जानिये क्या है स्वामित्व योजना ? इससे आपको क्या और कैसे मिलेगा फायदा ?

  •  कमलेश पांडेय
  •  अक्टूबर 20, 2020   18:07
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जानिये क्या है स्वामित्व योजना ? इससे आपको क्या और कैसे मिलेगा फायदा ?
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जहां तक स्वामित्व योजना को लाने की वजह का सवाल है तो हमारे देश की लगभग 60 फीसदी आबादी गांवों और कस्बों में रहती है। जहां पुरानी व्यवस्था के तहत ज्यादातर ग्रामीणों के पास अपनी जमीन के मालिकाना हक के दस्तावेज नहीं हैं।

स्वामित्व योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक महत्वाकांक्षी योजना है जिसके तहत गांवों के लोगों की आवासीय संपत्ति के अभिलेख में पूरा ब्योरा दर्ज किया जा रहा है। इस योजना के तहत ग्रामीण इलाकों की संपत्तियों से जुड़ी भौतिक प्रतियां प्रॉपर्टी मालिकों को दी जाएंगी। वास्तव में स्वामित्व योजना गांव में रहने वाले लोगों को आत्मनिर्भर बनाने में बहुत ही कारगर और मददगार साबित हो सकती है।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में ‘स्वामित्व योजना’ के तहत एक लाख प्रॉपर्टी मालिकों को प्रॉपर्टी कार्ड्स बांटे हैं। जिससे ये लाभार्थी फिजिकल कॉपी के साथ-साथ डिजिटल संपत्ति कार्ड भी सम्बन्धित वेबसाइट से डाउनलोड कर सकते हैं। भूमि पैमाइश व राजस्व सम्बन्धी विभागों के अधिकारियों की मानें तो ग्रामीण इलाकों में मौजूद घरों के मालिकों के मालिकाना हक का एक रिकॉर्ड रखने वाली इस योजना के तहत प्रॉपर्टी से जुड़े विवादों के साथ-साथ उनसे सम्बन्धित सटीक भूमि रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। क्योंकि इस योजना का स्पष्ट मकसद ग्रामीण क्षेत्रों में घरों के मालिकों को अधिकार संबंधी रिकॉर्ड से संबद्ध संपत्ति कार्ड उपलब्ध कराना है।

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बताया जाता है कि राजस्व विभाग के स्थानीय प्रतिनिधि और अन्य संबद्ध विभागों के प्रतिनिधि लोगों के द्वारा संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड तैयार किये जा रहे हैं। कुछ जगहों पर यह कार्य पूरा कर लिया गया है, जबकि कुछ जगहों पर किया जा रहा है। खास बात यह है कि इस योजना के जरिए जमीन से जुड़े विवादों के निपटारे में बेहद आसानी होगी।

स्वामित्व योजना को लेकर सरकार की ऐसी है प्लानिंग

दरअसल, सरकार की प्लानिंग है कि इस योजना के तहत आगामी चार साल में यानि अप्रैल 2020 से मार्च 2024 तक पूरे देश के 6.2 लाख गांवों को कवर किया जाएगा। इससे एक ओर जहां सटीक भूमि रिकॉर्ड से संपत्ति संबंधी विवादों को कम करने का अवसर प्राप्त होगा, वहीं वित्तीय तरलता को बढ़ावा मिलेगा। इससे योजना और राजस्व संग्रह को सुव्यवस्थित और ग्रामीण क्षेत्रों में प्रॉपर्टी राइट्स पर स्पष्टता सुनिश्चित की जाएगी। इसके तहत, देशभर में लगभग 300 नियमित प्रचालन प्रणाली स्टेशन की स्थापना होगी। जिसके माध्यम से ड्रोन तकनीक और नियमित प्रचालन प्रणाली स्टेशन के द्वारा आवासीय भूमि की पैमाइश सुनिश्चित की जाएगी।

जहां तक इस योजना को लाने की वजह का सवाल है तो हमारे देश की लगभग 60 फीसदी आबादी गांवों और कस्बों में रहती है। जहां पुरानी व्यवस्था के तहत ज्यादातर ग्रामीणों के पास अपनी जमीन के मालिकाना हक के दस्तावेज नहीं हैं। वहां पर साल दर साल वक्त बीतता गया, लेकिन पुरानी व्यवस्था के चलते मालिकाना हक से जुड़े कागज कभी नहीं बन सके। हालांकि, गांवों की खेतिहर जमीन का रिकॉर्ड तो रखा गया, लेकिन लोगों के घरों पर विशेष ध्यान नहीं दिया गया। यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ‘स्वामित्व’ योजना से इसी बड़ी कमी को दूर करना चाहती है। 

बता दें कि इस योजना का ऐलान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लॉकडाउन के दौरान किया था। उन्होंने राष्ट्रीय पंचायत दिवस के दिन ही स्वामित्व योजना की शुरुआत की है, जिसके तहत गांव की जमीन की वैज्ञानिक तरीके से ड्रोन का इस्तेमाल करते हुए माप या पैमाइश की जाएगी। वास्तव में, स्वामित्व योजना गांव की संपत्तियों के सही आकलन करने का प्रयास है, जिसके तहत देश के सभी गांवों की संपत्ति की ड्रोन से मैपिंग की जाएगी और गांव के लोगों को एक मालिकाना प्रमाणपत्र दिया जाएगा। इससे संपत्ति को लेकर जो भ्रम की स्थिति बनी रहती है वो एक हद तक दूर हो जाएंगे। इससे गांव में विकास योजनाओं की प्लानिंग सही तरीके से होगी।

स्वामित्व योजना के कुछ अहम फायदे

स्पष्ट कहा जाए तो अब शहरों की तरह ही गांवों में भी आप बैंकों से लोन ले सकते हैं। क्योंकि जब आपके पास स्वामित्व होगा तो उस संपत्ति के आधार पर आप बैंक से लोन ले सकते हैं जो आपके जीवन में काफी काम आ सकता है।

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वहीं, वैज्ञानिक तकनीक के जरिए मालिकाना हक से गांवों के निवासी अपनी संपत्ति का वित्तीय उपयोग भी सुनिश्चित कर पाएंगे। इससे गांवों के आवासीय क्षेत्र का रिकॉर्ड भी पंचायतों को प्रदान कर सकेंगे। इससे संपत्तियों को कर संग्रह के दायरे में भी लाया जा सकेगा और इससे आसानी से कर संग्रह संभव हो पाएगा। इस आमदनी से पंचायतें अपने ग्रामीण क्षेत्र में बेहतर और कारगर सुविधाएं भी दे पाएंगी। स्वाभाविक है कि संपत्ति के स्पष्ट आकलन और मालिकाना हक का निर्धारण होने से उनकी कीमतों में भी तेजी आएगी। देखा जाए तो ड्रोन सर्वेक्षण तकनीक के उपयोग से ग्राम पंचायत के पास गांव का सटीक रिकॉर्ड और मानचित्र होगा। जिसका उपयोग कर वसूली, भवन निर्माण के लिए परमिट जारी करने में और अवैध कब्जा समाप्त करने आदि के लिए किया जा सकता है।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2020 के नए वित्तीय वर्ष में 6 प्रमुख राज्यों में स्वामित्व योजना की पायलट शुरुआत की गई है, जिसके तहत यूपी, महाराष्ट्र, कर्नाटक हरियाणा, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड में इस योजना को प्रारंभिक तौर पर प्रारंभ किया गया है। समझा जाता है कि यहां जब काम किया जाएगा तो स्पष्ट अनुभव काम आएगा कि गलतियां क्या हैं? कहां हैं और उन्हें कैसे दूर किया जाए। जब वो कमियां ध्यान में आएंगी, तब इसमें सुधार भी किया जाएगा। फिर स्वामित्व योजना को हिंदुस्तान के हर गांव में लागू किया जाएगा, ताकि सभी को इसका समान रूप से फ़ायदा मिल सके।

-कमलेश पांडेय

(वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार)







रिटर्न दाखिल करते समय इन त्रुटियों से बचें, ताकि आपको नोटिस ना मिले

  •  जे. पी. शुक्ला
  •  नवंबर 28, 2020   17:11
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रिटर्न दाखिल करते समय इन त्रुटियों से बचें, ताकि आपको नोटिस ना मिले
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80 सी, 80 डी और 24 (बी) जैसे विभिन्न वर्गों के तहत आयकर निर्धारणकर्ताओं की विभिन्न कर कटौती उपलब्ध हैं। ये कटौती निवेश या खर्च के लिए उपलब्ध हैं। इनके अलावा, कटौती और छूट की गणना करते समय विचार करने के लिए विभिन्न नियम और सीमाएं हैं।

कर नोटिस प्राप्त करना, वह भी करों का भुगतान करने और आईटीआर दाखिल करने के बाद! शायद वह आखिरी चीज होगी जो आप नहीं चाहेंगे।

पिछले कुछ वर्षों से आयकर रिटर्न (ITR) फाइलिंग पूरी तरह से ऑनलाइन प्रक्रिया बन गई है। हालाँकि, जैसा कि आपको विभिन्न विवरणों को भरना और आईटीआर दाखिल करते समय विभिन्न चरणों का पालन करना आवश्यक है, गलतियाँ करने या गलत जानकारी भरने की थोड़ी संभावना अवश्य रहती है। उदाहरण के लिए, आप पूरी तरह से गलत आईटीआर फॉर्म चुन सकते हैं, किसी आय का उल्लेख करने से चूक सकते हैं, गलत स्व-मूल्यांकन कर चालान विवरण या गलत टीडीएस (स्रोत पर कर कटौती) विवरण, कर कटौती खाता संख्या या कोई अन्य विवरण हो- ये सभी आपको एक कर नोटिस प्राप्त करने के कारण बन सकते हैं।

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आइए सबसे आम गलतियों पर नज़र डालते हैं जो आप कर सकते हैं और उनसे कैसे बचा जाए।

1. गलत आईटीआर फॉर्म का चयन करना

केवल वही आईटीआर फॉर्म चुनें जो आपके लिए लागू है। सरकार ने करदाताओं के विभिन्न वर्गों के लिए अलग-अलग आईटीआर फॉर्म निर्धारित किए हैं, जो उनकी आवासीय स्थिति पर निर्भर करता है, जिसके तहत उनके आय के स्रोत आते हैं, जैसे कर योग्य आय का स्तर, किसी कंपनी में शेयर / निर्देशन या एक साझेदारी फर्म में सदस्य आदि। अक्सर करदाता इनमें से कुछ शर्तों की अनदेखी कर जाते हैं और इस तरह अनजाने में गलत फॉर्म का चयन कर लेते हैं। 

इसलिए, उपयुक्त आईटीआर फॉर्म का चयन करना बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। यदि आप गलत आईटीआर फॉर्म में अपनी रिटर्न फाइल करते हैं तो इसे अमान्य माना जाता है या बिल्कुल भी दायर नहीं माना जाता है और ऐसे मामलों में आपको कर विभाग से नोटिस मिल सकता है।

2. किसी आय का छूट जाना

दूसरी सबसे आम गलती, जो ज्यादातर कर फाइलर करते हैं, वो है कुछ निश्चित आय की अनदेखी करना। आपके नियोक्ता टैक्स काटते हैं और आपको फॉर्म 16 देते हैं। लेकिन क्या वह एकमात्र आय है जो आपने अर्जित की है? एक साधारण बचत बैंक बैलेंस से आपको ब्याज भी तो मिलता है। वह भी कर योग्य है। यद्यपि आपका निवेश छोटा है, मगर फॉर्म में यह भी घोषित किया जाना चाहिए। आपके फॉर्म 16 ने इसे कवर नहीं किया होगा। 

कभी-कभी करदाता, विशेष रूप से वेतनभोगी, मुख्य रूप से अपने नियोक्ताओं द्वारा जारी किए गए फॉर्म 16 या टीडीएस प्रमाणपत्र के आधार पर ही अपना आईटीआर दाखिल कर देते हैं। वे अनजाने में आय के अन्य स्रोतों, जैसे कि ब्याज आय को मिस कर जाते हैं। आईटीआर फॉर्म भरते समय ऐसे विवरणों को इकठ्ठा करना चाहिए और उन्हें संभाल कर रखना चाहिए। कर रिटर्न का आकलन करते समय कर विभाग मिसिंग आय को नोटिस कर सकता है और आपको एक डिमांड नोटिस भेज सकता है।

3. टैक्स क्रेडिट में बेमेल (Mismatch)

इसका मतलब यह है कि आपने अपने कर रिटर्न में जो कर क्रेडिट का दावा किया है और आयकर अधिकारियों के रिकॉर्ड में जो उपलब्ध है, उसके बीच कुछ अंतर है। बेमेल के विभिन्न कारण हो सकते हैं। जैसे कि आपने गलत जानकारी दर्ज की हो या टीडीएस कटौतीकर्ता द्वारा विभाग के पास जमा नहीं किया गया हो या आपके फॉर्म 26AS में परिलक्षित नहीं होता हो। इसलिए, कर नोटिस से बचने के लिए फॉर्म 26AS में दर्शाए गए टीडीएस के साथ अपनी आय में से काटे गए कर की जांच करें। यदि कोई बेमेल है तो अपना टैक्स रिटर्न दाखिल करने से पहले इसे ठीक अवश्य करवा लें।

4. गलत कटौती का दावा करना

80 सी, 80 डी और 24 (बी) जैसे विभिन्न वर्गों के तहत आयकर निर्धारणकर्ताओं की विभिन्न कर कटौती उपलब्ध हैं। ये कटौती निवेश या खर्च के लिए उपलब्ध हैं। इनके अलावा, कटौती और छूट की गणना करते समय विचार करने के लिए विभिन्न नियम और सीमाएं हैं। हालांकि, कई बार करदाता तकनीकी ज्ञान की कमी के कारण एक गलत खंड के तहत एक गलत राशि या कटौती का दावा पेश कर देते हैं, जिसके परिणामस्वरूप उनकी कर देयता में बदलाव आ जाता है।

इसके परिणामस्वरूप, कर नोटिस अपरिहार्य हो जाते हैं। इसलिए, कटौती का दावा करते समय कर नियमों का उचित ज्ञान होना जरूरी है। यदि आपको इस तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है तो  ऐसे  हालात में आपको कर विशेषज्ञ या चार्टर्ड एकाउंटेंट से परामर्श लेना उचित होता है।

5. टैक्स रिटर्न दाखिल नहीं करना

कर रिटर्न दाखिल ही नहीं करना, जबकि आप उस श्रेणी में आते हैं, निश्चित रूप से कर नोटिस प्राप्त करने की संभावना को बढ़ाता है। याद रखें, यदि आपकी सकल आय, मूल छूट सीमा से ऊपर है, जैसे - 60 वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों के लिए 2.5 लाख रुपये तक, 60 से 80 वर्ष की आयु वालों के लिए 3 लाख रुपये और 80 से अधिक आयु वालों के लिए 5 लाख रुपये,  तो आप अपना टैक्स रिटर्न फाइल अवश्य करें। अन्य मापदंड भी हैं जो कर रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य बनाते हैं।

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इसके अलावा, आपको निश्चित तारीख से पहले अपना रिटर्न दाखिल करना चाहिए। इस साल नियत तारीख को 30  नवंबर 2020 तक के लिए बढ़ा दिया गया है। आप उसके बाद भी 31 मार्च, 2021 तक रिटर्न दाखिल कर सकते हैं, लेकिन एक पेनल्टी के साथ। मूल्यांकन वर्ष (Assessment Year) समाप्त होने के बाद, यानी 31 मार्च के बाद रिटर्न दाखिल नहीं किया जा सकता है।

जब हम गलतियाँ करते हैं तो आखिरी क्षण तक चीजों को स्थगित करने से गलतियाँ होने की संभावना को हम और भी बढ़ा देते हैं। इसलिए, हमें अपना टैक्स रिटर्न बहुत ही सावधानी, सही समय और उचित परामर्श के साथ ही फाइल करना चाहिए, जिससे किसी प्रकार के नोटिस की सम्भावना ही न रहे।

जे. पी. शुक्ला







अपनी कार चोरों से 'ऐसे' बचाएँ, जानिए कुछ आसान से टिप्स

  •  मिथिलेश कुमार सिंह
  •  नवंबर 25, 2020   20:33
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अपनी कार चोरों से 'ऐसे' बचाएँ, जानिए कुछ आसान से टिप्स
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मार्केट में ऐसी तमाम डिवाइसेज हैं, जो आपकी कार को एक्स्ट्रा सिक्योर करती हैं। इनमें टायर लॉक, स्टेरिंग लॉक, गियर लॉक जैसे टूल्स आपकी काफी सहायता करते हैं। जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम भी इसमें काफी सहायता करता है।

क्या आपने अपनी कार की इंश्योरेंस करा रखी है और इसी भरोसे कार चोरी की संभावना के प्रति निश्चिंत हैं?

अगर ऐसा है तो आप यह बात जान लें कि कार चोरी होने के बाद प्राथमिकी दर्ज (f.i.r.) कराना और फिर इंश्योरेंस क्लेम करने का प्रोसेस काफी पेचीदा और झंझट भरा है। कई बार ऐसे भी मामले आए हैं जिसमें इस झंझट से परेशान होकर लोग उम्मीद ही खो देते हैं।

तो ऐसी स्थिति में क्यों ना पहले से ही सावधान रहा जाए, ताकि कार चोरी की संभावना से बचा जा सके। आइए जानते हैं कुछ टिप्स...

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कार के अंदर ना रखें कीमती सामान 

जी हां! कई लोग कार के अंदर सीट पर ही लैपटॉप बैग, पर्स इत्यादि रख देते हैं, जो चोरों को सीधे तौर पर आकर्षित करता है। अगर आपने अपनी कार के अंदर कुछ कीमती सामान रख रखा है तो सावधान हो जाएं और आगे से ऐसा ना करें। अगर मजबूरी में कुछ सामान कार के अन्दर रखना पड़ रहा है तो उसे डिक्की में छिपा कर रखें या ऐसी जगह जहाँ वह सीधा नज़र न आये। इस प्रकार की गलती आपको भारी पड़ सकती है। अगर आपकी कार में सेंटर लॉकिंग है, उसके बावजूद इस तरह का रिस्क ना लें, क्योंकि कार का शीशा तोड़ने में किसी चोर को अधिक समय नहीं लगता है।

ऑथराइज जगह पर ही सर्विस कराएं 

क्या आपने कभी कल्पना की है कि अगर आपकी कार की चाबी का कोई क्लोन बना ले तो क्या होगा? ऐसा अक्सर होता है कि आप किसी मैकेनिक के पास जाते हैं और वहां पर अपनी कार बनने के लिए छोड़ आते हैं। कई बार ऐसा भी होता है कि वह मैकेनिक चोरों के गिरोह से मिला होता है और आपकी कार की डुप्लीकेट चाबी बनाकर उन्हें दे देता है। इसके बाद आप खुद कल्पना कर लें कि क्या हो सकता है?

ऐसे में आवश्यक है कि ऑथराइज्ड जगह पर ही सर्विस कराएं और कार ठीक कराएं। आपातकाल में अगर कभी आपको किसी लोकल मैकेनिक के पास गाड़ी ठीक कराना ही हो, तो अपनी आंखों के सामने ठीक कराएं।

लावारिस की तरह ना छोड़ें कार

जी हां! अगर आपकी कार किसी पार्किंग या ऑफिस स्पेस के बाहर खड़ी रहती है और उसे आप हफ्तों तक चलाते नहीं हैं, उसकी सफाई नहीं करते हैं, तो ऐसी कार चोरों की नजर में आसानी से आ जाती है। चोर इस बात को ताड़ लेते हैं कि उस कार पर किसी का ध्यान नहीं है। ऐसे में उनका काम आसान हो जाता है।

कार को करें एक्स्ट्रा सिक्योर

मार्केट में ऐसी तमाम डिवाइसेज हैं, जो आपकी कार को एक्स्ट्रा सिक्योर करती हैं। इनमें टायर लॉक, स्टेरिंग लॉक, गियर लॉक जैसे टूल्स आपकी काफी सहायता करते हैं। जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम भी इसमें काफी सहायता करता है। हालांकि अगर आप नई कार ले रहे हैं तो कोशिश करें कि उसमें आधुनिक जमाने के तमाम फीचर अवेलेबल हों, जैसे एंटी थेफ्ट, इंजन इमोबिलाइजर, सिक्योरिटी अलार्म, सेंट्रल लॉकिंग इत्यादि।

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इंश्योरेंस रिनुअल में ना करें लापरवाही 

जी हां! आप चाहे जितना एडवांस हो जाएँ, लेकिन चोर भी दिन प्रतिदिन शातिर होते जा रहे हैं। खुदा ना खास्ता, आपके साथ दुर्घटना हो ही गयी, तो तत्काल पुलिस रिपोर्ट दर्ज करें और उससे पहले अपने इंश्योरेंस को रिन्यू रखें। बेशक आप की कार पुरानी हो गई हो, किंतु लगातार रिन्यू करने से आप फिक्र से मुक्त रहते हैं। झंझट ही सही, लेकिन बुरे समय पर आपको गाड़ी की वैल्यू इंश्योरेंस कंपनी से मिल जाती है।

इसके अतिरिक्त, कई लोग बैट्री इत्यादि की सुरक्षा के लिए लोहे की अलग से ग्रिप बनवाकर मैनुअल ताले भी लगवाते हैं। हालाँकि, कई लोग इस तरह की चीजों को प्रिफर नहीं ही करते हैं।

- मिथिलेश कुमार सिंह







कम समय में ऐसे करें माइंड को रिलैक्स ताकि दिमाग रहे फिट

  •  मिथिलेश कुमार सिंह
  •  नवंबर 21, 2020   16:34
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कम समय में ऐसे करें माइंड को रिलैक्स ताकि दिमाग रहे फिट
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ऑफिस में भी जब कार्य का प्रेशर बढ़ता है तो लोग चाय पीते हैं, किंतु आप दूध वाली चाय की बजाय हर्बल चाय का प्रयोग करें। हर्बल चाय-ग्रीन टी पीने से इसमें मौजूद तत्व आपके शरीर में विषाक्त पदार्थों को दूर करते हैं और आपके दिमाग को तत्काल राहत पहुंचाते हैं।

आज की भाग दौड़ भरी जिंदगी में मनुष्य का दिमाग कब उलझ जाए, पता नहीं चलता!

घर-परिवार हो, बिजनेस हो, अथवा समाज में रहने से सामने आने वाली समस्याएं हों, तमाम चीजों में दिमाग ही के सहारे तो हम चलते हैं। ऐसे में जब दिमाग ही उलझन और तनाव में रहेगा, तब अपने कार्य के परिणाम की हम सहज ही कल्पना कर सकते हैं

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वस्तुतः दिमाग का सही निर्णय लेने के लिए रिलैक्स होना जरूरी होता है। कल्पना कीजिए, अगर आपका दिमाग ही सही निर्णय ना ले पाए तो क्या स्थिति होगी? ज़ाहिर तौर पर तमाम निर्णय गलत होंगे और गलत निर्णय से न केवल हमारी ज़िन्दगी असफल होने की ओर बढ़ेगी, वरन हमारा आत्मविश्वास भी बिखर जायेगा।  इसके अलावा आप यह भी जान लीजिए कि दिमाग जब तनाव में रहता है तो कॉर्टिसोल नामक हार्मोन (Cortisol Hormone) की उत्पत्ति होती है, जो आपके दिमाग के लिए बेहद नुकसानदायक है। तो फिर दिमाग को किस प्रकार रिलैक्स किया जा सकता है?

आइए जानते हैं कुछ तरीके...

हर्बल चाय अथवा च्युइंग गम का करें इस्तेमाल

जी हां! अक्सर जब व्यक्ति तनाव में होता है, तो चाय की चुस्कियां लेता है। तमाम लोगों को आपने देखा भी होगा।

ऑफिस में भी जब कार्य का प्रेशर बढ़ता है तो लोग चाय पीते हैं, किंतु आप दूध वाली चाय की बजाय हर्बल चाय का प्रयोग करें। हर्बल चाय-ग्रीन टी पीने से इसमें मौजूद तत्व आपके शरीर में विषाक्त पदार्थों को दूर करते हैं और आपके दिमाग को तत्काल राहत पहुंचाते हैं।

वैसे अगर आप चाय नहीं पीते हैं तो फिर आप च्यूइंग गम का प्रयोग करें। इससे आपका कॉर्टिसोल हार्मोन का लेवल निश्चित रूप से कम होगा। हालांकि इसे बहुत अधिक देर तक नहीं चबाना चाहिए और कुछ मिनटों के बाद मुंह को रिलैक्स छोड़ना चाहिए।

स्ट्रैचिंग व मसाज

जी हां! अगर आपका दिमाग तनाव में है, तो मसाज आपको तत्काल राहत पहुंचा सकता है। इसी प्रकार से स्ट्रैचिंग भी आपको मदद कर सकती है। स्ट्रैचिंग आप कुर्सी पर या फिर बेड पर भी कर सकते हैं और इससे आपकी मसल्स को काफी राहत मिलती है।

योगा 

जी हां! योगा ना केवल भारत में, बल्कि संपूर्ण विश्व में तन और मन को शांत- रिलैक्स रखने में मददगार साबित हो रहा है। अब तो तमाम कंपनियां कारपोरेट योगा के लिए विशेष ट्रेनर भी हायर कर रही हैं।

इसके लिए कोई आवश्यक नहीं है कि सुबह या शाम को ही आप योगा करें, बल्कि जब आप दिमाग को तुरंत रिस्क रिलैक्स करना चाहते हैं तो योगा का सहारा अवश्य लें। इसमें ध्यान, प्राणायाम इत्यादि पद्धतियों को शामिल कर सकते हैं

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एकांत में टहलें / धूप लें

जी हां! अगर आपको किसी एनवायरनमेंट से तनाव होता है, तो तत्काल पांच से 10 मिनट की वाक लें। यह वाक आप अकेले करें, तो ज्यादा बेहतर रहेगा। धूप भी इसमें आपकी काफी मदद करती है और आपके दिमाग को शांत रखती है।

जूस पीयें / डार्क चॉकलेट लें

जूस पीने से भी आपके दिमाग की तरंगें तत्काल रिलैक्स होती हैं। खासकर खट्टे फलों का, जिनमें मौसमी, संतरा, अनन्नास इत्यादि शामिल है, वह आपके दिमाग को तत्काल रिलेक्स करता है। इसी प्रकार डार्क चॉकलेट खाने से भी आपके तनावपूर्ण दिमाग में कार्टिसोल हार्मोन का लेवल कम होता है।

अपना म्यूजिक कलेक्शन सुनें

गानों की असीमित मौजूदगी में अपने लिए कुछ गाने अवश्य सेलेक्ट करें, जो आपको सुकून पहुंचाते हैं। तनाव के पलों में आंख बंद करके कुछ मिनट उन गानों को सुनने से आपका तनाव तुरंत रफूचक्कर हो जाएगा।

सच कहा जाए तो दिमाग से ही हमारा पूरा शरीर और हमारा व्यवहार नियंत्रित होता है, इसलिए दिमाग को अत्यधिक उलझन वाली परिस्थितियों में डालने से आपको अवश्य ही बचना चाहिए और उपरोक्त रिलैक्सेशन के उपायों को आजमाना चाहिए।

- मिथिलेश कुमार सिंह