ते पूंजी की व्यवस्था, शादी-विवाह व अन्य सामाजिक संस्कारों के निमित्त इसका उपयोग कर सकते हैं। कोई भी व्यक्ति अपनी नियमित आय या मासिक आय में से कुछ राशि की बचत करके अपने आरडी एकाउंट को चला सकता है। ऐसा करने से उसके पूरे परिवार का भला होगा।

- कमलेश पांडेय

वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार







अपने रिटायरमेंट की योजना बनाइए, दिए हुए टिप्स पर ध्यान दीजिए

  •  कमलेश पांडेय
  •  जनवरी 9, 2021   12:40
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अपने रिटायरमेंट की योजना बनाइए, दिए हुए टिप्स पर ध्यान दीजिए

आपको पता है कि किसी भी व्यक्ति के लिए प्रत्येक महीने के खर्च की एक निश्चित योजना होती है जिसमें कमी की गुंजाइश कदापि नहीं होती। हां, कतिपय आकस्मिक खर्चों के चलते वह कब और कैसे बढ जाएंगी, उन्हें रोकना मुश्किल होता है।

आजकल हरेक कामकाजी व्यक्ति एक न एक दिन अपने रोजमर्रे के काम-धंधे से अवकाश पा लेता है जिसे रिटायरमेंट कहते हैं। आमतौर पर अवकाश प्राप्ति की औसतन उम्र सीमा साठ-पैंसठ साल है। कहीं कुछ कम तो कहीं कुछ ज्यादा। यह सरकारी या निजी संस्थाओं के नियमन पर निर्भर है। हालांकि कुछ व्यक्तिगत पेशेवर जबतक स्वस्थ हैं तबतक अवकाश लेना नहीं चाहते, लेकिन सत्तर से पचहत्तर पार करते करते ऐसे लोग भी जिंदगी से थक जाते हैं और न चाहते हुए भी स्वैच्छिक अवकाश लेकर आराम करना पसंद करते हैं। बस यही से उनकी आर्थिक योजना की परीक्षा शुरू हो जाती है। इसलिए बुद्धिमान लोग बैंक बैलेंस के साथ साथ चल-अचल संपत्ति सृजन पर भी ज्यादा ध्यान देते हैं।

अमूमन, गांव और शहर की जरूरतें और प्राथमिकताएं अलग-अलग होती हैं। इसलिए बुद्धिमान लोग उस हिसाब से भी अपनी आर्थिक योजनाएं बनाते हैं। मसलन, किसी भी गांव में जीवन गुजर-बसर के लिए कृषि योग्य भूमि, सब्जी की क्यारियां या फलों का बगान जरूरी होता है जिससे नियमित आमदनी होती रहे। कुछ लोग पशुपालन को भी प्राथमिकता देते हैं। हालांकि अब यहां भी मकान-दुकान से किराया और स्वरोजगार से आमदनी विकसित होने की संभावनाएं बलवती हुई हैं।

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इसी प्रकार किसी भी शहर या महानगर के लिए आवासीय मकान/फ्लैट्स, दुकान, फैक्ट्री, फार्म हाऊस, होटल्स आदि का होना जरूरी है ताकि उन्हें किराया पर लगाकर भी नियमित आमदनी सुनिश्चित किया जा सके। हालांकि स्कूल, कॉलेज, प्रकाशन संस्थान या व्यक्तिगत स्वामित्व वाले अन्य पेशेवर संस्थानों, एनजीओज, ट्रस्ट, कम्पनीज की संभावना किसी भी व्यक्ति की निवेश योग्यता और बचत क्षमता पर भी निर्भर करती हैं। फिर सुयोग्य और सुशिक्षित सन्तानों जैसा सुरक्षित निवेश विकल्प कुछ भी नहीं है। क्योंकि फिक्स, चालू या बचत खाता और पेंशन प्लान से रुपए-पैसे चाहे आप कितना भी जमा/इकट्ठा कर लें। लेकिन उसे यदि जरूरत या समझदारी पूर्वक खर्च करने की कला आपमें या आपकी संतान में नहीं है तो जीवन का अन्तिम कालखण्ड वाकई दुखदाई हो जाता है।

आम तौर पर महसूस किया जाता है कि कुछ लोगों के लिए यह  एक डर पैदा करने वाला उम्र का पड़ाव होता है जिसमें पहला सवाल यही उठता है कि क्या हमारी बचत पर्याप्त है? क्या हम अपने मन मुताबिक अपनी जिंदगी के शेष पल गुजार पाएंगे? यदि बीमार हो गए तो फिर क्या होगा? ये ऐसे सवाल हैं जिनका समुचित जवाब स्वतः न मिले तो सम्बन्धित व्यक्ति की उम्र अपने आप कम होती जाती है। दूसरी ओर, कुछ लोगों के लिए रिटायरमेंट के बाद की जिंदगी उम्मीदों से भरी होती है, क्योंकि अब वे पर्याप्त समय मिलने के बाद अपनी सभी शेष इच्छाएं पूरी कर सकते हैं, जैसे मनपसंद जगहों की यात्रा करना, पसंदीदा शौक पालना या फिर ऐसे कामकाज निष्पादित करना, जिनके लिए पहले पर्याप्त समय नहीं था। क्योंकि हमें यह बात हमेशा याद रखनी चाहिए कि आखिरकार रिटायरमेंट नौकरी से ले रहे हैं, अपनी शेष जिंदगी से नहीं। इसलिए इसकी योजना पहले से बनाइए और यदि किसी कारण बस नहीं बना पाए हैं तो जो बचा है उसे सुव्यवस्थित कर लीजिए।

इस बात में कोई दो राय नहीं कि उपरोक्त बातें जीवन रूपी  सिक्के के दो पहलू की तरह हैं, जिसमें चित्त या पट्ट होना नीयति और व्यक्तिगत समझदारी पर निर्भर है। फिर भी यदि आप रिटायरमेंट के लिए पहले से योजना बनाने में चूक गए हैं तो  अब जीवन को वित्तीय रूप से सहेजने और सुरक्षित करने की योजना पर शीघ्र अमल कीजिए, अन्यथा रोजमर्रे की समस्याएं आप पर हावी पड़ जाएंगी। कहना न होगा कि भले ही आप की वित्तीय स्थिति बेहद अच्छी हो, लेकिन लंबी अवधि के लिए रुपए-पैसों का प्रबंधन करना और अपने विभिन्न खर्चों पर लगाम रखना किसी भी व्यक्ति के लिए जरूरी होता है। खासकर रिटायरमेंट के बाद तो इन बातों का ध्यान रखना और भी आवश्यक होता है, क्योंकि आप इन्हें ध्यान में रखकर ही बेहतर तरीके से अपना वित्तीय प्रबंधन कर सकते हैं।

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# जानिए, आपको क्या करना चाहिए।

आपको पता है कि किसी भी व्यक्ति के लिए प्रत्येक महीने के खर्च की एक निश्चित योजना होती है जिसमें कमी की गुंजाइश कदापि नहीं होती। हां, कतिपय आकस्मिक खर्चों के चलते वह कब और कैसे बढ जाएंगी, उन्हें रोकना मुश्किल होता है। लिहाजा आप उन निवेश विकल्पों में अपने पैसे लगाएं जिनसे आपको अपना घर खर्च पूरा करने के लिए नियमित रिटर्न मिलेगा। यदि आपने फिक्स्ड डिपॉजिट या डेट-ओरिएंटेड इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश किया है तो अपने टैक्स बोझ को भी जानिए-समझिए और सरकारी की बदलती आर्थिक नीतियों के मद्देनजर ऐसे निवेश विकल्पों को चुनिए जो कि टैक्स कम करने के बाद महंगाई दर से ज्यादा रिटर्न देते हों। इसके अलावा, छोटी अवधि की अपनी जरूरतों के लिए भी लगने वाले पैसों को आप डेट फंड में लगाएं और मनमाफिक उसका उपयोग सुनिश्चित करें।

यही नहीं, दीर्घ अवधि की अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए अपने निवेश पोर्टफोलियों में से शेष/बाकी विकल्पों के साथ इक्विटी फंड को भी जरूर रखें। यदि आप ऐसा करेंगे तो चिकित्सीय आपातकाल, स्वास्थ्य जांच और आकस्मिक खर्चों (घर की मरम्मत, आदि) से भी एकबारगी जूझ सकते हैं। इसलिए इन सभी के लिए आप अलग से आपात फंड बनाएं तो बेहतर रहेगा। इसके अलावा, आप अपनी वसीयत भी तैयार कीजिए ताकि आपके अचानक गुजर जाने के बाद किसी को कोई समस्या नहीं होगी। हां, यदि आपने पहले ही कोई वसीयत बनाई हुई है तो साल में कम से कम एक बार उसकी समीक्षा अवश्य करें और यह सुनिश्चित करें कि आपकी संपत्ति (भौतिक और वित्तीय दोनों) की सूची सामयिक है और प्रत्येक संपत्ति के लिए आपकी नॉमिनी का नाम स्पष्ट लिख हुआ है। ऐसा करके आप एक बेहतर अभिभावक होने का परिचय दे सकते हैं।

# समझिए, आपको क्या नहीं करना चाहिए।

मेरी सलाह मानेंगे तो आपको अपना काम करते रहना चाहिए, उन्हें करना बिल्कुल न छोड़े। क्योंकि अब आपके लिए पूरे वक्त की नौकरी करना जरूरी नहीं है, बल्कि आप एक कंसल्टंट या फ्रीलांसर के तौर पर भी अपना काम जारी रख सकते हैं। ध्यान रखिए कि ऐसा करने से न सिर्फ आपको सुनिश्चित आय मिलेगी, बल्कि आपको मानसिक और शारीरिक तौर पर भी सक्रिय रखेगी जो कि अवकाश प्राप्ति के बाद बेहद जरूरी होता है। यही नहीं, अपनी सुनिश्चित आय के लिए आप कई पेंशन प्लान खरीदने से बचें, क्योंकि इन प्लानस पर महंगाई की मार अक्सर पड़ती है एवं इनमें किए हुए निवेश पर लॉक-इन पीरियड भी होता है। इसलिए हमेशा ख्याल रखिए कि टैक्स लगने वाले डेट निवेश विकल्पों में अपनी बड़ी पूंजी कभी न लगाएं। इससे आपका जोखिम बढ़ जाएगा। यही नहीं, पूंजी घाटे के जोखिम वाले निवेश विकल्पों में भी ज्यादा पैसा लगाने से आप बचें।कुल मिलाकर इक्विटी में निवेश कुल पोर्टफोलियो का 25 फीसदी से ज्यादा नहीं होना चाहिए। साथ यही यह भी याद रखें कि एक ही तरह के निवेश विकल्प या फंड में पैसा बिल्कुल न लगाएं। क्योंकि इससे आपको क्षति हो सकती है। आपको यह मालूम होना चाहिए कि लंबी अवधि में विविधीकरण वाले पोर्टफोलियो के साथ कम जोखिम जुड़ा होता है। इसलिए सभी निवेश विकल्पों में नॉमिनी का नाम लिखना न भूलें। अन्यथा आपके गुजर जाने के बाद आपके उत्तराधिकारी को परेशानी हो सकती है।

# देखिए, अपना निजी बजट ऐसे बनाएं।

किसी भी व्यक्ति का निजी बजट बनाना आसान काम है, लेकिन यह एक उबाऊ काम है, इसलिए अधिकांश लोग इसमें दिलचस्पी नहीं लेते। लेकिन जो नहीं लेते, उनका आर्थिक भविष्य प्रायः मजबूत नहीं होता। क्योंकि भले ही शुरुआत में आपको अपनी आय के हर स्रोत और सम्भावित खर्च की पूरी सूची बनानी पड़ती है। लेकिन, आप जब एक बार अपनी सूची बना लेंगे, तब खर्चों में बदलाव करना और अपने अनुमानित बजट पर नजर रखना बेहद आसान हो जाएगा।

लिहाजा, सबसे पहले आपको महीने के कुल खर्च का हिसाब किताब लगाना है। क्योंकि इनमें से कुछ ऐसे खर्च होंगे जिन्हें आपको हर महीने करना ही करना होता है, जैसे सोसाइटी फीस, नगरपालिका टैक्स, बिजली उपभोग शुल्क, पेपर, दूध, दाई आदि। निःसन्देह, इनको लेकर आप कुछ अधिक बदलाव नहीं कर पाएंगे। क्योंकि इनमें से ज्यादातर खर्च बढ़ते-घटते रहते हैं जो आपकी मासिक या सालाना आय पर निर्भर होते हैं। इसलिए इन पर लगाम लगाई जा सकती है। ऐसे खर्चों में खाना, उपभोगी सेवाएं, कपड़े, मनोरंजन और यात्रा आदि शामिल हैं, जो बजट के बाहर भी जा सकते हैं। अतः इन खर्चों पर नियंत्रण पाने के लिए आप समझदारी से काम लें, अन्यथा खुला हाथ किसी के लिए भी अहितकर ही होता है।

बेहतर होगा कि आप आय के सभी स्रोतों यथा- पेंशन, निवेश, ब्याज, आदि को जोड़ लें। फिर कुल आय में आपको महीने में होने वाले सभी खर्च को कम-ज्यादा करना होगा। इस काम को करने के लिए आप स्प्रेडशीट का भी इस्तेमाल कर सकते हैं ताकि अपनी सही वित्तीय हालत जानने में आपको सहूलियत हो। इसके लिए आपको अनुमानित बजट और असली व्यय के अंतर के साथ अपनी आय की तालिका बनानी होगी। उसमें वेतन, पेंशन, किराए से होने वाली आय, मिला हुआ ब्याज, कारोबार से होने वाली आय, अन्य आय को जोड़कर कुल आय बनानी होगी। फिर अपने खर्चे, जैसे- खाना, उपभोग खर्च (बिजली, गैस, पानी, आदि), वेतन (परिचर, ड्राइवर, आदि), बीमा (स्वास्थ्य, कार और आदि), मोबाइल, लैंडलाइन, इंटरनेट, डीटीएच/केबल शुल्क, यात्रा और परिवहन, छुट्टियां, आराम और मनोरंजन, कपड़े, तोहफे, बच्चों की शिक्षा/कर्ज, दूसरे कर्ज, नगरपालिका टैक्स, सोसाइटी फीस, अन्य/मरम्मत/आपात खर्च के कुल खर्च को जोड़ना होगा और फिर महीने की बचत पर गौर फ़रमाना होगा जो अनुमानित और वास्तविक दोनों होगा।

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याद रखिए कि अगर महीने की बचत का आंकड़ा ऋणात्मक है तो आप अपनी आय से ज्यादा खर्च कर रहे हैं। इसलिए सावधान हो जाइए। ऐसे में आपके पास तीन विकल्प शेष हैं- पहला, खर्च कम करें; दूसरा, आय बढ़ाएं; और तीसरा, दोनों करें। तीसरा विकल्प ज्यादा श्रेयष्कर होगा। बेशक, जब आप अपना निजी बजट बना लेंगे तो आपको पता चल जाएगा कि आपको गुजारे के लिए न्यूनतम कितनी रकम चाहिए। ऐसे में वित्तीय अनुशासन पालें और बचत करने के बारे में सोचें। हमेशा सोच-समझकर ही पैसा निकालें, क्योंकि जितनी पूंजी आप निवेशित रखेंगे, उतनी ही आपकी संपत्ति में बढ़ोतरी होगी।

आम तौर पर ज्यादातर रिटायर हुए लोगों के पास आय के दो ही स्रोत होते हैं-पहला, पेंशन प्लान और दूसरा पहले से पैसे लगाए हुए निवेश विकल्पों, यथा- म्युचुअल फंड्स, स्टॉक और शेयर, फिक्स्ड डिपॉजिट, अनुइटी, आदि से होने वाली आय। साथ ही, यदि आपने प्रॉपर्टी में भी निवेश किया हो तो उससे आपको किराया मिलता होगा। इसलिए, किसी भी रिटायर व्यक्ति के लिए ये जरूरी है कि आप अपनी आय-व्यय पर सतत नजर रखें। अगर आपके पास अतिरिक्त आय है तो उसे निवेश करें ताकि वक्त के साथ आपकी बचत में भी बढ़ोतरी जारी रहे जो आपके वक्त ए जरूरत पर काम आवे।

- कमलेश पांडेय

वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार







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