हवाला कारोबार क्या है? यह किनके बीच होता है? इसमें कौन लोग शामिल होते हैं? यह कैसे काम करता है?

हवाला कारोबार क्या है? यह किनके बीच होता है? इसमें कौन लोग शामिल होते हैं? यह कैसे काम करता है?

साफ शब्दों में कहें तो रुपये को दुनिया में एक जगह से दूसरे स्थान पर ग़ैरक़ानूनी रूप से हस्तांतरण करवाने का नाम ही हवाला है, जिसमें सबसे अहम भूमिका एजेंट या बिचौलिए या मध्यस्थ की होती है। क्योंकि ये बिचौलिए अपने धंधे में इतने सिद्धहस्त होते हैं कि शायद ही कभी किसी लेन देन का रिकॉर्ड छोड़ते हैं।

हवाला, धन-हस्तान्तरण की एक अवैध एवं अनौपचारिक प्रणाली है, जो धन लेने-देने वाले दलालों के एक बहुत बड़े नेटवर्क के रूप में काम करती है। दरअसल, हवाला का पूरा काम इस नेटवर्क के 'विश्वास' एवं 'कार्यकुशलता' पर आधारित होता है। भले ही हवाला का काम मुख्यत: मध्य पूर्व, उत्तरी अफ्रीका एवं दक्षिण एशिया में फैला हुआ है, लेकिन भारत में भी इसकी अच्छी खासी पैठ है। 

भारतीय अर्थव्यवस्था इसके नकारात्मक पहलुओं से अंदर तक प्रभावित होती है। इसलिए प्रशासन का कर्तव्य है कि वह ऐसे नेटवर्क की शिनाख्त करे और इसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे। एक बार तो भारतीय राजनीति में भी हवाला कांड के चलते भूचाल आ गया, जिससे कई राजनेताओं की सियासी विश्वसनीयता पर ही सवाल उठने लगे। इसी हवाला कांड में भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी का नाम आने के बाद उन्होंने अपने महत्वपूर्ण पद से न केवल इस्तीफा दे दिया, बल्कि उन्होंने तबतक कोई राजनीतिक पद ग्रहण नहीं किया, जबतक कि वो इस आरोप से बरी नहीं हो गए।

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# रुपये को बगैर हिलाए-डुलाए चलता है हवाला कारोबार

वास्तव में, हवाला वह कारोबार है जहां रुपये को दुनिया के एक हिस्से से दूसरी जगह ट्रांसफर करना पड़ता है और वो भी बग़ैर उसे हिलाए डुलाए हुए। इसके लिए न तो बैंकों की ज़रूरत है न ही करेंसी एक्सचेंज की। न तो कोई फॉर्म भरना है और ना ही फ़ीस देनी है, बल्कि इसमें एक तो वो होगा जो रुपये भेजेगा, दूसरा वो होगा जिसके पास रुपये आएंगे और बीच में कम से कम दो मध्यस्थ होंगे। यह भरोसे का धंधा कहा जाता है।

# बैंकिंग सिस्टम आने से बहुत पहले से भी चल रहा था हवाला कारोबार

हवाला कारोबार पारंपरिक है जो बैंकिंग सिस्टम आने से बहुत पहले भी था और अपने इस्तेमाल करने में आसानी और संलिप्त लोगों को मिलने वाले कई फायदे की वजह से यह सदियों से किसी न किसी रूप में चला आ रहा है। आलम यह है कि इसके ज़रिए दुनिया भर में लाखों डॉलर इधर से उधर किए जा सकते हैं, वह भी यह जाने बग़ैर कि राशि कितनी है और इसे नियंत्रित कौन कर रहा है।

साफ शब्दों में कहें तो रुपये को दुनिया में एक जगह से दूसरे स्थान पर ग़ैरक़ानूनी रूप से हस्तांतरण करवाने का नाम ही हवाला है, जिसमें सबसे अहम भूमिका एजेंट या बिचौलिए या मध्यस्थ की होती है। क्योंकि ये बिचौलिए अपने धंधे में इतने सिद्धहस्त होते हैं कि शायद ही कभी किसी लेन देन का रिकॉर्ड छोड़ते हैं। यही वो व्यक्ति होते हैं जो हवाला के ज़रिए रुपया कहां से निकल कर कहां पहुंच रहा है, इसे पता लगाने में सबसे बड़ी बाधा होते हैं। ये ख़ुद को संभावित मनी लॉन्डरिंग (धन शोधन), नशीले पदार्थों की तस्करी (ड्रग ट्रैफिकिंग) और चरमपंथी संगठनों के वित्तपोषण के लिए भी भाड़े पर दे सकते हैं।

# आखिर में हवाला का यह धंधा आया है कहां से?

हवाला व्यापार की शुरुआत कब हुई यह स्पष्ट नहीं है लेकिन कुछ लोग इसे 8वीं शताब्दी से 'सिल्क रूट' के तहत भारत से जोड़ते हैं। दरअसल, सिल्क रूट को प्राचीन चीनी सभ्यता के व्यापारिक मार्ग के रूप में जाना जाता है। दो सौ साल ईसा पूर्व से दूसरी शताब्दी के बीच हान राजवंश के शासन काल में रेशम का व्यापार बढ़ा। पहले रेशम के कारवाँ चीनी साम्राज्य के उत्तरी छोर से पश्चिम की ओर जाते थे। लेकिन फिर मध्य एशिया के क़बीलों से संपर्क हुआ और धीरे-धीरे यह मार्ग चीन, मध्य एशिया, उत्तर भारत, आज के ईरान, इराक़ और सीरिया से होता हुआ रोम तक पहुंच गया।

ग़ौरतलब है कि इस मार्ग पर केवल रेशम का व्यापार नहीं होता था बल्कि इससे जुड़े सभी लोग अपने-अपने उत्पादों का व्यापार करते थे। लेकिन सिल्क रूट पर अक्सर चोरी और लूट की घटनाएं होती रहती थी। इसलिए भारतीय, अरब और मुस्लिम व्यापारियों ने अपने मुनाफे की रक्षा के लिए अलग-अलग तरीके अपनाए। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, हवाला का अर्थ है 'के एवज़ में' या 'के बदले में'।

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# हवाला कारोबार में एक पासवर्ड का इस्तेमाल करते हैं व्यापारी

इसके तहत व्यापारी एक पासवर्ड का इस्तेमाल करते थे जो कि कोई वस्तु, शब्द या कोई इशारा होता था और ठीक उसी तरह की पूरक वस्तु, शब्द या पासवर्ड उसे प्राप्त करने वाले को बताना होता था। इस तरह, वो सुनिश्चित किया करते थे कि पैसे या सामानों की लेन-देन सही हाथों तक पहुंच जाए। यह व्यवस्था कितनी पुरानी थी इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि भारत में पहला बैंक 'बैंक ऑफ़ हिंदुस्तान' था जिसकी स्थापना 18वीं शताब्दी में कोलकाता में हुई थी।

वहीं, आज तकनीक के मामले में दुनिया जिस तेज़ी से आगे बढ़ रही है, उसी गति से हवाला के काम को करना भी आसान हुआ है। आज इंस्टैंट मैसेजिंग एप्लिकेशन के ज़रिए पासवर्ड की जगह कोड भेजे जाते हैं। लिहाजा बिचौलिए भी अपनी व्यावसायिक गतिविधियों के समानांतर इसे भी बेहद आसानी से अंजाम दे सकते हैं।

# जानिए हवाला का मतलब और इसमें संलिप्त रहने वाले कम से कम तीन लोग 

सबसे पहला हवाला व्यापार या कारोबार को जानने के लिए हवाला शब्द का मतलब जानना जरूरी है। आम बोल चाल की भाषा में हवाला देने का मतलब होता है कि किसी को कोई उद्धरण देना या जिक्र करना। उदाहरण के तौर पर लोग कहते हैं कि “उससे मिल लो” और “मेरा हवाला दे देना” आपका काम हो जायेगा। इसी प्रकार हवाला का कारोबार भी किया जाता है जिसमें बताये गए या “हवाला” दिए गए व्यक्ति को भुगतान करना या उससे भुगतान लेना शामिल होता है। इस प्रकार के हवाला व्यापार में 3 लोग अवश्य ही शामिल होते हैं- पहला, जिससे भुगतान लेना है। दूसरा, जिसको भुगतान देना है। तीसरा, एजेंट, भुगतान लेने और देने वालों के बीच कड़ी का काम एजेंट करता है। 

# हवाला लेन-देन में धन अनधिकृत रूप से एक देश से दूसरे देश में किया जाता है विदेशी विनिमय

जानकारों के मुताबिक, हवाला लेन-देन में धन अनधिकृत रूप से एक देश से दूसरे देश में विदेशी विनिमय किया जाता है। अर्थात हवाला का मतलब एजेंटों के माध्यम से धन का एक देश से दूसरे देश में हस्तांतरण किया जाता है। इस प्रकार यह पैसे के लेन-देन का एक गैर कानूनी तरीका है जिसे “हुंडी” भी कहा जाता है। आपको पता होना चाहिए कि हवाला कारोबार एक देश के अन्दर भी होता है। जिसके माध्यम से विभिन्न राजनीतिक दलों और आतंकी संगठनों और नक्सली संगठनों तक रुपया पहुँचाया जाता है।

# जानिए, कौन-कौन लोग करते हैं हवाला कारोबार 

हवाला कारोबार करने वालों में मुख्य रूप से निर्यात व्यापार में शामिल कम्पनियाँ, बड़े-बड़े कारोबारी और राजनीतिक दलों के नेता शामिल होते हैं। बड़े व्यापारी जो कर चोरी कर रहे हैं, वे भी काला धन अर्जित कर रहे हैं। हमारे देश के बहुत सारे लोग बाहर रहते हैं और हवाला का कारोबार करने वाले उनका इस्तेमाल हवाला कारोबार करने में करते हैं।

# जानिए कि आखिरकार कैसे होता है हवाला का लेन-देन 

हवाला के लेन-देन को एक उदाहरण के माध्यम से समझा जा सकता है। वह यह कि भारत में एक राजनीतिक पार्टी के नेता मिस्टर एबीसी ने बहुत बड़ी मात्रा में काला धन कमाया है, जिसको वह भारत में नहीं रखना चाहते हैं। इसलिए उन्होंने इस धन को स्विट्ज़रलैंड में जमा करने का फैसला किया है। इसके लिए वह किसी तरह एक एजेंट का जुगाड़ करते हैं जो कि स्विट्ज़रलैंड में उनका बैंक अकाउंट खुलवा देता है और वहां पर रहने वाले मिस्टर माइकल द्वारा कमाया हुआ 100 करोड़ का काला धन स्विट्ज़रलैंड की मुद्रा (स्विस फ्रैंक) में ही मिस्टर एबीसी के खाते में जमा करा देता है।

अब स्विट्ज़रलैंड में रहने वाले मिस्टर एबीसी ने उसी एजेंट के माध्यम से भारत में अपने किसी परिचित के खाते में मिस्टर एबीसी से पैसा लेकर जमा करा दिया है। इस प्रकार इस हवाला कारोबार में शामिल दोनों लोगों ने अपने-अपने काले धन को सफ़ेद कर लिया है। ऊपर बताया गया तरीका काले धन को सफ़ेद करने का सिर्फ एक तरीका है। इसके अलावा भी कई अन्य तरीकों से हवाला कारोबार होता है। इस व्यापार में स्विस फ्रैंक और भारत के रुपये के बीच की विनिमय दर का भी ध्यान रखा जाता है। हवाला कारोबार करने वाले लोग दो देशों के बीच की विनिमय दरों में होने वाले उतार-चढ़ाव का फायदा भी उठाते हैं। भारत में हवाला के आरोपी व्यापारी हसन अली और ललित मोदी हैं। पहले अमरीका में रहने वाले भारतीय अमरीकी दो खाते रखते थे। लेकिन अब अमरीका में इसकी जाँच होती है तो उनके खातों की सारी जानकारी सामने आ जाती है।

# आखिर में भारत में क्या है हवाला कारोबार का आकार 

गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में प्रतिवर्ष हवाला कारोबार का आकार 20 से 25 अरब डॉलर का है। भारत में सबसे अधिक हवाला का कारोबार केरल में होता है जो कि खाड़ी के देशों से बहुत बड़ी मात्रा में विदेश से रुपया प्राप्त करता है। एक अनुमान के अनुसार, केरल में हर साल 23,000 करोड़ का हवाला रुपया आता है। इसके बाद दूसरे नंबर पर दिल्ली का स्थान आता है। वास्तव में, भारत में काला धन एक विकराल समस्या बन चुकी है, लेकिन भारत सरकार इसके खात्मे के लिए कृत संकल्प नजर आती है। इसी दिशा में सरकार ने हाल ही में 100, 200, 500 और 2000 रुपये के नये नोट्स भी चलाये हैं।

# आखिर में हवाला लेनदेन गुप्त तरीक़े से क्यों किए जाते हैं?

ऐसा इसलिए होता है कि, कई बार ये घोषित पैसे नहीं होते हैं यानी पूरी तरह से वैध नहीं होते। कई बार (यूज़र) टैक्स देने से बचता है। वहीं जब वो बतौर रिमिटेंस यह पैसे दूसरे देश में भेजता है तो वह यह सुनिश्चित करना चाहता है कि बतौर कमीशन बिचौलिया कम से कम पैसे रखे। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि अगर कोई व्यक्ति अमेरिका से दूसरे देश में स्थित अपने परिवार को पारंपरिक तरीक़े से पैसे भेजना चाहता है तो इसके लिए उसे कई मांगों को पूरा करना पड़ता है। 

# बैंकिंग सिस्टम का इस्तेमाल करने की प्रक्रिया है पेंचीदगी भरी

अगर आप बैंकिंग सिस्टम का इस्तेमाल करते हैं तो आपके पास एक निश्चित राशि होनी चाहिए। आप खाता खोल सकें इसके लिए आपके पास आपकी पहचान, वहां आपकी क़ानूनी स्थिति आदि जैसे कुछ दस्तावेज़ चाहिए होते हैं। अन्य मनी ट्रांसफर सेवाएं अंतरराष्ट्रीय लेन देन के लिए आपसे 20 फ़ीसद तक कमीशन ले सकती हैं। चाहे मामला कोई भी हो, यूज़र को कई नियंत्रणों से गुज़रना पड़ता है, ताकि मनी लॉन्ड्रिंग जैसी गतिविधियों से बचा जा सके। लेकिन हवाला में ऐसा कुछ नहीं करना पड़ता है.

#  ग़ैर पारंपरिक तरीक़े से पैसों के हस्तांतरण को और आसान बना सकती हैं बदलती और विकसीत तकनीक

बदलती और विकसीत तकनीक ग़ैर पारंपरिक तरीक़े से पैसों के हस्तांतरण को और आसान बना सकती हैं। यह इतना अधिक प्रभावी है क्योंकि इसमें प्राप्तकर्ता तक पैसे अपेक्षाकृत जल्दी पहुंच जाते हैं और बतौर कमीशन भी कम देना पड़ता है। बिचौलिए के लिए उसका नेटवर्क अच्छा होना बेहद ज़रूरी है। जितना अधिक आपके पास कॉन्टैक्ट होगा, उतना ही अच्छा आपका बिजनेस चलेगा। लिहाजा आप बहुत कम चार्ज करें और ज़्यादा से ज़्यादा फायदा दें। बिचौलिए को भरोसेमंद होने की भरपूर कोशिश करनी चाहिए। पहले सूदखोरी और ब्याज़ का प्रचलन कम था और बिचौलिए के लिए बहुत सारा पैसा बनाना मुश्किल था।

यही कारण था कि पश्चिमी देशों की तुलना में यह व्यवस्था मध्यपूर्व और एशिया में ज़्यादा फैला, जहां बैंकिंग लेनदेन पर सख्त निगरानी और नियंत्रण है। कुछ जगहों पर इन बिचौलियों पर लोग बैंक से ज़्यादा भरोसा करते हैं, क्योंकि बिचौलियों का यह पारिवारिक और पुश्तैनी धंधा होता है जिसे वो बैंकों की तुलना में अधिक विश्वसनीय मानते हैं। पहले के जमाने में हवाला और उसके जैसी ही हुंडी बेहद लोकप्रिय अवधारणा थे और आज की तारीख़ में इसकी समझ बदल गई है, क्योंकि वो आधुनिक बैंकिंग से अलग काम करते हैं। हवाला के दलाल या बिचौलिए इसके लेनदेन के बहुत कम या कोई रिकॉर्ड नहीं रखते।

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# जानिए, आखिर कितना बड़ा है हवाला का व्यापार

पारंपरिक हवाला व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा ये है कि पैसों की लेनदेन कौन कर रहा है, यह सरकार या अंतरराष्ट्रीय संस्थानों की पकड़ से बाहर रहता है।

यह तथ्य कि लेन-देन के बहुत कम या बिल्कुल ही कोई रिकॉर्ड का न होना इन पैसों की हेरफेर को पकड़ने में एक बाधा है। माना जाता है कि न्यूयॉर्क में हुए 9/11 के हमले में आतंकवादियों का वित्तपोषण भी इन्हीं ग़ैर-पारंपरिक तरीक़ों से किया गया था।

इसलिए न केवल अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया में नए और सख़्त नियमों के आने से कुछ हज़ार डॉलर की अंतरराष्ट्रीय लेन देन और भी जटिल हो गई है। अमेरिका में 9/11 के हमलों के बाद अमेरिका हवाला को आतंकवादियों को वित्तपोषण का एक संभव ज़रिया मानता आया है। हवाला और अन्य ग़ैर पारंपरिक तरीक़ों को कुछ वर्षों से मनी लॉन्डरिंग और राजनीतिक भ्रष्टाचार से लेकर मानव अंगों की तस्करी जैसी कई आपराधिक गतिविधियों से जोड़ा जाता रहा है।

# संगठित अपराध और करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट की एक जांच में हुआ यह खुलासा

2018 में संगठित अपराध और करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट की एक जांच में कहा गया था कि दुबई में हवाला जैसे ग़ैर पारंपरिक व्यवस्था का इस्तेमाल कर बड़ी संख्या में लाखों विदेशी कामगार भारत, फिलिपींस जैसे देशों में अपने परिवार को पैसे भेजते रहे हैं। इसमें बताया गया था कि ये रक़म 240 करोड़ रुपये से भी अधिक है। वहीं, फ़रवरी 2016 में अमेरिकी ड्रग इन्फोर्समेंट ऑफ़िस (डीईए) ने कोलंबिया और हिज़बुल्लाह संगठन के बीच यूरोप के ज़रिए मनी लॉन्ड्रिंग और नशीले पदार्थों की तस्करी का संबंध को उजागर करते हुए बताया था कि लाखों यूरो और ड्रग्स की लेनदेन की गई है। 

डीईए के दस्तावेज़ों के मुताबिक, लेबनान के रास्ते लाखों के ड्रग्स मध्यपूर्व पहुंचाए गए और इसके बदले में हवाला के ज़रिए यूरो कोलंबिया भेजे गए थे। पूर्वी अफ़्रीका, ख़ास कर सोमालिया में हथियारों के तस्कर हवाला का इस्तेमाल कर लाखों डॉलर इधर से उधर करते हैं। वर्ल्ड बैंक के मुताबिक, विकासशील देशों में रेमिटेंस के ज़रिए अपने परिवारों की मदद के लिए पैसे भेजने वाले प्रवासी कामगारों की संख्या में इज़ाफ़ा हुआ है।

# आधिकारिक आंकड़े से कहीं बड़ा है रेमिटेंस का वास्तविक आकार 

कोविड-19 महामारी के प्रभाव के बावजूद आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक निम्न और मध्य आय वाले देशों में भेजी जाने वाली रेमिटेंस 2020 में लगभग 400 खरब रुपये थी। यह राशि 2019 के मुक़ाबले महज 1.6 फ़ीसद कम है। 2019 में यह आंकड़ा 406.31 खरब रुपये था. हालांकि वर्ल्ड बैंक यह भी स्पष्ट करता है कि रेमिटेंस का वास्तविक आकार, जो पारंपरिक और ग़ैर पारंपरिक दोनों ज़रिए से पहुंचाया जाता है, आधिकारिक आंकड़े से कहीं बड़ा है। कुल मिलाकर अर्थव्यवस्था में संभावित वैश्विक सुधार के साथ ही उम्मीद जताई जा रही है कि पारंपरिक और ग़ैर पारंपरिक माध्यमों जैसे कि हवाला से निम्न और मध्य आय वाले देशों को भेजे जाने वाली रेमिटेंस की राशि 2021 और 2022 में और भी बड़ी हो जाएगी।

# हवाला व्यापार में पकड़े जाने पर कितनी सजा का प्रावधान है?

हवाला कारोबार करने वाला व्यक्ति काले धन को वैध बनाना (मनी लॉन्ड्रिंग), विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियमन अधिनियम (फेरा) और अन्य कर कानूनों के उल्लंघन का दोषी माना जाता है। इसलिए हवाला को ‘अवैध रूप से कमाई गई’ रकम को ‘अवैध रूप से प्राप्त करना’ कहा जा सकता है। फेरा कानून के मुताबिक, सिर्फ अधिकृत व्यापारी के माध्यम से ही देश में या देश के बाहर मुद्रा प्राप्त की जा सकती है। फेरा के नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माने की राशि, हवाला कारोबार की राशि की 5 गुना तक और 7 वर्ष की सजा भी हो सकती है।

- कमलेश पांडेय

वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार