ईपीएफ क्या है ? इसके जरिये कैसे बचत होती है ? क्या ज्यादा पीएफ कटवा सकते हैं ?

  •  कमलेश पांडे
  •  जून 12, 2019   17:46
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ईपीएफ क्या है ? इसके जरिये कैसे बचत होती है ? क्या ज्यादा पीएफ कटवा सकते हैं ?

सवाल है कि यदि किसी कर्मचारी ने कई नौकरियां बदलीं जिसके चलते उसे ईपीएफ नंबर भी याद नहीं है तो क्या उसे ईपीएफ मिलेगा ? जवाब होगा कि अवश्य मिलेगा। क्योंकि ईपीएफओ ने बीटा वर्जन में एक लिंक उपलब्ध कराया है।

अधिकतर लोगों को यह पता भी नहीं होता है कि कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) क्या चीज है, इसके सहारे कैसे और कितनी बचत की जा सकती है, इसके क्या-क्या अन्य फायदे हैं तथा कौन-कौन से लोग इसके दायरे में आते हैं और कौन-कौन से लोग नहीं। इसलिए हम आपको बताएंगे ईपीएफ से जुड़े उन मूलभूत तथ्यों के बारे में, जो आमतौर पर पूछे जाने वाली बातों, उनसे जुड़े पूरक प्रश्नों एवं समीचीन उत्तरों की बानगी बन सकते हैं।

सवाल है कि मेरे दोस्त का ईपीएफ क्यों नहीं कट रहा है ?

जवाब स्वरूप यह बताया जा सकता है कि कोई भी नियोक्ता अपने कर्मचारियों के वेतन में से दो सूरतों में ही ईपीएफ की कटौती नहीं करता है- पहला, यदि किसी प्रतिष्ठान में 20 से कम कर्मचारी हों तो वहां पर पीएफ कटौती आवश्यक नहीं है। दूसरा, यदि किसी प्रतिष्ठान में 20 से अधिक कर्मचारी हैं और सभी कर्मचारियों का मूल वेतन एवं महंगाई भत्ता (डीए) दोनों मिलाकर 15 हजार रुपये मासिक से अधिक है और यदि इन सबने फार्म 11 भरकर ईपीएफ से बाहर रहने का निर्णय लिया है तो ऐसी दशा में कतई पीएफ की कटौती नहीं होगी।

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लिहाजा, सहज ही सवाल उठ रहा है कि क्या कोई पीएफ से अलग रह सकता है ? जवाब है- हां, क्योंकि यदि कोई नियोक्ता ईपीएफ की सुविधा देता है, लेकिन किसी कर्मचारी का वेतन और डीए दोनों मिलाकर 15,000 रुपये से अधिक है तो वह फार्म 11 भरकर खुद को ईपीएफ से अलग रखने के लिए आवेदन दे सकता है। हालांकि, गौर करने वाली बात यह है कि ऐसा कोई भी विकल्प नौकरी शुरू करते वक्त ही चुनना होगा। कहने का तातपर्य यह कि यदि किसी कर्मचारी ने जीवन में एक बार भी ईपीएफ में योगदान किया है तो फिर वह इससे कतई बाहर नहीं रह सकता है।

समझिए कि ईपीएस क्या है?

यदि आपको नहीं पता तो यह जान लीजिए कि ईपीएस यानी कि कर्मचारी पेंशन स्कीम का आगाज सन 1995 में हुआ था। जिसे फैमिली पेंशन स्कीम (एफपीएस) की जगह लाया गया था। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, इसमें कर्मचारी के मासिक ईपीएफ (अधिकतम 15000 रुपये) योगदान के 8.33 फीसद (अधिकतम 1250 रुपये) के अलावा सरकार की तरफ से भी 1.77 फीसद योगदान होता है। जिसका उद्देश्य कर्मचारी को 20 साल की नौकरी अथवा 58 साल की उम्र में रिटायर होने पर पूर्ण पेंशन या फिर 20 साल की नौकरी किन्तु 58 साल से कम उम्र में नौकरी जाने पर सेवानिवृत्ति पेंशन या स्थायी पूर्ण विकलांगता पेंशन या 10 साल से अधिक किंतु 20 साल से कम अवधि तक सेवा पर अल्प सेवा पेंशन प्रदान करना है।

बहुत से लोग यह सवाल करते हैं कि यदि ईपीएस में योगदान न करूं तो क्या होगा ? ऐसे लोगों के लिए यहां पर यह स्पष्ट कर देना जरूरी है कि ईपीएस ऐसे सभी कर्मचारियों के लिए अनिवार्य है, जिनका बेसिक और डीए 15000 रुपये मासिक या उससे कम है। परन्तु, पहली सितंबर 2014 को या उसके बाद ईपीएफ सदस्य बनने वाले को और 15000 रुपये से अधिक बेसिक एवं डीए वाले नए कर्मचारियों का संपूर्ण योगदान केवल ईपीएफ खाते में ही जाएगा और कोई राशि ईपीएस में जमा नहीं होगी। हालांकि, 15000 रुपये से अधिक बेसिक व डीए वाले मौजूदा ईपीएफ सदस्यों का ईपीएस में योगदान पहले की ही भांति यथावत होता रहेगा।

नौकरियां बदलने पर भी ईपीएफ नम्बर रहेगा यथावत

सवाल है कि यदि किसी कर्मचारी ने कई नौकरियां बदलीं जिसके चलते उसे ईपीएफ नंबर भी याद नहीं है तो क्या उसे ईपीएफ मिलेगा ? जवाब होगा कि अवश्य मिलेगा। क्योंकि ईपीएफओ ने बीटा वर्जन में एक लिंक उपलब्ध कराया है, जो सम्बन्धित कर्मी को एक ऑनलाइन पोर्टल पर ले जाएगा। जहां वह अपने पिछले रोजगार व नियोक्ता का ब्यौरा देकर अपने ईपीएफ खाते का मेंबर आईडी तथा सम्बन्धित राशि निकालने का तरीका भी देख सकते हैं।

आपके लिए यह जानना भी महत्वपूर्ण है कि किन परिस्थितियों में कोई कर्मचारी ईपीएफ निकाल सकते हैं ?

आप यह समझ लीजिए कि निम्नलिखित मामलों में आप फार्म 31 जमा करके पीएफ से अपनी राशि निकाल सकते हैं:- पहला- जगह, मकान, फ्लैट खरीदने या किसी एजेंसी से मकान बनवाने या हाउसिंग लोन अदा करने के लिए और दूसरा अपने बेटे, बेटी, भाई या बहन की शादी के लिए।

सवाल है कि यदि कोई नियोक्ता केवल 15000 रुपये पर पीएफ काट रहा है तो ? यहां आपके यह जानना जरूरी है कि यदि कोई नियोक्ता अपने कर्मचारी के खाते में अधिक वेतन बतौर टेक होम सैलरी दिखाना चाहता है तो वह न्यूनतम 1800 रुपये, जो 15000 रुपये या बेसिक व डीए का 12 फीसद है, की कटौती करने को स्वतंत्र है। लेकिन यदि कोई कर्मचारी ईपीएफ में इससे अधिक योगदान करना चाहता है तो फिर उसे वीपीएफ अपनाना होगा।

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एक सवाल यह भी है कि क्या पीएफ निकासी पर कोई टैक्स लगता है ? यहां जवाब यह होगा कि यदि कर्मचारी ने पांच साल से कम अवधि का योगदान किया है तथा धारा 80सी के तहत कर लाभ प्राप्त किया है तो निकाले गए पीएफ पर पिछले चार साल के औसत टैक्स ब्रैकेट स्लैब के अनुसार टैक्स लगेगा।

एक अन्य सवाल यह है कि क्या पीएफ निकासी के लिए न्यूनतम छह माह का योगदान जरूरी है? जवाब होगा- नहीं। क्योंकि पीएफ में योगदान की गई छोटी से छोटी राशि भी निकाली जा सकती है। एक अन्य पूरक सवाल है कि क्या छह महीने से कम योगदान करने पर कर्मचारी पेंशन स्कीम में जमा राशि जब्त हो जाएगी? जवाब होगा- हां। केवल छह महीने से अधिक और साढ़े नौ साल तक ईपीएस में योगदान होने पर ही उसे निकाला जा सकता है, अन्यथा कतई नहीं।

ऐसे कीजिये ईपीएफ की गणना

जहां तक ईपीएफ की गणना का सवाल है तो यह जानना सबके लिए जरूरी है कि किसी भी कर्मचारी के मूल वेतन और डीए को मिलाकर जो कुल राशि बनती है, उसका 12 प्रतिशत योगदान कर्मचारी करता है, और इतना ही नियोक्ता की ओर से भी पीएफ में किया जाता है। यहां यह भी स्पष्ट कर दें कि किसी भी नियोक्ता के हिस्से के 12 फीसद योगदान में से 8.33 फीसद या 1250 रुपये, जो भी कम हो, का योगदान कर्मचारी पेंशन योजना यानी ईपीएस में होता है। जबकि, शेष 3.67 फीसद राशि का योगदान कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) में होता है। इसके विपरीत, कर्मचारी के हिस्से का पूरा 12 फीसद योगदान ईपीएफ में ही जाता है।

यहां तीन उदाहरण देकर हम इसे और स्पष्ट करेंगे:

पहला, यदि कर्मचारी का बेसिक व डीए 15 हजार रुपये से कम, जैसे कि 10,000 रु. मात्र है तो योगदान(रु)-गणना (फीसद)-राशि(रु.) क्रमशः 10000- 12- 1200, 10000- 8.33- 833 और 10000- 3.67- 367 होगा।

दूसरा, यदि कर्मचारी का बेसिक व डीए 15 हजार रुपये ही है तो योगदान- गणना (फीसद)- राशि रु. क्रमशः 15000-12-1800, 15000-8.33-1250 और 15000-3.67- 550 होगा। 

तीसरा, यदि बेसिक व डीए 15 हजार रुपये से अधिक, जैसे कि 20 हजार रु. है तो योगदान- गणना (फीसद)- राशि रु. क्रमशः 20000-12- 2400, 20000- 8.33-1250 और 20000-12 (-1250 रु.)-1150 होगा। 

मुझे विश्वास है कि अब आप समझ चुके होंगे कि ईपीएफ क्या है, कैसे कार्य करता है और इससे किनका हित सधता है। इसलिए विलम्ब मत कीजिए और इस सुविधा का लाभ उठाकर खुद को आर्थिक तौर पर सुरक्षित कीजिए। गुजरा वक्त कभी लौट कर नहीं आएगा।

-कमलेश पांडे

(वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार)







एफआईआर होने के बाद आपके पास क्या है कानूनी रास्ते

  •  मिथिलेश कुमार सिंह
  •  जनवरी 21, 2021   18:31
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एफआईआर होने के बाद आपके पास क्या है कानूनी रास्ते

खुदा-न-खास्ता अगर आपका नाम भी किसी एफआईआर में दर्ज हो जाता है या फिर आपके किसी संबंधी परिचित का नाम एफआईआर में दर्ज हो जाता है, तो इससे घबराने की बजाय आप यह विचार करें कि आपके पास भी कानून द्वारा उपलब्ध कई रास्ते हैं, जिनका प्रयोग आप कर सकते हैं।

कहते हैं कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं। ऐसे में अगर पुलिस के पास कोई मामला आ जाए, तो उन मामलों पर संज्ञान लेकर कई बार पुलिस एफआईआर दर्ज कर लेती है। अब जिन व्यक्तियों के नाम एफआईआर (फर्स्ट इनफार्मेशन रिपोर्ट / प्राथमिकी) में दर्ज होते हैं, पुलिस यह कोशिश करती है कि वह उन व्यक्तियों को तत्काल गिरफ्तार करे या फिर उन्हें समन देकर उनसे पूछताछ करें।

खुदा-न-खास्ता अगर आपका नाम भी किसी एफआईआर में दर्ज हो जाता है या फिर आपके किसी संबंधी परिचित का नाम एफआईआर में दर्ज हो जाता है, तो इससे घबराने की बजाय आप यह विचार करें कि आपके पास भी कानून द्वारा उपलब्ध कई रास्ते हैं, जिनका प्रयोग आप कर सकते हैं।

आइए देखते हैं...

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एफआईआर अगर झूठी है तो?

अब इस संभावना पर विचार कीजिए कि आप पर दर्ज प्राथमिकी अगर झूठी है, तो आप क्या कर सकते हैं! जाहिर तौर पर कानून के दुरुपयोग करने वाले लोगों की संख्या समाज में कुछ कम नहीं है। कई बार तो कुछ पुलिसकर्मी खुद भी तमाम मामलों में इंवॉल्व होकर लोगों को फंसाने और परेशान करने का कार्य करते हैं।

ऐसे में अगर कोई झूठी प्राथमिकी आप पर दर्ज हो गयी है, तो आप भारतीय दंड संहिता में वर्णित धारा 482 के तहत उस प्राथमिकी को चैलेंज कर सकते हैं। इसके लिए आपको हाई कोर्ट का रुख करना होगा और अगर आपने हाईकोर्ट में एफआईआर रद्द कराने की याचिका दायर कर दी, तो पुलिस आप के संबंध में कोई कार्रवाई नहीं कर सकती है।

हाँ! इसमें आपको एक वकील की मदद ज़रूर लेनी पड़ेगी और एक एप्लीकेशन के माध्यम से अपनी बेगुनाही के सबूत देकर एफआईआर रद्द कराने की याचिका हाईकोर्ट में दायर कर सकते हैं। जाहिर तौर पर इसमें तमाम डाक्यूमेंट्स आप लगा सकते हैं, तो अपनी बेगुनाही के लिए जवाब पेश कर सकते हैं। हालांकि यह टालमटोल का मामला नहीं दिखना चाहिए और आपके पक्ष में मजबूत सबूत नजर आना चाहिए, तभी आपकी एफआईआर रद्द हो सकती है।

अगर प्राथमिकी रद्द नहीं होती है और गिरफ्तारी की तलवार लटकती है तो क्या करें?

मान लीजिए कि FIR रद्द कराने का विकल्प आप के संबंध में काम नहीं आता है तो भी आप कानून की मदद ले सकते हैं, और इसमें पुलिसकर्मी अपनी मनमानी नहीं कर सकते हैं।

इसमें पुलिस अगर आपको किसी स्थान से गिरफ्तार करती है तो जल्द से जल्द आपके किसी रिश्तेदार को उसे सूचित करना होगा कि आप की गिरफ्तारी अमुक अस्थान से की गई है और अमुक स्थान पर आपको रखा गया है। अगर आपका कोई रिश्तेदार शहर से बाहर है तो भी 8 से 12 घंटे के भीतर पुलिस को टेलीग्राम के माध्यम से करीबी को सूचना देना अनिवार्य है। पुलिस को अपने रोजनामचे (डायरी) में इसका पूरा विवरण, पुलिस अधिकारी का नाम, जिसकी अभिरक्षा में आपको रखा गया है, उसे दर्ज करना होगा।

साथ ही गिरफ्तारी के 48 घंटे के भीतर ही डॉक्टरों द्वारा आप की चिकित्सा जांच कराना भी अनिवार्य है। इसके अलावा आपको आपके वकील से मिलने की परमिशन भी दी जाएगी। हालांकि वकील आपसे पूरी पूछताछ के दौरान मौजूद नहीं रहेगा।

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गिरफ्तारी के दौरान आप पर बल प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए और आप के सम्मान की रक्षा की जानी चाहिए। इस प्रकार के दिशा निर्देश पुलिस को पहले से ज्ञात होते हैं।

खासकर महिलाओं की तलाशी सिर्फ और सिर्फ महिला पुलिसकर्मियों द्वारा ही शालीनता के साथ ली जाएगी। महिलाओं को सूर्यास्त के बाद, और सूर्योदय के पहले किसी हालत में गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। हथकड़ी या बेड़ी का प्रयोग प्रतिबंधित कर दिया गया है।

गिरफ्तारी के बाद भी आप को पर्याप्त कानूनी अधिकार दिए गए हैं और उसमें से सबसे महत्वपूर्ण यह है कि 24 घंटे के भीतर आपको संबंधित न्यायालय में पेश किया जाएगा और आपको अपने वकील से मिलने की परमिशन भी दी जाएगी। जाहिर तौर पर यह तमाम जानकारियां आपको नहीं होती हैं और इस वजह से आप एफआईआर में अपना या अपने किसी संबंधी का नाम देखकर घबरा जाते हैं। कहना अतिशयोक्ति नहीं है कि अगर आपको समस्त प्रक्रियाओं की जानकारी हो, तो आप इन मामलों को कहीं बेहतर ढंग से अंजाम तक पहुंचा सकते हैं। 

वैसे बेहतर यही समझना है कि पुलिस और प्रशासन हमारे लिए, हमारी सुरक्षा के लिए ही बनाए गए हैं। इस बात को जानकर, ऐसे किसी कार्य से खुद ही दूर रहना समझदारी है, जहाँ पुलिस को आपके ऊपर प्राथमिकी दर्ज करना पड़े। वैसे, ध्यान रखने वाली बात यह भी है कि अगर संयोगवश आपका नाम कहीं आ भी जाता है, तो पुलिस को उसकी कार्रवाई करने दें और उसमें बाधा उत्पन्न करने की बजाय सहयोग करने का प्रयत्न करें। साथ ही उपलब्ध कानूनी उपचारों के माध्यम से आगे की प्रक्रिया जारी रखें।

-मिथिलेश कुमार सिंह







कोरोना वैक्सीन के लिए जरूरी है Co-Win ऐप, कराना होगा रजिस्ट्रेशन, यहां जानें सब कुछ

  •  अंकित सिंह
  •  जनवरी 18, 2021   16:54
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कोरोना वैक्सीन के लिए जरूरी है Co-Win ऐप, कराना होगा रजिस्ट्रेशन, यहां जानें सब कुछ

तो सबसे पहले आपको बता दें कि को भी Co-Win ऐप है? सरकार की ओर से जारी बयान के मुताबिक भारत में कोरोना टीकाकरण की योजना, कार्यान्वयन, निगरानी और मूल्यांकन के लिए Co-Win ऐप विकसित किया गया है। कोरोना वैक्सीन को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए इस ऐप की मदद ली जाएगी।

भारत में कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई तेज हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में निर्मित दो कोरोना वैक्सीन को आपातकालीन इस्तेमाल के लिए लॉन्च कर दिया है। एक सिरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की कोविशिल्ड है दूसरी भारत बायोटेक की कोवैक्सीन। इन दोनों टीकों ने भारत के आत्मनिर्भर बनने की राह को और भी मजबूत किया है। कोरोना के टीकाकरण अभियान के पहले चरण में लगभग 3 करोड़ फ्रंटलाइन वॉरियर्स को पहला डोज दिया जाएगा। भारत के इस कदम को लेकर विश्व में हर तरफ वाहवाही हो रही है। माना जा रहा है कि जल्द ही आम लोगों के लिए भी कोरोना वैक्सीन शुरू की जाएगी। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि आम लोगों तक यह वैक्सीन कैसे पहुंचेगी। सरकार इसके लिए तकनीक का इस्तेमाल कर रही है। सरकार ने Co-Win ऐप शुरू किया है जिसके जरिए आम लोग भी आसानी से टीका लगवा सकते हैं। आज हम आपको बताते हैं Co-Win ऐप के बारे में और आखिर यह ऐप आपको टीकाकरण में कैसे मदद करेगा इसके बारे में भी...

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तो सबसे पहले आपको बता दें कि को भी Co-Win ऐप है? सरकार की ओर से जारी बयान के मुताबिक भारत में कोरोना टीकाकरण की योजना, कार्यान्वयन, निगरानी और मूल्यांकन के लिए Co-Win ऐप विकसित किया गया है। कोरोना वैक्सीन को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए इस ऐप की मदद ली जाएगी। आम लोग इस ऐप पर रजिस्ट्रेशन करवा कर कोरोना का टीका आसानी से ले सकेंगे। इस ऐप पर टीकाकरण केंद्र से लेकर टीका लेने वाले लोगों तक की पूरी सूची होगी। इस ऐप के जरिए टीकाकरण प्रक्रिया की पूरी तरह से ट्रैकिंग की जाएगी। कुल मिलाकर अगर कम शब्दों में कहें तो Co-Win ऐप पर भारत में लगाए जाने वाले टीके को लेकर पूरा लेखा-जोखा रहेगा। Co-WIN ऐप को पांच मॉड्यूल में बांटा गया है। पहला है प्रशासनिक मॉड्यूल, दूसरा रजिस्ट्रेशन मॉड्यूल, तीसरा वैक्सीनेशन मॉड्यूल, चौथा लाभान्वित स्वीकृति मॉड्यूल और पांचवां हैं रिपोर्ट मॉड्यूल।

एक बात स्पष्ट कर दें कि Co-Win ऐप पर रजिस्ट्रेशन के बाद ही आप कोरोना का टीका लगवा सकते हैं। रजिस्ट्रेशन के लिए आपको अपनी आईडी दिखानी होगी। आपको बता दें कि रजिस्ट्रेशन के लिए  कोई भी फोटो आईडी का इस्तेमाल किया जा सकता है। आप इन आईडी का इस्तेमाल कर सकते है।

आधार कार्ड, 

वोटर आईडी कार्ड

ड्राइविंग लाइसेंस,

पैन कार्ड,

मनरेगा जॉब कार्ड,

पासपोर्ट 

पेंशन दस्तावेज फोटो के साथ,

बैंक या डाकघर द्वारा जारी फोटो वाली पासबुक

सांसद, विधायक, एमएलसी द्वारा जारी किए गए आधिकारिक पहचान पत्र 

स्वास्थ्य बीमा स्मार्ट कार्ड

सेवा पहचान पत्र

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अब आपको यह बताते है कि Co-Win ऐप पर रजिस्ट्रेशन कैसे करा सकते हैं। सबसे पहले आपको गूगल प्ले स्टोर में जाकर Co-Win ऐप डाउनलोड करना होगा। ध्यान रहे कि आपको Co-Win ऐप  डाउनलोड करना है। वर्तमान में गूगल प्ले स्टोर पर Co-Win ऐप के ही नाम से कई फर्जी ऐप मौजूद है। ऐसे ऐप को इंस्टॉल करने से बचें। रिपोर्ट के मुताबिक Co-Win ऐप एंड्रॉयड, आईओएस और KaiOS, सभी प्लेटफार्म पर उपलब्ध रहेगा। नोकिया फोन और जिओ फोन इस्तेमाल करने वाले लोग भी Co-Win ऐप डाउनलोड कर सकते हैं। 

ऐप को डाउनलोड करने के बाद आपको रजिस्ट्रेशन करना होगा। रजिस्ट्रेशन से पहले Co-Win ऐप पर केंद्र और राज्य सरकार द्वारा जारी गाइडलाइंस बताई जाएगी। रजिस्ट्रेशन के दौरान आपको अपनी फोटो आईडी देनी होगी। बिना फोटो आईडी के रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाएगा। रजिस्ट्रेशन के दौरान आपको अपना मोबाइल नंबर भी रजिस्टर्ड करवाना होगा। रजिस्टर्ड मोबाइल पर ही रजिस्ट्रेशन पूरा होने के बाद एक SMS आएगा। इस SMS में वैक्सीनेशन की तारीख, पता और समय बताया जाएगा। आपको यह भी बता दें कि जिस फोटो आईडी के जरिए आपने Co-Win ऐप पर रजिस्ट्रेशन करवाया है उसे टीका लगाते समय भी ले जाना जरूरी है। Co-Win ऐप या फिर मैसेज के जरिए ही आपको डोज की दूसरी तिथि बताई जाएगी।

- अंकित सिंह







कोरोना महामारी से जूझती जनता के लिए आरबीआई ने कीं यह पहलें

  •  जे. पी. शुक्ला
  •  जनवरी 16, 2021   15:57
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कोरोना महामारी से जूझती जनता के लिए आरबीआई ने कीं यह पहलें

लगातार अधिक तरलता को देखते हुए मौजूदा नीति दर गलियारे को 50 बीपीएस से बढ़ाकर 65 बीपीएस करने का निर्णय लिया गया है। नए कॉरिडोर के तहत, तरलता समायोजन सुविधा (एलएएफ) के तहत रिवर्स रेपो दर पॉलिसी रेपो दर से 40 बीपीएस कम होगी।

मौजूदा कोविड-19  महामारी के मद्देनजर भारतीय बाजार में खुदरा और साथ ही संस्थागत प्लेयर्स पर बोझ को कम करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा हाल ही में कई उपाय किए गए हैं। RBI ने हाल ही में 27 मार्च, 2020 को एक कोविद-19 नियामक पैकेज की घोषणा की थी, जिसमें भारत भर के उधारदाताओं को सभी किश्तों के भुगतान पर तीन महीने- 1 मार्च, 2020 और 31 मई, 2020 (मोरेटोरियम पीरियड) के बीच की मोहलत देने की अनुमति थी। 

यह स्टेटमेंट विभिन्न विकासात्मक और विनियामक नीतियों को निर्धारित करता है, जो COVID-19 की वजह से वित्तीय स्थितियों की मुश्किलों को सीधे संबोधित करता है। इसमें शामिल हैं: (i) सिस्टम में तरलता का विस्तार से यह सुनिश्चित करना कि वित्तीय बाजार और संस्थान COVID से संबंधित अव्यवस्थाओं के सामने सामान्य रूप से कार्य करने में सक्षम हैं; (ii) मौद्रिक संचरण को सुदृढ़ करना ताकि आसान शर्तों पर बैंक ऋण प्रवाह उन लोगों के लिए बने रहे जो महामारी से प्रभावित रहे हैं; (iii) COVID-19 व्यवधानों के कारण पुनर्भुगतान के दबावों को कम करने और कार्यशील पूंजी तक पहुंच में वित्तीय तनाव कम करना और (iv) महामारी की शुरुआत और इसके प्रसार के साथ उच्च अस्थिरता को देखते हुए बाजारों के कामकाज में सुधार।

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नियामक पैकेज के तहत कुछ उपाय:

1. लक्षित दीर्घकालिक परिचालन संचालन (Targeted Long Term Repos Operations (TLTROs)

भारत में COVID-19 की शुरुआत और तेजी से प्रसार ने घरेलू इक्विटी, बॉन्ड और विदेशी मुद्रा बाजारों में बड़े बिकवाली को उत्साहित किया है। रिडेम्पशन प्रेशर के तेज होने से कॉरपोरेट बॉन्ड, कमर्शियल पेपर और डिबेंचर जैसे इंस्ट्रूमेंट्स पर लिक्विडिटी प्रीमियर बढ़ गए हैं। COVID-19 प्रकोप के साथ व्यापारिक गतिविधि के कमज़ोर होने के साथ, इन उपकरणों के लिए वित्तीय स्थितियां, जो उपयोग की जाती हैं, बैंक क्रेडिट में मंदी की स्थिति में कार्यशील पूंजी तक पहुंचने के लिए इसे सख्त कर दिया गया है।

बैंकों को प्राथमिक बाज़ार निर्गमों से अपने सक्षम उपकरणों के वृद्धिशील होल्डिंग्स के पचास प्रतिशत और द्वितीयक बाजार से शेष पचास प्रतिशत का अधिग्रहण करना होगा, जिसमें म्यूचुअल फंड और गैर-बैंकिंग वित्त कंपनियां शामिल हैं। इस सुविधा के तहत बैंकों द्वारा किए गए निवेश को परिपक्वता (HTM) के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा, यहां तक कि कुल निवेश का 25 प्रतिशत से अधिक HTM पोर्टफोलियो में शामिल करने की अनुमति होगी। 

2. नकद आरक्षित अनुपात (Cash Reserve Ratio)

बैंकिंग प्रणाली में तरलता पर्याप्त बनी हुई है, जैसा कि 1-25 मार्च, 2020 के दौरान दैनिक औसत आधार पर 2.86 लाख करोड़ के ऑर्डर के एलएएफ के रिवर्स रेपो परिचालन के तहत बैंकिंग प्रणाली से अधिशेष के अवशोषण में परिलक्षित होता है। हालाँकि, इस तरलता का वितरण वित्तीय प्रणाली में अत्यधिक विषम है और बैंकिंग प्रणाली के भीतर भी ऐसा ही है।

COVID-19 के कारण होने वाले व्यवधान पर बैंकों की मदद करने के लिए एकमुश्त उपाय के रूप में, सभी बैंकों के नकदी आरक्षित अनुपात (CRR) को 100 आधार अंकों की घटाकर शुद्ध मांग और समय देनदारियों (एनडीटीएल) के 3.0 प्रतिशत करने का निर्णय 28 मार्च, 2020 के रिपोर्टिंग पखवाड़े से लिया गया है। सीआरआर में यह कमी सम्पूर्ण बैंकिंग प्रणाली में लगभग 1,37,000 करोड़ की प्राथमिक तरलता को अतिरिक्त एसएलआर की होल्डिंग्स के संबंध में घटकों की देयताओं के अनुपात में जारी करेगी। यह वितरण 26 मार्च, 2021 को समाप्त होने वाली एक वर्ष की अवधि के लिए उपलब्ध होगा।

इसके अलावा, कर्मचारियों की सामाजिक दूरी और परिणामस्वरूप बैंकों द्वारा सामना की जाने वाली कठिनाइयों का संज्ञान लेते हुए, पहले दिन से प्रभावी दैनिक सीआरआर बैलेंस रखरखाव की आवश्यकता को 90 प्रतिशत से घटाकर 80 प्रतिशत करने का निर्णय 28 मार्च, 2020 से लिया गया है। 

3. सीमांत स्थायी सुविधा (Marginal Standing Facility)

सीमांत स्थायी सुविधा (MSF) के तहत, बैंक वैधानिक तरलता अनुपात (SLR) में 2 प्रतिशत तक की कटौती करके अपने विवेक पर रातोंरात उधार ले सकते हैं।

TLTRO, CRR और MSF से संबंधित ये तीन उपाय सिस्टम में कुल 3.74 लाख करोड़ की तरलता को इंजेक्ट करेंगे।

4. मौद्रिक नीति दर गलियारे का चौड़ीकरण (Widening of the Monetary Policy Rate Corridor)

लगातार अधिक तरलता को देखते हुए मौजूदा नीति दर गलियारे को 50 बीपीएस से बढ़ाकर 65 बीपीएस करने का निर्णय लिया गया है। नए कॉरिडोर के तहत, तरलता समायोजन सुविधा (एलएएफ) के तहत रिवर्स रेपो दर पॉलिसी रेपो दर से 40 बीपीएस कम होगी। सीमांत स्थायी सुविधा (MSF) की दर पॉलिसी रेपो दर से 25 बीपीएस ऊपर रहेगी।

इस तरह के प्रयास वास्तविक अर्थव्यवस्था के वित्तीय तनाव के संचरण को रोकेंगे और व्यवहार्य व्यवसायों की निरंतरता सुनिश्चित करेंगे और इन असाधारण रूप से परेशान समय में उधारकर्ताओं को राहत प्रदान करेंगे।

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5. सावधि ऋण पर अधिस्थगन (Moratorium on Term Loans)

सभी वाणिज्यिक बैंकों (क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, छोटे वित्त बैंकों और स्थानीय क्षेत्र के बैंकों सहित), सहकारी बैंक, अखिल भारतीय वित्तीय संस्थान और NBFC (आवास वित्त कंपनियों और सूक्ष्म-वित्त संस्थानों सहित) ("ऋण देने वाली संस्थाएं)" को 1 मार्च, 2020 तक बकाया सभी सावधि ऋणों के संबंध में किश्तों के भुगतान पर तीन महीने की मोहलत देने की अनुमति दी गई। 

6. कार्यशील पूंजी सुविधाओं पर ब्याज का स्थगितकरण (Deferment of Interest on Working Capital Facilities)

नकद ऋण / ओवरड्राफ्ट के रूप में स्वीकृत कार्यशील पूंजीगत सुविधाओं के संबंध में, उधार देने वाली संस्थाओं को 1 मार्च, 2020 तक बकाया ऐसी सभी सुविधाओं के संबंध में ब्याज के भुगतान पर तीन महीने की छूट देने की अनुमति दी जा रही है। ब्याज का भुगतान आस्थगित अवधि की समाप्ति के बाद किया जाएगा।

उधारकर्ताओं को COVID-19 की वजह से उत्पन्न आर्थिक गिरावट से सक्षम बनाने के लिए विशेष रूप से अधिस्थगन / स्थगन प्रदान किया जा रहा है।

7. वर्किंग कैपिटल फाइनेंसिंग में आसानी (Easing of Working Capital Financing)

नकद ऋण / ओवरड्राफ्ट के रूप में स्वीकृत कार्यशील पूंजी सुविधाओं के संबंध में, उधार देने वाली संस्थाएं मार्जिन को कम करके और / या उधारकर्ताओं के लिए कार्यशील पूंजी चक्र को आश्वस्त करके ड्राइंग पावर को रिकलकुलेट कर सकती हैं। उधारकर्ताओं के लिए विशेष रूप से COVID-19 से आर्थिक गिरावट की वजह से दी गई क्रेडिट शर्तों में इस तरह के बदलाव को उधारकर्ता की वित्तीय कठिनाइयों के कारण दी गई रियायतों के रूप में नहीं माना जाएगा।

8. नेट स्टेबल फंडिंग रेशियो (NSFR) के कार्यान्वयन को स्थगित करना (Deferment of Implementation of Net Stable Funding Ratio (NSFR)

वैश्विक वित्तीय संकट के बाद के वर्षों में किए गए सुधारों के हिस्से के रूप में, बेसल कमेटी ऑन बैंकिंग सुपरविजन (BCBS) ने नेट स्टेबल फंडिंग रेशियो (NSFR) की शुरुआत की थी, जो बैंकों को फंडिंग के पर्याप्त स्थिर स्रोतों के लिए अपनी गतिविधियों की फंडिंग को भविष्य के वित्त पोषण के तनाव के जोखिम को कम करने के लिए बैंकों की आवश्यकता के हिसाब से जोखिम को कम करता है।  

- जे. पी. शुक्ला







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