आयकर रिटर्न भरने से जुड़ी वो बातें जो आपके लिए जानना है जरूरी

By कमलेश पांडे | Publish Date: Jun 16 2018 2:01PM
आयकर रिटर्न भरने से जुड़ी वो बातें जो आपके लिए जानना है जरूरी
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रिटर्न भरने की पूरी प्रक्रिया के शेष चरणों के बारे में, जिसके बारे में इससे पूर्व के आलेख में शब्द सीमा के चलते बताना शेष रह गया था, लेकिन उसे जानना आपके लिए बेहद जरूरी है।

आगामी 31 जुलाई तक उन सभी व्यक्तियों के लिए आयकर रिटर्न भरना जरूरी है जिनकी आय ढाई लाख रुपए से अधिक है। इसलिए आप लोगों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए यहां बता रहे हैं आयकर रिटर्न भरने की पूरी प्रक्रिया के शेष चरणों के बारे में, जिसके बारे में इससे पूर्व के आलेख में शब्द सीमा के चलते बताना शेष रह गया था, लेकिन उसे जानना आपके लिए बेहद जरूरी है। आपकी स्मृति ताजा कर दें कि अभी तक आपको अपना ई-फ़ाइलिंग एकाउंट बनाने, आयकर रिटर्न फॉर्म डाउनलोड और अपलोड करने, ई-फ़ाइलिंग के लिए लॉगिन करने और फॉर्म 26 एएस डाउनलोड करने के बारे में बताया जा चुका है। लिहाजा, अब आगे की गूढ़ जानकारी आपसे साझा कर रहे हैं। तो आइए विस्तार पूर्वक जानते हैं कि आप अपना आयकर रिटर्न कैसे दाखिल करें।

#चरण 5:- सावधानी पूर्वक ऐसे भरें अपने आयकर रिटर्न फॉर्म में व्यक्तिगत विवरण
 
यदि आप ऑनलाइन फॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं तो सीधे असेसमेंट ईयर तथा फॉर्म को चुनिए। फिर सम्बन्धित फॉर्म में अपनी व्यक्तिगत जानकारी सावधानी पूर्वक भरिए। याद रहे कि डाउनलोडेड जिप फाइल से एक्सेल फॉर्म यूटीलिटी को एक्सट्रेक्ट कीजिए एवं एक्सेल फॉर्म के मैक्रोज़ को इनेबल कीजिए। फिर इसमें सावधानीपूर्वक मांगी गई जानकारियां भरना शुरू कीजिए। ध्यान रहे कि पहले पृष्ठ में आप अपने बारे में आधारभूत जानकारियां, जैसे- नाम, पैन, पूरा पता, जन्मतिथि, ई-मेल आईडी, मोबाइल नंबर, आवासीय स्टेटस आदि सावधानीपूर्वक भरिए। याद रहे कि आयकर रिटर्न आप मौलिक (ऑरिजिनल) भर रहे हैं या फिर संशोधित (रिवाइज्ड), इसका भी स्पष्ट उल्लेख आपको करना होगा।


 
यद्यपि, दूसरे पृष्ठ में आपको अपनी आमदनी का स्पष्ट विवरण देना जरूरी होगा। इसके लिए वेतन से आमदनी वाले कोष्ठक (कॉलम) में आपको करयोग्य आय (टैक्सेबल इनकम) ही भरनी है। गृह सम्पत्ति से आय में किराया या गृह ऋण ब्याज (होमलोन इंट्रेस्ट) को भरना होता है। आमतौर पर गृह कर्ज का साल भर का ब्याज निगेटिव में भऱा जाएगा। यानी कि अगर एक लाख का ब्याज दे रहे हैं तो इसे 1,00,000 भरें। इसके बाद टैक्स डिडक्शन वाले निवेश का हिसाब किताब देना होगा। यदि आपकी आमदनी और कर कटौती (टैक्स डिडक्शन) का विवरण देने से फॉर्म में आयकर देनदारी अपने आप कैलकुलेट हो जाती है।
 
हालांकि, तीसरे पृष्ठ में आप अपनी आमदनी में से टीडीएस, अग्रिम कर या स्वमूल्यांकित कर (सेल्फ असेसमेंट टैक्स) के माध्यम से जमा की हुई रकम को निर्देशित किए गए स्थान पर ही उल्लेख कीजिए। इसके लिए आप अपने फॉर्म 16 और फॉर्म 26 एएस में दिए गए विवरण को देखकर ही अपने फॉर्म में भरें। ऐसी आमदनी जिस पर आयकर नहीं बनता है तो उसका भी इस पृष्ठ में उल्लेख बखूबी कीजिए। खेती से कमाई, डिविडेंड, दीर्घ अवधि पूंजीगत लाभ (लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन), ईपीएफ, पीपीएफ और ग्रेच्युटी की रकम इसी तरह की आमदनी मानी जाती है।
 


लिहाजा, आप अपने बैंक खाते संबंधी विवरणों, जैसे कि खाता संख्या, खाते का प्रकार (बचत या करेंट), बैंक शाखा का आईएफएससी कोड, रिफंड की स्थिति में उसे पाने का मोड (चेक या सीधे खाते में जमा) आदि का उल्लेख भी सावधानी पूर्वक कीजिए। साथ ही, हर शीट्स पर दिए गए वैलिडेट बटन पर क्लिक कीजिए। इससे यह सुनिश्चित हो जाएगा कि आयकर रिटर्न में जो जानकारियां आपने प्रदान की हैं उन्हें आयकर रिटर्न में कैप्चर्ड कर लिया गया है। यही नहीं, यदि आपसे कहीं भी कुछ भी छूट रहा होगा तो शीट स्वतः ही उस विवरण को भरने की आवश्यकता जताएगी।
 
#चरण 6:- आप अपनी कर देनदारियों को पहले चेक करें, फिर सम्बन्धित विवरण सतर्कतापूर्वक भरें
 


यदि आपको पता नहीं हो तो यह जान लीजिए कि आयकर रिटर्न फॉर्म सबमिट करने से पहले आपकी कर देनदारी बिल्कुल शून्य होनी चाहिए। इसलिए रिटर्न फॉर्म में इसे चेक जरूर कर लें। आपका ऑनलाइन फॉर्म अपने आप ही आपकी कर देनदारी का विवरण देगा, जबकि एक्सेल में कैलकुलेट बटन दबाने के बाद ही यह बताएगा। लिहाजा, यदि आप पर कर देनदारी बनती है तो सबसे पहले उस कर को जमा कर दीजिए। फिर आप फटाफट ऑनलाइन आयकर जमा कर सकते हैं।
 
बेशक आप कर जमा (टैक्स डिपॉजिट) करने के बाद ही अपने आयकर रिटर्न को फाइल करें। क्योंकि रिटर्न में जमा किए गए कर का विवरण भी आपको भरना होगा। इसलिए आपने पहले ही ज्यादा कर रिटर्न भरा होगा तो उसका रिफंड भी इस फॉर्म में दिख जाएगा। जो लोग ऑनलाइन फॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं, उन्हें बैंक विवरण देने और कर देनदारी जांचने के बाद फॉर्म सबमिट करना है। क्योंकि यदि कुछ छूट गया होगा तो सिस्टम अपने आप ही आपको सूचित करेगा। अतः ऑनलाइन फॉर्म सबमिट करने के बाद आपको ई-वेरिफिकेशन करना होगा। ऐसे लोगों के लिए नीचे के दो चरण की जरूरत नहीं होती है। इसलिए आप अपने आयकर कैलकुलेटर से अपनी कर देनदारी का पता करें, फिर आयकर विवरण भरें।
 
#चरण 7:- आप ऐसे बनाइए अपनी एक्सएमएल फ़ाइल
 
जब आपके सारे कर जमा हो जाएं तब आप 'जेनेरेट एक्सएमएल' टैब पर क्लिक कीजिए और एक्सएमएल फ़ाइल को अपने कंप्यूटर पर सेव कर लीजिए। यह हमेशा आपके काम आएगी।
 
#चरण 8:- अब आप अपना आयकर रिटर्न जमा कर दीजिए
 
अब आप आयकर की वेबसाइट पर जाइए और इसमें मौजूद ‘अपलोड रिटर्न’ बटन पर क्लिक कीजिए। उसके बाद यहां पर आप आईटीआर फॉर्म, नेम, असेसमेंट ईयर आदि की जानकारियां भरने के बाद पहले से कंप्यूटर पर सेव की गई एक्सएमएल फ़ाइल को अपलोड कर दीजिए। इससे आपकी प्रक्रिया पूरी हो जाएगी और रिटर्न जमा हो जाएगा।
 
#चरण 9:- जरूरी होता है आयकर रिटर्न का वेरिफिकेशन करना ताकि त्रुटियों से बचा जा सके
 
अब तो आयकर रिटर्न का वेरिफिकेशन हाथों-हाथ ही हो जाता है। पहले तो इसके लिए फॉर्म जमा करने के बाद आईटीआर-वी  को डाउनलोड करना होता था। फिर इस फॉर्म का प्रिंट लेकर हस्ताक्षर करके उसे पोस्ट से भेजना होता था। लेकिन अब तो यह वेरिफिकेशन ओटीपी के जरिए ही हो जाता है। दरअसल, फॉर्म सबिमिट करने के बाद आपके आधार से लिंक मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी पहुंच जाता है, जिसको भरते ही आपका आयकर रिटर्न वेरिफाई हो जाता है। अतः जो लोग नेटबैंकिंग के जरिए अपना रिटर्न फाइल कर रहे हैं, उन्हें तो अब ओटीपी की भी जरूरत नहीं होती है। सिर्फ एक बटन पर क्लिक करने से ही उनका काम बन जाता है।
 
#चरण 10:- आयकर रिटर्न की पावती तथा प्रमाण पत्र अवश्य लें
 
अब आयकर रिटर्न भरते ही आपके मेल पर एक पावती पहुंच जाती है। अतः आप इस पावती को संभाल कर रख लें। हालांकि लगभग तीन महीने में आपको आयकर रिटर्न भरने का प्रमाण पत्र मिल जाएगा। यह प्रमाण पत्र आपके रिटर्न के असेसमेंट के बाद दिया जाता है। इस प्रमाण पत्र को इंटिमेशन यू/एस 143 (1) के तौर पर भेजा जाता है। अतः आप इस पीडीएफ फाइल को सेव कर लें। क्योंकि इसका प्रिंट ही किसी भी व्यक्ति द्वारा लोन लेते समय उसके काम आता है। आप भी इसके अपवाद नहीं हो सकते, बशर्ते कि आप लोन ही न लें।
 
#आयकर रिटर्न भरने के दौरान कुछेक अपेक्षित सावधानियां
 
पहला, हमेशा लेन-देन का सही विवरण ही दें, अन्यथा बढ़ेगी परेशानी। दरअसल, आपके बैंक खाता से हुए तमाम लेन-देन, विभिन्न सरकारी और निजी योजनाओं में निवेश, चल-अचल सम्पत्ति की खरीदारी, विदेश यात्राओं के विवरण आदि पर आयकर विभाग की हर वक्त कड़ी नजर रहती है। क्योंकि आपके पैन कार्ड और आधार नंबर के जरिए इनका समस्त विवरण उसके पास उपलब्ध होता है। इसलिए आयकर दाखिल करते समय ऐसे सभी लेन-देन का सही सही विवरण दें ताकि आगे कभी भी आप मुश्किल में नहीं पड़ें।
 
दूसरा, आप अपनी नियमित/अनियमित आमदनी के तमाम स्रोतों का सटीक उल्लेख आयकर रिटर्न भरने में करें, क्योंकि उनमें जो कमाई कर मुक्त या कर एक्सेम्पशन की श्रेणी में आती हो, उसका भी विस्तृत ब्यौरा अवश्य भरें। यही नहीं, यदि आपने शेयर बाजार में या इक्विटी से जुड़े सभी म्यूचुअल फंड्स-ईएलएसएस में निवेश कर रखा है तो इससे जुड़े लाभ या नुकसान का ब्यौरा भी अपने आयकर रिटर्न में अवश्य भरें।
 
तीसरा, आप अपना पता और बैंक खाता आयकर विभाग के रिकार्ड में हमेशा अपडेट रखें, क्योंकि आयकर रिटर्न दाखिल करने के बाद यदि आपका रिफंड बनता है तो यह सीधे आपके खाते में ट्रांसफर कर दिया जाता है। इसलिए इस विषय में हमेशा सावधान रहें।
 
चौथा, अंतिम तिथि का इंतजार कभी भी नहीं करें। क्योंकि अक्सर लोग आयकर रिटर्न दाखिल करने के लिए अंतिम  तारीख का ही इंतजार करते हैं जो कि उचित नहीं है। क्योंकि आखिरी दिनों में आयकर विभाग की वेबसाइट incometaxindiaefiling.gov.in पर रिटर्न दाखिल करने वालों की इतनी भीड़ बढ़ जाती है कि कई बार सर्वर ही डाउन हो जाता है। इससे न सिर्फ आप मानसिक परेशानी झेलते हैं, बल्कि आपका कीमती समय भी अनावश्यक खराब होता है। यही नहीं, यदि सिस्टम में किसी खामी के चलते अंतिम तारीख पर रिटर्न दाखिल न हो पाया तो आपको जुर्माना भी अलग से भरना पड़ सकता है। लिहाजा हर तरह से बेहतर होगा कि आप अंतिम तिथि का इंतजार न करें और सभी संबंधित जरूरी कागजात इकट्ठा कर लें और समय रहते ही अपना आयकर रिटर्न फाइल कर दें।
 
पांचवां, साधारणतया नौकरी-पेशा के साथ-साथ आम लोगों को 31 जुलाई से पहले आयकर रिटर्न भरना आवश्यक होता है। लेकिन इसके बाद भी किसी को आयकर रिटर्न भरने की मनाही नहीं होती, बल्कि पेनाल्टी लगती है। कहने का तातपर्य यह कि आप अगले 31 मार्च तक अपना आयकर रिटर्न फाइल कर सकते हैं। फिर भी आप हमेशा याद रखिए कि इससे आपको कई तरह का नुकसान भी हो सकता है। पहला, यदि आपका रिफंड बनता है तो वो भी नहीं मिलेगा। दूसरा, पूरा कर नहीं भरा है तो आपको ब्याज भी देना होगा और पेनाल्टी तो लगेगी ही।तीसरा, आप संशोधित रिटर्न कतई नहीं भर सकेंगे।
 
छठा, आयकर रिटर्न दाखिल करने के लिए निर्धारित अंतिम तारीख तक रिटर्न न भर पाने के बाद भी आप उस असेसमेंट ईयर की समाप्ति के बाद भी एक साल के अंदर रिटर्न भर सकते हैं। इसे बिलेटेड रिटर्न कहते हैं। आम तौर पर रिटर्न भरने में लेट हो जाने या फिर त्रुटि रह जाने पर बिलेटेड रिटर्न का सहारा लिया जाता है।
 
सातवां, आयकर रिटर्न भरते समय यदि सम्बन्धित तथ्यों में किसी प्रकार की चूक या गलती हो जाती है तो उस असेसमेंट ईयर की समाप्ति के बाद भी एक वर्ष के दौरान उसे रिवाइज्ड रिटर्न के माध्यम से सुधारा जा सकता है।
 
आठवां, आपने जो आयकर रिटर्न दाखिल किया है, यदि उस पर असेसमेंट अफसर कोई खामी निकाल देता है तो उसमें अपेक्षित सुधार जरूरी हो जाता है। अतः ऐसा करने के लिए डिफेक्टिव रिटर्न भरा जाता है। इससे रिटर्न में कोई खामी नहीं रह पाती और कर अदाकर्ता भी चैन की बंशी बजाता है।
 
-कमलेश पांडे

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