आरबीआई रिटेल डायरेक्ट स्कीम क्या है? इसके क्या क्या फायदे हैं? पढ़ें सारे जानकारी

आरबीआई रिटेल डायरेक्ट स्कीम क्या है? इसके क्या क्या  फायदे हैं? पढ़ें सारे जानकारी

रिटेल डायरेक्ट स्कीम खुदरा निवेशकों के लिए गवर्नमेंट सेक्योरिटीज सॉवरेन बांड आदि में निवेश करने का एक अच्छा माध्यम है। आरबीआई द्वारा दी जाने वाली खुदरा प्रत्यक्ष योजना खुदरा निवेशकों के लिए सरकारी प्रतिभूतियों, सॉवरेन बांड आदि में निवेश करने का एक अच्छा अवसर है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रोत्साहन पर भारतीय रिज़र्व बैंक ने जो कुछ नवीन ग्राहक केंद्रित पहल की है, उनमें  आरबीआई रिटेल डायरेक्ट स्कीम भी एक है। इसके क्या क्या फायदे होंगे, यह जानना सबके लिए जरूरी है। ताकि समय रहते ही लोग इसका लाभ उठा सकें। इस बात में भी कोई दो राय नहीं कि कोरोना के इस चुनौतीपूर्ण कालखंड में देश के वित्त मंत्रालय ने, आरबीआई ने और अन्य वित्तीय संस्थाओं ने भी बहुत प्रशंसनीय काम किया है। इसलिए पीएम मोदी ने उन्हें सराहा है।

इसे भी पढ़ें: साइबर धोखाधड़ी के तहत बैंक खाते से चुराए गए धन को फिर से ऐसे प्राप्त करें? RBI ने बताए हैं यह तरीके

वास्तव में, अमृत महोत्सव का ये कालखंड, 21वीं सदी का ये महत्वपूर्ण दशक, देश के विकास के लिए बहुत महत्व रखता है। ऐसे में आरबीआई की भी भूमिका बहुत बड़ी है, महत्वपूर्ण है और इसकी टीम  देश की अपेक्षाओं पर खरा उतरेगी। बेशक, आरबीआई के इस अभिनव ग्राहक केंद्रित पहल से देश में निवेश के दायरे का विकास होगा और पूंजी बाजार तक सबकी पहुंच आसान हो जायेगी। यह निवेशकों के लिये अधिक आसान, अधिक सुरक्षित बनेगा। 

देखा जाए तो खुदरा प्रत्यक्ष योजना से देश के छोटे निवेशकों को सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश का सरल और सुरक्षित माध्यम मिल गया है। सरकार ने भी इन योजनाओं की नागरिक केंद्रित प्रकृति पर बल दिया है और दो टूक कहा है कि खुदरा प्रत्यक्ष योजना से अर्थव्यवस्था में सबके समावेश को ताकत मिलेगी, क्योंकि इससे मध्य वर्ग, नौकरीपेशा, छोटे व्यापारियों और वरिष्ठ नागरिकों की छोटी बचतों के लिये सीधे तथा सुरक्षित रूप से सरकारी प्रतिभूतियों तक पहुंच बनेगी। सरकारी प्रतिभूतियों में अदायगी की गारंटी का प्रावधान है, जिससे छोटे निवेशक भी सुरक्षा के प्रति आश्वस्त होंगे।

पाया गया है कि बीते सात सालों में फंसे हुए कर्जों की पारदर्शिता के साथ पहचान की गई तथा समाधान और वसूली पर ध्यान दिया गया। वहीं, सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों का दोबारा पूंजीकरण किया गया, वित्तीय प्रणाली और सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों में एक के बाद एक सुधार किये गये। इसके अलावा, बैंकिंग सेक्टर को और मजबूत करने के लिए सहकारी बैंकों को भी भारतीय रिजर्व बैंक के दायरे में लाया गया है। इससे इन बैंकों के कामकाज में भी सुधार आ रहा है और जो लाखों जमाकर्ता हैं, उनके भीतर भी इस प्रणाली के प्रति विश्वास मजबूत हो रहा है।

यही नहीं, देश के बैंकिंग सेक्टर में बीते चंद सालों के दौरान वित्तीय सेक्टर में समावेश से लेकर तकनीकी एकीकरण और दूसरे सुधार किये गये हैं। जिनकी ताकत हमने कोविड के इस मुश्किल समय में भी देखी है। हाल के दिनों में सरकार जो बड़े-बड़े फैसले ले रही थी, उनका प्रभाव बढ़ाने में भी भारतीय रिजर्व बैंक के फैसलों ने मदद की है।

देखा जाए तो छह-सात साल पहले तक बैंकिंग, पेंशन और बीमा, ये सब भारत में किसी विशिष्ट-क्लब की तरह हुआ करते थे। देश का सामान्य नागरिक, गरीब परिवार, किसान, छोटे कारोबारी-व्यापारी, महिलाएं, दलित-वंचित-पिछड़े, इन सबके लिये ये सुविधाएं बहुत दूर थीं। इसलिए प्रधानमंत्री ने पुरानी व्यवस्था की आलोचना की और कहा कि जिन लोगों पर इन सुविधाओं को गरीब तक पहुंचाने की जिम्मेदारी थी, उन्होंने भी इस पर कभी ध्यान नहीं दिया। 

इसके बजाय, बदलाव न हो, इसके लिये तरह-तरह के बहाने बनाये जाते थे। उन्होंने इस बात पर भी अफसोस जताया कि पहले कहा जाता था कि बैंक की शाखा नहीं है, कोई स्टाफ नहीं है, इंटरनेट नहीं है, जागरूकता नहीं है; न जाने क्या-क्या तर्क दिये जाते थे।

प्रधानमंत्री की एक सकारात्मक पहल से यूपीआई ने बहुत कम समय में डिजिटल लेन-देन के मामले में भारत को दुनिया का अग्रणी देश बना दिया है। सिर्फ सात सालों में भारत ने डिजिटल लेन-देन के मामले में 19 गुना छलांग लगाई है। आज 24 घंटे, 7 दिन और 12 महीने देश में, कभी भी, कहीं भी हमारी बैंकिंग प्रणाली काम कर रही है।

इसलिए हमें देश के नागरिकों की आवश्यकताओं को केंद्र में रखना ही होगा, निवेशकों के भरोसे को निरंतर मजबूत करते रहना होगा। मुझे भी पूरा विश्वास है कि भारतीय रिजर्व बैंक एक संवेदनशील और निवेशक-अनुकूल गंतव्य के रूप में भारत की नई पहचान को मजबूती प्रदान करना जारी रखेगा।

आरबीआई रिटेल डायरेक्ट स्कीम के तहत छोटे निवेशक अब बिना किसी शुल्क के आरबीआई के साथ गिल्ट सिक्योरिटीज एकाउंट (जीएसए) खोल सकते हैं। इसके जरिए रिटेल निवेशक सीधे जी-सेक में निवेश कर पाएंगे। यह एक ऐसी योजना है जो खुदरा निवेशकों को ऑनलाइन सरकारी बॉन्ड खरीदने और बेचने की अनुमति देती है।

भारतीय रिजर्व बैंक ने फरवरी 2021 में इसकी घोषणा की थी। अब सरकारी बॉन्ड की खरीद और बिक्री के लिए पोर्टल (rbiretaildirect.org.in) का इस्तेमाल किया जा सकता है।

# जानिए, आरबीआई रिटेल डायरेक्ट स्कीम क्या है?

आरबीआई रिटेल डायरेक्ट स्कीम के तहत खुदरा निवेशक प्राइमरी और सेकेंडरी बाजारों में गवर्नमेंट सेक्योरिटीज (जी-सेक) को ऑनलाइन खरीद और बेच सकेंगे। आरबीआई के मत, छोटे निवेशक अब आरबीआई के साथ गिल्ट सिक्योरिटीज खाता खोलकर सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश कर सकते हैं। इन खातों को रिटेल डायरेक्ट गिल्ट (आरडीजी ) खाता कहा जाएगा।

# समझिए, रिटेल निवेशकों को ऐसे होगा फायदा

आरडीजी खातों से रिटेल निवेशकों को जी-सेक बाजार में डायरेक्ट एक्सेस मिल जाएगा। ये गवर्नमेंट सेक्योरिटीज दो तरह की होंगी- पहला, केंद्र सरकार द्वारा इश्यू की गईं और दूसरा, राज्य सरकार द्वारा इश्यू की गईं। इसमें ऑनलाइन पोर्टल के जरिए बिना किसी शुल्क के आरबीआई के साथ रिटेल डायरेक्ट गिल्ट खाता खुलेगा, जिसके जरिए रिटेल निवेशक सीधे जी-सेक में निवेश कर पाएंगे। 

इसका बड़ा फायदा यह है कि गवर्नमेंट सेक्योरिटीज में पैसा काफी हद तक सुरक्षित होता है। रिटेल निवेशकों को जी-सेक में निवेश का एक नया जरिया मिलेगा। ये बेहद आसान होगा, क्योंकि निवेश एक पोर्टल के जरिए होगा। यह आम आदमी को गवर्नमेंट सेक्योरिटीज में जोड़ने का एक अच्छा प्रयास है। 

बता दें कि विदेश में ऐसे कईं फाइनेंशल इंजीनियरिंग के मकैनिज्म इस्तेमाल होते हैं जहां आम आदमी को इसका एक्सेस दिया जाता है। इससे तकनीक का अच्छा इस्तेमाल होगा। मेरे हिसाब से रिटेल निवेशकों को इसमें भाग लेना चाहिए।

# परखिए, खुदरा निवेशकों के लिए निवेश का अच्छा अवसर है आरबीआई रिटेल डायरेक्ट स्कीम

रिटेल डायरेक्ट स्कीम खुदरा निवेशकों के लिए गवर्नमेंट सेक्योरिटीज सॉवरेन बांड आदि में निवेश करने का एक अच्छा माध्यम है। आरबीआई द्वारा दी जाने वाली खुदरा प्रत्यक्ष योजना खुदरा निवेशकों के लिए सरकारी प्रतिभूतियों, सॉवरेन बांड आदि में निवेश करने का एक अच्छा अवसर है। 

वाकई, ऐसा भारत में पहली बार हुआ है जब खुदरा निवेशकों को सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश के लिए आसान और डायरेक्ट चैनल मिला हो। सरकारी प्रतिभूतियां इक्विटी या एसेट में निवेश की तुलना में कम जोखिम और कम रिटर्न प्रदान करती हैं। 

मेरी सलाह यह है कि खुदरा निवेशकों को अपने निवेश में विविधता लानी चाहिए और बेहतर व सुरक्षित रिटर्न पाने के लिए इसका लाभ उठाना चाहिए।

इसे भी पढ़ें: ब्रांच बैंकिंग क्या है? इसके क्या फायदे हैं और क्या नुकसान है?

# देखिए, आखिर कौन खोल सकता है आरडीजी खाता?

आरबीआई द्वारा 12 जुलाई, 2021 को जारी अधिसूचना के अनुसार, खुदरा निवेशक आरडीजी खाता खोल सकते हैं। इसके लिए निम्नलिखित चीजें अनिवार्य हैं-

बचत बैंक, आयकर विभाग द्वारा जारी पैन कार्ड,

केवाईसी के लिए कोई भी आधिकारिक वैध दस्तावेज, जैसे- आधार कार्ड, वोटर आईडी, ईमेल आईडी,

मोबाइल नंबर आदि।

# अनुकरण कीजिए, ऐसे करें ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीकरण?

निवेशक ऑनलाइन फॉर्म भरकर ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीकरण कर सकते हैं। इसके लिए आपको पंजीकृत मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी पर प्राप्त ओटीपी का इस्तेमाल करना होगा। पंजीकरण होने पर, 'रिटेल डायरेक्ट गिल्ट अकाउंट' खोला जाएगा और ऑनलाइन पोर्टल तक पहुंचने के लिए एसएमएस या ई-मेल के माध्यम से जानकारी दी जाएगी।

# अर्थव्यवस्था में सभी की भागीदारी को प्रमोट करने की है भावना 

अर्थव्यवस्था में सभी की भागीदारी को प्रमोट करने की जो भावना है, उसको रिटेल डायरेक्ट स्कीम नई ऊंचाई देने वाली है। देश के विकास में गवर्नमेंट सिक्योरिटीज मार्केट  की अहम भूमिका से आमतौर पर लोग परिचित हैं। विशेष रूप से आज जब देश अपने फिज़िकल और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने में जुटा है, अभूतपूर्व इंवेस्टमेंट कर रहा है, तब छोटे से छोटे निवेशक का प्रयास और सहयोग, भागीदारी बहुत काम आने वाली है। 

अभी तक गवर्नमेंट सिक्योरिटी मार्केट में हमारे मध्यम वर्ग, हमारे कर्मचारियों, हमारे छोटे व्यापारी, सीनियर सिटिजंस यानि जिनकी छोटी सेविंग्स है, उनको सिक्योरिटीज़ में निवेश के लिए बैंक, इंश्योरेंस या म्युचुअल फंड्स जैसे इनडाइरेक्ट  रास्ते अपनाने पड़ते थे। लेकिन अब उन्हें सुरक्षित निवेश का एक और बेहतरीन विकल्प मिल रहा है।

# देश की संपदा के निर्माण में सीधा निवेश करने में और होगी आसानी 

अब देश के एक बहुत बड़े वर्ग को, गवर्नमेंट सिक्योरिटीज़ में, देश की संपदा के निर्माण में सीधा निवेश करने में और आसानी होगी। ये भी आप जानते हैं कि भारत में सभी गवर्नमेंट सिक्योरिटीज़ में गारंटीड सेटलमेंट का प्रावधान होता है। ऐसे में छोटे निवेशकों को सुरक्षा का एक आश्वासन मिलता है। यानि छोटे निवेशक सुरक्षित निवेश पर अच्छे रिटर्न का भरोसा मिलेगा और सरकार को इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए देश के सामान्य मानवों की आशा आकांक्षाओं के अनुरुप नया भारत बनाने के लिए जो-जो व्यवस्थाएं विकसित करनी चाहिए, इसके लिए ज़रूरी संसाधन मिलेंगे। और यही तो आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए नागरिक और सरकार की सामूहिक शक्ति है, सामूहिक प्रयास है। 

# देश के आखिरी व्यक्ति को भी इस प्रोसेस का हिस्सा बनाना चाहते हैं हम

आमतौर पर फिनांसियल की बातें जरा टेक्नीकल हो जाती हैं, इसलिए सामान्य लोग हेडलाइन पढ़कर छोड़ देते हैं।  इसलिए सामान्य मानव को बेहतर तरीके से इन बातों को समझाना आज के समय की मांग है। क्योंकि फिनांसियल इनक्लूजन की बात जब हम करते हैं, तब इस देश के आखिरी व्यक्ति को भी इस प्रोसेस का हिस्सा हम बनाना चाहते हैं। 

आप एक्सपर्ट्स इन सारी बातों से भलीभांति परिचित हैं, लेकिन देश के सामान्य जन के लिए भी ये जानना, उनकी बहुत मदद करेगा। जैसे उन्हें पता होना चाहिए कि इस योजना के तहत फंड मैनेजर्स की ज़रूरत नहीं पड़ेगी, और सीधा "रिटेल डायरेक्ट गिल्ट (आरडीजी) एकाउंट'' खोला जा सकता है। ये अकाउंट भी ऑनलाइन खोला जा सकता है और सिक्योरिटीज़ की खरीद-फरोख्त भी ऑनलाइन संभव है। 

# सैलरी वालों या पेंशनर्स के लिए घर बैठे सुरक्षित निवेश का बहुत बड़ा विकल्प है यह

ये सैलरी वालों या फिर पेंशनर्स के लिए घर बैठे-बैठे सुरक्षित निवेश का ये बहुत बड़ा विकल्प है। इसके लिए कहीं भी आने-जाने की ज़रूरत नहीं है, फोन और इंटरनेट से ही आप मोबाइल फोन पर इंटरनेट केनक्टिविटी, आपका काम हो जाएगा। ये आरडीजी अकाउंट, निवेशक के सेविंग्स एकाउंट्स से भी लिंक होगा। जिससे सेल-परचेज़ ऑटोमेटिक खरीद-फरोख्त का जो काम है, ऑटोमेटिक संभव हो सकेगा। आप कल्पना कर सकते हैं, लोगों को इससे कितनी आसानी होगी। 

यही नहीं, फिनांसियल इनक्लूजन और ईजी ऑफ एक्सेस जितनी जरूरी है, ईजी ऑफ इन्वेस्टमेंट और बैंकिंग सिस्टम पर सामान्य जन का भरोसा भी, सामान्य जन के लिए सुविधा भी व सामान्य जन के लिए सरलता भी, उतना ही आवश्यक है। एक मज़बूत बैंकिंग सिस्टम मज़बूत होती अर्थव्यवस्था के लिए बहुत ज़रूरी है। 

# एनपीएज को पारदर्शिता के साथ रिकॉग्नाइज किया गया तथा रिजोल्यूशन और रिकवरी पर ध्यान दिया गया

वर्ष 2014 के पहले कुछ सालों में देश के बैंकिंग सिस्टम को जिस प्रकार से नुकसान पहुंचाया गया था, आज हर किसी को पता है कि कैसी स्थितियां पैदा हो गई थी, क्या कुछ नहीं हुआ था। बीते 7 सालों में, एनपीएज को पारदर्शिता के साथ रिकॉग्नाइज किया गया, रिजोल्यूशन और रिकवरी पर ध्यान दिया गया, पब्लिक सेक्टर के बैंकों को री-कैपिटलाइज किया गया, फाइनेंशियल सिस्टम और पब्लिक सेक्टर बैंकों में एक के बाद एक रिफॉर्म्स किए गए। 

खास बात यह कि जो विलफुल डिफॉल्टर्स, पहले सिस्टम से खिलवाड़ करते थे, अब उनके लिए मार्केट से फंड जुटाने का रास्ता बंद कर दिया गया है। पब्लिक सेक्टर बैंकों से जुड़ी गवर्नेंस में सुधार हो, डिसीजन मेकिंग, ट्रांसफर-पोस्टिंग से जुड़ी आज़ादी हो, छोटे बैंकों को मर्ज कर बड़े बैंकों का निर्माण हो या फिर नेशनल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कम्पनी लिमिटेड की स्थापना हो, इन सभी कदमों से आज बैंकिंग सेक्टर में नया विश्वास, नई ऊर्जा लौट रही है। 

# बैंकिंग सेक्टर को और मज़बूत करने के लिए को-ऑपरेटिव बैंकों को भी लाया गया आरबीआई के दायरे में 

वहीं, बैंकिंग सेक्टर को और मज़बूत करने के लिए को-ऑपरेटिव बैंकों को भी आरबीआई के दायरे में लाया गया। इससे इन बैंकों की गवर्नेंस में भी सुधार आ रहा है और जो लाखों  डिपॉजिटर्स हैं, उनके भीतर भी इस सिस्टम के प्रति विश्वास मजबूत हो रहा है। बीते कुछ समय में डिपॉजिटर्स के हितों को देखते हुए ही, अनेक फैसले लिए गए हैं। यह जो योजना लॉन्च हुई है, इससे बैंक, एनबीएफसीज और प्री-पेड इंस्ट्रूमेंट में 44 करोड़ लोन अकाउंट और 220 करोड़ डिपॉजिट अकाउंट के जो धारक हैं, उन धारकों को सीधी राहत मिलेगी।

- कमलेश पांडेय

वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार