विश्व बाजार में कारोबारी सम्भावनाएं तलाश रहे हैं तो मदद करेगा 'SMEX इंडिया'

By कमलेश पांडे | Publish Date: Sep 21 2018 2:39PM
विश्व बाजार में कारोबारी सम्भावनाएं तलाश रहे हैं तो मदद करेगा 'SMEX इंडिया'

यदि आप छोटे एवं मध्यम आकार के उद्यमी हैं और विश्व बाजार में अपने लिए कारोबारी सम्भावनाएं तलाश रहे हैं तो नए डिजिटल प्लेटफॉर्म ''एसएमईएक्स इंडिया'' नामक पोर्टल पर सक्रिय हो जाइए।



यदि आप छोटे एवं मध्यम आकार के उद्यमी हैं और विश्व बाजार में अपने लिए कारोबारी सम्भावनाएं तलाश रहे हैं तो नए डिजिटल प्लेटफॉर्म 'एसएमईएक्स इंडिया' नामक पोर्टल पर सक्रिय हो जाइए। सम्भव है कि आपके सपनों को पंख लग जाए, क्योंकि यह एक कमर्शियल वेब पोर्टल है जिसे 'स्राम म्राम टेक्नोलॉजी' ने लांच किया है। दरअसल, यह एक सामाजिक संगठन है जो छोटे लघु उद्यमी (एसएमई) के कल्याण एवं उनके लिये पसंदीदा और लाभकारी कारोबारी अवसर उपलब्ध करवाने की दिशा में सक्रिय है। एक आकलन के मुताबिक, एसएमई की ऑनलाइन मौजूदगी मात्र से ही उनका रेवेन्यू 51 प्रतिशत और मुनाफा 49 प्रतिशत तक बढ़ जाता है, जो कि एक सुखद संकेत है। आंकड़े गवाह हैं कि देश के सकल राष्ट्रीय उत्पाद (जीडीपी) में छोटे लघु उद्यमियों (एसएमईज) की हिस्सेदारी सलाना 11 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ रही है जो देश की जीडीपी ग्रोथ से भी अधिक है।
 
यदि आपके पास ठीकठाक मुनाफे वाला कारोबारी आइडिया है तो माइक्रोफाइनेंस इंडस्ट्री (एमएफआई) भी आपके लिए मददगार साबित हो सकता है, क्योंकि माइक्रो फाइनेंस लोन पोर्टफोलियो में गत वित्तीय वर्ष 2017-18 में 47 प्रतिशत का इजाफा देखा गया है जो 68,789 करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है। बता दें कि इससे पिछले वित्तीय वर्ष 2016-17 में यह मात्र 46,842 करोड़ रुपए था। हाल ही में सरकार ने भी स्पष्ट किया है कि बैंक जिस दर पर माइक्रो फाइनेंस संस्थानों को कर्ज देते हैं उसे कम किया जाना चाहिए ताकि अधिक से अधिक लोगों को माइक्रो फाइनेंस के दायरे में लाया जा सके। एक गहन रिपोर्ट से जाहिर होता है कि पिछले वित्त वर्ष 2017-18 में टॉप-10 माइक्रो फाइनेंस संस्थानों ने 55,013 करोड़ रुपये के कर्ज दिए जो कि माइक्रो फाइनेंस सेक्टर द्वारा बांटे गए कुल कर्ज का 67 प्रतिशत है। यह एक सुखद संकेत है, क्योंकि जो छोटे लघु उद्यमी अपने कारोबार में हौसला दिखाकर आगे बढ़ रहे हैं, उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं से पूरा का पूरा लाभ भी मिल रहा है।
 
आपको पता होना चाहिए कि एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) देश के कुल मैन्युफैक्चरिंग उत्पादन में 45 प्रतिशत और कुल निर्यात में 40 प्रतिशत योगदान देते हैं, जो कि इस क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए सम्भावनाओं के कई द्वार खोलते हैं। इस बात में भी कोई दो राय नहीं कि भारत में छोटे व्यवसाय क्षेत्र ही बड़े पैमाने पर रोजगार भी उपलब्ध कराते हैं। यही वजह है कि यह क्षेत्र सरकार के लिए विकास का केंद्र बिंदु है। लिहाजा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम के समग्र विकास में सहायता प्रदान करने के लिए सरकार द्वारा भी विभिन्न योजनाएं शुरू की गई हैं ताकि उद्यमियों को उसका भरपूर फायदा मिल सके। अब तक की भारत की 3 प्रमुख एम.एस.एम.ई. योजनाएं निम्नवत हैं:-


 
# एमएसएमई प्रदर्शन एवं क्रेडिट रेटिंग योजना
 


दरअसल, छोटे व्यवसायों के लिए क्रेडिट उपलब्धता की कमी शुरू से ही एक प्रमुख मुद्दा रहा है। क्योंकि अधिकांश कर्जदाता संस्थानों के पास लोन उधारकर्ताओं की अत्याधिक मांग है, और अपने उधारकर्ताओं की लोन योग्यता के मूल्यांकन के लिए ये सभी संस्थान एक समान प्रक्रिया का पालन करते हैं। इस लिहाज से एमएसएमई के लिए प्रदर्शन और क्रेडिट रेटिंग योजना एक महत्वपूर्ण योजना है, क्योंकि इसका उद्देश्य एमएसएमईज की क्षमताओं और क्रेडिट योग्यता पर एक। भरोसेमंद तीसरे पक्ष की रेटिंग प्रदान करना है। यह योजना एमएसएमई के मौजूदा कार्यों को पूरा करने में मदद करने के लिए भी तैयार है। यह एमएसएमई सर्वोत्तम प्रैक्टिसेज के बारे में भी जनजागरुकता पैदा करेगा ताकि उनकी क्रेडिट पात्रता में सुधार हो और बेहतर दरों पर उन्हें भी लोन मिल सके। एक स्टैण्डर्ड रेटिंग प्रक्रिया भी एमएसएमई को अपने प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ स्वयं को बेंचमार्क करने में मदद कर सकती है और अपने विक्रेताओं और ग्राहकों के प्रति उनकी सर्वस्वीकार्यता भी बढ़ा सकती है।
 
बता दें कि रेटिंग के उद्देश्य के लिए, रेटिंग एजेंसियों को दिया जाने वाला शुल्क सूक्ष्म और लघु उद्यमों के कारोबार पर निर्भर करेगा, क्योंकि इसे 3 स्लैब में वर्गीकृत किया गया है:- पहला, 50 लाख रूपये तक के कारोबार के लिए एमएसएमई मंत्रालय रेटिंग एजेंसी को भुगतान करने के लिए शुल्क का 75 प्रतिशत वापस करेगा, जो कि अधिकतम 15,000 रूपये हो सकता है। दूसरा, 50 लाख से 2 करोड़ रूपये रुपए के बीच कारोबार के लिए एमएसएमई मंत्रालय रेटिंग एजेंसी को भुगतान करने के लिए शुल्क का 75 प्रतिशत वापस करेगा, जो कि अधिकतम 30,000 रूपये हो सकता है। और तीसरा, 2 करोड़ रूपये से ऊपर के कारोबार के लिए एमएसएमई मंत्रालय रेटिंग एजेंसी को भुगतान करने के लिए शुल्क का 75 प्रतिशत वापस करेगा, जो कि अधिकतम 40,000 रूपये हो सकता है। गौरतलब है कि परफॉरमेंस और क्रेडिट रेटिंग योजना, राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम, एमएसएमई मंत्रालय द्वारा लागू किया जा रहा है।
 
# एमएसएमई क्रेडिट गारंटी ट्रस्ट फंड


 
एमएसएमई और लघु उद्योग विकास बैंक ऑफ इंडिया (सिडबी) के मंत्रालय ने संयुक्त रूप से सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट (सीजीटीएमएसई) नामक एक ट्रस्ट की स्थापना की है। जो एमएसएमई के लिए एक महत्वपूर्ण योजना है और इसका उद्देश्य उद्यमियों और छोटे व्यवसायियों को जमानत मुक्त ऋण प्रदान करना है। इस योजना में नए और मौजूदा सूक्ष्म और लघु उद्यम शामिल हैं जो सर्विस और मैन्युफैक्चरिंग कार्यों में शामिल हैं। इस योजना में खुदरा व्यापार को शामिल नहीं किया गया है। 
 
बता दें कि सीजीटी के तहत अधिकतम ऋण राशि 1 करोड़ है। इसे स्टार्टअप या मौजूदा व्यापार को अवधि कर्ज या कार्यशील पूंजी ऋण के रूप में प्रदान किया जा सकता है। इसका मुख्य लाभ यह है कि यदि छोटे या लघु उद्यम बैंक को कर्ज चुकाने में नाकामयाब रहते हैं, तो सीजीटीएमएसई को क्रेडिट सुविधा के 85 प्रतिशत तक की राशि, बैंक को चुकाने का प्रावधान है। इस मॉडल का फोकस यह है कि बैंकों को कर्ज का लाभ उठाने में सक्षम होने के लिए प्रोजेक्ट योग्यता और बिजनेस मॉडल की पुष्टि पर जोर देना चाहिए।
 
# डिजिटल एमएसएमई प्रोत्साहन योजना
 
आपको मालूम होना चाहिए कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए डिजिटल एमएसएमई योजना एक महत्वपूर्ण योजना है, जिसका उद्देश्य सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को डिजिटल उपकरणों के उपयोग के लिए प्रेरित करना है। इससे वे अधिक दक्षता और बढ़ती हुई प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हो सकेंगे। इस योजना में एसएमई को समय और रूपये इन-हाऊस आईटी समाधानों को विकसित करने के लिए खर्च करने की बजाय क्लाउड कंप्यूटिंग पर स्विच करने को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया है। क्लाउड आधारित तकनीक एमएसएमई को अपनी व्यावसायिक प्रक्रियाओं का संचालन करने के लिए इंटरनेट का उपयोग करने में मदद करेगी।
 
दरअसल, कलाउड आधारित मॉडल के लाभ निम्नवत हैं- पहला, एक व्यापारी को अपनी आवश्यकता के अनुसार ही भुगतान करना है और उसे शुरुआत में भारी निवेश नहीं करना पड़ता है। दूसरा, यह आसानी से मापनीय (स्केलेबल), क्योंकि यदि उपभोगता को व्यवसाय बढ़ाना है तो वे समय और प्रयास लगाये बिना बहुत ही आसानी से व्यवसाय को बढ़ा सकते हैं। तीसरा, कलाउड आधारित मॉडल के लिए आपको किसी विशेष स्थान और डिवाइस की जरूरत नहीं रहती, बल्कि इसके लिए आपको केवल इंटरनेट की आवश्यकता है।
 
आपको पता होना चाहिए कि इस मॉडल पर स्विच करने के लिए एमएसएमई को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार उपभोक्ता के भुगतान पर 2 साल की सब्सिडी भी प्रदान कर रही है। लिहाजा हर यूनिट को 1 लाख तक की अधिकतम सब्सिडी 2 वर्ष की अवधि में एमएसएमई के द्वारा वितरित की जाएगी। क्लाउड आधारित मॉडल के अंतर्गत दी गई सेवाएं इस प्रकार हैं:- पहला, इआरपी; दूसरा, लेखांकन (एकाउंटिंग); तीसरा, विनिर्माण डिजाइन (मैन्युफैक्चरिंग डिजाईन) और चौथा, कराधान (जीएसटी) और अनुपालन। इस प्रकार यदि आप सरकार और सामाजिक संगठन प्रदत्त इन सेवाओं का लाभ उठाने में कामयाब रहे तो आपके कारोबार को निश्चय ही वैश्विक पंख लग जायेगा, ऐसा मेरा विश्वास है।
 
-कमलेश पांडे

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