RBI का Tokenisation सिस्टम क्या है, कैसे करेगा काम, इससे हमारे और आपके जीवन पर क्या पड़ेगा असर?

RBI का Tokenisation सिस्टम क्या है, कैसे करेगा काम, इससे हमारे और आपके जीवन पर क्या पड़ेगा असर?

भारतीय रिजर्व बैंक ने ऑनलाइन फ्रॉड पर लगाम लगाने के लिए अपनी टोकनाइजेशन स्कीम का दायरा और बढ़ा दिया है। इसके तहत अब आप लैपटॉप, डेस्कटॉप, स्मार्ट वॉच या बैंड और इंटरनेट ऑफ थिंग्स डिवाइस तक के जरिए आप टोकनाइजेशन का लाभ उठा पाएंगे।

वो जमाना अब बीत सा गया जब बटुए में रुपये लेकर घूमा करते थे। अब जमाना आ गया है कि फोन से क्यूआर कोर्ड स्कैन करके हम पड़चून का सामान खरीद लेते हैं। इसी कड़ी में भारत ने एक और कदम आगे बढ़ाया है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया एक नई व्यवस्था लागू करने वाली है, जिससे पेमेंट करने का तरीका पूरी तरह से बदलने वाला है। क्या है आईबीआई की तरफ से लागू किया गया ये नया नियम, इससे हमारे और आपके जीवन पर क्या असर पड़ेगा और सबसे बड़ी बात कि क्या इसके लिए कोई भुगतान भी करना पड़ेगा। इन सारे सवालों के जवाब टटोलेंगे आज के इस विश्लेषण में।  

एक ऐसा तरीका जिससे आपकी कार्ड डिटेल चाहे वो क्रेडिट कार्ड हो या डेबिट कार्ड उसे रिप्लेस कर एक यूनिक अल्टरनेटिव कोर्ड में कनवर्ट कर दिया जाएगा जिसे टोकन कहते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक ने ऑनलाइन फ्रॉड पर लगाम लगाने के लिए अपनी टोकनाइजेशन स्कीम का दायरा और बढ़ा दिया है। इसके तहत अब आप लैपटॉप, डेस्कटॉप, स्मार्ट वॉच या बैंड और इंटरनेट ऑफ थिंग्स डिवाइस तक के जरिए आप टोकनाइजेशन का लाभ उठा पाएंगे। 

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टोकनाइजेशन क्या है?

टोकन व्यवस्था के तहत कार्ड के जरिये लेन-देन को सुगम बनाने को लेकर विशेष वैकल्पिक कोड सृजित होता है। इसे टोकन कहा जाता है। इसके तहत लेन-देन को लेकर कार्ड का ब्योरा देने की जरूरत नहीं पड़ती। रिजर्व बैंक ने मंगलवार को उपकरण आधारित टोकन व्यवस्था को ‘कार्ड-ऑन-फाइल टोकनाइजेशन’ (सीओएफटी) सेवाओं तक बढ़ा दिया। इस कदम से व्यापारी वास्तविक कार्ड का ब्योरा अपने पास नहीं रख पाएंगे। ‘कार्ड-ऑन-फाइल’ का मतलब है कि कार्ड से जुड़ी सूचना भुगतान सुविधा देने वाले (गेटवे) और व्यापारियों के पास होगी। इसके आधार पर वे भविष्य में होने वाले लेन-देन को पूरा करेंगे। यह कार्ड डिटेल्स साझा करने से होने वाली धोखाधड़ी की संभावना को कम करता है। टोकन का उपयोग पॉइंट-ऑफ-सेल (पीओएस) टर्मिनलों और क्यूआर कोड भुगतान पर संपर्क रहित कार्ड लेनदेन करने के लिए किया जा सकता है। मान लीजिए आप फ्लिपकार्ट या अमेजॉन जैसी शॉपिंग साइट पर गए और आपको एक फोन खरीदना हो आपने "Buy Now" पर क्लिक किया। फिर आप "Payment Method" पर आए। अब आपको यहां पर कार्ड सेलेक्ट करना है, जिस भी कार्ड से आपको पेमेंट करना है। आप कार्ड नंबर डालते हो और फिर पेमेंट हो जाती है। ये तो हो गई पुराने तरीके की बात जो हम और आप पहले भी इस्तेमाल करते आते हैं। लेकिन आने वाले वक्त में इससे अलग तरीका आपको ट्रांजक्शन के वक्त इस्तेमाल करने को मिलेगा। 

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कैसे करेगा काम

मान लीजिए जैसे आप किसी भी शॉपिंग साइट पर कुछ खरीदने के बाद भुगतान के लिए कार्ड नंबर डालेंगे। इसके बाद मास्टर कार्ड, वीजा कार्ड या फिर रुपे जैसे नेटवर्क कार्ड प्रोवाइडर आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक यूनिक टेम्परोरी टोकन मैसेज के जरिये प्राप्त होगा जो कि 16 अंकों का होगा। यही आपके क्रेडिट/डेबिट कार्ड का अस्थायी कार्ड नंबर होगा। जैसे ही आप इस नंबर को पेमेंट के लिए इस्तेमाल करोगे फिर पेमेंट सफलतापूर्वक होने के बाद, मैसेज के माध्यम से प्राप्त हुआ नंबर डिटोकनाइजेशन हो जाएगा।  सुरक्षा के लिहाज से देखा जाए तो ये तभी काम करेगा जब आप रियल टाइम पर इसका इस्तेमाल कर रहे हो। ओटीपी की तर्ज पर ही ये यूनिक वर्चुअल नंबर काम करेगा। इससे इन साइट्स पर आपकी कार्ड डिटेल्स सेव हो भी जाती है तो एग्जेक्ट कार्ड नंबर सेव नहीं होगी। भविष्य में कभी भी इन साइटों पर साइबर अटैक होता है तो आपका डाटा सुरक्षित रहेगा और उसे चुराया नहीं जा सकेगा। वहीं जब उपयोगकर्ता Google Pay या PhonePe जैसे वर्चुअल वॉलेट में अपने कार्ड का विवरण दर्ज करते हैं, तो ये प्लेटफ़ॉर्म टोकन सर्विस प्रोवाइडर से टेकन मांगेंगे। टीएसपी पहले ग्राहक के बैंक से डेटा के सत्यापन का अनुरोध करेंगे। जब डेटा सत्यापित हो जाएगा तो एक कोड मैसेज के माध्यम से यूजर के मोबाइल पर आएगा। एक बार अद्वितीय टोकन उत्पन्न हो जाने के बाद, यह ग्राहक के उपकरण से अपरिवर्तनीय रूप से जुड़ा रहता है और इसे बदला नहीं जा सकता है। हर बार जब कोई ग्राहक भुगतान करने के लिए अपने डिवाइस का उपयोग करता है, तो प्लेटफ़ॉर्म ग्राहक के वास्तविक डेटा को प्रकट किए बिना, केवल टोकन साझा करके लेनदेन को अधिकृत करने में सक्षम होगा।

टोकन कैसे मिलेगा

शुरूआत में टोकनाइजेशन की सर्विस सभी के अनिवार्य नहीं होगी। यानी यूजर अपनी इच्छा के अनुसार इसका इस्तेमाल कर सकेगा। यूजर को अपने कार्ड के लिए टोकन जेनरेट करने का ऑनलाइन आवेदन करना होगा। जिसके आधार पर कार्ड कंपनी टोकन जेनरेट करेगी। इस सर्विस के लिए यूजर को किसी तरह का पेमेंट नहीं करना होगा। इसके अलावा यूजर को यह भी सुविधा मिलेगी कि वह अपने कार्ड से होने वाले सभी भुगतान के लिए टोकन व्यवस्था का इस्तेमाल करें। या फिर वह केवल किसी खास ट्रांजैक्शन के लिए भी टोकन जेनरेट करवा सकेगा।

क्या इसके लिए ग्राहक को कोई भुगतान भी करना होगा

आरबीआई के अनुसार ग्राहकों के लिए ये सेवा पूरी तरह से निशुल्क है इसके लिए कोई भुगतान नहीं करना होगा। इससे एक फायदा यह भी होगा कि कार्ड प्रोवाइडर कंपनी को किसी भी तरह का कोई शुल्क नहीं देना होगा। यह सुविधा ग्राहकों की इच्छा पर निर्भर करेगा कि वह इसे लेना चाहती है या नहीं। स्पष्ट है कि यूजर्स को इसके लिए किसी प्रकार की बाध्यता का सामना नहीं करना पड़ेगा, परंतु बैंक या अन्य कंपनियों के द्वारा इसे लागू किया जाएगा। ग्राहकों के पास खुद को इस सर्विस के साथ रजिस्टर और डीरजिस्टर करने का अधिकार प्राप्त होगा। 

उपभोक्ता की सुविधा और सुरक्षा के लिहाज से अहम

आरबीआई की तरफ से डेटा स्टोरेज से जुड़े टोकनाइजेशन के जारी  नियम 1 जनवरी 2022 से लागू होंगे। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कार्ड के आंकड़े की सुरक्षा को चाक-चौबंद करने के प्रयास के तहत टोकन व्यवस्था (टोकनाइजेशन) का दायरा बढ़ाया है। इसके तहत कार्ड जारी करने वालो को टोकन सेवा प्रदाता (टीएसपी) के रूप में काम करने की अनुमति दी गयी है। गौरतलब है कि अभी तक जोमैटो जैसे फूड डिलीवरी ऐप, कैब सेवा देने वाली कंपनियों के ऐप, कई ओटीटी प्लेटफॉर्म पर ग्राहकों को पहले से अपने क्रेडिट कार्ड की डिटेल भरकर देना होता है। यूजर के कार्ड का डेटा इन वेबसाइट्स या ऐप पर सेव होता था जिसके चोरी होने का डर लगा रहता है। लेकिन अब 1 जनवरी, 2022 से कार्ड विवरण संग्रहीत नहीं करने के निर्देश दिए हैं। आरबीआई के नए नियमों के तहत 1 जनवरी, 2022 से कार्ड लेनदेन/पेमेंट में कार्ड जारीकर्ता बैंक या कार्ड नेटवर्क के अलावा कोई भी वास्तविक कार्ड डेटा स्टोरेज नहीं करेगा। इसमें पहले से स्टोर ऐसे किसी भी डेटा को फिल्टर किया जाएगा।

-अभिनय आकाश