Kamada Saptami 2026: कामदा सप्तमी व्रत से होती हैं सभी इच्छाएं पूरी

Kamada Saptami 2026
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भक्त सुबह जल्दी उठते हैं, नहाते हैं और साफ कपड़े पहनते हैं। वे भगवान विष्णु या भगवान सत्यनारायण की पूजा करते हैं और मंत्र और श्लोक पढ़ते हैं। भक्त उपवास रखते हैं, और कुछ लोग सिर्फ फल खाते हैं या सिर्फ पानी पीते हैं। भक्त भगवान को फूल, फल और दूसरी चीजें चढ़ाते हैं।

हिन्दू धर्म में कामदा सप्तमी व्रत खास महत्व है। कामदा सप्तमी व्रत पूर्णतयः भगवान सूर्य को समर्पित होता है। इस व्रत को कामना पूर्ति के लिए खास माना गया है। मनोकामनाएं पूरी करने वाला यह व्रत पूरे वर्ष भर चलता है। इस व्रत को करने से स्वास्थ्य, धन, संतान और पद-प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है तो आइए हम आपको कामदा सप्तमी व्रत का महत्व एवं पूजा विधि के बारे में बताते हैं।  

जानें कामदा सप्तमी व्रत के बारे में 

कामदा सप्तमी व्रत एक महत्वपूर्ण त्योहार है, यह दिन भगवान सूर्य को समर्पित है, हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस त्योहार का एक खास महत्व है क्योंकि कहा जाता है कि भगवान सूर्य इस दिन अपने भक्तों को आशीर्वाद देते हैं और उनके सभी पापों को दूर करते हैं। यह त्योहार भारत के कई हिस्सों में, खासकर उत्तर भारत में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह हिंदुओं के लिए एक ज़रूरी दिन है, और कामदा सप्तमी व्रत को भगवान सूर्य के प्रति भक्ति दिखाने और उनका आशीर्वाद पाने का एक तरीका माना जाता है। इस साल कामदा सप्तमी व्रत 24 फरवरी को है। 

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कामदा सप्तमी व्रत के दिन ऐसे करें पूजा, होगा लाभ 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार षष्ठी को एक समय भोजन करके सप्तमी को निराहार रहकर, “खखोल्काय नमः” मन्त्र से सूर्य भगवान की पूजा की जाती है और अष्टमी को तुलसी दल के समान अर्क के पत्तो का सेवन किया जाता है। प्रातः स्नानादि के बाद सूर्य भगवान की पूजा की जाती है सारा दिन “सूर्याय नमः” मन्त्र से भगवान का स्मरण किया जाता है। अष्टमी को स्नान करके सूर्य देव का हवन पूजन किया जाता है। सूर्य भगवान् का पूजन करके आज घी, गुड़ इत्यादि का दान किया जाता है और दूसरे दिन ब्राह्मणों का पूजन करके खीर खिलाने का विधान है।

त्योहार के दौरान मनाए जाने वाले रीति-रिवाज और परंपराएं भी हैं खास 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भक्त सुबह जल्दी उठते हैं, नहाते हैं और साफ कपड़े पहनते हैं। वे भगवान विष्णु या भगवान सत्यनारायण की पूजा करते हैं और मंत्र और श्लोक पढ़ते हैं। भक्त उपवास रखते हैं, और कुछ लोग सिर्फ फल खाते हैं या सिर्फ पानी पीते हैं। भक्त भगवान को फूल, फल और दूसरी चीजें चढ़ाते हैं। कुछ इलाकों में, लोग पवित्र नदी में डुबकी लगाते हैं या दान-पुण्य करते हैं।

कामदा सप्तमी व्रत का महत्व

पंडितों के अनुसार उपवास करने से शरीर और मन शुद्ध होता है, और भक्त को त्योहार के आध्यात्मिक पहलू पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है। इसे भगवान के प्रति भक्ति और आभार व्यक्त करने के तरीके के रूप में देखा जाता है। कुछ भक्त अपने परिवार, दोस्तों और प्रियजनों के लिए आशीर्वाद मांगने के लिए भी उपवास रखते हैं।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार व्यक्ति का जीवन उसके जन्म कुण्डली पर निर्भर करता है। जिन व्यक्ति की कुण्डली में सूर्य नीच स्थान पर होता है उनके जीवन में काफी परेशानियां और धन आदि की हानि होती है। कामदा सप्तमी व्रत करने से इन सभी परेशानियों से निजात मिलता है। कामदा सप्तमी व्रत करने से व्यक्ति की कुण्डली में सूर्य बलवान होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है।


संध्या आरती के बाद होता है पारण 

यह त्योहार कई हिंदू पौराणिक कहानियों से जुड़ा है। इसकी एक कहानी भगवान सत्यनारायण से जुड़ी है, जो भगवान विष्णु के अवतार हैं और कैसे उन्होंने एक गरीब ब्राह्मण को उसकी परेशानियों से उबरने में मदद की। कामदा सप्तमी व्रत हिंदू धर्म में एक ज़रूरी त्योहार माना जाता है और इसे बहुत श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि त्योहार के दौरान व्रत रखने और पूजा-पाठ करने से किसी की इच्छाएं पूरी होती हैं। इस त्योहार को देवी-देवताओं का आशीर्वाद लेने और अपने मन और शरीर की गंदगी को साफ करने के मौके के तौर पर भी देखा जाता है।

कामदा सप्तमी व्रत कथा से जुड़ी पौराणिक कथा 

पौराणिक कथाओं के अनुसार प्राचीन काल में एक राजा था, जिसके पास अपार सुख-सुविधाएं थीं, लेकिन कोई संतान नहीं थी। संतान न होने के कारण राजा और रानी अत्यंत दुखी रहते थे। निराश होकर राजा ने ऋषि-मुनियों से इसका उपाय पूछा। ऋषियों ने उन्हें कामदा सप्तमी (सप्तमी तिथि) का व्रत करने का सुझाव दिया, जो समस्त इच्छाओं को पूर्ण करने वाला है। राजा और रानी ने पूरी श्रद्धा और उपवास के साथ भगवान विष्णु, सूर्य देव और शिव-पार्वती की पूजा की। व्रत के प्रभाव से रानी ने एक तेजस्वी और बुद्धिमान पुत्र को जन्म दिया। तब से यह व्रत संतान सुख और समृद्धि के लिए प्रसिद्ध हुआ। 

भक्ति और आत्म-संयम को बढ़ावा देता है कामदा सप्तमी व्रत 

कामदा सप्तमी व्रत एक महत्वपूर्ण हिंदू त्योहार है जिसे बहुत भक्ति और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस त्योहार का ऐतिहासिक और पौराणिक दोनों तरह से महत्व है और यह हिंदू संस्कृति और परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। त्योहार के द्वारा, लोग न सिर्फ़ भगवान शिव और दूसरे देवी-देवताओं का आशीर्वाद लेते हैं, बल्कि आत्म-संयम, भक्ति और दया जैसे गुण भी अपनाने की कोशिश करते हैं। यह त्योहार हमें हमारी सांस्कृतिक विरासत को बचाकर रखने की महत्ता को बताता है। आने वाली पीढ़ियों के लिए अपनी परंपराओं और संस्कृति को ज़िंदा रखने के लिए कामदा सप्तमी व्रत जैसे त्योहार मनाते रहना ज़रूरी है। कामदा सप्तमी व्रत के दौरान व्रत रखना खुद को शुद्ध करने और देवी-देवताओं के प्रति भक्ति दिखाने का एक तरीका माना जाता है। इस त्योहार को आत्म-संयम का अभ्यास करने वाला और दृढ़ इच्छा शक्ति को बनाए रखने वाला माना जाता है। भक्त कामदा सप्तमी व्रत रखकर और पूरी ईमानदारी और लगन से पूजा-पाठ करके, भगवान की सेवा करते हैं।

- प्रज्ञा पाण्डेय

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