प्रॉडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना क्या है? इससे किसको और क्या फायदा होगा?

प्रॉडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना क्या है? इससे किसको और क्या फायदा होगा?
Prabhasakshi

वाकई कोई भी देश तभी आगे बढ़ता है, जब वह विनिर्माण यानी मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो जाए। साथ ही उसके आयात-निर्यात में संतुलन स्थापित हो। इसलिए केंद्र की मोदी सरकार का जोर स्वदेशी पर है। अभी तक विदेश से आयात हो रही वस्तुओं को स्वदेश में ही निर्मित किए जाने पर जोर दिया जा रहा है।

भारत की विनिर्माण क्षमताओं और निर्यात को बेहतर करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वित्त वर्ष 2019-20 के कोरोना काल में अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्रों में उत्‍पादन आधारित प्रोत्‍साहन राशि (प्रॉडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव-पीएलआई) योजना शुरू की है, वह अब परवान चढ़ती जा रही है। जिस तरह से इस अभूतपूर्व योजना की लोकप्रियता बढ़ी है, उससे सब लोग पीएलआई योजना और इससे सम्बन्धित सेक्टर्स के बारे में जानना समझना चाह रहे हैं, ताकि वे भी इसका फायदा उठा सकें।

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वाकई कोई भी देश तभी आगे बढ़ता है, जब वह विनिर्माण यानी मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो जाए। साथ ही उसके आयात-निर्यात में संतुलन स्थापित हो। इसलिए केंद्र की मोदी सरकार का जोर स्वदेशी पर है। अभी तक विदेश से आयात हो रही वस्तुओं को स्वदेश में ही निर्मित किए जाने पर जोर दिया जा रहा है। उदाहरणार्थ, मोबाइल फोन एवं उसके कंपोनेंट्स को ही ले लीजिए। 

सभी जानते हैं कि चीन एवं साउथ कोरिया मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग के बड़े हब हैं। अधिकांश मोबाइल फोन एवं कंपोनेंट्स वहां से ही हमारे देश में आयात होते हैं, लेकिन अब सरकार का जोर इनके स्वदेशी निर्माण पर है, क्योंकि अब उसका लक्ष्य आत्मनिर्भर बनने का है। इसके अलावा, अन्य क्षेत्रों में भी मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने एवं आत्मनिर्भर भारत बनाने के लिए केंद्र सरकार पीएलआई योजना लेकर हाजिर हुई है। 

समझा जाता  है कि कोरोना काल के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था का जिस गति से विस्तार हो रहा है, उससे  जिज्ञासु लोग इस महत्वाकांक्षी योजना का अध्ययन कर रहे हैं, ताकि समय रहते ही इसका लाभ हासिल कर सकें।

आपको बता दें कि मोबाइल फोन एवं इलेक्ट्रानिक कंपोनेंट्स के निर्माण के लिए केंद्र सरकार ने मार्च, 2020 में पीएलआई स्कीम को लांच किया था। लेकिन अन्य क्षेत्रों के लिए इस स्कीम को केंद्रीय कैबिनेट ने 15 दिसंबर, 2021 को मंजूर किया है।

# वित्त वर्ष 2019-20 के अंतिम मार्च महीने में शुरू हुई है पीएलआई योजना 

बता दें कि वित्त वर्ष 2019-20 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत की विनिर्माण क्षमताओं और निर्यात को बेहतर बनाने के लिए कतिपय प्रमुख क्षेत्रों में प्रॉडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना शुरू करने के लिए अपनी मंजूरी दी। हालांकि, इससे पहले भी सरकार ने चिकित्सा उपकरणों, मोबाइल फोन और निर्दिष्ट सक्रिय दवा सामग्री के लिए पीएलआई योजना की घोषणा की गई थी। 

यह योजना संबंधित मंत्रालयों व विभागों द्वारा लागू की जाएगी, जो इसके लिए निर्धारित समग्र वित्तीय सीमाओं के दायरे में होगी। वहीं, पीएलआई के अंतिम प्रस्तावों का मूल्यांकन विभिन्न क्षेत्रों में गठित व्यय वित्त समिति (ईएफसी) द्वारा किया जाएगा, जिसे केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित किया जाएगा। कहने का तातपर्य यह कि किसी भी नए क्षेत्र को पीएलआई के तहत शामिल करने के लिए केंद्रीय मंत्रिमण्डल की नए सिरे से मंजूरी लेने की आवश्यकता होगी।

# समझिये, पीएलआई योजना क्या है?

देश में घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और आयात बिलों में कटौती करने के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2020 के मार्च महीना में एक ऐसी योजना को शुरू किया जिसका उद्देश्य घरेलू इकाइयों में निर्मित उत्पादों से बढ़ती बिक्री पर कंपनियों को प्रोत्साहन देना है। इसके तहत भारत में दुकान स्थापित करने के लिए विदेशी कंपनियों को आमंत्रित करने के अलावा, इस योजना का उद्देश्य स्थानीय देशी कंपनियों को मौजूदा विनिर्माण इकाइयों को स्थापित करने या विस्तार करने के लिए प्रोत्साहित करना है। 

बताया गया है कि यह योजना महज पांच वर्ष की अवधि के लिए स्वीकृत की गई है जो कि नकद प्रोत्साहन देगी और सभी सनराइज और महत्वपूर्ण क्षेत्रों को इसमें शामिल किया जाना प्रस्तावित है। यह सेक्टर्स ऑटोमोबाइल, नेटवर्किंग उत्पाद, खाद्य प्रसंस्करण, उन्नत रसायन विज्ञान और सौर पीवी विनिर्माण आदि हैं। साथ ही यह योजना भारत में इकाइयों को स्थापित करने के लिए विदेशी कंपनियों को आमंत्रित करेगी। 

हालांकि, इसका उद्देश्य स्थानीय कंपनियों को मौजूदा विनिर्माण इकाइयों को स्थापित करने या विस्तार करने के लिए प्रोत्साहित करना है। भारत सरकार ने उत्‍पादन के प्रमुख क्षेत्रों में उत्‍पादन आधारित प्रोत्‍साहन राशि यानि प्रॉडक्‍शन लिंक्‍ड इंसेंटिव दे रही है, जो लगभग दो लाख करोड़ रुपये निर्धारित है। यह  उत्‍पादन, निर्यात और रोजगार भी बढ़ाएगा। यह निर्णय आत्‍म-निर्भर भारत को साकार करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण साबित हो रहा है।

# अर्थव्यवस्था के दस प्रमुख क्षेत्रों में लागू है पीएलआई योजना 

पीएलआई योजना में भारतीय अर्थव्यवस्था के दस प्रमुख क्षेत्र, यथा- खाद्य प्रसंस्करण, दूरसंचार, इलेक्ट्रॉनिक्स, वस्त्र, विशेष इस्पात, ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स, सौर फोटो-वोल्टाइक मॉड्यूल, एयर कंडीशनर और एलईडी जैसे वाइट गुड्स शामिल किये गए हैं। इस योजना के तहत भारतीय निर्माताओं को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाए जाने की तैयारी है। साथ ही यह महत्वपूर्ण प्रतिस्पर्धी और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में निवेश को भी आकर्षित करेगी तथा उनकी क्षमता सुनिश्चित करेगी।

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यह योजना बड़े पैमाने की अर्थव्यवस्थाओं का निर्माण करेगी, निर्यात बढ़ाएगी और भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का अभिन्न अंग बनाएगी। इसलिए पीएलआई योजना की प्राथमिकता,।क्षेत्र, कार्यान्वयन मंत्रालय व विभाग के साथ-साथ वित्तीय परिव्यय (रुपये करोड़ में) को भी स्पष्ट कर दिया गया है।

पहला, एडवांस केमिस्ट्री सेल (एसीसी) बैटरी, नीति आयोग एवं भारी उद्योग विभाग के लिए 18,100 करोड़ रुपये निर्धारित किये गए हैं। वहीं, इलेक्ट्रॉनिक व प्रौद्योगिकी उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के लिए 5000 करोड़ रुपये निर्धारित किये गए हैं।

वहीं, ऑटोमोबाइल एवं ऑटो घटक, भारी उद्योग विभाग के लिए 57042 करोड़ रुपये निर्धारित किये गए हैं।

वहीं, फार्मास्यूटिकल्स ड्रग्स, फार्मास्यूटिकल्स विभाग के लिए 15000 करोड़ रुपये निर्धारित किये गए हैं।

वहीं, दूरसंचार एवं नेटवर्किंग उत्पाद, दूरसंचार विभाग के लिए 12195 करोड़ रुपये निर्धारित किये गए हैं।

वहीं, वस्त्र उत्पाद : एमएमएफ विभाग और टेक्निकल टेक्सटाइल, वस्त्र मंत्रालय के लिए 10683 करोड़ रुपये निर्धारित किये गए हैं। वहीं, खाद्य उत्पाद, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के लिए 10900 करोड़ रुपये निर्धारित किये गए हैं। वहीं, उच्च दक्षता सौर पीवी मॉड्यूल, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के लिए 4500 करोड़ रुपये निर्धारित किये गए हैं। 

वहीं, व्हाइट गुड्स (एसी और एलईडी), उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग के लिए 6238 करोड़ रुपये निर्धारित किये गए हैं। वहीं, विशिष्ट स्टील, इस्पात मंत्रालय के लिए 6322 करोड़ रुपये निर्धारित किये गए हैं। इस प्रकार कुल 145980 करोड़ रुपये इस मद के लिए आवंटित किये गए हैं। 

केंद्र सरकार पीएलआई योजना के अंतर्गत किस सेक्टर में कितना प्रोत्साहन देगी, इसमें कुछ बदलाव और इजाफा दोनों किया है। इसलिए इसका अद्यतन ब्योरा इस प्रकार से है:- आटोमोबाइल एवं आटो कंपोनेंट- 57,000 करोड़, मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग एवं इलेक्ट्रानिक कंपोनेंट- 40,951 करोड़, चिकित्सा उपकरणों की मैन्युफैक्चरिंग एवं फार्मास्युटिकल्स-3,420 करोड़, फार्मा एवं ड्रग सेक्टर-15,000 करोड़, टेक्सटाइल सेक्टर-10,683 करोड़, टेलीकॉम नेटवर्क एवं इंफ्रास्ट्रक्चर-12,000 करोड़, फूड प्रोडक्ट्स सेक्टर-10,900 करोड़, सोलर फोटो वॉल्टिक सेक्टर-4,500 करोड़, एडवांस केमिकल सेल बैटरी-18,100 करोड़, इलेक्ट्रानिक टेक्नोलाजी प्रोडक्शन- 5,000 करोड़, स्पेशल स्टील-6,322 करोड़ और व्हाइट गुड्स (एसी एवं एलईडी)-6,238 करोड़।

# उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना की आवश्यकता क्यों है?

आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, पीएलआई का विचार महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकार इन पूंजी गहन क्षेत्रों में निवेश करना जारी नहीं रख सकती है, क्योंकि उन्हें रिटर्न देने के लिए अधिक समय की आवश्यकता होती है। इसके बजाय, वह क्या कर सकती है कि भारत में क्षमता स्थापित करने के लिए पर्याप्त पूंजी के साथ वैश्विक कंपनियों को आमंत्रित किया जाए।

वहीं, इकोनॉमिक एक्सपर्ट बताते हैं कि जिस तरह की विनिर्माण की आवश्यकता है, उसके लिए हमें बोर्ड की पहल की आवश्यकता होती है। इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मास्यूटिकल्स खुद बड़े क्षेत्र हैं। इसलिए, इस बिंदु पर, अगर सरकार श्रम गहन क्षेत्रों जैसे कपड़ों और चमड़े पर ध्यान केंद्रित कर सकती है, तो यह वास्तव में मददगार होगा। वहीं, पीएलआई योजना के तत्वावधान में कई और फार्मास्युटिकल उत्पाद लाए गए हैं, जिनमें जटिल जेनेरिक, एंटी-कैंसर और डायबिटिक दवाएं, इन-विट्रो डायग्नोस्टिक डिवाइस और विशेष खाली कैप्सूल शामिल हैं.

# वर्तमान में किन किन सेक्टर्स में लागू है पीएलआई योजना?

वर्ष 2020 के मार्च के आसपास, केंद्र सरकार ने मोबाइल विनिर्माण के साथ-साथ दवा सामग्री और चिकित्सा उपकरणों के लिए पीएलआई योजना शुरू की थी। जबकि मोबाइल और संबद्ध उपकरणों के लिए योजना अप्रैल को अधिसूचित की गई थी। मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण निर्माण के लिए पीएलआई योजना के एक हिस्से के रूप में, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों के लिए 4-6 प्रतिशत की प्रोत्साहन योजना बनाई गई है जो मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स जैसे ट्रांजिस्टर, डायोड, थाइरिस्टर, रेसिसटर कैपेसिटर और नैनो-इलेक्ट्रॉनिक जैसे सूक्ष्म विद्युत प्रणाली का निर्माण करते हैं. 

# पीएलआई योजना के तहत क्या-क्या लाभ होगा?

पीएलआई योजना के प्रथम दृष्ट्या अनेक लाभ दृष्टिगोचर हो रहे हैं। इनमें से कुछ लाभ इस प्रकार गिनाए जा सकते हैं, जैसे- रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा मिलेगा। आयात बिलों में कटौती होगी। उद्यमियों के लिए नया अवसर पैदा होगा। ग्रामीण क्षेत्रों एवं छोटे शहरों का विकास होगा। स्वदेशी उत्पादों के दाम भी आयातित के मुकाबले कम होंगे। गांवों, शहरों से रोजगार के लिए होने वाला पलायन रुकेगा।

दरअसल, 10 प्रमुख क्षेत्रों में पीएलआई योजना भारतीय निर्माताओं को वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी बनाएगी, जो मुख्य योग्यता और अत्याधुनिक तकनीक के क्षेत्रों में निवेश को आकर्षित करेगी; दक्षता सुनिश्चित करेगी, अर्थव्यवस्था में सुधार लाएगी, निर्यात को बढ़ाएगी और भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का एक अभिन्न हिस्सा बनाएगी।

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वहीं, औद्योगिक वस्तुओं के उत्पादन और निर्यात में वृद्धि से भारतीय उद्योग को विदेशी प्रतिस्पर्धा और विचारों को जानने का काफी अवसर मिलेगा, जिससे आगे कुछ नया करने की अपनी क्षमताओं में सुधार करने में मदद मिलेगी।

वहीं, विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने और एक अनुकूल विनिर्माण इकोसिस्टम के निर्माण से न केवल वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के साथ एकीकरण हो सकेगा बल्कि देश में एमएसएमई क्षेत्र के साथ बैकवर्ड लिंकेज भी स्थापित होंगे।

वहीं, दूरसंचार उपकरण एक सुरक्षित दूरसंचार अवसंरचना के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण और रणनीतिक तत्व है और भारत दूरसंचार और नेटवर्किंग उत्पादों का एक प्रमुख मूल उपकरण निर्माता बनने की आकांक्षा रखता है। 

# इस प्रकार है क्षेत्रवार उत्पाद श्रेणी

क्षेत्रवार उत्पाद श्रेणी इस प्रकार है: एडवांस केमिस्ट्री सेल, एसीसी बैटरी, विनिर्माण, इलेक्ट्रॉनिक व प्रौद्योगकी उत्पाद, सेमीकन्डक्टर फैब, डिस्प्ले फैव, लैपटॉप व नोटबुक, सर्वर, आईओटी उपकरण, निर्दिष्ट कंप्यूटर हार्डवेयर, ऑटोमोबाइल और ऑटो घटक के क्षेत्र में पीएलआई स्कीम को बढ़ावा दिया गया है।

वहीं, फार्मास्यूटिकल्स के क्षेत्र में श्रेणी 1 के तहत बायोफार्मास्यूटिकल्स, जटिल जेनेरिक दवाएं, पेटेंट दवाएं या पेटेंट समाप्ति होने वाली दवाएं, सेल आधारित या जीन थेरेपी उत्पाद, ऑर्फन दवाएं, विशेष खाली कैप्सूल व कॉम्प्लेक्स एक्सिपिएंट के क्षेत्र में पीएलआई स्कीम को बढ़ावा दिया गया है।

वहीं, फार्मास्युटिकल्स के क्षेत्र में श्रेणी 2 के तहत सक्रिय फार्मा सामग्री यानि एपीआई, मुख्य शुरुआती सामग्री यानी केएसएम और ड्रग इंटरमीडियरी यानि डीआई के क्षेत्र में पीएलआई स्कीम को बढ़ावा दिया गया है। 

वहीं, फार्मास्युटिकल्स के क्षेत्र में श्रेणी 3 के तहत रीपर्पस्ड ड्रग्स, ऑटोड्रग्स इम्यून, एंटीड्रग्स कैंसर, एंटी डायबिटिकड्रग्स, एंटी इंफेक्टिव ड्रग्स, कार्डियोवस्कुलर ड्रग्स, साइकोट्रोपिक ड्रग्स और एंटी रेट्रोवायरल ड्रग्स, इन-विट्रो डायग्रोस्टिक उपकरण यानी आईवीडी, फाइटोफार्मास्यूटिकल्स, अन्य दवाएं जिनका निर्माण भारत में नहीं किया जाता है और अनुमोदित अन्य दवाएं के क्षेत्र में पीएलआई स्कीम को बढ़ावा दिया गया है।

वहीं, दूरसंचार उत्पाद के क्षेत्र में कोर ट्रांसमिशन उपकरण, 4जी/5 जी, नेक्स्ट जेनरेशन रेडियो एक्सेस नेटवर्क और वायरलेस उपकरण, एक्सेस एंड कस्टमर प्रेमिसेज उपकरण (सीपीई), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी एक्सेस डिवाइस और अन्य वायरलेस उपकरण व एंटरप्राइज़ उपकरण: स्विच व राउट के क्षेत्र में पीएलआई स्कीम को बढ़ावा दिया गया है। 

वहीं, वस्त्र उत्पाद के क्षेत्र में मानव निर्मित फाइबर श्रेणी और तकनीकी वस्त्र के क्षेत्र में पीएलआई स्कीम को बढ़ावा दिया गया है। वहीं, खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में रेडी टू ईट यानी आरटीई, रेडी टू कुक यानी आरटीसी, समुद्री उत्पाद, फल एवं सब्जियां, शहद, देसी घी, मोत्ज़ारेला चीज, ऑर्गेनिक अंडे और पोल्ट्री मांस के क्षेत्र में पीएलआई स्कीम को बढ़ावा दिया गया है। 

वहीं, सौर पीवी विनिर्माण के क्षेत्र में सौर पीवी में, व्हाइट गुड्स के क्षेत्र में एयर कंडीशनर व एलईडी, स्टील उत्पाद के क्षेत्र में कोटेड स्टील, हाई स्ट्रेंथ स्टील, स्टील रेल और एलॉए स्टील बार एवं रॉड के क्षेत्र में पीएलआई स्कीम को बढ़ावा दिया गया है।

# पीएलआई योजना आत्मनिर्भर बनने की ओर बड़ा कदम

हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आत्मनिर्भर भारत का सपना पूरे करने में यह योजना कारगर साबित होगी। पीएलआई योजना आत्मनिर्भर भारत बनने की ओर बड़ा कदम है। हमारी दवाएं, वैक्सीन, व्हीकल, मोबाइल फोन आदि हमारे देश में ही बनेंगे। इससे आयात के रूप में बाहर जाने वाली विदेशी मुद्रा की बचत होगी। इसके अलावा, मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स स्थापित करने के लिए विदेशी कंपनियों को देश में न्योता जाएगा। जाहिर सी बात है कि इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा। इसके साथ ही स्किल्ड वर्क फोर्स को भी उसकी स्किल के मुताबिक कार्य मिलेगा। 

# पीएलआई योजना के अंतर्गत ग्रामीण इलाकों एवं छोटे शहरों पर फोकस

पीएलआई योजना के अंतर्गत ग्रामीण इलाकों एवं छोटे शहरों पर फोकस रहेगा। यहां विभिन्न उ़द्योगों की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स स्थापित की जाएंगी, ताकि यहां रोजगार का दायरा बढ़े। गांवों एवं छोटे शहरों के रहने वालों को रोजगार की तलाश में अपने क्षेत्र से पलायन न करना पड़े। रोजगार के अतिरिक्त ग्रामीण इलाकों एवं छोटे शहरों को यातायात, आईटी एवं अन्य संसाधनों की दृष्टि से विकसित करने में भी पीएलआई की महती भूमिका रहेगी। स्वदेशी होने की वजह से इन वस्तुओं के दाम भी सामान्य लोगों की पहुंच में रहेंगे।

# देश के एमएसएमई सेक्टर पर होगा इसका सबसे बड़ा असर

पीएलआई योजना से देश को उत्पादन एवं निर्यात में तो लाभ होगा ही, इससे देश के एमएसएमई सेक्टर को तगड़ा बूस्ट मिलेगा। दरअसल, प्रत्येक सेक्टर में जो सब्सिडियरी यानी सहायक यूनिट्स बनेंगी, उनको वैल्यू चेन में नए सप्लायर बेस की आवयकता होगी। ये सहायक यूनिट्स अधिकांशतः एमएसएमई सेक्टर में ही बनेंगी। लिहाजा, अधिकांश रोजगार ही इसी सेक्टर में सृजित होगा। इसके अतिरिक्त देश को भी वैश्विक स्तर पर निर्यात प्रतिस्पर्धा में खड़ा करने का लक्ष्य केंद्र सरकार निर्धारित करके चल रही है। इसके लिए यहां निर्मित सामान एवं उपकरणों का गुणवत्तापूर्ण होना आवश्यक होगा।

# इंसेंटिव के लिए क्लेम की गणना में क्या शामिल नहीं होगा

एक्सपर्ट बताते हैं कि यह योजना उत्पादन पर 5 प्रतिशत इंसेटिव से लिंक्ड है। इस इंसेंटिव को हासिल करने के लिए जब क्लेम की गणना की जाएगी तो इसमें ट्रेडिंग और आउटसोर्स जॉब वर्क के जरिए हुए टर्नओवर को शामिल नहीं किया जाएगा। वहीं, इसके तहत केवल उन्हीं वस्तुओं के निर्माण के लिए कंपनी को पीएलआई योजना का फायदा मिलेगा, जिन्हें इस स्कीम के अंतर्गत शामिल किया गया है। इसके साथ ही केवल देश में रजिस्टर्ड कंपनियों को ही पीएलआई स्कीम का फायदा मिलेगा।

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# पीएलआई योजना के अंतर्गत किसी ग्रुप की एक ही कंपनी को शामिल किया जाएगा

जानकार बताते हैं कि पीएलआई योजना के अंतर्गत आने वाली कंपनियों को अपने कारखानों में प्रोसेसिंग व ऑपरेशन एक्टिविटीज करनी होगी। यदि किसी ग्रुप की कोई कंपनी पीएलआई योजना के तहत शामिल है एवं उसके किसी सामान को योजना के तहत शामिल किया गया है। साथ ही, वही सामान ग्रुप की कोई और कंपनी भी बना रही है तो ऐसी स्थिति में ग्रुप की अन्य कंपनी द्वारा बनाए गए सामान को इस योजना के तहत शामिल नहीं माना जाएगा। यानी किसी ग्रुप की केवल एक ही कंपनी पीएलआई स्कीम के तहत लाभ ले सकेगी। कंपनी ग्रुप योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन के समय एक से अधिक कंपनियों के लिए आवेदन कर सकते हैं, किंतु बात जब चयन की आएगी तो उन्हें एक कंपनी को चुनना होगा।

स्पष्ट है कि पीएलआई योजना से वैश्विक भागीदारों से बड़े निवेश आकर्षित होंगे और घरेलू कंपनियों को उभरते अवसरों का फायदा उठाने और निर्यात बाजार में बड़े व्यापारी बनने में और मदद मिलने की उम्मीद है। यह सच है कि बीते 2 वर्षों में पीएलआई स्कीम को बढ़िया रिस्पांस मिला है। यही वजह है कि इस महत्वपूर्ण सेक्टर के लिए आवंटन बढ़ाया गया है। 

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी माना है कि आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए शुरू की गई पीएलआई स्कीम को काफी अच्छा रिस्पांस मिला है। अगले पांच साल में इसके जरिए 60 लाख नए रोजगार के सृजन की संभावनाएं हैं और 30 लाख करोड़ रुपये का एडिशनल प्रोडक्शन होगा। 

वहीं, वित्त वर्ष 2022-23 के केंद्रीय बजट में भी सरकार ने मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए कई ऐलान किए हैं, जिसमें प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेटिव (पीएलआई) से संबंधित ऐलान भी शामिल हैं। बताया गया है कि वर्ष 2030 तक 280 गीगावॉट की इंस्टॉल्ड सोलर कैपिसिटी हासिल करने को लेकर घरेलू मैन्युफैक्चरर्स को बढ़ावा देने के लिए 19,500 करोड़ रुपये का एडिशनल एलोकेशन किया गया है। इससे अधिक एफिशिएंसी वाले मॉड्युल के प्रोडक्शन में मदद मिलेगी। वहीं, पीएलआई स्कीम के तहत 5जी के लिए मजबूत इकोसिस्टम तैयार करने को लेकर 'डिज़ाइन- लेड मैन्युफैक्चरिंग' के लिए एक स्कीम शुरू की जाएगी।

मोदी सरकार ने सेमीकंडक्टर (चिप), एडवांस बैटरी और डिस्प्ले के भारत में विनिर्माण के लिए 76,000 करोड़ रुपये की पीएलआई स्कीम घोषित की है। इससे पहले वह ऑटो सेक्टर के लिए 25,938 करोड़ रुपये की पीएलआई स्कीम लॉन्च कर चुकी है। वहीं, सरकार ने तकनीकी एवं मानव निर्मित फाइबर के आयात को कम करने के लिए अपने देश में ही फाइबर निर्माण को टेक्सटाइल सेक्टर में पीएलआई स्कीम लेकर आई है।

- कमलेश पांडेय

वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार